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बुधवार, 10 मई 2017

बुद्ध पूर्णिमा और ब्लॉग बुलेटिन

सभी हिन्दी ब्लॉगर्स को मेरा सादर नमस्कार।
संबंधित चित्र


।। बुद्धम् शरणम् गच्छामि।।


सभी देश वासियों को बुद्ध पूर्णिमा की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ। सादर ... अभिनन्दन।। 


~ आज की पठनीय बुलेटिन कड़ियाँ ~ 














आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर... अभिनन्दन।। 

शुक्रवार, 7 अप्रैल 2017

1650वीं बुलेटिन - पंडित रवि शंकर

सभी ब्लॉगर मित्रों को मेरा सादर नमस्कार। 
Pandit-Ravi-Shankar.jpg
रवि शंकर (अंग्रेज़ी: Ravi Shankar, पूरा नाम: पंडित रवीन्द्र शंकर चौधरी, जन्म: 7 अप्रॅल, 1920 - मृत्यु: 11 दिसम्बर, 2012) विश्व में भारतीय शास्त्रीय संगीत की उत्कृष्टता के सबसे बड़े उदघोषक थे। एक सितार वादक के रूप में उन्होंने ख्याति अर्जित की। रवि शंकर और सितार मानो एक-दूसरे के लिए ही बने हों। वह इस सदी के सबसे महान संगीतज्ञों में गिने जाते थे। रविशंकर को विदेशों में बहुत अधिक प्रसिद्धि प्राप्त हुई। विदेशों में वे अत्यन्त लोकप्रिय एवं सफल रहे। रविशंकर के संगीत में एक प्रकार की आध्यात्मिक शान्ति प्राप्त होती है।

पं रवि शंकर का जन्म संस्कृति-संपन्न काशी में 7 अप्रॅल, सन् 1920 को हुआ था। आपका आरंभिक जीवन काशी के पुनीत घाटों के पर ही बीता। पंडित रविशंकर का बचपन बहुत ही सुखद रहा। उनके पिता प्रतिष्ठित बैरिस्टर थे और राजघराने में उच्च पद पर कार्यरत थे। रविशंकर जब केवल दस वर्ष के थे तभी संगीत के प्रति उनका लगाव शुरू हुआ। पंडित रविशंकर ने बचपन में कला जगत में प्रवेश एक नर्तक के रूप में किया। उन्होंने अपने बड़े भाई उदय शंकर के साथ कई नृत्य कार्यक्रम किये।

रविशंकर संगीत की परम्परागत भारतीय शैली के अनुयायी थे। उनकी अंगुलियाँ जब भी सितार पर गतिशील होती थी, सारा वातावरण झंकृत हो उठता था। अन्तर्राष्ट्रीय मंच पर भारतीय संगीत को ससम्मान प्रतिष्ठित करने में उनका उल्लेखनीय योगदान है। उन्होंने कई नई-पुरानी संगीत रचनाओं को भी अपनी विशिष्ट शैली से सशक्त अभिव्यक्ति पदान की।

रवि शंकर ने भारत, कनाडा, यूरोप तथा अमेरिका में बैले तथा फ़िल्मों के लिए भी संगीत कम्पोज किया। इन फ़िल्मों में 'चार्ली', 'गांधी' और 'अपू त्रिलोगी' भी शामिल हैं। इसके अतिरिक्त आपने अनेक फ़िल्मों में भी अपने संगीत का जादू जगाया है।

रवि शंकर ने वर्ष 1971 में 'बांग्लादेश मुक्ति संग्राम' के समय वहां से भारत आ गए लाखों शरणार्थियों की मदद के लिए कार्यक्रम करके धन एकत्र किया था। हिन्दुस्तानी संगीत को रविशंकर ने रागों के मामले में भी बड़ा समृद्ध बनाया है। यों तो उन्होंने परमेश्वरी, कामेश्वरी, गंगेश्वरी, जोगेश्वरी, वैरागी तोड़ी, कौशिकतोड़ी, मोहनकौंस, रसिया, मनमंजरी, पंचम आदि अनेक नये राग बनाए हैं, पर वैरागी और नटभैरव रागों का उनका सृजन सबसे ज्यादा लोकप्रिय हुआ। शायद ही कोई दिन ऐसा जाता हो, जब रेडियो पर कोई न कोई कलाकार इनके बनाए इन दो रागों का न गाता-बजाता हो।

प्रारम्भ में पंडित जी ने अमेरिका के प्रसिद्ध वायलिन वादक येहुदी मेन्युहिन के साथ जुगलबन्दियों में भी विश्व-भर का दौरा किया। तबला के महान् उस्ताद अल्ला रक्खा भी पंडित जी के साथ जुगलबन्दी कर चुके हैं। वास्तव में इस प्रकार की जुगलबन्दियों में ही उन्होंने भारतीय वाद्य संगीत को एक नया आयाम दिया। पंडित जी ने अपनी लम्बी संगीत-यात्रा में अपने और अपने सम्बन्ध में कुछ महत्त्वपूर्ण पुस्तकें भी लिखी हैं। ‘माई म्यूजिक माई लाइफ’ के अतिरिक्त उनकी ‘रागमाला’ नामक पुस्तक विदेश के एक सुप्रसिद्ध प्रकाशक ने प्रकाशित की है।

