Subscribe:

Ads 468x60px

कुल पेज दृश्य

लतीफा लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
लतीफा लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

सोमवार, 30 दिसंबर 2013

सफ़ेद भेड़ - काली भेड़ - ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |

एक मासूम हिमालय की तराई में भेड़े चरा रहा था, तभी वहा से एक गुज़रते हुए पर्यटक ने लड़के से पूछा, "ये भेड़े कितना दूध देती है ?"

 लड़का: कौनसी, सफ़ेद वाली या काली वाली ?

 पर्यटक: सफ़ेद वाली।

 लड़का: 3 लीटर।

 पर्यटक: और काली वाली ?

 लड़का: ये भी 3 लीटर देती है।

 पर्यटक: ये ऊन कितनी देती है।

 लड़का: कौनसी सफ़ेद वाली या काली वाली ?

 पर्यटक: सफ़ेद वाली।

 लड़का: 5 किलो।

 पर्यटक: और काली वाली ?

 लड़का: वो भी 5 किलो।

 पर्यटक: अबे साले जब ये दूध बराबर देती है, ऊन बराबर देती है तो फिर ये काली भेड़ ,सफ़ेद भेड़ क्या लगा रखी है?

 लड़का: जी वो बात ये है की ये सफ़ेद भेड़ मेरे पिताजी की है।

 पर्यटक: और ये काली भेड़ ?

 लड़का: ये भी मेरे पिताजी की ही है।

सादर  आपका 
==============================

"टोपी हिन्दुस्तान की" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

अभी इसके सर कभी उसके सर 

नांगलोई में काव्य गोष्ठी और एडवेंचर मेट्रो ट्रेल -- एक सफ़र की दास्ताँ !

सुनाइए 

विदेश का खोखला आकर्षण

अक्सर आकर्षित करता है 

.....और माँ माँ ही होती है -एक लघु कथा

सत्य वचन 

किताबों की दुनिया - 90

बड़ी अनोखी 

आग से रिश्ता ...

गर्मी भरा 

कितने ही रंग...!

मनभावन

पान की दुकान पर केजरीवाल का असर 

जोशी जी की खास रिपोर्ट 

मिशन मून

पूरा हो सून 

चाहिये था क्या हमें, ये सोचते ही रह गये

कल्पना के पृष्ठ शब्द खोजते ही रह गये

बस उनकी आँखें ही लॉगिन करती हैं

है अपने दिल का अकाउंट बहुत महफूज

==============================
अब आज्ञा दीजिये ...
 
जय हिन्द !!!

सोमवार, 12 अगस्त 2013

याई रे, याई रे, ब्लॉग बुलेटिन आई रे ...

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम !
पप्पू: मैम, May I Go to Washroom (क्या मैं शौचालय जा सकता हूँ?)।

मैडम गुस्से में, "हिंदी नहीं आती? हिंदी के पीरियड में जो भी बात करनी है हिंदी में किया करो।

पप्पू: बहनजी, पेशाब कर आएं?

मैडम: ठीक है जाओ।

दूसरे दिन अंग्रेजी की क्लास में।

पप्पू: बहनजी, पेशाब कर आएं?

मैडम गुस्से में, "अंग्रेजी में नहीं बोल सकते, जब अंग्रेजी का पीरियड हो तो हर बात अंग्रेजी में ही पूछोगे...समझे?

पप्पू: ओके मैम, May I Go to Washroom (क्या मैं शौचालय जा सकता हूँ?)?

मैडम: ओके।

पप्पू ने सीख ले ली कि अब वो किसी मैडम को शिकायत का मौक़ा नहीं देगा और तीसरे दिन संगीत की क्लास में सुसु आने पर शिक्षिका से बोला।

पप्पू गाना गाते हुए ,"याई रे, याई रे, जोर से सुसू आई रे।"

(इस पप्पू की हरकतों का किसी और पप्पू की हरकतों से मेल खाना संयोग मात्र है ... इस के पीछे कोई राजनीतिक कारण नहीं है !)
सादर आपका 
शिवम मिश्रा  
======================== 

क्यों बेच रही हो ? कबाड़ी को

बेटी को जन्म दिया तो मै तुम्हे तेज़ाब से नहला दूंगा ।

न होने की भाषा

माँ (हायकु )

वीर सपूत

धैर्य की परीक्षा - एक प्रेरक कथा

लोकतंत्र में मतदाता की जबावदेही

नेता उवाच !!!

