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शुक्रवार, 17 मार्च 2017

भारत के दो नायाब नगीनों की जयंती का दिन और ब्लॉग बुलेटिन

सभी ब्लॉगर मित्रों को मेरा सादर नमस्कार।
आज १७ मार्च है ... आज का दिन जुड़ा हुआ है भारत के दो नायाब नगीनों से ... एक हैं ... भारतीय बॉडी बिल्डिंग जगत में 'फादर ऑफ इंडियन बॉडी बिल्डिंग' के नाम से पहचाने जाने वाले स्वतंत्र भारत के पहले मिस्टर यूनिवर्स ख़िताब के विजेता मनोहर आइच और दूसरी हैं ... कल्पना चावला , पहली महिला भारतीय अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री और अंतरिक्ष शटल मिशन विशेषज्ञ।

आज इन दोनों की ही जयंती है। आइये थोड़ा जानते हैं इन दोनों ही के बारे में ...

भारत के इन दो नायाब नगीनों की जयंती के दिन हम सब उन्हें शत शत नमन करते हैं।


अब चलते हैं आज की बुलेटिन की ओर...

स्मृतियों में गाँव और गणगौर

आकाशीय बिजली क्या होती है?

जीवन में सबसे महत्वपूर्ण क्या है? – 2

विभिन्न देशो की मुद्राओं वैज्ञानिकों के या विज्ञान संबधित चित्र

रूढ़ियाँ-समाज और युवाओं की जिम्मेवारी...4

परमारों का विस्तार और आजादी के बाद परमार वंश

लोकतंत्र के भीतर गुंजाइश है लोकतंत्र पर हमले की...

काँग्रेस में हार की जिम्मेदारी लेने के लिए मचा घमसान

शांत खामोश शाम...

रखा तो है शमशान भी है कब्रगाह भी है और बहुत है दो गज जमीन है सुकून से जाने के लिये

आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर ... अभिनन्दन।।

गुरुवार, 17 मार्च 2016

धरती से अंतरिक्ष तक बेटियों की धमक - ब्लॉग बुलेटिन

नमस्कार साथियो,
धरती से लेकर सुदूर अंतरिक्ष तक सफलता की कहानी रचने वाली भारतीय बेटियों की कहानी कहता है आज, 17 मार्च का दिन. इसमें एक बेटी है कल्पना चावला और दूसरी बेटी है साइना नेहवाल. आज इन दोनों बेटियों का जन्मदिन है. आइये संक्षेप में इन दोनों बेटियों के बारे में जानते हुए आज की बुलेटिन का आनन्द उठायें.


अंतरिक्ष जाने वाली प्रथम भारतीय महिला कल्पना चावला का जन्म करनाल (हरियाणा) में 17 मार्च 1962  को हुआ था. उनके पिता का नाम श्री बनारसी लाल चावला और माता का नाम श्रीमती संज्योति है. चार भाई बहनों में सबसे छोटी कल्पना की प्रारंभिक शिक्षा टैगोर पब्लिक स्कूल करनाल में हुई. बाद में पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज, चंडीगढ़ से सन 1982 में अभियांत्रिकी स्नातक की उपाधि प्राप्त करके वे संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए चली गईं. वहाँ वर्ष 1984 में टेक्सास विश्वविद्यालय आर्लिंगटन से वैमानिक अभियान्त्रिकी में विज्ञान निष्णात तथा वर्ष 1988 में कोलोराडो विश्वविद्यालय बोल्डर से वैमानिक अभियंत्रिकी में विद्या वाचस्पति की उपाधि प्राप्त की. उनको हवाईजहाज़ों, ग्लाइडरों, व्यावसायिक विमान चालन के लाइसेंस के लिए प्रमाणित उड़ान प्रशिक्षक का दर्ज़ा प्राप्त होने के साथ-साथ एकल तथा बहुइंजन वायुयानों के लिए व्यावसायिक विमानचालक के लाइसेंस भी प्राप्त थे. उनको मार्च 1995 में नासा के अंतरिक्ष यात्री कोर में शामिल करते हुए 1998 में पहली उड़ान के लिए चुना गया. उनका पहला अंतरिक्ष मिशन 19 नवम्बर 1997 को छह अंतरिक्ष यात्री दल के रूप में अंतरिक्ष शटल कोलंबिया की उड़ान एसटीएस-87 से शुरू हुआ, इसकी अवधि 19 नवंबर 1997 से 5 दिसंबर 1997 थी. अपने पहले मिशन में उन्होंने 1.04 करोड़ मील का सफ़र तय करके पृथ्वी की 252 परिक्रमाएँ की तथा अंतरिक्ष में 360 से अधिक घंटे बिताए. उड़ान प्रशिक्षक और विमानन लेखक जीन पियरे हैरीसन से शादी करके वे सन 1990 में संयुक्त राज्य अमेरिका की नागरिक बनीं. वर्ष 2000 में उन्हें अपनी दूसरी अंतरिक्ष उड़ान के लिए चुना गया और 16 जनवरी 2003 को कोलंबिया द्वारा एसटीएस-107 मिशन का आरंभ हुआ. कोलंबिया अन्तरिक्ष यान में उनके साथ अन्य यात्री- कमांडर रिक डी० हुसबंद, पायलट विलियम मैकूल, कमांडर माइकल एंडरसन, इलान रामों, डेविड ब्राउन, लौरेल बी० क्लार्क थे. यह अंतरिक्ष यात्रा कल्पना चावला की अंतिम यात्रा साबित हुई. सभी तरह के अनुसंधान तथा विचार-विमर्श के उपरांत वापसी के दौरान 1 फ़रवरी 2003 को कोलंबिया अंतरिक्षयान पृथ्वी की कक्षा मे प्रवेश करते ही टूटकर बिखर गया, जिसमें कल्पना चावला सहित उनके सभी साथियों की मृत्यु हो गई.
सफल अभियान की दर्दनाक और दुखद समाप्ति पर कल्पना चावला के शब्द सत्य हो गए, “मैं अंतरिक्ष के लिए ही बनी हूँ. प्रत्येक पल अंतरिक्ष के लिए ही बिताया है और इसी के लिए ही मरूँगी.” आज उनके जन्मदिवस पर उनको विनम्र श्रद्धांजलि.

