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हिंदी साहित्य के प्रमुख हस्ताक्षर राजेंद्र यादव का सोमवार देर रात निधन हो गया. वह 85 साल के थे...अपने लेखन में समाज के वंचित तबके और महिलाओं के अधिकारों की पैरवी करने वाले राजेंद्र यादव प्रसिद्ध कथाकार मुंशी प्रेमचंद की ओर से शुरू की गई साहित्यिक पत्रिका हंस का 1986 से संपादन कर रहे थे.
प्रेत बोलते हैं (सारा आकाश), उखड़े हुए लोग, एक इंच मुस्कान (मन्नू भंडारी के साथ), अनदेखे अनजान पुल, शह और मात, मंत्रा विद्ध और कुल्टा उनके प्रमुख उपन्यास हैं.इसके अलावा उनके कई कहानी संग्रह भी प्रकाशित हुए हैं. इनमें देवताओं की मृत्यु, खेल-खिलौने, जहाँ लक्ष्मी कैद है, छोटे-छोटे ताजमहल, किनारे से किनारे तक और वहाँ पहुँचने की दौड़ प्रमुख हैं. इसके अलावा उन्होंने निबंध और समीक्षाएं भी लिखीं.
राजेंद्र यादव का जीवन विवादों से भरा रहा. मगर उन्होंने कभी इससे हार नहीं मानी.
आज की पीढ़ी उन्हें 'हंस' के संपादक के रूप में याद करेगी. 'हंस' का संपादन उन्होंने उस समय शुरू किया, जब उनकी रचनात्मकता का सबसे अनुर्वर समय था. इसलिए रचनाकार राजेंद्र यादव को वह पीढ़ी नहीं जान पाई, जो 'हंस' पढ़कर बड़ी हुई. लेकिन इसके पहले की पीढ़ी उन्हें नई कहानी की त्रयी के सदस्य के रूप में याद करेगी.
आगरा विश्वविद्यालय से ही 1951 में हिंदी में एमए करने वाले राजेंद्र यादव के मशहूर उपन्यास 'सारा आकाश' पर बासु चटर्जी ने फिल्म भी बनाई थी।
आज का यह विशेष बुलेटिन स्वर्गीय राजेंद्र यादव को श्रद्धा सुमन अर्पित करता है =
मैं न तो कोई लेखक, कहानीकार या कवि था न ही कोई जाना माना प्रकाशक। फिर भी हंस के कार्यालय में कभी जाना हुआ तो पूरा समय देते थे। नए प्रकाशक की चुनौतियों के बारे में बताया करते थे। क्या नया छाप रहा हूँ, इस बारे में पूछते थे। हंस में विज्ञापन देने का कोई रिस्पांस मिलता है कि नहीं यह भी पूछते थे। जब हमारे प्रकाशन ज्योतिपर्व से महत्वाकांक्षी श्रृंख्ला का लोकार्पण होना था तो बहुत संकोच से गया था उनके पास लेकिन उन्होंने आने के लिए सहमति देने में मिनट भी नहीं लगाया। अपनी कुछ कहानियां देने का वादा किया था लेकिन उस से पहले चले गए। विनम्र श्रद्धांजलि !
राजेन्द्र यादव को मैं कभी नहीं मिला लेकिन फिर भी उन्हें व्यक्ति के रूप में मैंने कभी पसंद नहीं किय पर हां , उनके संपादकीय मैंने कई साल पढ़े. पढ़े इसलिए कि उनमें बहुत कुछ नया होता था ना कि सुनी-सुनाई बातें. श्रद्धांजलि.
अब कुछ लिंक्स =