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गुरुवार, 28 मार्च 2013

होली के रंग, स्लो नेट और ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम !

पिछले २ - ३ दिनों से फेसबुक पर कुछ मित्रों के स्टेटस से भी पता चला और खुद भी फर्क महसूस कर रहा था कि इंटरनेट कुछ धीमा है ... फिर लगा शायद होली की छुट्टियों मे उपयोग बढ़ जाने के कारण ऐसा है पर आज जब नेट पर खबरें पढ़ रहा था तो मालूम हुआ कि दुनिया भर में अब इंटरनेट पर संकट छा गया है। इसकी वजह से न सिर्फ इंटरनेट यूजर्स को इसकी कम स्पीड से दो-चार होना पड़ रहा है, वहीं आशंका यह भी जताई जा रही है कि इससे कई बैंकों के ईमेल अकाउंट और और महत्वपूर्ण पासवर्ड तक हैक हो सकते हैं। इसको लेकर दुनिया के कई देश बेहद चिंतित हैं। कल शाम से काफी लोगों ने फेसबुक के भी काफी धीमा खुलने या न खुलने की शिकायत की थी |
दरअसल, इसकी वजह स्पैम से लड़ने वाली आर्गेनाइजेशन में आया मतभेद बताया जा रहा है। इस वजह से आशंका जताई जा रही है कि इंटरनेट पर साइबर अटैक हो सकता है। आशंका यह भी है कि यदि इससे जल्द ही न निपटा गया तो जल्द ही कई देशों में बैंकों समेत कई अन्य सुविधाएं बाधित हो जाएंगी। इतना ही नहीं कई बैंकों के अकाउंटों के पासवर्ड भी हैक हो जाने की संभावना है। पांच देशों की साइबर पुलिस इसकी जांच में जुटी है। इस वजह से दुनिया के कई देशों में इंटरनेट की धीमी रफ्तार से इंटरनेट यूजर्स काफी परेशान हैं।
यदि इससे जल्द निजाद न पाई गई तो दुनिया के कई देशों को बड़ा नुकसान होने की पूरी संभावना है। दुनिया भर में हैकर्स इस परेशानी का पूरा फायदा हैकर्स उठाने की ताक में बैठे हैं। बैंकों के अकाउंट और पासवर्ड हैक होने की चिंता ने कई बैंकों की पेशानी पर लकीरें खींच दी हैं। 

अब यह तो आने वाला समय ही बताएगा कि भारत मे इसका कितना असर हुआ ... फिलहाल कम स्पीड पर ब्लॉग बुलेटिन तो लग ही रही है ... पढ़ें और बताएं कैसी लगी ???

सादर आपका 

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मेरा बचपन ......

Ashok Saluja at यादें...
*यादें !* चलिए आज आपको अपने बचपन के सैर कराता हूँ ....... और ख़ुद आप को सुनाता हूँ ! होली की याद में इतना तो बनता ही है न ??? अशोक

शिष्टाचार

सुज्ञ at सुज्ञ
पाश्चात्य देशों में जो 'शिष्टाचार' बहुप्रशंसित है वह शिष्टाचार वस्तुतः भारतीय अहिंसक जीवन मूल्यों की खुरचन मात्र है। भारतीय अहिंसक मूल्यों में नैतिकता पर जोरदार भार दिया गया है। पाश्चात्य शिष्टाचार उन्ही नैतिक आचारों के अंश है। सभ्यता और विकास के क्रम में यह शिष्टाचार पश्चिम ने भारतीय अहिंसा के सिद्धांत से ही तो ग्रहण किए है। उनके लिये अहिंसा पालन जितना सुविधाजनक था अपना लिया। परिणाम स्वरूप वह आचरण, उनके शिष्टाचार स्वरूप में स्थापित हो गया। जबकि भारत में यह अहिंसा पालन और नैतिक आचरण किताबों में कैद और उपदेशों तक सीमित हो गया। क्योंकि पालन बड़ा कठीन था और मानवीय स्वभाव सदैव से सरलतागाम... more »

अबके इस होली में !

पी.सी.गोदियाल "परचेत" at अंधड़ !
अपनी "छवि" बदलनी चाही, अबके हमने भी इस होली में। श्वेत-वसन स्व: अंग चढ़ाकर, अबीर, गुलाल, रंग लगाकर, निकले घर से हम टोली में। PLANNING FOR HITTING THE STREET ! उत्सव के नज़ारे बड़े-बड़े थे, पिचकारी लेकर कई चाँद खड़े थे, ताक में चकोरों की अपने घर की खोली में। अपनी "छवि" बदलनी चाही, अबके हमने भी इस होली में। देख हमें इक चाँद मुस्काया, रंग भरा चेहरा दिल को भाया, ना नुकूर के खेल-खेल में मल दिया गुलाल ठिठोली में। अपनी "छवि" बदलनी चाही, अबके हमने भी इस होली में। SWEET TREATS :) फिर ऐसा रंग चढ़ा होली को , दिया भंग बढ़ा हमजोली को, खुद ही आ गया घर हमारे  more »

अरमान मेरे दिल का निकलने नहीं देते

ख़ातिर से तेरी याद को टलने नहीं देते सच है कि हम ही दिल को संभलने नहीं देते आँखें मुझे तलवों से वो मलने नहीं देते अरमान मेरे दिल का निकलने नहीं देते किस नाज़ से कहते हैं वो झुंझला के शब-ए-वस्ल तुम तो हमें करवट भी बदलने नहीं देते परवानों ने फ़ानूस को देखा तो ये बोले क्यों हम को जलाते हो कि जलने नहीं देते हैरान हूँ किस तरह करूँ अर्ज़-ए-तमन्ना दुश्मन को तो पहलू से वो टलने नहीं देते दिल वो है कि फ़रियाद से लबरेज है हर वक़्त हम वो हैं कि कुछ मुँह से निकलने नहीं देते गर्मी-ए-मोहब्बत में वो है आह से माअ़ने पंखा नफ़स-ए-सर्द का झलने नहीं देते. *- अकबर इलाहाबादी *

शर्म का पर्दा ...

उदय - uday at कडुवा सच ...
वैसे तो, आज का हर आदमी, कवि है, कलाकार है बस, नहीं है तो,......एक अच्छा दुकानदार नहीं है ? ... उनकी सिसकियाँ थमने का नाम नहीं ले रही हैं 'उदय' अब 'रब' ही जाने, कैसा जलजला आया है उन पर ?? ... उनका भी अंदाज, कुछ अजब, कुछ गजब, कुछ निराला है खुद को ही,............................ खुद बधाई दे रहे हैं वो ? ... कश्मकश, सपने, महकती रातें, और वो बेबाक लिपटना तेरा गर हम चाहें भी तो, कैसे...................भूल जायें वो मंजर ? ... मैंने तो 'उदय', सिर्फ आँख से शर्म का पर्दा हटाया है यहाँ तो लोग हैं, जो जिस्म भी खुल्ला ही रखते हैं ? ...

