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सोमवार, 9 अप्रैल 2018

राहुल सांकृत्यायन जी की 125वीं जयंती और ब्लॉग बुलेटिन

सभी हिन्दी ब्लॉगर्स को नमस्कार। 
Rahul Sankrityayan.JPG
महापण्डित राहुल सांकृत्यायन (जन्म- 9 अप्रैल, 1893; मृत्यु- 14 अप्रैल, 1963) को हिन्दी यात्रा साहित्य का जनक माना जाता है। वे एक प्रतिष्ठित बहुभाषाविद थे और 20वीं सदी के पूर्वार्द्ध में उन्होंने यात्रा वृतांत तथा विश्व-दर्शन के क्षेत्र में साहित्यिक योगदान किए। बौद्ध धर्म पर उनका शोध हिन्दी साहित्य में युगान्तरकारी माना जाता है, जिसके लिए उन्होंने तिब्बत से लेकर श्रीलंका तक भ्रमण किया था।

राहुल सांकृत्यायन जी का जन्म 9 अप्रैल, 1893 को पन्दहा ग्राम, ज़िला आजमगढ़ (उत्तर प्रदेश) में हुआ। राहुल सांकृत्यायन के पिता का नाम गोवर्धन पाण्डे और माता का नाम कुलवन्ती था। इनके चार भाई और एक बहिन थी, परन्तु बहिन का देहान्त बाल्यावस्था में ही हो गया था। भाइयों में ज्येष्ठ राहुल जी थे। पितृकुल से मिला हुआ उनका नाम 'केदारनाथ पाण्डे' था। सन् 1930 ई. में लंका में बौद्ध होने पर उनका नाम 'राहुल' पड़ा। बौद्ध होने के पूर्व राहुल जी 'दामोदर स्वामी' के नाम से भी पुकारे जाते थे। 'राहुल' नाम के आगे 'सांस्कृत्यायन' इसलिए लगा कि पितृकुल सांकृत्य गोत्रीय है।

अपनी 'जीवन यात्रा' में राहुल जी ने स्वीकार किया है कि उनका साहित्यिक जीवन सन् 1927 से प्रारम्भ होता है। वास्तविक बात तो यह है कि राहुल जी ने किशोरावस्था पार करने के बाद ही लिखना शुरू कर दिया था। जिस प्रकार उनके पाँव नहीं रुके, उसी प्रकार उनके हाथ की लेखनी भी कभी नहीं रुकी। उनकी लेखनी से विभिन्न विषयों पर प्राय: 150 से अधिक ग्रन्थ प्रणीत हुए हैं। प्रकाशित ग्रन्थों की संख्या सम्भवत: 129 है। लेखों, निबन्धों एवं वक्तृतताओं की संख्या हज़ारों में हैं।

राहुल सांकृत्यायन को अपने जीवन के अंतिम दिनों में ‘स्मृति लोप’ जैसी अवस्था से गुजरना पड़ा एवं इलाज हेतु उन्हें मास्को ले जाया गया। मार्च, 1963 में वे पुन: मास्को से दिल्ली आ गए और 14 अप्रैल, 1963 को सत्तर वर्ष की आयु में सन्न्यास से साम्यवाद तक का उनका सफर पूरा हो गया।

आज राहुल सांकृत्यायन जी की 125वीं जयंती पर सभी भारतवासी उन्हें शत शत नमन करते हैं। सादर।।


~ आज की बुलेटिन कड़ियाँ ~















आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर ... अभिनन्दन।। 

रविवार, 9 अप्रैल 2017

जन्म दिवस - राहुल सांकृत्यायन जी और ब्लॉग बुलेटिन

सभी ब्लॉगर मित्रों को मेरा सादर नमस्कार।
आज महापंडित राहुल सांकृत्यायन जी का जन्म दिवस है। राहुल जी ने हिन्दी को अपनी कई विधाओं से समृद्ध किया है। विषय की दृष्टि से देखा जाय तो उपन्यास, कहानी, नाटक, जीवनी, यात्रा - वर्णन, कोश, दर्शन, इतिहास, विज्ञान आदि कोई भी विषय उनकी लेखनी से अछूता नहीं रहा है। राहुल जी का जन्म इनके ननिहाल आजमगढ़ ( उत्तर प्रदेश ) जिले के पदहा ग्राम में 9 अप्रैल, सन 1893 ई. में  था। राहुल जी का जन्म नाम "केदार पाण्डे" था। इनके पिता का नाम श्री गोवर्धन पाण्डे तथा माँ श्रीमती कुलवंती देवी थी। चार भाईयों और एक बहन के बीच में राहुल जी सबसे बड़े थे।  राहुल जी स्वभाव से कोमल और दयावान थे। राहुल जी मूलरूप से घुमक्क्ड़ थे इन्होंने एशिया महाद्वीप के साथ - साथ भारतीय महाद्वीप के लगभग हर देश में प्रवास किया था जैसे - तिब्बत, श्रीलंका, इंग्लैंड, जापान, कोरिया, सोवियत संघ, चीन आदि। राहुल जी को भारत का तीसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान "पदमभूषण" भी प्राप्त हुआ था। राहुल जी कि कुछ महत्वपूर्ण कृतियाँ हैं :- बुद्धचर्या, घुमक्क्ड़ - शास्त्र, हिन्दी काव्य धारा, मध्य एशिया का इतिहास, मेरी लद्दाख यात्रा, तिब्ब्त में सवा वर्ष, रूस में पच्चीस मास, वोल्गा से गंगा आदि। 11 दिसंबर, सन 1961 ई. में राहुल जी की स्मृति - नाश हो गई उन्हें कुछ भी याद नहीं रहा जिसके बाद राहुल जी बीमार रहने लगे। उनकी ये दशा उनके जीवन के अन्तिम क्षणों तक रही। 14 अप्रैल, सन 1963 ई. को राहुल जी का देहान्त हो गया।


