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गुरुवार, 12 जुलाई 2018

बार-बार बहाए जाने के बीच ब्लॉग बुलेटिन

नमस्कार साथियो,
आज की बुलेटिन अपनी एक लघुकथा के साथ. कृपया दोनों का आप आनंद लें.
सादर....
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मात्र दस वर्ष की उम्र में मछली की तरह तैरते हुए उसने जैसे ही अंतिम बिन्दु को छुआ वैसे ही वह तैराकी का रिकॉर्ड बना चुकी थी। स्वीमिंग पूल से बाहर आते ही उसको साथियों ने, परिचितों ने, मीडियाकर्मियों ने घेर लिया। सभी उसे बधाई देने में लगे थे। उसके चेहरे पर अपार प्रसन्नता दिख रही थी। इस भीड़भाड़, गहमागहमी के बीच पत्रकारों ने तैराकी, प्रशिक्षक, सफलता का श्रेय किसे जैसे सवालों को दागना शुरू कर दिया।

कैमरों के चमकते फ्लैश के बीच दमकते चेहरे के साथ पूरे आत्मविश्वास से उसने कहा-पिछले कई दशकों से पैदा होते ही कभी नदी, कभी नाले, कभी तालाब, कभी फ्लश में बहाये जाने ने तैरना बखूबी सिखाया है। उनके बार-बार बहाये जाने के अहंकार और मेरे बार-बार पैदा होने की जिद ने इसे दृढ़ता प्रदान की है।

उसका जवाब सुनकर भीड़ खामोश थी, गहमागहमी थम गई थी, कैमरे के फ्लैश चमकना भूल गये थे। लोगों को पानी से भीगे उसके चेहरे पर आंसुओं की धार अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही थी।


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गुरुवार, 17 मार्च 2016

धरती से अंतरिक्ष तक बेटियों की धमक - ब्लॉग बुलेटिन

नमस्कार साथियो,
धरती से लेकर सुदूर अंतरिक्ष तक सफलता की कहानी रचने वाली भारतीय बेटियों की कहानी कहता है आज, 17 मार्च का दिन. इसमें एक बेटी है कल्पना चावला और दूसरी बेटी है साइना नेहवाल. आज इन दोनों बेटियों का जन्मदिन है. आइये संक्षेप में इन दोनों बेटियों के बारे में जानते हुए आज की बुलेटिन का आनन्द उठायें.


अंतरिक्ष जाने वाली प्रथम भारतीय महिला कल्पना चावला का जन्म करनाल (हरियाणा) में 17 मार्च 1962  को हुआ था. उनके पिता का नाम श्री बनारसी लाल चावला और माता का नाम श्रीमती संज्योति है. चार भाई बहनों में सबसे छोटी कल्पना की प्रारंभिक शिक्षा टैगोर पब्लिक स्कूल करनाल में हुई. बाद में पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज, चंडीगढ़ से सन 1982 में अभियांत्रिकी स्नातक की उपाधि प्राप्त करके वे संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए चली गईं. वहाँ वर्ष 1984 में टेक्सास विश्वविद्यालय आर्लिंगटन से वैमानिक अभियान्त्रिकी में विज्ञान निष्णात तथा वर्ष 1988 में कोलोराडो विश्वविद्यालय बोल्डर से वैमानिक अभियंत्रिकी में विद्या वाचस्पति की उपाधि प्राप्त की. उनको हवाईजहाज़ों, ग्लाइडरों, व्यावसायिक विमान चालन के लाइसेंस के लिए प्रमाणित उड़ान प्रशिक्षक का दर्ज़ा प्राप्त होने के साथ-साथ एकल तथा बहुइंजन वायुयानों के लिए व्यावसायिक विमानचालक के लाइसेंस भी प्राप्त थे. उनको मार्च 1995 में नासा के अंतरिक्ष यात्री कोर में शामिल करते हुए 1998 में पहली उड़ान के लिए चुना गया. उनका पहला अंतरिक्ष मिशन 19 नवम्बर 1997 को छह अंतरिक्ष यात्री दल के रूप में अंतरिक्ष शटल कोलंबिया की उड़ान एसटीएस-87 से शुरू हुआ, इसकी अवधि 19 नवंबर 1997 से 5 दिसंबर 1997 थी. अपने पहले मिशन में उन्होंने 1.04 करोड़ मील का सफ़र तय करके पृथ्वी की 252 परिक्रमाएँ की तथा अंतरिक्ष में 360 से अधिक घंटे बिताए. उड़ान प्रशिक्षक और विमानन लेखक जीन पियरे हैरीसन से शादी करके वे सन 1990 में संयुक्त राज्य अमेरिका की नागरिक बनीं. वर्ष 2000 में उन्हें अपनी दूसरी अंतरिक्ष उड़ान के लिए चुना गया और 16 जनवरी 2003 को कोलंबिया द्वारा एसटीएस-107 मिशन का आरंभ हुआ. कोलंबिया अन्तरिक्ष यान में उनके साथ अन्य यात्री- कमांडर रिक डी० हुसबंद, पायलट विलियम मैकूल, कमांडर माइकल एंडरसन, इलान रामों, डेविड ब्राउन, लौरेल बी० क्लार्क थे. यह अंतरिक्ष यात्रा कल्पना चावला की अंतिम यात्रा साबित हुई. सभी तरह के अनुसंधान तथा विचार-विमर्श के उपरांत वापसी के दौरान 1 फ़रवरी 2003 को कोलंबिया अंतरिक्षयान पृथ्वी की कक्षा मे प्रवेश करते ही टूटकर बिखर गया, जिसमें कल्पना चावला सहित उनके सभी साथियों की मृत्यु हो गई.
सफल अभियान की दर्दनाक और दुखद समाप्ति पर कल्पना चावला के शब्द सत्य हो गए, “मैं अंतरिक्ष के लिए ही बनी हूँ. प्रत्येक पल अंतरिक्ष के लिए ही बिताया है और इसी के लिए ही मरूँगी.” आज उनके जन्मदिवस पर उनको विनम्र श्रद्धांजलि.