ऑनलाइन आईडी चोरों से सावधान!

टोपी रे टोपी तेरा रंग कैसा ....

ट्विटर कहानियाँ

========================
अब आज्ञा दीजिये ...
जय हिन्द !!!

गुरुवार, 16 मई 2013

क्या आईपीएल, क्या बॉस का पारा, खेल है फ़िक्स्ड सारा - ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय ब्लॉगर मित्रों ,
प्रणाम !

लीजिये एक लतीफा सुनिए ... मेरा मतलब है पढ़िये ...  आज फेसबुक पर दर्शन बवेजा जी की प्रोफ़ाइल पर पढ़ा तो यहाँ आप सब को भी पढ़वाने ले आया !

बॉस : अगर मेरे हवाई जहाज़ में 50 ईंटे हो और मैं एक नीचे फ़ेंक दूं
तो कितनी बचेंगी....?
एम्पलोयी : 49
बॉस : तीन वाक्य में बताओ कि हाथी को फ्रिज़ में कैसे रखा जाये....?
एम्पलोयी : (1) फ्रिज़ खोलिए,
(2 ) हाथी को उसमेँ रखिये और
(3) फ्रिज़ बंद कर दीजिये....!
बॉस : अब 4 वाक्य में बताओ कि हिरन को फ्रिज़ में कैसे रखा जाये....??
एम्पलोयी : (1) फ्रिज़ खोलिए
(2 ) हाथी को बाहर निकालिए
(3 ) हिरन को अन्दर रखिये
4) फ्रिज़ बंद कर दीजिये....!
बॉस : आज जंगल में शेर काजन्मदिन मनाया जा रहा है, वहां एक को छोड़ कर
सबजानवर मौजूद हैँ,
बताओ कौन गैरमौजूद है....?
एम्पलोयी : हिरन, क्योंकि वो फ्रिज़ में बंद है....!
बॉस : बताओ, एक बूढ़ी औरत मगरमच्छोँ से भरे तालाबको कैसे पार कर सकती है....?
एम्पलोयी : बड़ी आसानी से, क्योंकि सारे मगरमच्छ शेर की जन्मदिनकी पार्टी
में गए हैं....!
बॉस : अच्छा आखिरी सवाल, वो बूढ़ी औरत
मर कैसे गयी....?
एम्पलोयी : हम्म्म्मम....लगता है सर कि वो तालाब में फिसल गयी अथवा गिर
गयी होगी....:/:|
बॉस : अबे गधे, उसके सिर पर ईंट लगी थी जो मैंने एरोप्लेन से फेंकी थी,
यही प्रॉबलम है कि तुम अपने काम में जरा भी ध्यान नहीं लगाते हो और
तुम्हारा दिमाग कही और रहता है,
You should always be focused on your job....! Understand....??
मॉरल ..............................................................................

: जितना मर्ज़ी Prapare कर लो अगर बॉस ने ठान ली है तो वो तुम्हारा
बैँड बजा के रहेगा....

===============

तो साहब कैसा लगा आप सब को यह लतीफा ??? 

सादर आपका 


===============

रिश्तों के अवशेष

कभी कभी या शायद बहुधा रिश्ते जलाए प्रेम पत्रों के अवशेष से रह जाते हैं काले सलेटी इन अवशेषों के शब्द अब भी खुदे रह जाते हैं जस के तस कुछ वैसे ही जैसे स्मृति में बसी रहती हैं वे पुरानी बातें, मीठी, खारी, खट्टी, कड़वी बातें और अवशेषों के इन शब्दों में से पढ़ पाते हैं हम वे ही शब्द जो वे हमें पढ़वाना, समझाना, याद करवाना चाहें केवल वे अंश जो सतह पर हों, हम उन्हें उलट पलट कर आगे पीछे का नहीं पढ़ सकते चाहकर भी उन्हें चूम, दुलार, सहेज नहीं सकते ऐसा प्रयास भर उन्हें भुरभुरा कर कुछ चुटकी भर राख बना देगा। जिसमें उतने सीमित शब्द, रिश्तों के वे महकते क्षण न पढ़, न जी सकेंगे हम सो लालची से हम इन जले अव... more »

