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गुरुवार, 26 मई 2016

आशाओं के रथ पर दो वर्ष की यात्रा - ब्लॉग बुलेटिन

नमस्कार मित्रो,
देश के पन्द्रहवें प्रधानमंत्री के रूप में नरेन्द्र मोदी ने आज अपने कार्यकाल के दो वर्ष पूरे कर लिए हैं. दो वर्ष का समय किसी भी केन्द्रीय नेतृत्व के कार्यों पर अंतिम परिणाम देने के लिए भले ही पूर्णतः उपयुक्त न हो किन्तु उनके आकलन के लिए अवश्य ही उपयुक्त है. मोदी जी ने अपने शपथ ग्रहण वाले दिन से ही अपनी कार्यशैली से ये दर्शा दिया था कि वे समन्वय और सहयोग की भावना से सत्ता-सञ्चालन करने की मंशा रखते हैं. शपथ ग्रहण समारोह में सार्क देशों को आमंत्रित करना और पडोसी देशों की यात्राओं के द्वारा उन्होंने सकारात्मक रुख दर्शाया. इसका सुखद परिणाम ये हुआ कि आज देश की अंतर्राष्ट्रीय साख में आशातीत उछाल आया है.



वैश्विक स्तर पर देश की छवि को सुधारने में अहम् भूमिका निर्वहन करने वाले मोदी जी ने देश की स्थिति को भी सुधारने हेतु पर्याप्त एवं निरंतर कार्य किये हैं. सरकार द्वारा आम आदमी के लिए योजनाओं का सञ्चालन किया जा रहा है. जन-धन योजना, सुकन्या समृद्धि योजना, प्रधानमंत्री बीमा योजना, अटल पेंशन योजना, गैस सब्सिडी हेतु पहल योजना, उज्ज्वला योजना, स्वच्छता अभियान, मेक इन इंडिया, स्टार्टअप योजना, बेटी बचाओ बेटी पढाओ योजना आदि के द्वारा सरकार ने स्पष्ट सन्देश दिया कि उसके ऊपर भले ही उद्योगपतियों की सरकार होने का आरोप लगे किन्तु सत्यता यह नहीं है. जिस तरह से पडोसी देशों से संबंधों को विस्तार दिया गया उससे वर्षों से चले आ रहे अनेक विवादों को भी सुलझाया जा सका है. बांग्लादेश के साथ चल रहे सीमा-विवाद का सहजता से हल निकाल लिया गया. जम्मू-कश्मीर में सरकार में गठबंधन के द्वारा पाक-अधिकृत कश्मीर से और सीमा पार से आतंकी घटनाओं पर भी अंकुश लगा है. इसके अलावा महिलाओं की सुरक्षा, रेल यात्रा के सुखद अनुभव, बिजली एवं ऊर्जा के क्षेत्र में लगातार कार्य, विदेश मंत्रालय का सकारात्मक सहयोग, परिवहन व्यवस्था की सजगता आदि को सरकार की सफलता माना जा सकता है. तकनीक के क्षेत्र में, अन्तरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में, प्रक्षेपण के विषय में, रक्षा अनुसन्धान में देश आत्मनिर्भर होने के साथ-साथ सशक्त भी हुआ है. अब देश से विदेशी राकेट प्रक्षेपित किये जा रहे हैं. 



ऐसा भी नहीं है कि केंद्र सरकार इन दो वर्षों में समस्त क्षेत्रों में सफल ही रही हो. सफलता के साथ-साथ कई-कई मोर्चों पर आंशिक सफलता अथवा असफलता भी हाथ लगी है. पठानकोट हमले को इसी रूप में देखा जा सकता है. इसके अलावा काला धन वापसी को लेकर किये गए वादे पर अमल होता नहीं दिख रहा है. मंहगाई पर अंकुश लगा पाने में सरकार विफल रही है. किसानों के मुद्दे पर भी सरकार की तरफ से कोई सकारात्मक कदम उठते नहीं दिखे हैं. रुपये की कीमत सम्बन्धी, शेयर बाजार सम्बन्धी मामलों में भी वैसे परिणाम नहीं मिले हैं जैसे कि अपेक्षित थे.