मेरी बेटी श्रेयांसी की रचना

मेरी बेटी श्रेयांसी ने कंप्यूटर पर रची ये तस्वीर. एक घर , जो उसके सपने में है. तारे जो उसे प्यारे लगते हैं. कहीं किसी कोने में रात का भी डर है. इसलिए घर की तलाश में भटकता बच्चा भी बगल में खड़ा मिल जाएगा.

बच्चे की सीख

* * *बचपन* *से ही मुझे अध्यापिका बनने तथा बच्चों को मारने का बड़ा शौक था. अभी मैं पाँच साल की ही थी कि छोटे-छोटे बच्चों का स्कूल लगा कर बैठ जाती. उन्हें लिखाती पढ़ाती और जब उन्हें कुछ न आता तो खूब मारती. मैं बड़ी हो कर अध्यापिका बन गई. स्कूल जाने लगी. मैं बहुत प्रसन्न थी कि अब मेरी पढ़ाने और बच्चों को मारने की इच्छा पूरी हो जाएगी. जल्दी ही स्कूल में मैं मारने वाली अध्यापिका के नाम से प्रसिद्ध हो गई. एक दिन श्रेणी में एक नया बच्चा आया. मैंने बच्चों को सुलेख लिखने के लिए दिया था. बच्चे लिख रहे थे.* * * * अचानक ही मेरा ध्यान एक बच्चे पर गया जो उल्टे हाथ से बड़ा ही गंदा हस्तलेख लिख रहा थ... more »

परिभाषाएं - (२ )

तारे वह तिलिस्म - जो सारी दूरीमिटा देते हैं- धरती और आकाशके बीच ! वह रहनुमा - जो भटके हुओंकी होते हैं- आखरी उम्मीद ! वह अपने - जो आशिश्ते हैं - अपने से दूरअपनों को !

दुआ

वो उदास आँखों वाली लड़की सुर्ख फूल सब्ज़ पत्ते नर्म हवा रुकी रुकी बारिश और मिट्टी की सौंधी महक को चाहने वाली, माहताब से बदन वाली वो लड़की... उदास रहती थी पतझड़ में. उसे सूखी ज़मीन और नीला आसमान ज़रा नहीं भाते उसकी आँखों को चूमे बिना ही चखा है मैंने कोरों पर जमे नमक को... एक रात नींद में वो मुस्कुराई और बादल उसके इश्क में दीवाना हो गया.... यकीन मानों खिली धूप में बेमौसम बारिश यूँ ही ,बेमकसद नहीं हुआ करती.... (न कोई अनमेल ब्याह,न अपवर्तन के नियम....) नीले आसमान पर लडकी के लिए मैंने लिखी जो दुआ वही तो है ये इन्द्रधनुष... अनु

अबे, सुन बे गुलाब

naveen kumar naithani at लिखो यहां वहां
(यादवेन्द्र का प्रस्तुत आलेख गुलाव जैसी प्रजातियों वाले फूलों से जुड़े पर्यावरणीय मसलों पर चर्चा के साथ हमारी निर्यात नीति पर भी कुछ जरूरी सवाल उठाता है) अबे ,सुन बे गुलाब: जल संकट और फूल की कीमत -यादवेन्द्र अभी अभी वेलेन्टाइन डे गुजरा है और भारत में यह दिन सांस्कृतिक पहरेदारों केउपद्रवों के कारण पिछले कुछ सालों से ज्यादा चर्चित रहा है।अपने प्रेम का इजहार करने के लिए सुन्दर फूलों -खास तौर पर गुलाब - की देश के अन्दरकी बिक्री और विदेशों में निर्यात के रिकार्ड दर रिकार्ड के लिए भी इस दिन कोख़ास तौर पर याद किया जाता है। बंगलुरु और पुणे जैसे इ... more »

अजीब जिद्दी हैं ये

मेरे ख़याल बिखरे पड़े हैं रास्तों पर अनजान दहलीजों पर कहाँ से गुजरूँ कि इनसे कभी फिर सामना न हो ये बहुत सवालिया किस्म के हैं न खुद दम लेते है न मुझे दो पल सुकून से आने जाने देते हैं कोई इन्हें समेट कर कहीं दूर शहर के बाहर फेंक क्यूँ नहीं आता पर फिर लगता है की ये कहीं मुझे ढूँढ़ते हुए वापिस मेरा दरवाजा तो नहीं खटखटाएंगे अजीब जिद्दी हैं ये... 
 
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अब आज्ञा दीजिये ...
 
जय हिन्द !!!

बुधवार, 27 मार्च 2013

हैप्पी होली - २ - ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय ब्लॉगर मित्रों ,
प्रणाम !

आज आपको एक किस्सा सुनता हूँ ...

एक शरीफ लड़के, (जी हाँ, लड़के भी शरीफ होते है), की सगाई एक बहुत ख़ूबसूरत लड़की, (जी हाँ, लड़कियाँ बहुत खूबसूरत भी होती है), से हुई।

 पर वो लड़का उस लड़की से कभी नहीं मिला था, ना ही उस से बात की थी।
(जी हाँ, आज भी ऐसा होता है) 

 बस सब लोगो से उसकी खूबसूरती की तारीफ ही सुनी थी।

अपनी सुहाग रात पर लड़का बड़ा ख़ुशी-ख़ुशी अपने कमरे में गया और बड़े स्टाइल से अपनी पत्नी का घूंघट उठा कर उससे बोला।

 लड़का: "तुम सच में बहुत ख़ूबसूरत हो, समझ नहीं आता की तुम्हे क्या तोहफा दूँ?"

 लड़की शर्माती हुई बोली, "दो आप ता दिल तले, वो दे दो।"

इस किस्से से हमें यह सबक मिलता है कि सुनी सुनाई बातों पर यकीन नहीं करना चाहिए खुद भी थोड़ी जांच पड़ताल करनी चाहिए।

अब जैसे मैं तो यहाँ आपको पोस्टो के लिंक दे दूंगा ... पर आप खुद जा कर उनको पढ़ना जरूर ... ;)

आप सब को होली की हार्दिक शुभकामनायें !