सम्मान और पुरस्कार 

पंडित रवि शंकर को विभिन्न विश्वविद्यालयों से डाक्टरेट की 14 मानद उपाधियां मिल चुकी हैं।
संयुक्त राष्ट्र संघ के अंतर्गत संगीतज्ञों की एक संस्था के सदस्य रहे।
रवि शंकर को तीन ग्रेमी पुरस्कार मिले हैं।
रेमन मैग्सेसे पुरस्कार, पद्म भूषण, पद्म विभूषण तथा भारत का सर्वोच्च सम्मान भारत रत्‍न भी मिल चुका है।
रवि शंकर को भारतीय संगीत ख़ासकर सितार वादन को पश्चिमी दुनिया के देशों तक पहुंचाने का श्रेय भी दिया जाता है।
1968 में उनकी 'यहूदी मेनुहिन' के साथ उनकी एल्बम 'ईस्ट मीट्स वेस्ट' को पहला ग्रैमी पुरस्कार मिला था। फिर 1972 में 'जॉर्ज हैरिसन' के साथ उनके 'कॉनसर्ट फॉर बांग्लादेश' को ग्रैमी दिया गया। संगीत जगत का ऑस्कर माने जाने वाले ग्रैमी पुरस्कार की विश्व संगीत श्रेणी में पंडित रविशंकर के साथ स्पर्धा में ब्रिटेन के प्रख्यात संगीतकार जॉन मेक्लॉलिन और ब्राज़ील के गिलबर्टो गिल और मिल्टन नेसिमेल्टो भी शामिल थे।

1986 में राज्यसभा के मानद सदस्य चुनकर भी उन्हें सम्मानित किया गया। 1986 से 1992 तक राज्य सभा के सदस्य रहे। सितार वादक पंडित रविशंकर भारत के उन गिने चुने संगीतज्ञों में से थे जो पश्चिम में भी लोकप्रिय रहे। रवि शंकर अनेक दशकों से अपनी प्रतिभा दर्शाते रहे। 1982 के दिल्ली एशियाड (एशियाई खेल समारोह) के 'स्वागत गीत' को उन्होंने कई स्वर प्रदान किये थे। उनको देश-विदेश में कई बार सम्मानित किया जा चुका है।

पंडित रविशंकर का 92 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। अमेरिका में सैन डिएगो के एक अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली।



आज भारत के सितारवादक पंडित रवि शंकर जी के 97वें जन्मदिवस पर पूरा देश उनको याद करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता है। सादर।।


अब चलते हैं आज की बुलेटिन की ओर......















 आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर ... अभिनन्दन।। 

सोमवार, 13 फ़रवरी 2017

ब्लॉग बुलेटिन - भारत कोकिला से हिन्दी ब्लॉग कोकिला और विश्व रेडियो दिवस

सभी ब्लॉगर मित्रों को मेरा सादर नमस्कार। 

सरोजिनी नायडू का जन्म 13 फरवरी, सन 1879 ई. को हैदराबाद में भारत के प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ. अघोरनाथ चट्टोपाध्याय के यहाँ हुआ था। इनकी माता का नाम वरदासुन्दरी था। सरोजिनी जी बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि की थी। 12 वर्ष की अवस्था में ही सरोजिनी ने मद्रास यूनिवर्सिटी से मैट्रिक उत्तीर्ण किया था। सन 1895 ई. में वह विदेश गई और लंदन के किंग्स कॉलेज व कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में सरोजिनी जी ने 3 वर्ष तक शिक्षा प्राप्त की। श्रीमती सरोजिनी नायडू 1913 में पहली बार राजनीतिक मंच पर आई। 1918 ई. में सरोजिनी नायडू की मुलाकात महात्मा गांधी से हुई। 1925 के कांग्रेस के 48वें अधिवेशन में कानपुर में वह प्रथम भारतीय महिला अध्यक्ष चुनी गई।1926 म वह दूसरी बार पुन : अध्यक्ष निर्वाचित हुई। गांधी जी की गिरफ्तारी के बाद उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की कार्यवाहक अध्यक्ष के रूप में स्वतन्त्रता आन्दोलन की गतिविधियों को सक्रिय रूप में चलाया। 8 अगस्त, 1942 को वह गिरफ्तार कर ली गई तथा आगा खाँ महल में कारावास में अन्य प्रमुख नेताओं के साथ नज़रबन्द हुई। 1948 में वह उत्तर प्रदेश की प्रथम महिला राज्यपाल बनी। राज्यपाल के रूप में उन्होंने अपनी प्रशासनिक योग्यता का अभूतपूर्व परिचय दिया। 2 मार्च, 1949 ई. को श्रीमती सरोजिनी नायडू जी का देहावसान हो गया। उन्हें भारत कोकिला की उपाधि से विभूषित किया गया।