ब्याज पर ज़िंदगी

*ना जाने किस अज़ाब की सज़ा पा रही हूँ *** *के इश्क़ की हर बाजियों को हारती जा रही हूँ *** *तुम्हारा फ़न मेरा दिल तोड़ने से हर बार निखरा*** *अपनी हस्ती को तुम्हारे आगे मिटाती जा रही हूँ *** ** *ज़िंदगी कब से गिरवी पड़ी है तुम्हारे पास *** *अब ब्याज पर ज़िंदगी जीती जा रही हूँ *** *आँखों में अश्क तुम्हारे दी हुई सौगातें हैं *** *इन सौगातों में खुद को डुबोती जा रही हूँ *** *मेरे तुम्हारे बीच रिश्ता लगभग वही है *** *पर पहले प्यार की तड़फ खोती जा रही हूँ *** *सोनिया *

artical on Self-improvement in hindi

drneeraj baba at Achhibatein
जरा अपने को ही सुधार लें --- दोस्तों, जब से दुनिया बनी है तब से हर इंसान सिर्फ और सिर्फ दूसरे को ही सुधारने ,उसे अपने मन मुताबिक़ ढालने में ही लगा है ! लेकिन विडम्बना और हकीकत है कि आज तक कोई किसी को सुधार या बदल नहीं पाया है ! माता-पिता बच्चों को बदलना (सुधारना ) चाहते हैं ! पति पत्नी को ,पत्नी पति को , सास बहु को ,बहु सास को , गुरु शिष्य को ,boss employee को ,,नेता अनुयायी को ,सब एक दुसरे को अपने मुताबिक ढालना चाहते हैं ! लेकिन सारी जिंदगी की इस "दूसरे को बदलो अभियान" के बाबजूद कोई दूसरे के मुताबिक़ नहीं बदलता ! बदलता वो ही है ,जो खुद अपने अन्दर से (स्वप्रेरणा से ) बदलना च... more »

व्यंग्यः जीना है तो रिश्ते बना मेरे यार

अतिथि तुम कब जाओगे के युग में मेरे एक 50 की उम्र में ही सठियाए से लगने वाले प्राइवेट मित्र पिछले दिनों मुझे रिश्ते-नातों का महत्व समझाने बैठ गए। उनको टालने की गरज़ से मैंने पत्नी के द्वारा लगातार ड्राइंग रूम के पर्दे की ओट से ऑंखें दिखाए जाने के बावजू़द उनके लिए दो बार चाय की मांग कर डाली। मेरी पत्नी मेरी इस निर्लज्जता और निडरता का जवाब अवश्य देती, परन्तु वह इतनी भी बेवकूफ नहीं कि किसी बाहरी व्यक्ति को अपनी असलियत की भनक यूं ही लग जाने दे। मेरी किस्मत भी इतनी भली थी कि मेरे वह मित्र प्याले में बची-खुची चाय को पारिवारिक चीटियों व मक्खियों द्वारा कई-कई बार चूस लिए जाने के बाद... more »

खंगाल रही हूँ

Neelima at Rhythm
खंगाल रही हूँ पुराने पन्ने अपनी लिखी डायरी के पुराने पन्ने जिस पर कई बार कडवाहट कई बार झुंझलाहट उड़ेली थी मैंने अक्षरक्ष जब तब कुण्ठित / अवसादित हो कर रंगा था मैंने अकेलेपन में फाड़ डालना हैं अब उन पन्नो को बिना दुबारा -तिबारा पढ़े भूल जाना हैं उन उदास पलो को सुनो न नयी डायरी लेनी हैं जिन्दगी को नए सिरे से लिखना हैं मुझे प्रेम की स्याही से ................नीलिमा शर्मा thank you so much

कार्टून कुछ बोलता है- अनोखा परिचय !

पी.सी.गोदियाल "परचेत" at अंधड़ !