सादर आपका

शिवम मिश्रा

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होली और तुम्हारी याद

वे सारे रंग जो साँझ के वक्त फैले हुए थे क्षितिज पर मैंने भर लिया है उन्हें अपनी आँखों में तुम्हारे लिए वर्षों से किताब के बीच में रखी हुई गुलाब पंखुड़ी को भी निकाल लिया है तुम्हारे कोमल गालों के गुलाल के लिए तुम्हारे जाने के बाद से मैंने किसी रंग को अंग नही लगाया है आज भी मुझ पर चड़ा हुआ है तुम्हारा ही रंग चाहो तो देख लो आकर एकबार दरअसल ये रंग ही अब मेरी पहचान बन चुकी है तुम भी कहो कुछ अपने रंग के बारे में

आओ होली खेले आओ

होली की ढेर सारी शुभकामनाओं के साथ ...... फागुन में ये मन नृत्य करे रंगों के संग मन रास करे राधा और श्याम के संग-संग सबके जीवन में रंग भरे ॥ पिचकारी-गुजिया-रंग-अबीर एक दूजे से प्यार करे जाहिर मिलकर सब खुशियाँ मनाओ आओ होली खेले आओ

एक शाम मेरे नाम ने पूरे किए अपने सात साल !

वक़्त का पहिया बिना रुके घूमता ही रहता है। आपके इस चिट्ठे ने भी आज समय के साथ चलते हुए अपनी ज़िंदगी के सात साल पूरे कर लिए हैं। सात सालों के इस सफ़र में करीब पौने छः लाख पेजलोड्स, हजार से ज्यादा ई मेल सब्सक्राइबर और उतने ही फेसबुक पृष्ठ प्रशंसक, मुझे इस बात के प्रति आश्वस्त करते हैं कि इस ब्लॉग के माध्यम से मैं आपकी गुज़री शामों में सुकून के कुछ पल मुहैया करा सका हूँ। पिछले साल मैंने इस अवसर (अगर ये विषय आपकी पसंद का है तो पूरा लेख पढ़ने के लिए आप लेख के शीर्षक की लिंक पर क्लिक कर पूरा लेख पढ़ सकते हैं। लेख आपको कैसा लगा इस बारे में अपनी प्रतिक्रिया आप जवाबी ई मेल या  more »

युक्तं मधुरं, मुक्तं मधुरं

  प्रवीण पाण्डेय at न दैन्यं न पलायनम्
होली की पदचाप सारी प्रकृति को मदमत कर देती है। टेसू के फूल अपने चटक रंगों से आगत का मन्तव्य स्पष्ट कर देते हैं। कृषिवर्ष का अन्तिम माह, धन धान्य से भरा समाज का मन, सबके पास समय, समय आनन्द में डूब जाने का, समय संबंधों को रंग में रंग देने का, समय समाज में शीत गयी ऊर्जा को पुनर्जीवित करने का। नव की पदचाप है होली, रव की पदचाप है होली, शान्तमना हो कौन रहना चाहता है। कौन रंग मैं अंग लगाऊँ मन के भावों को यदि कोई व्यक्त कर सकता है तो वे हैं रंग, मन को अनुशासन नहीं भाता, मन को कहीं बँधना नहीं भाता, मन शान्त नहीं बैठ पाता है। मन की विचार प्रक्रिया से हमारा संपर्क 'हाँ या  more » 

आज होली में.

पुरुषोत्तम पाण्डेय at जाले
चलो खेलें, नया खेल आज होली में बदल डाले सारे बेमेल आज होली में. बन्द कर दो ये समाचार-मीडिया जो दिल तोडते हैं हडताल- हुल्लड, अनसन या जो माइक बोलते हैं मुँह पर चिपका दो टेप उनके जो जहर घोलते हैं. कह दो खुल्ले में ना करो बकवास आज होली में. चलो खेलें, नया खेल आज होली में. बदल डालें सारे बेमेल आज होली में. कलमकारो तुम कलम में बिष-बीज मत डालो लिखो कुछ ऐसा तुम समय की धार बदल डालो रंगों-गुलालों में मुहब्बत हो, मन चाहे लगा डालो दिलों का भेद मिट जाये, तमन्ना आज होली में चलो खेलें, नया खेल आज होली में ... more »

होली के रंग

kamlesh kumar diwan at Kamlesh Kumar Diwan
होली के रंग होली के रंग छाँयेगे कोई न हो उदास । मौसम ही सब समायेगे कोई न हो उदास । नदियाँ ही रँग लाई हैं तितली के पँखों से ध्वनियाँ मधुर सुनाई दें पूजा के शँखो से पँछी भी चहचहायेगे आ जाये आस पास । होली के रँग छायेगे कोई न हो उदास । पुरवाईयो ने बाग बाग पात झराये बागो से उड़ी खुशबूओं ने भँबरे बुलाये अमिया हुई सुनहरी मौसम का है अंदाज । बोली के ढँग आयेगें कोई न हो उदास । होली के रँग छाँयेगे कोई न हो उदास । कमलेश कुमार दीवान 26/02/10

मना रहे हैं सब मिलकर होली।

आती है होली हर बार, लेकर रंगों की भरमार, महक रही है प्रेम से धर्ती, मना रहे हैं सब मिलकर होली। सभी गले मिल रहे हैं, प्रेम के फूल खिल रहे हैं, देकर इक दुजे को शुभकामनाएं, मना रहे हैं सब मिलकर होली। नफरत की जगह है दिलों में प्यार, न जाती धर्म की है दिवार, गिले शिकवे सब भूलकर, मना रहे हैं सब मिलकर होली। है होली का ये संदेश, न नफरत न रखो क्लेश, ऐसे लगे नित्य धरा पर, मना रहे हैं सब मिलकर होली। मना रहे हैं सब मिलकर होली।

होली और होलिका

rajendrakumar sharma at चिंतन(chintan)
*होली और दशहरे में एक समानता है * *होली पर होलिका का दहन होता है * *दशहरे पर रावण का दहन होता है * *दोनों ही बुराईयों के प्रतीक थे * *परन्तु होली स्त्री थी रावण पुरुष था * *रावण अहंकार का प्रतीक था * *तो होली ईर्ष्या की प्रतीक थी * *ईर्ष्या में व्यक्ति दूसरे व्यक्ति का नुकसान करने के दुराग्रह में * *स्वयं का को भी मिटा सकता है * *होली इस तथ्य को चरितार्थ करती है * *रावण का पुरुष होना होलिका का महिला होना * *बुराईयों के बारे में यह दर्शाती है की * *वे कही भी किसी भी रूप में हो सकती है * *उनका विनाश होना यह दर्शाता है की * *चाहे कितने भी वरदान की शक्तिया बुराईयों को मिल जाए * *उन्हें नष्ट ह... more »