विश्व की शीर्ष बैडमिन्टन खिलाड़ी के रूप में प्रतिष्ठित प्रथम भारतीय महिला साइना नेहवाल का जन्म 17 मार्च 1990 को हिसार (हरियाणा) में हुआ था. 8 वर्ष की आयु में ही बैडमिंटन खेलना शुरू करने वाली साइना के पिता का नाम डॉ० हरवीर सिंह नेहवाल और माता का नाम उषा नेहवाल है. साइना ने शुरुआती प्रशि‍क्षण हैदराबाद के लाल बहादुर स्टेडि‍यम, हैदराबाद में कोच नानीप्रसाद से प्राप्त कि‍या. लंदन ओलंपिक 2012 में साइना ने इतिहास रचते हुए बैडमिंटन की महिला एकल स्पर्धा में कांस्य पदक हासिल किया. बैडमिंटन मे ऐसा करने वाली वे भारत की पहली खिलाड़ी हैं. सन 2008 में बीजिंग में आयोजित हुए ओलंपिक खेलों मे भी वे क्वार्टर फाइनल तक पहुँची थी. वह बीडबल्युएफ विश्व कनिष्ठ प्रतियोगिता जीतने वाली पहली भारतीय हैं. वर्तमान में शीर्ष महिला भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी साइना भारत सरकार द्वारा पद्म श्री और सर्वोच्च खेल पुरस्कार राजीव गाँधी खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित हो चुकीं हैं.
साइना को जन्मदिन की बधाई, शुभकामनायें कि वे निरंतर प्रगति-पथ पर बढ़ती रहें.

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बुधवार, 30 जुलाई 2014

बेटियाँ बोझ नहीं हैं - ब्लॉग बुलेटिन



नमस्कार मित्रो,
बुधवार की बुलेटिन के साथ आपके समक्ष पुनः उपस्थित हैं. ३० जुलाई भारतीय एवं वैश्विक इतिहास में कई घटनाओं की गवाह बनी है, इनमें से कुछ घटनाएँ ख़ुशी का एहसास कराती हैं तो कई घटनाओं से क्षोभ का भाव पैदा होता है. भारतीय सन्दर्भ में आज का दिन कई घटनाओं का साक्षी बना और इनमें से एक घटना जो गौरवान्वित करती है, वो है देश की बैडमिंटन की खिलाड़ी साइना नेहवाल से सम्बंधित है. वर्ष २०१० में आज ही साइना नेहवाल को देश का सर्वोच्च खेल रत्न पुरस्कार ‘राजीव गाँधी खेल रत्न पुरस्कार’ दिए जाने की घोषणा की गई थी. बैडमिंटन में देश का नाम रोशन करने वाली साइना नेहवाल लन्दन ओलम्पिक में महिला एकल स्पर्धा में कांस्य पदक जीता था. ऐसा करने वाली वे पहली भारतीय महिला हैं. इसके अलावा वे वह विश्व कनिष्ठ बैडमिंटन चैम्पियनशिप जीतने वाली पहली भारतीय हैं. अभी हाल ही में उन्होंने आस्ट्रेलियन ओपन खिताब जीतकर बैडमिंटन प्रेमियों को बहुत बड़ी ख़ुशी प्रदान की. साइना को पद्म श्री पुरस्कार से भी नवाजा जा चुका है. ऐसी बेटियों की सफलता उन लोगों के मुँह पर तमाचा है जो बेटियों को बोझ समझकर उन्हें जन्म लेने से रोकते हैं. हम सभी उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हैं.
इस गौरवशाली क्षण के साथ आप सभी आज की बुलेटिन का आनंद लीजिये और अगली बुलेटिन तक के लिए हमें दीजिये इजाजत.
शुभरात्रि.. आपका हर पल आनंददायक और खुशियों से भरा हो.

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चित्र गूगल छवियों से साभार 

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