Subscribe:

Ads 468x60px

शनिवार, 3 मार्च 2018

सत्य और सुंदर तुम्हारा हर आगत




स्वयं को रुद्राक्ष बना लो अपनी सोच में
शिव की शिला सी बांहों में बांध दो खुद को
विष के हर प्याले को रिक्त कर दो
आत्मा की सात्विक सतह पर करो तांडव
और फिर ॐ की ध्वनि प्रतिध्वनि में 
स्वयं को छोड़ दो
फिर शिव तुम, तुम शिव 
सत्य और सुंदर तुम्हारा हर आगत 


...

3 टिप्पणियाँ:

देवेन्द्र पाण्डेय ने कहा…

वाह!

Sushma Verma ने कहा…

Thnk u so much mam..

Kavita Rawat ने कहा…

बहुत अच्छी बुलेटिन प्रस्तुति

एक टिप्पणी भेजें

बुलेटिन में हम ब्लॉग जगत की तमाम गतिविधियों ,लिखा पढी , कहा सुनी , कही अनकही , बहस -विमर्श , सब लेकर आए हैं , ये एक सूत्र भर है उन पोस्टों तक आपको पहुंचाने का जो बुलेटिन लगाने वाले की नज़र में आए , यदि ये आपको कमाल की पोस्टों तक ले जाता है तो हमारा श्रम सफ़ल हुआ । आने का शुक्रिया ... एक और बात आजकल गूगल पर कुछ समस्या के चलते आप की टिप्पणीयां कभी कभी तुरंत न छप कर स्पैम मे जा रही है ... तो चिंतित न हो थोड़ी देर से सही पर आप की टिप्पणी छपेगी जरूर!

लेखागार