दो वर्षों के कार्यों का विस्तृत लेखा-जोखा बहुत विस्तारित हो सकता है. संक्षेप में और मोटे रूप में समझना चाहिए कि इस कार्यकाल में भ्रष्टाचार होते नहीं दिखा है. मंत्री, सांसद अपने-अपने दायित्वों का निर्वहन करने में लगे हैं. देश को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने के प्रयास जारी हैं. आम आदमी में इस सरकार के प्रति विश्वास बना हुआ है. सामाजिक सौहार्द्र बढ़ाने में, समन्वय में, सहयोग में इस सरकार ने पर्याप्त कार्य किया है. लाभ-हानि के अपने-अपने समीकरण होते हैं, अपने-अपने नजरिये होते हैं. इसके बाद भी आम आदमी में देश के प्रधानमंत्री के रूप में नरेन्द्र मोदी पर विश्वास कहीं गहरे तक बना हुआ है. यही विश्वास देश को सतत उन्नति के पथ पर ले जायेगा. विश्वास रखें कि देश आगे बढ़ेगा, उन्नति करेगा और बुलेटिन से सदा की भांति आपको जानकारी और आनंद मिलेगा.

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सोमवार, 25 मई 2015

अप्रवासी की नज़र से मोदी365 :- ब्लॉग बुलेटिन

मोदी सरकार नें अपना एक वर्ष पूरा कर लिया है और ऐसे में कई चर्चाएं हो रही है कि इस सरकार नें क्या किया, क्या नहीं किया, क्या और अच्छा हो सकता था और क्या चूक हो गई। मैं एक अप्रवासी भारतीय के नज़रिए से पिछले एक वर्ष का अपना मत रख रहा हूं। 

मित्रों भारतीयों की स्मरण शक्ति बहुत कमज़ोर होती है और हम केवल सामनें का ही देखते हैं, ऐसे में पहले 2014 की स्थिति की एक झांकी देखना सबसे ज़रूरी हो जाता है। भारत की भौगोलिक स्थिति के बारे में क्या कहना, हमे विरासत में पाकिस्तान और चीन जैसे पडोसी मिले हैं जो सदैव भारत विरोधी गतिविधियों में सापेक्ष रूप से न सही लेकिन किसी न किसी रूप से लिप्त रहते ही हैं। बीते कई वर्षों में हमनें नेपाल, बांग्ला-देश, श्रीलंका जैसे देशों से भी सम्बन्ध बिगाडे हुए थे। देश उहापोह की स्थिति में था, हर रेटिंग एजेन्सी नें हमारी साख को नकारात्मक कर दिया था। मुद्रा भंडार की चिंताजनक स्थिति, कोई निवेश नहीं, उपर से आए दिन नये भ्रष्टाचार, वाकई विदेश में भारत की चिंताजनक स्थिति थी। मैं जब पिछले साल अमेरिका आया था तब लोग मजाक बनाते थे भारत की राजनीतिक स्थिति का। उस समय मेरे पास कोई शब्द न थे जिसके द्वारा मैं टाईम जैसे मैगज़ीन पर प्रधानमंत्री की "अंडर-अचीवर" की स्थिति को किसी भी प्रकार से जस्टीफ़ाई कर सकूं। दिन बदले, देश बदला, और आज ठीक एक साल बाद की स्थिति वास्तव में गौरव की गाथा है। यमन संकट में मोदी की कूटनीतिक सफ़लता का लोहा दुनियां नें माना, नेपाल भूकम्प में भारत के आपदा प्रबंधन नें दुनियां को हैरान किया। खुद नेपाल के प्रधानमंत्री मोदी के संदेश से भूकम्प की जानकारी लेते दिखे। पिछले साल, मोदी के लिए मेडिसन स्कवायर गार्डेन पार्क का सज जाना और किसी सुपर स्टार की तरह सभा को सम्बोधित करना यहां के अमरीकियों के लिए भी अचम्भे की बात थी। आज टाईम मैगज़ीन भारत के प्रधानमंत्री को अपने कवर पर फ़िर से स्थान देता है लेकिन इस बार यह उनकी यशगाथा लिए होता है, मेरे लिये भारत का इस स्थिति में आना बहुत बडे गौरव की बात है। 

इसके अलावा भी कई अन्य बातें जनता को जानना ज़रूरी है, इस पूरे आलेख के लिए यहां चटका लगाईए

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बुलेटिन के आज के अंक में इतना ही, कल फ़िर से एक नये अंक के साथ फ़िर मिलेंगे... तब तक के लिये शुभकामनाएं... 

जय हिन्द
देव



लेखागार