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शुक्रवार, 18 अक्टूबर 2013

हंसी के फव्वारे

प्रिये ब्लॉगर मित्रों - सादर प्रणाम

सोचा आज बहुत दिनों बाद कुछ हंसी मजाक हो जाये तो हाज़िर हूँ आपके सामने एक हंसती खिलखिलाती और गुदगुदाती सी बुलेटिन लेकर |









छगन लाल (पुत्र से)- अच्छा बताओ तो बेटे, तुम बड़े होकर क्या बनोगे ?
बेटा- पापा, मैं आपके जैसा डॉक्टर बनूंगा ।
छगन लाल खुशी से बोला- बहुत अच्छा, डॉक्टर बनकर फिर क्या करोगे ?
बेटा- सारे मरीजों को भला-चंगा कर दूंगा।
अब छगन लाल निराश होकर बोला- बेटा, फिर तो तुम इंजीनियर ही बनो।
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पत्नी – ऐसा लगता है कि सामने वाले घर में मियां-बीवी के बीच झगडा हो रहा है. आप एक बार जाकर देखिये न ?
पति – मैं एक-दो बार गया था …. शायद ये उसी का नतीजा है !
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संता - आज मैंने अपनी बीवी को वाचमैन के साथ पिक्चर देखने जाते हुए देखा!
बंता- तुम उनके पीछे नहीं गए?
संता- नहीं यार, दरअसल वो पिक्चर मेरी देखी हुई थी
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एक शादीशुदा शायर की मुलाकात अपनी पुरानी गर्लफ्रेंड से हुई । शायर ने कहा- मुलाहिजा फरमाएं! ये चांद-तारे अब अच्छे नहीं लगते, रोज-रोज के बहाने अब अच्छे नहीं लगते. खुदा करे इस साल हो जाए आपकी शादी, क्योंकि अब आप कुंवारे अच्छे नहीं लगते
गर्लफ्रेंड ने कहा- वाह वा..! वाह वा…! क्या आप करेंगे मुझसे शादी ?
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संता- सुना है तुझे नौकरी से निकाल दिया?
बंता- हां, उन लोगों ने मेरे ऊपर चोरी का इल्जाम लगा दिया था ।
संता- तो तुम्हें कहना चाहिए था कि साबित करके दिखाएं?
बंता- कहा था ।
संता- फिर?
बंता- उन्होंने साबित कर दिया ।
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टीचर (पिंकी से) - तुम्हारे नाना जी कहां रहते हैं?
छात्रा- सर, तिरुवनन्तपुरम में ।
टीचर- अच्छा, इसकी स्पेलिंग बताओ ।
पिंकी- सर, मुझे अभी-अभी याद आया कि वे गोवा में शिफ्ट हो गए हैं ।
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संता- यार बंता क्या तुम्हें रात में मच्छर परेशान नहीं करते?
बंता- कतई नहीं
संता- भला वो कैसे? मुझे तो बहुत परेशान करते हैं ।
बंता- मैं रात को शराब पीकर जब बिस्तर पर लेटता हूं तो मच्छर मुझे घेर लेते हैं, पहले तो नशे की हालत में मुझे उनके काटने का पता नहीं चलता और जब मैं होश में आता हूं, तो वे नशे में धुत हो चुके होते हैं ।
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एक कोचिंग क्‍लास में टीचर पढ़ा रहे थे।
उन्होंने वहां उपस्थित छात्रों से कहा- एक दिन ऐसा आएगा जब पृथ्‍वी पर पानी ही पानी होगा। जीव-जंतु सब नष्‍ट हो जाएंगे ।
छात्र - सर! उस दिन कोचिंग आना है या नहीं ?
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चमेली - मां, मैं सांता से शादी नहीं करूंगी।
शीला - क्यों बेटी, क्या तेरी नजर में कोई और है?
चमेली - नहीं मां ।
शीला - क्या कोई परेशानी है?
चमेली - हां! सांता को तो स्वर्ग-नरक में विश्वास ही नहीं है।
शीला - तू घबरा मत बेटी, पहले उससे शादी तो कर ले। उसके बाद उसे स्वर्ग-नरक में विश्वास अपने आप ही हो जाएगा।
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संता- यार, बंता पता है गर्लफ्रेंड और एग्जाम एक जैसे ही होते हैं
बंता- वो कैसे?
संता - दोनों ही में ढेर सारे सवाल होते हैं, ज्यादातर समझ में नहीं आते, जरूरत से ज्यादा समझाना पड़ता है और नतीजा भी एक जैसा - फेल
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आज की कड़ियाँ 