विक्रम वेताल १०/ नमकहराम

Ramakant Singh at ज़रूरत
आज होली पर राजा विक्रम जैसे ही दातुन मुखारी के लिए निकला वेताल खुद लटिया के जुठही तालाब के पीपल पेड़ से उतर कंधे पर लद गया दोनों निकल पड़े नगर के रेल्वे फाटक की ओर रास्ते में एक क़स्बा मिला सोनपुरा राह में एक जीव देखकर वेताल जिज्ञासा से भर उठा सांवला थुलथुल शरीर, खिचड़ी बाल साउथ इंडियन लुक किन्तु बंगाली मिक्स वेताल ने राजन से कहा राजन मै हमेशा एक कहानी सुनाता हूँ और आप मौन रहकर मेरा माखौल उड़ाते हो किन्तु आज ऐसा नहीं करने दूंगा आज की कहानी किसी नमकहराम जीव से सुनें किन्तु प्रश्न मैं ही पूछूँगा आज सही उत्तर चाहिए विधान सभा में प्रजाहित में आज आपके ज्ञान और सत्य की परीक्षा है जो स्वी... more »

होली की शुभकामना के साथ........

विशाल चर्चित at काव्य का संसार
चिमटा चला के मारा, बेलन घुमा के मारा फिर भी बचे रहे तो, भूखा सुला के मारा बरसों से चल रहा है, दहशत का सिलसिला ये बीवी ने जिंदगी को, दोजख बना के मारा कैसे बतायें कितनी मनहूस वो घडी थी इक शेर को है जिसने शौहर बना के मारा वैसे तो कम नहीं हैं हम भी यूं दिल्लगी में उसपे निगाह अक्सर उससे बचा के मारा चर्चित को यूं तो दिक्कत, चर्चा से थी नहीं पर बीवी ने आशिकी को मुद्दा बना के मारा - विशाल चर्चित

कार्टून :- बैठे-ठाले मेरी तो लंका लुट गई रे

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अब आज्ञा दीजिये ...

जय हिन्द !!!

गुरुवार, 14 मार्च 2013

एक ठो झटपटिया बुलेटिन... ब्‍लॉग बुलेटिन

सभी मित्रों को देव बाबा की राम राम... कितने व्यस्त हैं हम लोग.. हैं न... लेकिन व्यस्तता के बावजूद ब्लाग जगत के खबरची होनें की ज़िम्मेदारी तो निभानी है न.... तो लीजिए आज एक फ़टफ़टिया बुलेटिन एक अंदाज़ में.. पहले थोडा हंस लिया जाए...




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पत्नी – अगर मैं मर जाऊं तो तुम क्या करोगे ?
पति – मैं भी मर जाऊंगा.
पत्नी – क्यों ?
पति – कभी-कभी ज्यादा ख़ुशी भी जान ले लेती है …. !!!
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संता हवाईजहाज में सफर कर रहा था। एयरहोस्टेस ने मुस्कुराकर उसका अभिवादन किया। अभिवादन का प्रत्युत्तर देते हुए संता ने कहा – “आपकी शक्ल मेरी बीबी से काफी मिलती है।”
इस बात पर एयरहोस्टेस ने उसे एक तमाचा जड़ दिया। गाल सहलाते हुए संता ने कहा – “शक्ल ही नहीं, आदत भी मिलती है ….!”
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बंता ने अपने दोस्त संता को जानकारी दी – यार आज बस में आते वक्त मेरी जेब कट गई पर मेरी बीबी ने मेरा पैसा बचा लिया।
संता ने आश्चर्य प्रकट करते हुये कहा – अच्छा ! तो क्या भाभीजी ने उस जेबकतरे को पकड़ लिया था ?

बंता – अरे नहीं यार, वह तो बस में मेरे साथ थी ही नहीं ?
संता – तो फिर उन्होंने तुम्हारे पैसे कैसे बचाये ?
बंता – अरे यार, उसने तो मेरे जागने के पहले बड़े सबेरे ही मेरा बटुआ खाली कर दिया था ……..
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पत्नी: मेरे ओंठ गुलाब की पंखुड़ी जैसे हैं ना ?
पति : हाँ
पत्नी : मेरी आँखें कमल के फूल जैसी हैं ना ?
पति : हाँ
पत्नी : मेरी आवाज कोयल जैसी है ना ?
पति : हाँ
पत्नी : मेरी चाल मोरनी जैसी है ना ?
पति : हाँ

पत्नी : ओह ! तुम कितनी अच्छी बातें करते हो … !

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चलिए अब आज के बुलेटिन की ओर चलते हैं

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मित्रों आशा है की आपको आज का फ़टफ़टिया बुलेटिन पसन्द आया होगा.... तो फ़िर आप आनन्द लीजिए और हमें कल तक के लिए इज़ाजत दीजिए... 

जय हिन्द
देव

मंगलवार, 8 जनवरी 2013

कद्र करो तुम सेना की... ब्‍लॉग बुलेटिन

सैनिक.... आखिर एक सैनिक की क्या पहचान है। देश के लिए मर मिटनें का जज्बा लिए एक वीर सैनिक जब देश पर शहीद होनें निकल पडता है तो फ़िर उस समय न वह देश में फ़ैले भ्रष्टाचार के बारे में सोचता है और न ही किसी राजनीतिक नफ़े नुकसान का आंकलन ही करता है। अब साहब हैरानी तब हुई जब अपनें ब्लाग जगत के ही कुछ बुधियारो नें सेना पर ही व्यंग्य कस डाला। वह भी ऐसा जिसके बारे में सोच कर भी हैरानी हुई। अजी जनाब सेना क्या करती है जानना है तो फ़िर ज़रा समाचार पत्र पर नज़र डालिए... 

