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शनिवार, 3 मार्च 2018

सत्य और सुंदर तुम्हारा हर आगत




स्वयं को रुद्राक्ष बना लो अपनी सोच में
शिव की शिला सी बांहों में बांध दो खुद को
विष के हर प्याले को रिक्त कर दो
आत्मा की सात्विक सतह पर करो तांडव
और फिर ॐ की ध्वनि प्रतिध्वनि में 
स्वयं को छोड़ दो
फिर शिव तुम, तुम शिव 
सत्य और सुंदर तुम्हारा हर आगत 


...

3 टिप्पणियाँ:

देवेन्द्र पाण्डेय ने कहा…

वाह!

sushmaa kumarri ने कहा…

Thnk u so much mam..

कविता रावत ने कहा…

बहुत अच्छी बुलेटिन प्रस्तुति

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