विश्व की शीर्ष बैडमिन्टन खिलाड़ी के रूप में प्रतिष्ठित प्रथम भारतीय महिला साइना नेहवाल का जन्म 17 मार्च 1990 को हिसार (हरियाणा) में हुआ था. 8 वर्ष की आयु में ही बैडमिंटन खेलना शुरू करने वाली साइना के पिता का नाम डॉ० हरवीर सिंह नेहवाल और माता का नाम उषा नेहवाल है. साइना ने शुरुआती प्रशि‍क्षण हैदराबाद के लाल बहादुर स्टेडि‍यम, हैदराबाद में कोच नानीप्रसाद से प्राप्त कि‍या. लंदन ओलंपिक 2012 में साइना ने इतिहास रचते हुए बैडमिंटन की महिला एकल स्पर्धा में कांस्य पदक हासिल किया. बैडमिंटन मे ऐसा करने वाली वे भारत की पहली खिलाड़ी हैं. सन 2008 में बीजिंग में आयोजित हुए ओलंपिक खेलों मे भी वे क्वार्टर फाइनल तक पहुँची थी. वह बीडबल्युएफ विश्व कनिष्ठ प्रतियोगिता जीतने वाली पहली भारतीय हैं. वर्तमान में शीर्ष महिला भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी साइना भारत सरकार द्वारा पद्म श्री और सर्वोच्च खेल पुरस्कार राजीव गाँधी खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित हो चुकीं हैं.
साइना को जन्मदिन की बधाई, शुभकामनायें कि वे निरंतर प्रगति-पथ पर बढ़ती रहें.

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शनिवार, 1 फ़रवरी 2014

कल्पना चावला की 11 वीं पुण्यतिथि पर विशेष बुलेटिन

सभी चिट्ठाकार मित्रों को सादर नमस्कार।।

कल्पना चावला (१ जुलाई, १९६१ - १ फ़रवरी २००३), एक भारतीय अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री और अंतरिक्ष शटल मिशन विशेषज्ञ थी। वे कोलंबिया अन्तरिक्ष यान आपदा में मारे गए सात यात्री दल सदस्यों में से एक थीं। भारत की बेटी-कल्पना चावला करनाल, हरियाणा, भारत. में एक हिंदू भारतीय परिवार में पैदा हुई थीं। उनका जन्म १ जुलाई सन् १९६१ मे एक भारतीय परिवार मे हुआ था। उसके पिता का नाम श्री बनारसी लाल चावला तथा और माता का नाम संजयोती था | वह अपने परिवार के चार भाई बहनो मे सबसे छोटी थी | घर मे सब उसे प्यार से मोंटू कहते थे | कल्पना की प्रारंभिक पढाई लिखाई “टैगोर बाल निकेतन” मे हुई | कलपना जब आठवी कक्षा मे पहुची तो उसने इंजिनयर बनने की इच्छा प्रकट की | उसकी माँ ने अपनी बेटी की भावनाओ को समझा और आगे बढने मे मदद की | पिता उसे चिकित्सक या शिक्षिका बनाना चाहते थे । किंतु कल्पना बचपन से ही अंतरिक्ष में घूमने की कल्पना करती थी ।कल्पना का सर्वाधिक महत्वपूर्ण गुण था - उसकी लगन और जुझार प्रवृति | कलपना न तो काम करने मे आलसी थी और न असफलता मे घबराने वाली थी | उनकी उड़ान में दिलचस्पी जहाँगीर रतनजी दादाभाई टाटा, से प्रेरित थी जो एक अग्रणी भारतीय विमान चालक और उद्योगपति थे। पूरा लेख यहाँ पढ़े …… 

 आज अंतरिक्ष यात्री स्वर्गीय कल्पना चावला की 11 वीं पुण्यतिथि पर पूरा हिन्दी ब्लॉगजगत और ब्लॉग बुलेटिन टीम उन्हें शत शत नमन करती है। जय हिन्द, जय भारत।। 

 अब चलते हैं आज कि बुलेटिन की ओर.……
 













कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि।।

लेखागार