कार्टून :- छापा पड़ा

मकबरे के दोनों बुत एक दूसरे का चेहरा देखते सोये थे

Puja Upadhyay at लहरें
वो बहुत जोर से इस बात पर चौंका था कि मैंने कभी कोठा नहीं देखा था...किसी तरह का चकला, कोई बाईजी का घर नहीं. मैं इस बात पर परेशान हुयी थी कि उसने क्यों सोचा कि मैंने कोठा देखा होगा...शायद उसे मेरी उत्सुकता और मेरे पागलपन से कुछ ज्यादा ही उम्मीद थी. मुझे याद है मैंने हँसते हुए कहा था...कोठे में मेरे लिए क्या होगा...मैं तो लड़की हूँ. इस बात पर हद गुस्सा हुआ था मुझपर...बेवक़ूफ़ लड़की...मैं तुम्हारे लड़की होने की नहीं, लेखक होने की बात कर रहा हूँ...तुम लिखती हो फिर भी कभी तुमने देखने की जरूरत नहीं समझी...देश, विदेश इतनी जगह घूमी हो, कभी नहीं...चलो इस बार मेरे शहर आना, मैं तुम्हें ले जाऊँ... more »

हिंदी वालों के लिए खास फ़ाइल संपीडन औजार यानी ज़िप टूल - हिंदीज़िप

[image: image] बाजार में यूँ तो दर्जनों ज़िप टूल हैं. फिर मैं क्यों हिंदीज़िप का इस्तेमाल करूं? तो, सबसे पहली बात तो यह कि इसे खास हिंदी वालों के लिए बनाया गया है और इसका इंटरफ़ेस हिंदी में ही है. साथ ही यह तेज-तर्रार, नो-नॉनसेंस किस्म का ज़िप टूल है. और यह पूरी तरह निःशुल्क है. इसे खासतौर पर हिंदी भाषा-भाषी उपयोगकर्ताओं की समस्याओं को ध्यान में रखकर हिंदी भाषा के जाने माने कंप्यूटिंग विशेषज्ञ बालेंदु दाधीच ने तैयार किया है. *हिंदीज़िप की कुछ और विशेषताएँ -* हिंदीज़िप एक सरल, सुगम किंतु शक्तिशाली फ़ाइल कम्प्रेशन सॉफ्टवेयर है। इसकी खास विशेषताएँ हैं- - यह एक फ़्रीवेयर (निःशुल्क स... more

make your internet speed 10x faster इन्‍टरनेट की स्‍पीड को 10 गुना तक बढाइये

Abhimanyu Bhardwaj at MY BIG GUIDE
अगर आप अपने धीमे Internet connection से परेशान है, और कोई भी web site खोलने में घण्‍टों लग जाते हैं, तो यह software आपके बहुत काम आ सकता है, बस इस software को कम्‍प्‍यूटर में इंस्टॉल करें, और यह आपके धीमे Internet connection speed को 10 गुना तक बढा सकता है, यह software 100% CLEAN and SAFE है। ** *अब जरा इसके फीचर्स पर नजर डालिये - * ** ** - *यह Internet connection speed को कई गुना तक बढा देता है। * - *web site browsing तेजी से होती है।* - *download की स्‍पीड बढ जाती है। * - *online गेम आसानी से चलते हैं। * - * musicऔर movies की streaming आसानी से हो जाती है। * ... more »

परनानी - परनाती

Archana at अपना घर
*यहाँ आपको मिलेंगी सिर्फ़ अपनों की तस्वीरें जिन्हें आप सँजोना चाहते हैं यादों में.... ऐसी पारिवारिक तस्वीरें जो आपको अपनों के और करीब लाएगी हमेशा...आप भी भेज सकते हैं आपके अपने बेटे/ बेटी /नाती/पोते के साथ आपकी ** तस्वीर **मेरे मेल आई डी- archanachaoji@gmail.com पर साथ ही आपके ब्लॉग की लिंक ......बस शर्त ये है कि स्नेह झलकता हो **तस्वीर में...* *आज की तस्वीर में- खुशियाँ आँचल में समेटीं **है **दादी नें * * **- दादी** **श्रीमती **आशालता सक्सेना जी हैं - **अपनी परनाती आहना के साथ...* ***परनाती बोले तो= अपनी बेटी के बेटे/बेटी के बेटा/ बेटी ...**जैसे **यहाँ* *आशालता जी अपनी बेटीस्मि... more »
 ===============
अब आज्ञा दीजिये ...