आज सरोजिनी नायडू जी के 138वें जन्म दिवस पर पूरा हिंदी ब्लॉगजगत और हमारी ब्लॉग बुलेटिन टीम उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करती है।   


आज हिन्दी ब्लॉगजगत की "कोकिला" आदरणीया रश्मि प्रभा जी का भी जन्मदिन है। लगभग दर्जन भर हिन्दी चिट्ठों को समृद्ध करने वाली हमारी कोकिला रश्मि जी ने अपनी उपस्थिति से हिन्दी ब्लॉग जगत को काफी मान प्रतिष्ठा दिलाई है। अपनी प्यारी - प्यारी कविताओं और अभिव्यक्ति से उन्होंने हम जैसे कई चिट्ठाकारों और पाठकों को बांधे रखा है। आप हमेशा ऐसे ही खिलखिलाते रहे और अपनी लेखनी से हमेशा हम सबको बांधे रखे। बस ईश्वर से हमारी यही कामना है। सादर।।


आज मैं अपनी, ब्लॉग बुलेटिन टीम और पूरे हिन्दी ब्लॉगजगत की तरफ से आदरणीय रश्मि प्रभा जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाईयाँ और शुभकामनाएँ देता हूँ।   🎊 अभिनन्दन 🎉


विश्व रेडियो दिवस पर भारत के प्रधानमंत्री जी के विचार 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को विश्व रेडियो दिवस पर बधाई दी। प्रधानमंत्री ने ट्वीट कर कहा, "विश्व रेडियो दिवस की बधाई। मैं सभी रेडियो प्रेमी, रेडियो को सक्रिय और जीवंत बनाए रखने के लिए रेडियो में काम करने वाले सभी लोगों को बधाई देता हूं।"

उन्होंने कहा, "रेडियो बातचीत करने, सीखने और संवाद करने का सबसे अच्छा माध्यम है। मेरे अपने रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' ने मुझे देशभर के लोगों से जोड़ा। "उन्होंने अपने सभी रेडियो कार्यक्रमों का लिंक भी साझा किया। विश्व रेडियो दिवस हर साल 13 फरवरी को मनाया जाता है। यह मनोरंजन, सूचना और संचार के माध्यम के तौर पर रेडियो के महत्व को रेखांकित करता है।


अब चलते हैं आज की ब्लॉग बुलेटिन की ओर .... 















देखो भईया हमने तो बधाई दे दी, अब आपकी बारी है जल्दी - जल्दी अपने शुभकामनाएँ संदेश भेजिए। सादर। ... अभिनन्दन।

बुधवार, 8 फ़रवरी 2017

ब्लॉग बुलेटिन - जगजीत सिंह जी की 76वीं जयंती

सभी ब्लॉगर मित्रों को मेरा सादर नमस्कार।
जगजीत सिंह (जन्म : 8 फ़रवरी, 1941 - मृत्यु: 10 अक्टूबर, 2011) ग़ज़लों की दुनिया के बादशाह और अपनी सहराना आवाज़ से लाखों-करोड़ों सुनने वालों के दिलों पर राज करने वाले प्रसिद्ध ग़ज़ल गायक थे। खालिस उर्दू जानने वालों की मिल्कियत समझी जाने वाली.. नवाबों, रक्कासाओं की दुनिया में झनकती और शायरों की महफ़िलों में वाह-वाह की दाद पर इतराती ग़ज़लों को आम आदमी तक पहुंचाने का श्रेय अगर किसी को जाता है तो वह जगजीत सिंह हैं। उनकी ग़ज़लों ने न सिर्फ़ उर्दू के कम जानकारों के बीच शेरो-शायरी की समझ में इज़ाफ़ा किया बल्कि ग़ालिब, मीर, मजाज़, जोश और फ़िराक़ जैसे शायरों से भी उनका परिचय कराया।[1] हिंदी, उर्दू, पंजाबी, भोजपुरी सहित कई जबानों में गाने वाले जगजीत सिंह को साल 2003 में भारत सरकार के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक पद्मभूषण से नवाज़ा गया है।

( जानकारी स्त्रोत ~ http://bharatdiscovery.org/india/जगजीत_सिंह )

आज महान गजल गायक जगजीत सिंह जी की 76वीं जयंती पर पूरा हिन्दी ब्लॉगजगत और हमारी ब्लॉग बुलेटिन टीम उन्हें शत शत नमन करती है। सादर।।


अब चलते हैं आज की बुलेटिन की ओर .....





