ब्लॉग से फेसबुक, फेसबुक से मोबाइल, मोबाइल से वाट्सएप्प ... मिले मुझे सलिल भाई . विनम्रता, स्पष्टता, शालीनता से सामना होता रहा और दिल से दुआएँ निकलती रहीं . अब जब आज जन्मदिन है तब तो सर पर हाथ रखना ही है और कहना है ... खुदा दिलजलों की नज़र से बचाए, फिर भी दिलजले आ ही जाएँ राह में तो मुझसे बचाए .
हाल में सलिल भाई ने एक लिंक भेजा, और मैं हेमंत कुमार की आवाज़ में खो गई , आप इतना सोचिये मत, सुन ही लीजिये
सलिल भाई के लेखन के कायल तो हम रहे ही, अभिनय और गायन में भी वे मंजे हुए हैं ... जिन्होंने नहीं देखा हो, उनको देखना चाहिए
गीतों, रचनाओं, और बेजोड़ कलाकारी की जन्मदिन पार्टी है , आज सबलोग इस बिहारी के रंग में रंग जाइये , बिल्कुल होली के रंगों की तरह , आइये बढ़ते जाइये
अब इनकी कलम
चलते चलते कुछ बातें अपने लिए स्वयं सलिल भाई की कलम से -
- चला बिहारी ब्लॉगर बनने
- हमरा नामः सलिल वर्मा,वल्दः शम्भु नाथ वर्मा,साकिनः कदम कुँआ, पटना,हाल साकिनः भावनगर, गुजरात हम तीन माँ के बेटा हैं,बृज कुमारी हमको जनम देने वाली,पुष्पा अर्याणी हमरे अंदर के कलाकार को जन्म देने वाली,अऊर गंगा माँ जिसके गोदी में बचपन बीता अऊर कॉलेज (साइंस कॉलेज/पटना विश्वविद्यालय) की पढाई किए.बस ई तीन को निकाल लिया तो हम ही नहीं रहेंगे...