जय हिन्द !!!

शुक्रवार, 5 अप्रैल 2013

क्यों 'ठीक है' न !? - ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय ब्लॉगर मित्रों ,
प्रणाम !

एक बार में एक पाकिस्तानी,एक बंगलादेशी और एक भारतीय सरदार बियर पी रहे थे...

पाकिस्तानी अपनी बडबोलेपन की आदत से मजबूर बियर का ग्लास ख़त्म होने के बाद ग्लास को हवा में उछालता है और अपनी बन्दुक निकाल कर हवा में उसके टुकड़े-टुकड़े कर देता है...और बन्दुक की नली पर बड़ा इतराते हुए फूंक मारते हुए कहता है
"हमारे पाकिस्तान में कांच के इतने ग्लास बनते हैं कि हमें एक ही ग्लास को दुबारा इस्तेमाल करने की जरुरत नहीं"

बंगलादेशी ठहरा नकलची सो उसने भी जल्दी जल्दी अपनी बियर ख़त्म की और अपना ग्लास हवा में उछाला और वो भी अपनी बन्दुक निकाल कर हवा में उसके टुकड़े-टुकड़े कर देता है....और भद्दी सी हसी हसते हुए कहता है...
"हमारे बांग्लादेश में भी इतने ग्लास बनते हैं कि हमें भी दुबारा एक ही ग्लास को इस्तेमाल करने की जरुरत नहीं है"

हमारे सरदारजी शांति से अपनी बियर का मज़ा ले रहे थे आराम से एक एक घूँट पिए जा रहे थे...पाकिस्तानी और बंगलादेशी खूब इतरा रहे थे कि हमने भारतीय की बोलती बंद कर दी है
तभी सरदारजी की बियर ख़त्म होती है,सरदारजी अपना ग्लास टेबल पर रखते हैं और आवाज़ आती है धायं-धायं,सरदारजी अपनी बन्दुक निकालकर दोनों को मार देते हैं ... बाकी लोग घबरा जाते है तब सरदार जी समझते है कि

"ओये यार बात ये है की हमारे देश में इतने पाकिस्तानी और बंगलादेशी भरे पड़े हैं कि हमें हर बार एक ही पाकिस्तानी या बंगलादेशी के साथ बैठकर पीने की जरुरत ही नहीं है"

क्यों 'ठीक है' न !?

सादर आपका 
शिवम मिश्रा 
===================================
जल्दी वोट कीजिये

अरविन्द केजरीवाल के समर्थक नदारद !!

खाना खाने गए होंगे 

:)

तुम इतना जो :) रहे हो ... 

छंदचित्र...एवं...शेरगा

वाह ... क्या बात है 

घर-जमाई

रॉबर्ट वाडेरा 

सुहाने सपने

किस के 

अनुभुति की सुकृति ....!!

ब्लॉग की तीसरी वर्षगाँठ पर बधाइयाँ

घूरने वालों ने दी कुर्बानी ( एक व्यंग्य टिप्पणी)

इतिहास मे दर्ज़ हुई या नहीं 

माहिया

पहली कोशिश 

विंटर सिंड्रोम --या अतीत के धागे ---

आप बताएं 

कहना मुश्किल था कि बोतल में शराब थी या ---

दवा होगी ... 

Inner Beauty 

सब से जरूरी 

ये मेरा प्रेम पत्र पढ़ कर ...:)

तुम नाराज़ न होना 

साहित्यकार

बड़ा या छोटा 

माल असबाब की सुरक्षा - हार की जीत

हार या जीत 

 ===================================
अब आज्ञा दीजिये ...

जय हिन्द !!!

बुधवार, 6 फ़रवरी 2013

जानिए मच्छर मारने का सबसे आसान तरीका - ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय ब्लॉगर मित्रों ,
प्रणाम !

