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शुक्रवार, 26 अक्टूबर 2018

"सेब या घोडा?"- लाख टके के प्रसन है भैया !!

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |

बहुत समय पहले एक नगर में एक राजा था। एक दिन उसने एक सर्वे करने का सोचा, जिससे कि यह पता चल सके कि उसके राज्य के लोगों की घर गृहस्थि पति से चलती है या पत्नी से।

उसने एक ईनाम रखा कि "जिसके घर में पति का हुक्म चलता हो उसे मनपसंद घोडा़ ईनाम में मिलेगा और जिसके घर में पत्नि की सरकार हो वह एक सेब ले जाए।"

एक के बाद एक सभी नगरजन सेब उठाकर जाने लगे। राजा को चिंता होने लगी कि क्या मेरे राज्य में सभी सेब वाले ही हैं?

इतने में एक लम्बी-लम्बी मूछों वाला, मोटा तगडा़ और लाल-लाल आखों वाला जवान आया और बोला, "राजा जी मेरे घर में मेरा ही हुक्म चलता है! लाओ घोडा़ मुझे दीजिये!"
राजा खुश हो गए और कहा, "जा अपना मनपसंद घोडा़ ले जा।"

जवान काला घोडा़ लेकर रवाना हो गया। घर गया और फिर थोडी़ देर में दरबार में वापिस लौट आया।

राजा: क्या हुआ? वापिस क्यों आये हो?

आदमी: महाराज, घरवाली कहती है काला रंग अशुभ होता है, सफेद रंग शांति का प्रतीक होता है तो आप मुझे सफेद रंग का घोडा़ दीजिये!

राजा: घोडा़ रख और सेब लेकर निकल।

इसी तरह रात हो गई दरबार खाली हो गया लोग सेब लेकर चले गए।

आधी रात को महामंत्री ने राजा के कमरे का दरवाजा खटखटाया!

राजा: बोलो महामंत्री कैसे आना हुआ?

महामंत्री: महाराज आपने सेब और घोडा़ ईनाम में रखा, इसकी जगह एक मण अनाज या सोना रखा होता तो लोग कुछ दिन खा सकते थे या जेवर बना सकते थे।

राजा: मुझे तो ईनाम में यही रखना था लेकिन महारानी ने कहा कि सेब और घोडा़ ही ठीक है इसलिए वही रखा।

महामंत्री: महाराज आपके लिए सेब काट दूँ!

राजा को हँसी आ गई और पूछा, "यह सवाल तुम दरबार में या कल सुबह भी पूछ सकते थे। तो आधी रात को क्यों आये?"

महामंत्री: मेरी धर्मपत्नी ने कहा अभी जाओ और पूछ के आओ सच्ची घटना का पता चले।

राजा (बात काटकर): महामंत्री जी, सेब आप खुद ले लोगे या घर भेज दिया जाए।

शिक्षा: समाज चाहे कितना भी पुरुष प्रधान हो लेकिन संसार स्त्रीप्रधान है! 

सादर आपका

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रावण द्वारा अपहरण से पहले ही सीता जी गायब

इंटरनेट और इंट्रानेट क्या है? इनमे क्या अंतर है?

कमलेश श्रीवास्तव की ग़ज़लें

चीज़ स्टिक.

#करवा चौथ

इच्छाएँ

करवाचौथ पर्व पुनीत प्रेम का

हर क्षण बदलता जीवन

हमको तो दीवाली की सफाई मार गई ---

अभयारण्य की देख भाल करने के लिए जरुरी है, जीवट, धैर्य व साहस

अतिथि तुम कब जाओगे?

आज कुछ हड्डी की बात थोड़ा चड्डी की बात कुछ कबड्डी की बात

इंतज़ार

फ़िल्म - 'बधाई हो'

साईकिल पर कोंकण यात्रा भाग ४: मलकापूर- आंबा घाट- लांजा- राजापूर (९४ किमी)

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अब आज्ञा दीजिये ...

जय हिन्द !!!

शुक्रवार, 5 अक्टूबर 2018

'स्टेंड बाई' मोड और रिश्ते - ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |

कुछ चीजों को ज्यादा देर 'स्टेंड बाई' मोड पर छोड देने से वो खुद ही 'आफ' हो जाती हैं . . .