अगर प्रिंस खड्डे में गिरे तो निकालनें के लिए सेना, मुम्बई में बाढ आ जाए तो सेना, कोई भी आपदा आए तो सेना, अजी अगर नेताओं की सुरक्षा हो तो सेना, अगर कहीं जाना हो तो सेना, अगर आपकी तीर्थ यात्रा हो तो सेना, आपकी ट्रेन फ़ंसे तो सेना और आपके पुल टूटे तो सेना.. जब सरकारी ठेकेदार कामनवेल्थ का ब्रिज गिरा दे तब उसे चौबीस घंटे में खडा करे सेना.. अजी जनाब सेना से आप कुछ भी करा लीजिए आज तक सेना नें मना किया है? तो फ़िर ऐसे में नेताओं की तरह सेना पर बयान बाज़ी से बचिए... ज़िम्मेदारी का परिचय दीजिए और सेना की कद्र कीजिए। 

वैसे आज ही खबर आई की भारतीय जवान कश्मीर नियंत्रण रेखा की निगरानी में पाकिस्तानी गोलाबारी और घुसपैठ की वजह से शहीद हो गये.... हद तो तब हुई जब सरकारी दवाब में पहले इस खबर का खंडन किया गया और फ़िर बयान आया। भाई पाकिस्तान की ऐसी हिम्मत की वह हमारी तरफ़ देखे और गोलाबारी करे..... भाई वह ऐसी हरकत कर सकता है क्योंकी उसे पता है की हिन्दुस्तान में मौन सरकार है। भारत दवाब में कार्यवाही करता है, सेना को इस कमज़ोर सरकार की वजह से झुकना पडता है। कोई स्वतंत्र विचारधारा का नेतृत्व होता तो इस कार्यवाही का जवाब देता। लेकिन स्वतंत्र भारत की इस धर्मनिरपेक्ष सरकार को इसमें भी कोई राजनीतिक फ़ायदा दिख जाएगा। आईए सेना को नमन करें और जय जवान के नारे पर अपनी पूरी आस्था रखें। 

ब्‍लॉग बुलेटिन की पूरी टीम की तरफ़ से हम उन जवानों की शहादत को नमन करते हैं, यह कुर्बानी व्यर्थ नहीं जानी चाहिए। 

है शहीद तेरी शहादत पे हिन्दोस्तां को नाज़... जय जवान... 





मैं भारत माँ का प्रहरी हूँ , घायल हूँ पर तुम मत रोना,
साथी घर जाकर कहना , संकेतों में बतला देना, 
यदि हाल मेरे पिताजी पूछे तो, 
खाली पिंजरा दिखा देना, 
इतने पर भी वह न समझे तो 
... तो होनी का मर्म समझा देना
यदि हाल मेरी माताजी पूछे तो
मुर्झाया फूल दिखा देना
इतने पर भी वह न समझे तो
दो बूंद आंशु बहा देना
यदि हाल मेरी पत्नी पूछे तो,
जलता दीप बुझा देना
इतने पर वह न समझे तो
मांग का सिंदूर मिटा देना
यदि हाल मेरा बेटा पूछे तो
माँ का प्यार जाता देना
इतने पर वह न समझे तो
सैनिक धर्म बतला देना ...


आईए आज के बुलेटिन की ओर चला जाए.... 

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दिल में बाकी पिछली सर्दियाँ रह जायेंगी.....

सूनी, गुमसुम, खामोश बस्तियाँ रह जायेंगी खिज़ा आयी तो बस सूखी पत्तियाँ रह जायेंगी अबके हिज्र का दिसंबर शायद मैं भुला भी दूं पर दिल में बाकी पिछली सर्दियाँ रह जायेंगी मुझको मालूम है ये के, तुम न आओगे मगर याद करती तुमको मेरी हिचकियाँ रह जायेंगी पलट के जब कभी मैं माजी की तरफ देखूंगा आँखों में लहू, होठों पे सिसकियाँ रह जायेंगी है दुआ के खुदा तुमको सुकूँ की जिंदगी बख्शे हमारे हक में पुरानी सब चिट्ठियाँ रह जायेंगी

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माचिस

Vijay Kumar Shrotryia at My Poems - meri kavitayen...
हाथ में लेकर माचिस घूम रहे हैं व्यस्त है नुक्कड़ों पर चौराहों पर कैंटीन में सभा में हाथ में लेकर माचिस आजकल रोजाना की बरसात ने कर दिया है गीला इन माचिसों को जब कभी देखता हूँ लोगों को सेंकते धूप एक साथ समूह मे मुझे लगता है अब माचिस का गीलापन कम हो रहा है अपने प्राकृतिक रूप में आ रही है माचिस कौन नहीं जानता माचिस का काम होता है क्या

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प्रेम या भ्रम

मै मान भी लूँ कि तुम्हे प्यार नहीं मुझसे जो भी था, सब एक छलावा मात्र था पर इसमें मेरा तो कोई दोष नहीं मैंने तो तुम्हे ही चाहा था चुन लिया था तुम्ही को सदा के लिए फिर इस बार भी मै ही सजा क्यूँ भुगतूं हे प्रभु तुम बार-बार मुझे ही क्यूँ चुनते हों अपनी भृगु दृष्टि के लियें इसे तुम्हारा प्रेम समझूँ या तुम्हारा उपकार कैसे कैसे सपने बुने थे मैंने रेशमी धागों से तुमने कुछ न सोचा पल भर में तोड़ दियें सारें ख्वाब ये भी न ख्याल आया इन्ही रेशमी धागों से बुनी है मेरी साँसों की डोर तुम तो बस, तोड़ क... more »

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निजता में यह दखल ठीक नहीं

गुजरात दंगों के बाद दुनिया भर के अखबारों में छपा एक चित्र बहुत चर्चित हुआ था। इसमें एक दंगा पीडि़त को अपने दोनों हाथ जोड़कर रोते हुए अपने जीवन की भीख मांगते दिखाया गया था। बहुत मार्मिक दृश्य था वह! जब हिंसा पर उतारु भीड़ ने निहत्थों व निर्दोषी को घेर रखा हो तो उनके दिल पर जो गुजरती है, उन चेहरों का वह प्रतिनिधि चेहरा था। दंगों के एक साल बाद उस व्यक्ति के बारे में विस्तार से खबर छपी कि वह मजबूरन अपना शहर छोड़कर कलकत्ता में बसने के लिए चला गया। उसने बताया कि शहर व राज्य छोड़ने की वजह दंगे या नफरत नहीं थी, बल्कि फोटो छपने के बाद उसे मिलने वाला प्रचार था। उसने बताया कि वह इसके प्रकाशन के... more »

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शोभना काव्य सृजन पुरस्कार प्रविष्टि संख्या - 21