आज की बुलेटिन में सिर्फ इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर ... अभिनन्दन।।

शनिवार, 6 अगस्त 2016

हिरोशिमा एयर नागासाकी परमाणु हमला और ब्लॉग बुलेटिन

सभी ब्लॉगर मित्रों को मेरा सादर नमस्कार।




साल 1945 में जापान के शहर हिरोशिमा पर 6 अगस्त और नागासाकी पर 9 अगस्त को अमेरिका ने परमाणु बम से हमला किया था। 'लिटिल बॉय' और 'फैट मैन' नामक इन परमाणु बमों ने जापान में भारी तबाही पहुँचाई। जिसका असर वहाँ की आने वाली पीढ़ियों पर जानलेवा बीमारियों से हुआ। इस भयंकर परमाणु हमले में करीब साढ़े तीन लाख लोग मारे गए और इतने ही लोग घायल हुए। इस हमले में जापान के दोनों शहरों में 90 हजार से अधिक इमारतें बर्बाद हो गयी। इस परमाणु हमले के बाद ही द्वितीय विश्व युद्ध में जापान ने आत्मसमर्पण किया और इसी दुःखद मानवीय विनाशकारी घटना के साथ द्वितीय विश्व युद्ध का अंत हुआ।


आज से 71 साल पहले हुए इस विनाशकारी हमले में मारे गए सभी लोगों को हम सभी भारतवासी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते है।


सादर
हर्षवर्धन श्रीवास्तव


अब चलते हैं आज की बुलेटिन की ओर  ……

Orkut आ रहा है आपको Hello बोलने

डोपिंग क्या है?

अंटार्कटिका

दिल्ली नकली राज्य है !

साहित्य के बे-जोड़ प्राण वायु रहे है गोस्वामी तुलसीदास / डा. सूर्यकांत मिश्रा

अपराध,बलात्कार, निलम्बन, बहाली और राजनीति

कोई हिप्पी, कोई साधु। कोई नेता, कोई अभिनेता। अजीब मिक्स है!

एक देशगान -यह भारत बहुत महान है

दोस्‍त है वही !!!

व्यर्थ नहीं यह जीवन

श्श्श्श शोर नहीं मास्साब हैं आँख कान मुँह नाक बंद करके शिष्यों को इंद्रियाँ पढ़ा रहे हैं


आज की बुलेटिन में सिर्फ इतना ही कल फिर मिलेंगे, तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर ... अभिनन्दन।।

बुधवार, 6 अप्रैल 2016

ब्लॉग बुलेटिन और सुचित्रा सेन

सभी ब्लॉगर मित्रों को मेरा सादर नमस्कार।।
सुचित्रा सेन
सुचित्रा सेन (अंग्रेज़ी:Suchitra Sen, जन्म: 6 अप्रैल, 1931 - मृत्यु: 17 जनवरी 2014) हिन्दी एवं बांग्ला फ़िल्मों की एक अभिनेत्री थीं। वह मुनमुन सेन की माँ थी। विशेषकर उत्तम कुमार के साथ अभिनय करने के कारण वे सारे पश्चिम बंगाल में अत्यन्त जनप्रिय हुईं। उत्तम-सुचित्रा की जोड़ी आज भी बांग्ला चलचित्र की श्रेष्ठ जोड़ी मानी जाती है। वे प्रथम भारतीय अभिनेत्री हैं जिनको किसी अंतर्राष्ट्रीय चलचित्र महोत्सव में पुरस्कार प्रदान किया गया। 
सुचित्रा सेन का जन्म 6 अप्रैल, 1931 को बंगाल के पबना ज़िले में हुआ था, जो अब बांग्लादेश में है। सुचित्रा के पिता करुणामॉय दासगुप्ता एक स्थानीय स्कूल में हेड मास्टर थे। यह भी अजीब विडंबना रही कि सुचित्रा की पहली फ़िल्म 'शेष कथाय (बंगाली)' कभी रिलीज ही नहीं हुई। 
सुचित्रा सेन ने अपने कैरियर की शुरुआत 1952 में बंगाली फ़िल्म 'शेष कोठई' से की थी। उन्हें 1955 में बिमल राय की हिन्दी फ़िल्म 'देवदास' में उन्होंने 'पारो' की भूमिका निभाई थी। इसमें उनके साथ दिलीप कुमार थे। दिग्गज अभिनेता उत्तम कुमार और सुचित्रा सेन की जोड़ी को कोई नहीं भुला सकता। दोनों ने 1953 से लेकर 1975 तक 30 फ़िल्मों में साथ काम किया। 1959 की बंगाली फ़िल्म 'दीप जवेले जाई' को सुचित्रा की सर्वश्रेष्ठ फ़िल्मों में गिना जाता है। दस साल बाद यह फ़िल्म हिंदी में बनी थी, जिसमें सुचित्रा वाला रोल वहीदा रहमान ने किया था। 1975 की फ़िल्म 'आंधी' में सुचित्रा का रोल इंदिरा गांधी से प्रेरित बताया गया था। सुचित्रा ने इतना जबरदस्त अभिनय किया था कि उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के लिए नामित किया गया था। हालांकि सुचित्रा तो सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री नहीं चुनी गई, लेकिन फ़िल्म के उनके साथी कलाकार संजीव कुमार सर्वश्रेष्ठ अभिनेता जरूर बन गए। उनकी बेटी मुनमुन सेन भी मां के नक्शे कदम पर चलते हुए बंगाली फ़िल्मों के साथ हिंदी फ़िल्मों में भी आई। लगभग 25 साल के अभियन कैरियर के बाद उन्होंने 1978 में बड़े पर्दे से ऐसी दूरी बनाई कि उन्होंने लाइमलाइट से खुद को बिल्कुल अलग कर लिया।