आज राहुल सांकृत्यायन जी के 124वें जन्म दिवस पर सारा देश उनकों याद करते हुए उन्हें अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता है। सादर।। 


अब चलते हैं आज की बुलेटिन की ओर  ....













आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर ... अभिनन्दन।।  

गुरुवार, 10 अप्रैल 2014

राहुल सांकृत्यायन जी का जन्म दिवस और ब्लॉग बुलेटिन

सभी चिट्ठकार मित्रों को सादर नमस्कार।।


आज महापंडित राहुल सांकृत्यायन जी का जन्म दिवस है। राहुल जी ने हिन्दी को अपनी कई विधाओं से समृद्ध किया है। विषय की दृष्टि से देखा जाय तो उपन्यास, कहानी, नाटक, जीवनी, यात्रा - वर्णन, कोश, दर्शन, इतिहास, विज्ञान आदि कोई भी विषय उनकी लेखनी से अछूता नहीं रहा है। राहुल जी का जन्म इनके ननिहाल आजमगढ़ ( उत्तर प्रदेश ) जिले के पदहा ग्राम में 9 अप्रैल, सन 1893 ई. में  था। राहुल जी का जन्म नाम "केदार पाण्डे" था। इनके पिता का नाम श्री गोवर्धन पाण्डे तथा माँ श्रीमती कुलवंती देवी थी। चार भाईयों और एक बहन के बीच में राहुल जी सबसे बड़े थे।  राहुल जी स्वभाव से कोमल और दयावान थे। राहुल जी मूलरूप से घुमक्क्ड़ थे इन्होंने एशिया महाद्वीप के साथ - साथ भारतीय महाद्वीप के लगभग हर देश में प्रवास किया था जैसे - तिब्बत, श्रीलंका, इंग्लैंड, जापान, कोरिया, सोवियत संघ, चीन आदि। राहुल जी को भारत का तीसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान "पदमभूषण" भी प्राप्त हुआ था। राहुल जी कि कुछ महत्वपूर्ण कृतियाँ हैं :- बुद्धचर्या, घुमक्क्ड़ - शास्त्र, हिन्दी काव्य धारा, मध्य एशिया का इतिहास, मेरी लद्दाख यात्रा, तिब्ब्त में सवा वर्ष, रूस में पच्चीस मास, वोल्गा से गंगा आदि। 11 दिसंबर, सन 1961 ई. में राहुल जी की स्मृति - नाश हो गई उन्हें कुछ भी याद नहीं रहा जिसके बाद राहुल जी बीमार रहने लगे। उनकी ये दशा उनके जीवन के अन्तिम क्षणों तक रही। 14 अप्रैल, सन 1963 ई. को राहुल जी का देहान्त हो गया।


आज हम सब महापंडित राहुल सांकृत्यायन जी के 121वे जन्म दिवस पर उन्हें याद करते हुए उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते है। सादर।।


अब चलते हैं आज कि बुलेटिन की ओर  ……


गोमती तट पर खड़ा बैजनाथ मंदिरक

आभार बंगलुरू

तुम बहुत याद आओगे …………

हौसलें कि कहानी - बिना हाथ पैरों के फतह कर ली 14 हजार फीट से अधिक ऊंची चोटी

ट्विटर ने बदला अपना फेसलुक, बनने लगा फेसबुक

कौआ , मोबाइल और काँव काँव

निर्धारित शब्द ...

जीवन : पानी का बुलबुला !

कभी किसी बेखुदी में ऐसा भी हो जाता है

थप्पड़ों का इलाज़

युवराज़ सिंह का गुनाह....


आज कि बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे। शुभरात्रि।।

लेखागार