संगीता तोमर Sangeeta Tomar at सादर ब्लॉगस्ते! 
विषय: भ्रष्टाचार भारतीय राजनीति के पानी में मजे ले रही लोट लगा रही जुगाली कर रही भ्रष्टाचार की मरखनी, काली भैंस। चरवाहा खड़ा बाहर असहाय कर रहा विफल प्रयास उसे बाहर निकालने का। चर जाती यह नैतिकता, ईमानदारी की हरी घास चट कर जाती देश - प्रेम, निष्ठा का भूसा। हर ओर मुँह मारती सब कुछ को खाती मोटी होती जाती यह भ्रष्टाचार की मरखनी, काली भैंस। झूठ - फरेब के बड़े - बड़े सींग पटकनी देती अपने ही मालिक को कानून सी लंबी पूँछ मक्खियाँ उड़ाती। फर्जी खातों से थन कितना भी खींचो निकले न दुग्ध-कण फिर भी देश के हर कोने में छा रही फलती-फूलती जा रही यह भ्रष्टाचार की मरखनी, काली भैंस। रच... more »

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मेरी शिकायत दर्ज की जाए मी लॉर्ड : देवयानी भारद्वाज

रश्मि प्रभा... at वटवृक्ष 
मेरी शिकायत दर्ज की जाए मी लॉर्ड ............ बेहद सशक्त,अर्थपूर्ण आइना .... इस शिकायत ने मुझे विवश किया कि देव निर्मित इस भावनापूर्ण उद्यान में मैं अपनी आंतरिक सुप्त भावनाओं को जागृत कर, अपनी दृष्टि को सूर्य रथ बना लूँ . रथ पर मैं उन रचनाओं को लेकर आई हूँ - जो विशेष वाण हैं, ............... देर किस बात की,समक्ष है . ** * **रश्मि प्रभा* ================================================================= *मेरी शिकायत दर्ज की जाए मी लॉर्ड* कितने साल लगते हैं एक बलात्कार, एक हत्या, एक ज़ुर्म की सजा सुनाने में अदालत को कितने साल के बाद तक है इजाज़त कि एक पीड़ि‍त दर्ज़ कराने जाये उसके व... more »
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कल , आज और कल

पता नहीं क्यों आदत हो गयी है हमें इतिहास से फूल चुनने की और काँटों पर शयन करने की आखिर क्यों हम बार- बार पलट कर देखते हैं जबकि वक्त ना जाने कितनी करवटें बदल चुका है ना वैसा आलम रहा ना वैसा आचरण ना वैसे संस्कार तो फिर क्यों हम आज की तुलना बीते कल से करते हैं और खोजते हैं अपना बीता वक्त आज में जबकि जो बीत चुका वो वापस नहीं आता कालातीत हो चुका होता है जो क्यों उसे ज़िन्दा करने की उसे कुरेदने की कोशिश करते हैं फिर चाहे समाज की कुरीतियाँ हों या मन के दंश या घर की औरतें खींच लाते हैं उन्हें अतीत से वर्तमान में और थोपने लगते हैं कल के पलों पर आज के जंगल ढूँढने लगते हैं अमरबेलें जो कभी मु... more »

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आर पार की लड़ाई

रचना at नारी , NAARI - 
हर लड़ाई जब अपने पीक पर पहुचती हैं तो आमने सामने की लड़ाई होती हैं . यानी या तो आक्रमण करने वाला आप को मार देगा या आप आक्रमण करने वाले को मार देगे आक्रमण करने वाले को मारना " आत्मा रक्षा " माना जाता हैं और इस के लिये कानून कोई सजा नहीं देता हैं . इस देश मे आज उन महिला को कानून दोषी नहीं मान रहा हैं जिन्होने किसी बलात्कारी पुरुष को मारा हो . { जो इस बात को नहीं जानते हैं वो ज़रा अखबार ध्यान से पढ़े } आज देश में लड़कियों को बलात्कार करने के बाद मारने की शुरुवात हो चुकी हैं , दिल्ली रेप के बाद नॉएडा में इसी प्रकार की हुई हैं दिल्ली रेप बाद लड़कियों ने सेल्फ डिफेन्स के लिये पिस्टल के लाइसे... more »

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एक अमीर बलात्कारी --

ZEAL at ZEAL 
कसाब का कोई दोष नहीं था , गलती मरने वालों की थी, वे ताज होटल में क्यों गए , उन्हें अपने घर पर रहना चाहिए था तो बेचारा कसाब क्यों किसी को मारता देश-विदेश के 377 मूर्खों के कारण कसाब पर इतने इल्जाम लगे! --(सन्दर्भ नीचे है) दामिनी अपने बलात्कार की जिम्मेदार स्वयं है वो गिड़गिड़iयी क्यों नहीं ? --आसाराम बापू --------------------------------- इतना बड़ा मूर्ख पहले कभी नहीं देखा। इससे कोई पूछे दहेज़ के लिए मारी जाने वाली औरतों भी जिम्मेदार हैं अपनी मौत के लिए ! कन्या भ्रूण ह्त्या के लिए कोई जिम्मेदार नहीं , बल्कि भ्रूण ही जिम्मेदार है जो कोख में गिड़गिड़ाता नहीं की मुझे मत मारो। कल एक आश्रम म... more »
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मंटो की कहानी "खोल दो"

noreply@blogger.com (Smart Indian - स्मार्ट इंडियन) at रेडियो प्लेबैक इंडिया 
जहाँ तक मंटो को भारत और पाकिस्तान में मिलने वाले सम्मान का सवाल है तो पाकिस्तान का समाज तो ख़ैर एक बंद समाज था और वहाँ उनकी कहानियों पर प्रतिबंध लगा और उन पर मुक़दमे चले। लेकिन मैं समझता हूँ कि भारत में प्रेमचंद के बाद यदि किसी लेखक पर काम हुआ है तो वह मंटो है। हिंदी में भी, उर्दू में भी। ~ कमलेश्वर (प्रसिद्ध लेखक और उपन्यासकार) 'बोलती कहानियाँ'' इस स्तम्भ के अंतर्गत हम आपको सुनवा रहे हैं

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सिरपुर : जैन विहार एवं बौद्ध स्तूप sirpur

ब्लॉ.ललित शर्मा at ललितडॉटकॉम 
बौद्ध स्तूप हमारा कार्यक्रम प्रात: 9 बजे तक सिरपुर से सिंघधुरवा के लिए निकल जाने का था। लेकिन सुबह की सैर में प्रभात सिंह के साथ वेदपाठ शाला एवं स्तूप देखने के लिए चल पड़े। सिरपुर से पूर्व दिशा में रायकेरा तालाब के किनारे से स्तूप के लिए रास्ता जाता है। स्तूप तक पहुंचने के लिए धान के खेतों को पार करना पड़ता है। खेतों की मेड़ से होकर हम स्तूप तक पहुंचे। स्तूप से लगी हुई वेद पाठशाला है। जहाँ विद्यार्थियों के आवास के साथ शिक्षा का भी प्रबंध था। यहाँ के भवन में दो अंतराल हैं, उसके बाद दो कमरे भी हैं जहाँ विद्यार्थियों के साथ आचार्यगण भी निवास करते रहे होगें। वेद पाठशाला से लगा हुए मंदिर... more »
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तो मित्रॊ आज का बुलेटिन यहीं तक.. मिलते हैं कल फ़िर एक नये अंदाज़ में और एक नये मुद्दे के साथ। तब तक के लिए देव बाबा को इज़ाजत दीजिए...


