डी.एन.ए. अखबार में एगो बड़ा बढ़िया बात पढने को मिला. लेख था सुमित चक्रबोर्ती का. कमाल का बात लिखे हैं, सदी के “महानतम” बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर के सतक का सतक के बारे में.
“अगर आपने सचिन के सौवें शतक में कोइ निवेश नहीं किया है – भावनात्मक, आर्थिक या किसी भी तरह का – तो आपको बहुत मजेदार ड्रामा देखने को मिलेगा जो इस घटना के चारों ओर गढा गया है. हर खेल के पहले एक ‘हाइप’ खडा करना और हर असफलता के बाद उनकी चाटुकारिता करना, जैसा कि हमारे कमेंटेटर उनकी हर असफलता के कारणों की व्याख्या करने में बिछे जाते हैं.”
अब अगर आप भी एही अफ़सोस में मुरझाए जा रहे हैं कि उनका सेंचुरी नहीं बन रहा है, त हम आपको एगो हाफ-सेंचुरी पर मुस्कुराने का मौक़ा देने जा रहे हैं. अब ई मत पूछियेगा कि कौन हाफ-सेंचुरी, सचिन के सेंचुरी से बढकर खुसी देने वाला हो गया. त ध्यान से सुन लीजिए कि सचिन का सेंचुरी के मुकाबले में आपके सामने हाजिर है सलिल का हाफ-सेंचुरी... आपका ई प्यारा बुलेटिन का पचासवां पोस्ट!!
१३ नवंबर २०११ दिन रविवार को सुरू हुआ ई बुलेटिन आज ८ जनवरी २०१२ को केवल ५६ बौल में (माने ५७ दिन में) ५० का आंकड़ा छूने को तैयार बैठा है. अऊर अभी त हम नौट-आउट हैं. आप लोग अइसहीं स्टेडियम में बैठकर बुलेटिन के हर खिलाड़ी का जोस बढाते रहिएगा त ई बुलेटिन का मालूम केतना सेंचुरी बनाते हुए आगे बढता जाएगा.
त आप लोग खेल का आनंद लीजिए हम तनी दू-चार-दस-पन्द्रह कैच पकडकर आते हैं.
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एक
दोडॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’ जी हर माँ-बाप का उम्मीद बयान कर रहे हैं, जो ऊ लोग अपना बाल-बच्चा से लगाता है.
महेंद्र वर्मा जी भी गहरा सीख दे रहे हैं अपना गजल के माध्यम सेतीन
चारमांसाहार और शाकाहार के बीच भेद बता रहे हैं निरामिष के टीम सदस्य
आइये चलें कल्पना एयरलाइंस के उड़ान पर... पर में दिल्ली, पल में कर्नाटक...
हमारे मुख्य वैमानिक हैं श्रीमती मृदुला प्रधान जी
पाँच
प्रसासनिक सेवा और कलम का जादूगरी – अजीब कोम्बिनेशन है...
अश्वनी शर्मा जी को पढ़ने का अनोखा आनंद है, कविता हो या गज़ल
छः
साहित्य में प्रगतिवाद तक का सफर तय कर लिया है मनोज भारती जी ने..
यात्रा अभी भी जारी है
सात
मीडिया की खबर लेने वाले मीडिया-क्रूक्स
आज खबर ले रहे हैं सचिन, सेंचुरी और सनसनीखेज बयानों का
आठ
पंडित जी का सलाह मानिए – चुनाव के दौरान ध्यान देने लायक सलाह "क्वचिदन्यतोsपि" पर
डॉ. अरविन्द मिश्र का चुनाव तैयारी
नौ
बनारस से ही देवेन्द्र पांडे जी आपको ले चलेंगे बनारस के घाट के सैर पर
दस
गांधी जी जीवन का एक पन्ना ई भी है...
बच्चा लोग के साथ तैराकी का से जुदा एगो प्रेरक प्रसंग.. मनोजकुमार जी के सौजन्य से
ग्यारह
बेतरतीब याद, रूमानियत और एक खाली जगह..
देखिये कि जो खाली जगह अली सैयद साहब छोड़ दिए हैं
उसको भरने का साहस है कि नहीं आप में
अऊर अंत में
ज्ञानदत्त पांडे जी का कथरी के साथ याद कीजिये
कि कैसे मर जाता है हमारा पारंपरिक सिल्प और कैसे मशीनी हो जाता है आदमी का हुनर
कि कैसे मर जाता है हमारा पारंपरिक सिल्प और कैसे मशीनी हो जाता है आदमी का हुनर
आप आनंद लीजिए ई पचासवां बुलेटिन का अऊर हमको दीजिए इजाजत!! मिलते हैं एगो छोटा सा ‘एक ब्लांग’ वाला ब्रेक के बाद!!