सुचित्रा सेन बंगाली सिनेमा की एक ऐसी हस्ती थीं, जिन्होंने अपनी अलौकिक सुंदरता और बेहतरीन अभिनय के दम पर लगभग तीन दशक तक दर्शकों के दिलों पर राज किया और 'अग्निपरीक्षा', 'देवदास' तथा 'सात पाके बंधा' जैसी यादगार फ़िल्में कीं। हिरणी जैसी आंखों वाली सुचित्रा 1970 के दशक के अंत में फ़िल्म जगत को छोड़कर एकांत जीवन जीने लगीं। उनकी तुलना अक्सर हॉलीवुड की ग्रेटा गाबरे से की जाती थी, जिन्होंने लोगों से मिलना-जुलना छोड़ दिया था। कानन देवी के बाद बंगाली सिनेमा की कोई अन्य नायिका सुचित्रा की तरह प्रसिद्धि हासिल नहीं कर पाई। श्वेत-श्याम फ़िल्मों के युग में सुचित्रा के जबर्दस्त अभिनय ने उन्हें दर्शकों के दिलों की रानी बना दिया था। उनकी प्रसिद्धि का आलम यह था कि दुर्गा पूजा के दौरान देवी लक्ष्मी और सरस्वती की प्रतिमाओं के चेहरे सुचित्रा के चेहरे की तरह बनाए जाते थे।

सुचित्रा सेन का शुक्रवार 17 जनवरी 2014 को 82 साल की उम्र में दिल का दौरा पड़ने से कोलकाता के एक अस्पताल में निधन हो गया। सुचित्रा सेन मधुमेह नामक रोग से पीड़ित थीं। 

[ साभार - http://bhartdiscovery.org/india/सुचित्रा_सेन ]


आज सुचित्रा सेन जी की 85वे जन्मदिवस पर हिंदी ब्लॉग जगत और ब्लॉग बुलेटिन टीम उन्हें स्मरण करते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। सादर।। 


अब चलते हैं आज की बुलेटिन की ओर..........














आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे। तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर  … अभिनन्दन।।

रविवार, 20 मार्च 2016

विश्व गौरैया दिवस और ब्लॉग बुलेटिन

सभी ब्लॉगर मित्रों को मेरा सादर नमस्कार।।


आज विश्व गौरैया दिवस है। विश्व गौरैया दिवस यूएन द्वारा वर्ष 2010 से प्रतिवर्ष 20 मार्च को इसी उद्देश्य से मनाया जाता है क्योंकि इस दुर्लभ पक्षी का बचाव और संरक्षण किया जा सके तथा विलुप्ति के कगार पर पहुँच चुकी इस प्यारी और नन्हीं चिड़िया को बचाया जा सकें। अगर हम सभी थोड़ी सी भी कोशिश करेंगे, तो यह प्यारी गौरैया वापिस हमारे घरों में चहकेगी और हमारा आँगन फिर चहक उठेगा।

गौरैया पक्षी के विषय में अधिक जानकारी के लिए इन कड़ियों पर क्लिक करें :-

विश्व गौरैया दिवस
एक जानकारी गौरेया के बारे में।
गौरैया के नाम
"विश्व गौरैया दिवस" पर विशेष।


अब चलते हैं आज की बुलेटिन की ओर..........













आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे। तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर  … अभिनन्दन।।

बुधवार, 27 जनवरी 2016

ब्लॉग बुलेटिन - भारत भूषण जी की पुण्यतिथि

सभी ब्लॉगर मित्रों को मेरा सादर नमस्कार।
भारत भूषण
भारत भूषण ( जन्म: 14 जून, सन् 1920 ई. - मृत्यु: 27 जनवरी सन् 1992 ई. ) हिन्दी फिल्मों के प्रसिद्ध अभिनेता थे। इन्होंने कई ऐतिहासिक चरित्रों को अपने अभिनय से एक नया जीवन प्रदान किया था। बैजू बावरा, चैतन्य महाप्रभु, कालिदास, तानसेन, संत कबीर तथा मिर्जा ग़ालिब के किरदार इन्होंने अपने फिल्मी जीवन में निभाए थे। भारत भूषण जी ने अपने पूरे फिल्मी कैरियर में कुल 143 फिल्मों में अभिनय किया था। 50 तथा 60 के दशक में भारत भूषण जी काफी लोकप्रिय हो गए थे। वर्ष 1967 ई. में प्रदर्शित फिल्म 'तकदीर' नायक के रूप में इनकी अंतिम फिल्म थी। इसके बाद भूषण जी ने आगे चलकर अधिकांश चरित्र अभिनय के रूप में ही काम किया। आगे चलकर भारत भूषण जी को फिल्मों में काम मिलना भी बंद हो गया। इसके बाद इन्होंने कुछ धारावाहिकों में ही अभिनय किया। फिल्म जगत की अनदेखी और वक्त से बुरी तरह बिछड़ चुके हिन्दी फिल्मों के स्वर्णिम युग के इस बेहतरीन अभिनेता ने आखिरकार 27 जनवरी, सन् 1992 ई. को मुम्बई में इस दुनिया को अलविदा कह दिया।

आज हम सब हिंदी फिल्म के महान अभिनेता भारत भूषण जी को याद करते हुए विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।  

सादर।।

अब चलते हैं आज की बुलेटिन की ओर..........














आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे। तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर  … अभिनन्दन।।

शुक्रवार, 7 अगस्त 2015

ब्लॉग बुलेटिन - हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु हमले के 70 वर्ष

सभी ब्लॉगर मित्रों को मेरा सादर नमस्कार।




साल 1945 में जापान के शहर हिरोशिमा पर 6 अगस्त और नागासाकी पर 9 अगस्त को अमेरिका ने परमाणु बम से हमला किया था। 'लिटिल बॉय' और 'फैट मैन' नामक इन परमाणु बमों ने जापान में भारी तबाही पहुँचाई। जिसका असर वहाँ की आने वाली पीढ़ियों पर जानलेवा बीमारियों से हुआ। इस भयंकर परमाणु हमले में करीब साढ़े तीन लाख लोग मारे गए और इतने ही लोग घायल हुए। इस हमले में जापान के दोनों शहरों में 90 हजार से अधिक इमारतें बर्बाद हो गयी। इस परमाणु हमले के बाद ही द्वितीय विश्व युद्ध में जापान ने आत्मसमर्पण किया और इसी दुःखद मानवीय विनाशकारी घटना के साथ द्वितीय विश्व युद्ध का अंत हुआ।


आज से 70 साल पहले हुए इस विनाशकारी हमले में मारे गए सभी लोगों को हम सभी भारतवासी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते है।


सादर
हर्षवर्धन श्रीवास्तव


अब चलते हैं आज की बुलेटिन की ओर  ……













आज की बुलेटिन में बस इतना ही। कल फिर मिलेंगे शुभरात्रि। सादर … अभिनन्दन।।

गुरुवार, 13 फ़रवरी 2014

विशेष बुलेटिन - भारत कोकिला से हिन्दी ब्लॉग कोकिला तक

सभी ब्लॉगर मित्रों को सादर नमस्कार।।


सरोजिनी नायडू का जन्म 13 फरवरी, सन 1879 ई. को हैदराबाद में भारत के प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ. अघोरनाथ चट्टोपाध्याय के यहाँ हुआ था। इनकी माता का नाम वरदासुन्दरी था। सरोजिनी जी बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि की थी। 12 वर्ष की अवस्था में ही सरोजिनी ने मद्रास यूनिवर्सिटी से मैट्रिक उत्तीर्ण किया था। सन 1895 ई. में वह विदेश गई और लंदन के किंग्स कॉलेज व कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में सरोजिनी जी ने 3 वर्ष तक शिक्षा प्राप्त की। श्रीमती सरोजिनी नायडू 1913 में पहली बार राजनीतिक मंच पर आई। 1918 ई. में सरोजिनी नायडू की मुलाकात महात्मा गांधी से हुई। 1925 के कांग्रेस के 48वें अधिवेशन में कानपुर में वह प्रथम भारतीय महिला अध्यक्ष चुनी गई।1926 म वह दूसरी बार पुन : अध्यक्ष निर्वाचित हुई। गांधी जी की गिरफ्तारी के बाद उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की कार्यवाहक अध्यक्ष के रूप में स्वतन्त्रता आन्दोलन की गतिविधियों को सक्रिय रूप में चलाया। 8 अगस्त, 1942 को वह गिरफ्तार कर ली गई तथा आगा खाँ महल में कारावास में अन्य प्रमुख नेताओं के साथ नज़रबन्द हुई। 1948 में वह उत्तर प्रदेश की प्रथम महिला राज्यपाल बनी। राज्यपाल के रूप में उन्होंने अपनी प्रशासनिक योग्यता का अभूतपूर्व परिचय दिया। 2 मार्च, 1949 ई. को श्रीमती सरोजिनी नायडू जी का देहावसान हो गया। उन्हें भारत कोकिला की उपाधि से विभूषित किया गया।

आज सरोजिनी नायडू जी के 135वें जन्म दिवस पर गूगल ने डूडल बनाकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।


आज सरोजिनी नायडू जी के 135वें जन्म दिवस पर पूरा हिंदी ब्लॉगजगत और हमारी ब्लॉग बुलेटिन टीम उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करती है।   


आज हिन्दी ब्लॉगजगत की "कोकिला" आदरणीया रश्मि प्रभा जी का भी जन्मदिन है। लगभग दर्जन भर हिन्दी चिट्ठों को समृद्ध करने वाली हमारी कोकिला रश्मि जी ने अपनी उपस्थिति से ब्लॉगजगत को काफी प्रतिष्ठा दिलाई है। अपनी प्यारी - प्यारी कविताओं और अभिव्यक्ति से उन्होंने हम जैसे कई चिट्ठाकारों और पाठकों को बांधे रखा है। आप हमेशा ऐसे ही खिलखिलाते रहे और अपनी लेखनी से हमेशा हम सबको बांधे रखे। 