आज मैं आपको मच्छर मारने का सबसे आसान तरीका बताने वाला हूँ, बहुत ध्यान से पढ़ें :-

चीनी और लाल मिर्च का मिश्रण बना कर मच्छर को दें।

 मिश्रण खाते ही वो पानी की तलाश में निकलेगा।

 जैसे ही वो पानी के टैंक के पास जाए उसे धक्का दे दो।

 वो भीग जाएगा और खुद को सुखाने के लिए आग के पास जाएगा।

 उसी वक्त आप आग में बम फ़ेंक दें।

 वो बुरी तरह ज़ख़्मी हो के अस्पताल में दाखिल हो जाएगा।

 आप वहां जाकर उसका आक्सीजन मास्क उतार दें।

 मच्छर मर जाएगा...

अरे नहीं नहीं ... धन्यवाद की कोई ज़रूरत नहीं है, मुझे आप की सहायता करके ख़ुशी हुई।

सादर आपका

शिवम मिश्रा
==========================

भोर तो आ के रहेगी ---

भोर तो आकर रहेगी -------------------------- कितना भी हो घना अँधेरा सुबह कुहासे की चादर फाड़ सूरज धीमी धीमी मुस्कान बिखेरेगा ही ------------- भोर तो आकर रहेगा मुझे मेरा मन कभी दुलार से तो कभी डांट के समझाता है पता है वो सच कह रहा है नहीं निकल पा रही हूँ मै उन लछमण रेखाओं के बाहर जो मैने खुद ही खींच ली थी और खुद को तुम्हारे साथ ही बंद कर लिया था जिसमें क्या बताऊँ ? तुम्हें भी बताना होगा क्या तुमको समझने में मै खुद को भूल गई थी आशा और निराशा धूप छाँव सी आती जाती है पर मुझे पता है वक्त लगेगा थोड़ा लेकिन मैं निकल आऊँगी बाहर अपनी ही खींची हुई परिधि से तुम वापस आओगे जरुर पता है मुझे पर तब तक कहीं... more »

सिनेमा और साहित्य की संगत

विमलेन्दु at उत्तम पुरुष
*( भारतीय सिनेमा के सौ बरस पूरे होने पर )* आज भारतीय सिनेमा का शताब्दी वर्ष पूरा हो गया. जाते-जाते यह एक गंभीर प्रश्न को पुनर्जीवित कर गया कि, क्या भारतीय सिनेमा धर्म-निरपेक्ष नहीं रहा ? इसी प्रश्न के दूसरे प्रति-प्रश्न भी हैं कि, क्या भारतीय दर्शक धर्म-निरपेक्ष नहीं रहा ? या फिर यह कि किसी राजनीतिक-आर्थिक महत्वाकांक्षा के चलते, ऊपर के दोनों प्रश्न, अफवाह के शिल्प में उड़ाये जाते हैं ? ताज़ा विवाद ‘विस्वरूपम् ‘ को लेकर चल रहा है. कहा जा रहा है कि इसमें कुछ धार्मिक टिप्पणियाँ हैं. मुझे समझ में नहीं आता कि जब भी कोई कला-माध्यम किसी धार्मिक विषय पर टिप्पणी करता है तो वो इतनी more »

विवादित होते पद्म पुरस्कार

गगन शर्मा, कुछ अलग सा at कुछ अलग सा
*अब समय आ गया है कि इन पुरस्कारों की हालत भी टी.वी. पर हर पखवाडे दिखने वाले पुरस्कारों जैसी हो जाए, इसके चयन का तरीका तुरंत बदल देना चाहिए और यदि तुष्टीकरण जैसी मनोदशा के कारण ऐसा संभव ना हो तो इस प्रथा को खत्म ही कर देना श्रेयस्कर होगा।* पद्म पुरस्कार। देश का सर्वाधिक सम्मानित सम्मान।अपने को इसके लायक बनाने के लिए अथक परिश्रम किया जाता रहा है। जिसे पा कर वर्षों से अपने-अपने फन में सिद्धहस्त लोग गौरवान्वित होते रहे हैं। कुछ ऎसी भी हस्तियाँ होती हैं जिनके पास पहुँच कर ये सम्मान भी कृतार्थ होते हैं, पर इसके साथ ही अब ऎसी झोली में भी ये जा पड़ते हैं जहां इनका   more »