गुरुवार, 3 जनवरी 2013

मेरा भारत महान.... ब्लॉग बुलेटिन

सभी ब्लागर मित्रों को देव बाबा की राम राम, नये साल में अजीब वाक्या दिखा.... लीजिए आप भी देखिए... मुंबई का लक्ष्मी नगर बना 'छोटा पाकिस्तान', 'लादेन नगर'; लोगों की शिकायत पर जांच के आदेश। इस खबर के लिए इस लिंक पर ध्यान दिया जाए.... मुंबई का लक्ष्मी नगर बना 'छोटा पाकिस्तान', 'लादेन नगर'; लोगों की शिकायत पर जांच के आदेश

देखकर हैरानी भी हुई और उससे भी ज्यादा क्रोध आया... मामला आसानी से लेने वाला नहीं है क्योंकि सरकारी तंत्र और पुलिसिया मिली भगत के बिना यह होना सम्भव नहीं.... बहरहाल भूल सुधार लेनें और कार्यवाही के वादे किये गये हैं... लेकिन मामला इतनी आसानी से ठंडा होता दीख नहीं रहा। जो भी हो... भारत महान था और रहेगा.. हिन्दुस्तानी नित नये कारनामें करते रहेंगे... 



बहरहाल पूरी खबर देखिए... और अपनी प्रतिक्रिया दीजिए... हम अपने बुलेटिन को आगे बढाते हैं.... 

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पाक ने धोनी ब्रिगेड को 85 से धो डाला

कोलकाता। भारत पाकिस्‍तान के बीच चल रही तीन मैचों की वनडे क्रिकेट सीरीज भारत आज की हार के साथ गंवा चुका है। अगला मैच केवल खानापूर्ति से अधिक कुछ नहीं होगा, क्‍यूंकि आज की जीत के साथ पाकिस्‍तान सीरीज में 2-0 से आगे निकल चुका है। ईडन गार्डन्स में पाकिस्तान के खिलाफ खेले गए दूसरे वनडे में भारत को 85 रनों से शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा। भारत की ओर से सबसे ज्यादा रन कप्तान महेंद्र सिंह धोनी (नाबाद 54) ने बनाए। पहले बल्‍लेबाजी करते हुए नासिर जमशेद (106) एवं मोहम्मद हफीज (76) की शानदार बल्लेबाजी की मदद से पाकिस्तान ने ईडन गार्डन्स में खेले जा रहे दूसरे वन-डे में भारत को 251 रनों का ... more »

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छत्तीसगढ मित्र का पुन: प्रकाशन

ब्लॉ.ललित शर्मा at ललितडॉटकॉम 
पं माधवराव सप्रे विगत दिनों एक कार्यक्रम के दौरान मुझे "छत्तीसगढ़ मित्र" पत्रिका मिली। इसका प्रकाशन माधवराव सप्रे जी 111 वर्ष पूर्व करते थे। किसी पत्रिका का 111 वर्षों के बाद पुन: प्रकाशन अनूठा अनुभव है। 1871 में जन्मे माधवराव सप्रे जी प्रख्यात कहानीकार एवं पत्रकार थे। इसके साथ ही उन्होने अनुवाद का कार्य भी किया। हिन्दी की प्रथम कहानी एक "टोकरी भर मिट्टी" के शिल्पी माधवराव सप्रे जी ने जनवरी माह सन 1900 में रायपुर से सुदूर कस्बे पेंड्रा से "छत्तीसगढ मित्र" का सम्पादन एवं प्रकाशन प्रारंभ किया। उपनिवेशवाद के विरुद्ध संघर्ष के लिए उन्होने इसे अपना अस्त्र बनाया। उन्होने पत्र-पत्रिका के ... more »


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बलात्कार मामले में कंग्रेस नेता गिरफ्तार.

Kusum Thakur at आर्यावर्त 
असम के चिरांग इलाके में एक कांग्रेस नेता की स्थानीय लोगों ने जमकर धुनाई कर दी। आरोप है कि कांग्रेस के इस नेता विक्रम सिंह ब्रह्मा ने एक महिला के साथ उसके घर में घुसकर बलात्कार किया। पीड़ित महिला ने शोर मचाया तो लोगों ने आरोपी नेता विक्रम सिंह ब्रह्मा को धर दबोचा और उसकी जमकर धुनाई की। पुलिस ने इसके बाद मौके पर पहुंचकर महिला का बयान लिया और आरोपी नेता के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया। गौरतलब है कि अगले महीने ही इलाके में पंचायत चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में कांग्रेस के लिए ये शर्मिंदगी की स्थिति बन गई है क्योंकि विक्रम सिंह ब्रह्मा बोडोलैंड टेरिटोरियल काउंसिल के कांग्रेस कमेटी का मुख्य सं... more »

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कल्पना और एक और कल्पना

रश्मि प्रभा... at परिकल्पना 
कल्पना और एक और कल्पना ........ एक और क्यारी नए बीजों की खोज रोपण - सिंचन - प्रस्फुटन समय पर आलोचनात्मक काट-छांट प्रशंसा के खाद और .............. कई नाम कई चेहरे कई आयाम ............. न कल्पना रूकती है, नहीं रुकता उसमें से उगता सूरज उम्मीदों का रथ करता जाता है परिक्रमा ......... उत्सव समाप्त हुआ, पर कल्पनाएँ समाप्त नहीं हुई हैं - तो अपनी कल्पनाओं का सूत्र देते जाइये - किसान की तरह हम उसे परिकल्पना के विस्तृत मैदान में लगायेंगे - काश्मीर से कन्याकुमारी तक के विचारों को हम आपस में बांटेंगे . तो बदाइये कदम -------
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महिलाओं के विरूद्ध अपराध