आज मैं अपनी, ब्लॉग बुलेटिन टीम और पूरे हिन्दी ब्लॉगजगत की तरफ से आदरणीय रश्मि प्रभा जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाईयाँ और शुभकामनाएँ देता हूँ। :-)



सादर,,,
हर्षवर्धन श्रीवास्तव


अब चलते हैं आज कि बुलेटिन की ओर ……














हमने तो बधाई दे दी, अब आपकी बारी है जल्दी - जल्दी अपने शुभकामनाएँ सन्देश भेजिए। सादर।।
कल फिर मिलेंगे, शुभरात्रि।।

शनिवार, 8 फ़रवरी 2014

जगजीत सिंह जी की 73वीं जयंती पर विशेष बुलेटिन

सभी ब्लॉगर मित्रों को नमन।।



आज महान गजल गायक जगजीत सिंह जी की 73वीं जयंती पर पूरा हिन्दी ब्लॉगजगत और हमारी ब्लॉग बुलेटिन टीम उन्हें शत शत नमन करती है। सादर।।


अब चलते हैं आज कि बुलेटिन की ओर  …………… 













कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि।।

शनिवार, 1 फ़रवरी 2014

कल्पना चावला की 11 वीं पुण्यतिथि पर विशेष बुलेटिन

सभी चिट्ठाकार मित्रों को सादर नमस्कार।।

कल्पना चावला (१ जुलाई, १९६१ - १ फ़रवरी २००३), एक भारतीय अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री और अंतरिक्ष शटल मिशन विशेषज्ञ थी। वे कोलंबिया अन्तरिक्ष यान आपदा में मारे गए सात यात्री दल सदस्यों में से एक थीं। भारत की बेटी-कल्पना चावला करनाल, हरियाणा, भारत. में एक हिंदू भारतीय परिवार में पैदा हुई थीं। उनका जन्म १ जुलाई सन् १९६१ मे एक भारतीय परिवार मे हुआ था। उसके पिता का नाम श्री बनारसी लाल चावला तथा और माता का नाम संजयोती था | वह अपने परिवार के चार भाई बहनो मे सबसे छोटी थी | घर मे सब उसे प्यार से मोंटू कहते थे | कल्पना की प्रारंभिक पढाई लिखाई “टैगोर बाल निकेतन” मे हुई | कलपना जब आठवी कक्षा मे पहुची तो उसने इंजिनयर बनने की इच्छा प्रकट की | उसकी माँ ने अपनी बेटी की भावनाओ को समझा और आगे बढने मे मदद की | पिता उसे चिकित्सक या शिक्षिका बनाना चाहते थे । किंतु कल्पना बचपन से ही अंतरिक्ष में घूमने की कल्पना करती थी ।कल्पना का सर्वाधिक महत्वपूर्ण गुण था - उसकी लगन और जुझार प्रवृति | कलपना न तो काम करने मे आलसी थी और न असफलता मे घबराने वाली थी | उनकी उड़ान में दिलचस्पी जहाँगीर रतनजी दादाभाई टाटा, से प्रेरित थी जो एक अग्रणी भारतीय विमान चालक और उद्योगपति थे। पूरा लेख यहाँ पढ़े …… 

 आज अंतरिक्ष यात्री स्वर्गीय कल्पना चावला की 11 वीं पुण्यतिथि पर पूरा हिन्दी ब्लॉगजगत और ब्लॉग बुलेटिन टीम उन्हें शत शत नमन करती है। जय हिन्द, जय भारत।। 

 अब चलते हैं आज कि बुलेटिन की ओर.……
 













कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि।।

शुक्रवार, 11 अक्टूबर 2013

जेपी और ब्लॉग बुलेटिन

सभी चिठ्ठाकार मित्रों को सादर नमन।।


आज भारत के महान गाँधीवादी नेता श्री लोकनायक जयप्रकाश नारायण जी का 111 वां जन्म दिवस है। जयप्रकाश जी उर्फ़ जेपी को याद किया जाता है तो वह है उनके द्वारा आंदोलित "संपूर्ण क्रांति" (Total Revolution)। अपने जीवन के लम्बे समय में लोकतंत्र की कमियों को आलोचना करते - करते थक गए। सरकार की भी नीतियों में कोई खास परिवर्तन नहीं आया जिसके चलते भ्रष्टाचार, बेरोज़गारी, गरीबी और सत्ता केन्द्रीकरण निरंतर बढ़ती ही चली गई। जिससे जेपी ने अपने जीवन के अंतिम दशक में यह अनुभव किया कि भारत की ये समस्याएं विकराल रूप धारण कर चुकी है, जिसका एक मात्र उपाय है "संपूर्ण क्रांति"। अधिक पढ़े यहाँ पर …  


आज जेपी के जन्म दिवस पर पूरा हिंदी ब्लॉगजगत और हमारी पूरी ब्लॉग बुलेटिन टीम उन्हें सादर नमन करती है।।  