कुपोषित भावनाओ को चवनप्रास खिलाये ! - - - - - mangopeople

anshumala at mangopeople
*नोट -*--- कमजोर भावनाओ वाले लोग इस लेख को न पढ़े आप की भावनाए आहत हो सकती है । टीवी पर आज कल एक सरकारी विज्ञापन आ रहा है , पापा पापा स्कुल के बच्चे मुझे बुद्धू कहते है , क्योकि मुझे जल्दी बाते समझ नहीं आती है । क्या आप का बच्चा बातो को देर से समझता है पढाई में कमजोर है , बार बार बीमार पड़ता है तो जरा उसकी सेहत की जाँच कराये आप का बच्चा कुपोषण का शिकार हो सकता है , उसके खानपान पर ध्यान दे और उसे सेहतमंद बनाये ताकि वो बार बार बीमार न पड़े । यही विज्ञापन जरा कुछ बड़ो पर लागु करे तो कैसे होगा , क्या आप की भावनाए बार बार आहत होती है किसी फिल्म , पेंटिंग, किताब, साहित्य को देख, लड़कियों क... more »

वज़न,माइग्रेन,उच्च-रक्तचाप और डायरिया के लक्षणों पर ग़ौर करें

Kumar Radharaman at स्वास्थ्य 
अक्सर यह देखा जाता है कि किसी मरीज की बीमारी, मुख्य समस्या न होकर किसी अन्य बीमारी का लक्षण मात्र होती है। इसे ‘शेडो डिजीज’ भी कहा जाता है। माइग्रेन और दिल की बीमारी का सम्बन्ध इसका उदाहरण है। आइए जानते हैं ऐसी कुछ बीमारियों के बारे में, जो किसी अन्य गंभीर बीमारी का इशारा भर हो सकती हैं- *वजन कम होना* किस ओर है इशारा-डायबिटीज, कैंसर, लिवर या थॉयराइड संबंधी समस्या का लक्षण अचानक आपका वजन बहुत कम हो गया है। आप कहेंगे वजन कम होना तो अच्छी बात है। लेकिन, कम समय में ही बहुत ज्यादा वजन कम होना चिंता का विषय है। यह किसी अन्य बीमारी का संकेत हो सकता है। इसे नजरअंदाज न करें। डॉक्टर से सं... more »

दिल की दास्ताँ – भाग २

लालाजी भी आदत से बाज़ आने वालों में से नहीं थे | उन्होंने भी सुधांशु के गाल पर तमाचा रसीद करने में ज़रा भी वक़्त जाया नहीं किया | उसके कोमल मन पर बारम्बार ऐसे आघात उसके स्वाभाव को और ज्यादा विद्रोही बनाते जा रहे थे | उसको एहसास होने लगा था के उसके साथ गलत हो रहा है पर बताता कैसे और किसको | न कभी उसकी किसी ने सुनी, पढाई में अव्वल आने पर न कभी शाबाशी मिली न कोई इनाम, न कभी खुद ही घुमने गए न उसे घुमाने ले गए, कूप मंडूप से हर समय घर में पड़े रहो और बैठे रहो | वो आसमान का पंछी बनना चाहता था और यहाँ सब उसके पर कतरने में लगे थे | उसकी परवाज़ को पंख देने की जगह उसे पिंजड़े में क़ैद कर रहे थे | बस ... more »

मोबाइल फोन पड़ गए जबसे, गधों के हाथ में !

पी.सी.गोदियाल "परचेत" at अंधड़ !
*ढेंचू-ढेंचू के ही स्वर सुनाई पड़ते है अब, सकल दिन-रात में,* *मोबाइल फोन पड़ गए हैं यहाँ जबसे,तमाम गधों के हाथ में। * *लांघने को बाकी न छोड़ा, इनकी परस्पर ढेंच्विंग की हदों ने, * *जुबाँ है पास सबके किन्तु माँ कसम, हद कर दी इन गधों ने। * *मुहँ भीं नहीं थकते, राम जाने क्या है **इनकी **रसभरी बात में।* *मोबाइल फोन पड़ गए हैं यहाँ जबसे, तमाम गधों के हाथ में।।* * **'अनलिमिटेड ढेंचुआने' का पॅकेज ले रखा है गधे-गधी दोनों ने, * *सड़क, लाइन पार करते कई जिंदगियां लील ली इन फ़ोनों ने। * *मग्न अकेले ही ढेंचुआते है पागलों की तरह, कोई न साथ में। * *मोबाइल फोन पड़ गए हैं यहाँ जबसे, त... more »

खलबली है खलबली ...

