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मंगलवार, 24 दिसंबर 2019

2019 का वार्षिक अवलोकन  (तेइसवां)




अनीता निहलानी का ब्लॉग




वर्तमान का यह पल


घट रहा है जीवन अनंत-अनंत रूपों में
 वर्तमान के इस छोटे से पल में
सूरज चमक रहा है इस क्षण भी
अपने पूरे वैभव के साथ आकाश में
गा रहे हैं पंछी.. जन्म ले रहा है कहीं, कोई नया शिशु
फूट रहे हैं अंकुर हजार बीजों में
गुजर रही है कोई रेलगाड़ी किसी सुदूर गांव से
निहार रही हैं आँखें क्षितिज को किसी किशोरी की जिसकी खिड़की से
वर्तमान का यह पल नए तारों के सृजन का साक्षी है
पृथ्वी घूम रही है तीव्र गति से सूर्य की परिक्रमा करती हुई
यह नन्हा क्षण समेटे है वह सब कुछ
जो घट सकता है कहीं भी, किसी भी काल खंड में
सताया  जा रहा है कोई बच्चा
और  दुलराया भी जा रहा हो
कोई वृक्ष उठाकर कन्धों पर ले जा रहे होंगे कुछ लोग
कहीं तोड़ रहे होंगे फल कुछ शरारती बच्चे
इसी क्षण में रात भी है गहरी नींद भी
स्वप्न भी, सुबह भी है भोर भी
जो जीना चाहे जीवन को उसकी गहराई में
जग जाए वह वर्तमान के इस पल में
जिसमें सेंध लगा लेता है अतीत का पछतावा
भविष्य की आकांक्षा, कोई स्वप्न या कोई चाह उर की
हर बार चूक जाता है जीवन जिए जाने से
हर दर्द जगाने आता है
कि टूट जाये नींद और जागे मन वर्तमान के इस क्षण में...

4 टिप्पणियाँ:

Kavita Rawat ने कहा…

बहुत अच्छी वार्षिक अवलोकन प्रस्तुति

Sweta sinha ने कहा…

अनिता जी कि रचनाओं में जीवन दर्शन का सार निहित होता है।बहुत सुंदर लिखती है।
ये रचना भी बेहद शानदार एवं भावपूर्ण है।
सादर।

संजय भास्‍कर ने कहा…

बेहद शानदार

रचना दीक्षित ने कहा…

वाह ये तो वाकई शानदार है।बहुत देर से पहुंची पर पहुंच ही गयी

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