अब चलते हैं आज की बुलेटिन की ओर …

















तब तक के लिए शुभरात्रि।।

शनिवार, 21 सितंबर 2013

विश्व शांति दिवस .... ब्लॉग बुलेटिन

सभी चिठ्ठाकार मित्रों को सादर नमस्ते।।


विश्व शांति दिवस प्रतिवर्ष 21 सितंबर को मनाया जाता है। यह दिवस इसलिए मनाया जाता है क्योंकि विश्व के सभी देशों में शांति स्थापित हो और वो अहिंसा के मार्ग पर चल सके। वर्तमान समय में पूरे विश्व में शांति कायम करना संयुक्त राष्ट्र संघ का प्रमुख लक्ष्य है। इसलिए संयुक्त राष्ट्र संघ व उसकी संस्थाएँ, सिविल सोसायटी और विश्व के सभी देशों की राष्ट्रीय और केंद्र सरकारें प्रतिवर्ष 21 सितंबर विश्व शांति दिवस या अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस का आयोजन करती है। संयुक्त राष्ट्र संघ ने विश्व के सभी देशों में शांति का संदेश पहुँचाने के लिए कला, साहित्य, सिनेमा, संगीत और खेल जगत की प्रसिद्ध हस्तियों को समय - समय पर शांतिदूत भी नियुक्त किया है।

इसी शांति के ना होने के कारण पूरी दुनिया दो विश्व युद्धों को देख चुकी है। विश्व में तीसरा विश्व युद्ध ना हो इसके लिए विश्व में शांति स्थापित करना और ज़रूरी हो गया है। इसलिए हमें मिलकर पूरे विश्व को शांतिमय मनाना होगा।
सादर।।

अब रुख करते हैं आज की बुलेटिन की ओर  ….













पढ़िए ये सुन्दर कड़ियाँ। अब हम मिलते हैं कुछ अंतराल के बाद नमस्कार।।

बुधवार, 18 सितंबर 2013

"रहीम" का आँगन, राम की "तुलसी" और ब्लॉग बुलेटिन

सभी चिठ्ठाकारों मित्रों को सादर नमस्ते।। आज मैं अपनी 25वीं बुलेटिन में आपके साथ एक दिलचस्प खबर साझा कर रहा हूँ, उम्मीद है कि आपको ये खबर पसंद आएगी।

नाम हाफिज इकरार अब्बासी। इनकी उम्र 83 साल से भी अधिक है, पेशे से ये अधिवक्ता है। कोर्ट - कचहरी में ये अपनी दलीलें भी पेश करते रहते हैं। लेकिन एक बात इन्हें दूसरों से जुदा बनाती हैं और वो बात समाज को सांप्रदायिक सौहार्द व भाईचारे का आईना दिखाती है। मुसलमान होते हुए भी वह अपने आँगन में तुलसी को सम्मान देते हैं तो अपने घर के दरवाजे पर गौ सेवा की इबारतें भी लिखते हैं। बीते 70 सालों में उनके जीवन का एक दिन भी ऐसा नहीं गुजरा जब उन्होंने दिन की शुरुआत गाय और तुलसी के बगैर की हो। 

यह सार्थक कार्य कर रहें हैं अमरोहा (उत्तर प्रदेश) शहर के मुहल्ला सराय कोहना निवासी हाफिज इकरार अब्बासीजनवरी, सन 1930 ई. को स्वर्गीय मुख़्तार अहमद अब्बासी के घर जन्म लेने वाले इकरार अब्बासी ने 10 साल की छोटी उम्र में कुरान शरीफ की आयतें याद कर ली थी।  उसके बाद उन्होंने मुरादाबाद से एम. ए. और एलएलबी की पढ़ाई पूरी की और वकालत शुरू कर दी। रोज़ कोर्ट जाना और मुकदमों पर बहस करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गई है। लेकिन इस दिनचर्या को शुरू करने से पहले दस साल की उम्र से शुरू की गई अपनी खास दिनचर्या वह आज तक नहीं भूले। और वो है गौ सेवा और तुलसी की चाय। घर के आँगन में बनी गौसाला में 2 गाय रखने की परंपरा 70 साल से चली आ रही है। सुबह की नमाज़ पढ़कर गायों को चारा देना, पानी पिलाना तथा उनकी सफाई करना उनकी जिंदगी का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है। अब्बासी जी के घर के आँगन में तुलसी की छोटी बगिया महक रही है, बगैर तुलसी के वो चाय भी नहीं पीते है। तुलसी की साफ़ सफाई भी उनकी दिनचर्या का एक अभिन्न हिस्सा है। हाफिज इकरार अब्बासी कहते हैं कि -"उनके घर में कभी दूध व घी ख़रीदा ही नहीं गया। हम घर में पल रही गाय के दूध का ही इस्तेमाल करते हैं।" अपने शौक के बारे में बताते हुए कहते हैं कि -"हिंदू भाई गाय व तुलसी को पूजनीय मानते हैं तो वह इस लायक है भी, मानव जाति के लिए दोनों कुदरती तोहफा है।" वो आगे कहते है -"83 बरस की उम्र में कभी बीमार नहीं पड़ा।  यह गाय का दूध और तुलसी की ही देन है।"


अब रुख करते हैं आज की बुलेटिन की ओर  …. 














कल फिर मिलेंगे। तब तक के लिए शुभ रात्रि।।

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