शिवम् मिश्रा at पोलिटिकल जोक्स - Political Jokes
*गुप्त सूत्रों से ज्ञात हुआ है कि जैसे ही सिंह साहब को पता चला कि मोदी जी प्रधानमंत्री निवास आ रहे है, उन्होने अपना बोरिया बिस्तर बांधना शुरू कर दिया था ... बड़ी मुश्किलों से उनको समझाया जा सका कि सिर्फ मुलाक़ात होनी है ... वैसी कोई बात नहीं है जैसा वो समझ रहे है !*

स्वर्ग-नर्क के बँटवारे की समस्या - व्यंग्य

महाराज कुछ चिन्ता की मुद्रा में बैठे थे। सिर हाथ के हवाले था और हाथ कोहनी के सहारे पैर पर टिका था। दूसरे हाथ से सिर को रह-रह कर सहलाने का उपक्रम भी किया जा रहा था। तभी महाराज के एकान्त और चिन्तनीय अवस्था में ऋषि कुमार ने अपनी पसंदीदा ‘नारायण, नारायण’ की रिंगटोन को गाते हुए प्रवेश किया। ऋषि कुमार के आगमन पर महाराज ने ज्यादा गौर नहीं फरमाया। अपने चेहरे का कोण थोड़ा सा घुमा कर ऋषि कुमार के चेहरे पर मोड़ा और पूर्ववत अपनी पुरानी मुद्रा में लौट आये। ऋषि कुमार कुछ समझ ही नहीं सके कि ये हुआ क्या? अपने माथे पर उभर आई सिलवटों को महाराज के माथे की सिलवटों  more »

चक्रव्यूह फेसबुक का

राजीव तनेजा at हँसते रहो
***राजीव तनेजा*** [image: facebook-addiction] फेसबुकिया नशा ऐसा नशा है कि एक बार इसकी लत लग गई तो समझो लग गयी...बंदा बावलों की तरह बार बार टपक पड़ता है इसकी साईट पर कि..."जा के देखूँ तो सही मुझे कितने लाईक और कितने कमेन्ट मिले हैं?"... "अरे!...तुझे क्या लड्डू लेने हैं इन लाईक्स और कमैंट्स से जो बार बार फुदक कर पहुँच जाता है फिर से उसी नामुराद ठिकाने पे?".... [image: rgwertg3gr] "क्या कहा?....दिल नहीं मानता?".... "हुंह!...दिल नहीं मानता....अरे!...अगर दिल की सुनने का इतना ही शौक है तो क्यों नहीं सुनी तब अपने दिल की जब वो लम्बू का छोरा..हाँ-हाँ...वही (*अभिषेक *का बच्चा और कौन... more »

हलवा -परांठा से पापा...

shikha varshney at स्पंदन SPANDAN
इंसान अगर स्वभाववश कोमल ह्रदय हो तो वह आदतन ऊपर से एक कठोर कवच पहन लेता है। कि उसके नरम और विनम्र स्वभाव का कोई नाजायज फायदा न उठा सके। ज्यादातर आजकल की दुनिया में कुछ ऐसा ही देखा जाता है. विनम्रता को लोग कमजोरी समझ लिया करते हैं। जैसे अगर कोई विनम्रता और सरलता से अपनी गलतियां या कमजोरियां स्वीकार ले तो हर कोई उसकी कमियाँ निकालने पर आमदा हो जाता है क्योंकि दूसरों की कमियाँ गिनाने में ही उन्हें अपनी विद्वता का अहसास होता है शायद, परन्तु वहीँ एक कठोर स्वभाव वाले से कोई भी उसकी कमियों की चर्चा करने की हिम्मत कम ही करता है। अत: बहुत मुमकिन है कि इसी वजह से अन्दर से कोमल इंसान बाहरी ... more »
 ==========================
अब आज्ञा दीजिये ...

जय हिन्द !!!

लेखागार