जीवन में हास्य-रस की उपयोगिता - सुष

कुछ खट्टा कुछ मीठ्ठा - भूपेन्द्रसिंह रओल

हास्य रस - विकास परिहार

जीवन से कुल हास्य रस, जग ले जाए छीन - रविकर

कविता की नौटंकी - शील

आशिक, माशुका और महबूब - दीपक

परेशान दशानन - सूरज सिंह

हास्यरस और श्रृंगार रस - विजयप्रकाश

मैं बल्ब और तू ट्यूब - बाल कृषण गर्ग

विलक्षण प्रतिभा के धनी थे डॉ. सुब्रह्मण्यम् चंद्रशेखर - शशांक द्विवेदी

यादों के गर्म लिहाफ़ - रश्मि शर्मा

अब इजाज़त | आज के लिए बस यहीं तक | फिर मुलाक़ात होगी | आभार
जय श्री राम | हर हर महादेव शंभू | जय बजरंगबली महाराज 

मंगलवार, 21 अगस्त 2012

कुछ हंसी के गोलगप्पे... ब्‍लॉग बुलेटिन

आज कल हम कितने उलझे रहते हैं... न जानें कैसी कैसी परेशानियों से घिरे रहते हैं.... आईए तो फ़िर आज हम कुछ चुटकुलों से आपका मनोरंजन करते हैं..

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पति-पत्नी में झगड़ा हो रहा था.
पति – “अब अगर तुमने एक शब्द भी और कहा तो मेरे अंदर का जानवर जाग जायेगा … !”

पत्नी – “ठीक है, ठीक है … तुम्हारे अंदर जो जानवर बैठा है उसे जाग जाने दो … भला चूहे से भी कोई डरता है .. !!!”

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डॉक्टर - आपके तीन दांत कैसे टूट गए ?
मरीज - पत्नी ने कड़क रोटी बनाई थी.
डॉक्टर - तो खाने से इनकार कर देते !

मरीज – जी, वही तो किया था … !!!

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"तुम इतने चिन्तित क्यों हो ?” ऑपरेशन टेबल पर लेटे मरीज से डॉक्टर ने पूछा ।
"क्या बताऊं डॉक्टर साहब, यह मेरी जिन्दगी का पहला ऑपरेशन है” – मरीज ने जवाब दिया।
"अच्छा ! पर मेरी जिन्दगी का भी यह पहला ऑपरेशन है और मैं तो बिल्कुल भी चिन्तित नहीं हूं।”

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”डॉक्टर साहब, क्या आपको यकीन है कि मुझे  मलेरिया ही है ? दरअसल मैंने एक मरीज के बारे में पढ़ा था कि डॉक्टर उसका मलेरिया का इलाज करते रहे और अंतत: जब वह मरा तो पता चला कि उसे टायफाइड था।”

”चिन्ता मत करो, मेरे साथ ऐसा नहीं होगा। अगर मैं किसी का मलेरिया का इलाज करूंगा तो वह मलेरिया से ही मरेगा।”
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हंसी के हसगुल्लो के बाद आईए ब्लाग जगत के कुछ चुनिंदा पोस्टो पर नज़र डाली जाए....

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५०० वीं टिप्पणीमुझे अब मिल ही गयी ....!!!: बधाई हो
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नींद रात रानी हो गयी। वाह जी वाह
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बुद्धि की झोरिया : कहाँ टांग दिहो। क्या बात है...
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दिल से । (गीत)। बढिया गीत
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एक पत्र बचपन के नाम। एक उम्दा पोस्ट
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कैग की जीरो या मैडम का अंडा। श्श्श!!! का कहें...
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ढलती शाम के संग...। वाह
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वो इमली का पेड़। क्या जी वाह
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मुझ सी ही नटखट मेरी परछाइयाँ। मजा आ गया जी
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जहां निर्वाण होता हो मासूमियत का !!!। अच्छा ही है
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वेब-पत्रिकाओं और ब्लॉग से चोरी हो रही हैं रचनाएँ : मुंबई से प्रकाशित 'संस्कार' पत्रिका का कारनामा। सरजी कापीराईट का मतलब ही होता है राईट टू कापी.... :-)
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आशा है आपको आज का बुलेटिन पसन्द आया होगा.... तो फ़िर देव बाबा को इज़ाजत दीजिए.. एक छोटे से ब्रेक के बाद फ़िर मुलाकात होगी...

जै हिन्द



लेखागार