रणधीर सिंह सुमन at लो क सं घ र्ष !
*क्या कड़े कानून ही एकमात्र उपाय है * दिल्ली में सामूहिक बलात्कार की शिकार महिला की सिंगापुर में मौत (28 दिसम्बर 2012) ने गुस्से और विरोध की एक शक्तिशाली राष्ट्रव्यापी लहर को जन्म दिया है। लगभग दो सप्ताह पहले घटित इस अपराध के बाद से ही लोग सड़कों पर निकल आए थे और उन्होंने इस लोमहर्षक घटना के प्रति अपने रोष व वितृष्णा का इजहार किया। प्रदर्शनकारियों के विरूद्ध पुलिस की कार्यवाही दुर्भाग्यपूर्ण थी। सामूहिक बलात्कार की यह घटना इतनी भयावह और दिल को दहला देने वाली थी कि इसने समाज के सभी वर्गों का ध्यान आकर्षित किया और आमजनों के आक्रोश की कोई सीमा ही न रही। लोगों के निशाने पर थी सरकार और ... more »

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तीसरी पुण्यतिथि पर शत शत नमन

शिवम् मिश्रा at बुरा भला 
मेरे मामा जी स्व॰ श्री कुमुदनाथ मिश्रा जी मामा जी की गोदी मे मैं यकीन नहीं होता कि 3 साल हो गए आप को गए हुये ... *बहुत याद आते हो !!*

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एक साइकिल यात्रा- जयपुर- किशनगढ- पुष्कर- साम्भर- जयपुर

नीरज कुमार ‘जाट’ at मुसाफिर हूँ यारों -
इस यात्रा वृत्तान्त को शुरू से पढने के लिये यहां क्लिक करें। नवम्बर 2012 में की गई इस यात्रा की सम्पूर्ण जानकारी पहले लिखी जा चुकी है। यह भी बताया जा चुका है कि किस तरह अचानक कच्छ दर्शन को छोडकर राजस्थान के इस इलाके में आना हुआ। पुष्कर, साम्भर लेक, शाकुम्भरी माता, भानगढ, नीलकण्ठ महादेवऔर अजबगढ के वृत्तान्त भी लिखे जा चुके हैं। आज देखिये सम्पूर्ण साइकिल यात्रा का वृत्तान्त: 21 नवम्बर की सुबह जयपुर से निकला तो दिमाग में बूंदी था। साइकिल चलाने का अनुभव नहीं था, इसलिये मालूम भी नहीं था कि एक दिन में कितना चला लूंगा। फिर भी प्रथम-दृष्ट्या 100 किलोमीटर रोजाना का लक्ष्य रखा गया। बूंदी जाने क... more »

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लंदन में चंद्रमा की अवस्थाएं

मनोज पटेल at पढ़ते-पढ़ते 
*जार्डन के कवि अमजद नसीर की एक कविता... * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * *लंदन में चंद्रमा की अवस्थाएं : अमजद नसीर * (अनुवाद : मनोज पटेल) हम दोनों मौसम के बारे में बात कर रहे थे, वही ज़ंग खाई हुई कुंजी जिससे यहाँ लंदन में बातचीत के दरवाजे खुलते हैं. हमारी पुरानी पड़ोसन मिसेज मारिसन अब हमारी सड़क पर आखिरी अंग्रेज औरत बची हैं क्योंकि जैसे-जैसे इधर एशियाई आप्रवासियों की संख्या बढ़ती गई, वैसे-वैसे अंग्रेज यहाँ से अपना बोरिया-बिस्तर समेटते गए. वे बोलीं: "पहले लंदन का आसमान ऐसा नहीं बल्कि वैसा ही हुआ करता था जैसा कि आपके हिन्दुस्तान का आसमान होता होगा." मैंने उन्हें ... more »

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शोभना काव्य सृजन पुरस्कार प्रविष्टि संख्या - 17

संगीता तोमर Sangeeta Tomar at सादर ब्लॉगस्ते! 
*विषय: पर्यावरण समस्या* सांझ के धुधलाते सायों में, सूरज का वो रक्तिम वर्ण हो जाना वृक्षों की लावारिस लाशों से लिपटी मैंने देखा है प्रकृति का वो अश्रु बहाना, कटते वृक्ष, दूषित जल, बंजर भूमि की बेबसी मुद्धत हुई मुझे सुने चंचल झरने की स्वच्छन्द हँसी वीरान अम्बर से फुहारों का वो रूठ कर चले जाना बहुत दूर तक देखा मैंने प्यासी धरती का तड़फड़ाना रौंदे घौसलों में डरी सहमी जि़दगी इन्द्रधनुष का सदा के लिए छिप जाना मैंने देखा है नैसर्गिकता-परोपकार का स्वार्थ के हाथों मारे जाना भयावह फैलती कलँकारिमा यह विकास की निशानी है मानव ने तबाह कर डाला जिसे परोकारिणी, यह प्रकृति दीवानी है, प्रदूषण, शोर, धु... more »

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हार का ठीकरा

अपनी हार का ठीकरा दूसरों पर फोड़ते हो तुम जीत का सेहरा खुद के सर पर बांधते हो तुम क्यों सच से दूर भागते हो तुम खुद को धोखा देते हो तुम जीतना ही चाहते हो तो तो पहले अपने झूठ को जीत लो सच कहना सीख लो नहीं तो ज़िन्दगी भर हार का ठीकरा दूसरों के सर पर फोड़ते रहोगे तुम ज़िन्दगी भर हारते रहोगे तुम निराशा में जीते रहोगे तुम रोते रोते संसार से चले जाओगे तुम 876-60-28-11-2012 हार,जीत,निराशा,जीवन Dr.Rajendra Tela"Nirantar"

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ता-जिन्दगी ये दिल न कोई आरज़ू करे.....

'आप' से 'तुम' और फिर तुम से 'तू' करे हमसे वो इस तरह से कभी गुफ्तगू करे इक बार आ कर बस लगे यूँ ही सीने से ता-जिन्दगी ये दिल न कोई आरज़ू करे ये वो शय है जो के मिलती है नसीबों से मोहब्बत की कोई कभी ना जुस्तजू करे सारे ऐब-ओ-हुनर आ जाएंगे फिर नज़र कभी आईने को जो तू खुद से रु-ब-रु करे कुछ नहीं हासिल है रंजिश से मेरे दोस्त बढाये नफरतें को ये और जाया लहू करे बड़ा दुखे है दिल फिर इस प्यारे शहर का तार-तार जब कोई दिल्ली की आबरू करे उस को दिल से है "राज़" निकालना ऐसे फूलों से जुदा जैसे कोई के रंग-ओ-बू करे
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मित्रों आशा है आपको आज का बुलेटिन पसन्द आया होगा.. तो फ़िर मिलते हैं एक छोटे से ब्रेक के बाद

जय हिन्द
देव



लेखागार