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शनिवार, 20 अप्रैल 2013

क्यों न जाए 'ज़ौक़' अब दिल्ली की गलियाँ छोड़ कर - ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय ब्लॉगर मित्रों ,

प्रणाम !



जो 'ज़ौक़' साहब आज के दौर मे होते तो हरगिज न कहते कि,

"कौन जाए ज़ौक़ पर दिल्ली की गलियाँ छोड़ कर ..."
 
कार्टूनिस्ट :- सतीश आचार्य 

कार्टूनिस्ट :- सतीश आचार्य

कार्टूनिस्ट :- मनोज कुरील 

कार्टूनिस्ट :- सुधीर तैलंग 
सादर आपका 
 
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क्या पारम्परिक परिधान रूढ़ीवाद व पिछड़ेपन की निशानी है ?

अपना गाँव… पार्ट 3

बधशाला -7

..............अब और नहीं सहेंगे

क्या आज वर्जनाहीन समाज ही बच्चियों की सुरक्षा की शर्त है

ये तितलियाँ -क्यूँ बदल जाती हैं ?

स्त्री की प्रेम अभिव्यक्ति और हमारे सामाजिक नियम.

उज्जवल प्रकाश की ओर......

समाज भेड़िये पैदा कर रहा है और समाज के ठेकेदार जनता से सुरक्षा-कर वसूल रहे हैं

कब तक ?

अकेला

हे राम...बेटियों के वंदन और मानमर्दन का कैसा खेल

बदल रहा है

ऐ मेरे नादान दिल

आँखें

सप्पोर्ट सिस्टम

थोड़ा अपना सा,थोड़ा बेगाना सा ..

पुरस्कारों की चर्चा :गोलगप्पे वडा पाव की तरह

हंगामा है क्यूं बरपा? डोयिचे वेले पुरस्कारों पर दो टूक!

वीनू - तुम बहुत याद आओगे !

:):)

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अब आज्ञा दीजिये ...

जय हिन्द !!! 

बुधवार, 20 फ़रवरी 2013

लीजिये पढ़िये मेरी पहली ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय ब्लॉगर मित्रो,

प्रणाम !

मैं तुषार राज रस्तोगी | ब्लॉगर जगत विद्यालय का नवीन दाख़िला | आज से मैं भी ब्लॉग बुलेटिन में अपना योगदान करने का प्रयास करूंगा | आशा करता हूँ के आप सभी मित्रगण को मेरा यह प्रथम प्रयत्न पसंद आयेगा और आप सभी का आशीर्वाद और सहयोग मेरे साथ परस्पर बना रहेगा | मेरे द्वारा चुनी हुई कुछ कड़ियाँ कुछ इस प्रकार हैं | 

शुक्रवार, 21 दिसंबर 2012

नारी हो न निराश करो मन को - ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय ब्लॉगर मित्रों ,
प्रणाम !

"कल तक सबको 'उस' के दर्द का अहसास था ;
आज सब को अपनी अपनी जीत का अभिमान है !!
कल जहां रेप पीड़ितों की सूची थी ...
उन्ही मेजों पर आज नए विधायकों की सूची तैयार है !!
किसी चैनल , किसी सभा मे 'उसके' बारे मे कोई सवाल नहीं है ;
बहुतों के तन पर नई नई खादी सजी है
तभी तो सफदरजंग के आगे पटाखों की लड़ी जली है ... 
बेगैरत शोर को अब किसी का ख्याल नहीं है !!
जो लोग रोज़ लोकतन्त्र को नंगा करते हो ... 
उनको एक महिला की इज्ज़त जाने का अब मलाल नहीं है !
'तुम' जियो या मारो ... 
किस को फर्क पड़ता है ... 
आओ देख लो अब यहाँ कोई शर्मसार नहीं है !!
दरअसल 'तुम्हारी' ही स्कर्ट ऊंची थी ... 
'इस' मे 'इनका' कोई दोष नहीं ...
"जवान लड़की को सड़क पर छोड़ा ... 
क्या घरवालों को होश नहीं"
"लड़का तो 'वो' भोला था ... 
यह सब चाउमीन की गलती है ... 
वैसे एक बात बताओ लड़की घर से क्यों निकलती है ??"
चलो जो हुआ सो हुआ उसको भूलो ...
भत्ते ... नौकरी सब तैयार है ...
बस 'तुम' मुंह मत खोलो ...
तुम्हारी चीख से मुश्किल मे पड़ती सरकार है ...
अगली जीत - हार के लिए इनको तुम्हारी दरकार है ...
गुजरात - हिमाचल से निबट लिए  ...
अब दिल्ली की बारी है ...
चुनावी वादा ही सही पर यकीन जानना ...
दोषियों को छोड़ा न जाएगा यह मानना ...
हम सब तुम्हारे साथ है डरना मत ...
पर बिटिया अंधेरे के बाद घर से निकलना मत ...
अंधेरा होते ही सब समीकरण बदल जाते है ...
न जाने कैसे ...
हमारे यह रक्षक ही सब से बड़े भक्षक बन जाते है ...
कभी कभी लगता है यह वो मानवता के वो दल्ले है ...
जिन्होने हर चलती बस - कार मे ...
खुद अपनी माँ , बहन , बीवी और बेटी ...
नीलाम कर रखी है !!
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यहाँ दिये हर एक चित्र मे आपको एक पोस्ट का लिंक मिलेगा पर यह जरूरी नहीं है कि वो पोस्ट इस मुद्दे से जुड़ी हो ... पोस्ट देखने के लिए चित्र पर चटका लगाएँ !
















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अंत मे एक निवेदन "उस से "
लोग कहते है "नर हो न निराश करो मन को ..."
मैं कहता हूँ ,
"नारी हो न निराश करो मन को ...
उठो और शक्ति रूप धरो तुम ...
बन काल पापियों का नाश करो तुम ...
तुम से संबल हम पाते है ...
खुद को यूं निर्बल न करो तुम ...
उठो और शक्ति रूप धरो तुम !!"
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ब्लॉग बुलेटिन की पूरी टीम और पूरे ब्लॉग जगत के साथ हम सब एक स्वर मे इस  
जघन्य अपराध की घोर निंदा करते है और सरकार से मांग करते है कि इस मामले और इस जैसे बाकी मामलों मे अपने ढीले रवैये तो छोड़ जल्द से जल्द इंसाफ दिलवाएँ !

जय हिन्द !!

लेखागार