'रिश्ते' उनमें सबसे पहले आते हैं!

सादर आपका

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कट रहा जिंदगी का सफर अनजान लम्हों में

बाँसुरी हो गई

पृथ्वी शॉ के पहले चौदह भारतीय खिलाड़ी ऐसा कर चुके हैं

झारखंड में गांधी

“सीख” (रोला छंद)

बचा रहे बनारस...

भूख

श्री कृष्ण के घर सुदामा

हौंसले को सलाम (माउंटेन मैन - दशरथ मांझी)

गरम गोश्त

समर में हम

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अब आज्ञा दीजिये ...

जय हिन्द !!!

शुक्रवार, 13 जुलाई 2018

समान अधिकार, अनशन, जतिन दास और १३ जुलाई

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |

आज १३ जुलाई है...आज ही के दिन सन १९२९ को लाहौर जेल में, क्रान्तिकारियों के साथ राजबन्दियों के समान व्यवहार न होने के कारण, क्रान्तिकारियों ने अनशन आरम्भ कर दिया था| जोकि ६३ दिनों तक जारी रहा और इस दौरान जतिन दास की मौत के सदमे ने पूरे भारत को हिला दिया था | स्वतंत्रता से पहले अनशन या भूख हड़ताल से शहीद होने वाले एकमात्र व्यक्ति जतिन दास हैं... जतिन दास के देश प्रेम और अनशन की पीड़ा का कोई सानी नहीं है | जेल में क्रान्तिकारियों के साथ राजबन्दियों के समान व्यवहार न होने के कारण क्रान्तिकारियों ने 13 जुलाई, 1929 से अनशन आरम्भ कर दिया। जतीन्द्र भी इसमें सम्मिलित हुए। उनका कहना था कि एक बार अनशन आरम्भ होने पर हम अपनी मांगों की पूर्ति के बिना उसे नहीं तोड़ेंगे। कुछ समय के बाद जेल अधिकारियों ने नाक में नली डालकर बलपूर्वक अनशन पर बैठे क्रांतिकारियों के के पेट में दूध डालना शुरू कर दिया। जतीन्द्र को 21 दिन के पहले अपने अनशन का अनुभव था। उनके साथ यह युक्ति काम नहीं आई। नाक से डाली नली को सांस से खींचकर वे दांतों से दबा लेते थे। अन्त में पागल खाने के एक डॉक्टर ने एक नाक की नली दांतों से दब जाने पर दूसरी नाक से नली डाल दी, जो जतीन्द्र के फेफड़ों में चली गई। उनकी घुटती सांस की परवाह किए बिना उस डॉक्टर ने एक सेर दूध उनके फेफड़ों में भर दिया। इससे उन्हें निमोनिया हो गया। कर्मचारियों ने उन्हें धोखे से बाहर ले जाना चाहा, लेकिन जतीन्द्र अपने साथियों से अलग होने के लिए तैयार नहीं हुए। 

अमर शहीद जतिंद्र नाथ दास जी के बारे में यहाँ पढ़ें ... 

 ब्लॉग बुलेटिन टीम और हिन्दी ब्लॉग जगत की ओर से जतिन दास और उन के साथियों को शत शत नमन |

सादर आपका
 शिवम् मिश्रा

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केशों का तिलिस्म (बाल कहानी)

एक गजल - कुर्सी (अरुण कुमार निगम)

मोहलतें

बचपने वाला बचपन ......

यह बारिश नहीं प्रेम है...

मेरी जमा पूंजी

निमंत्रण

स्वयंवर

जेल के अन्दर एक जेल होती है जिसे तन्हाई कहते हैं

यह लड़ाई है अच्छाई और बुराई की

इस तिरंगे की छाँव में

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अब आज्ञा दीजिये ...

जय हिन्द !!!

सोमवार, 5 मार्च 2018

अंग्रेजी बोलने का भूत = 'ब्युटीफुल ट्रेजडी'

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |

अंग्रेजी बोलने का भूत जब दिमाग पर चढ़ता है तो कुछ इस प्रकार का माहौल बन जाता है ... 

टीचर – कल तुम कोचिंग नहीं आये कहाँ थे.?

स्टुडेंट – वो कल हमारे यहां मंदिर में 'ब्युटीफुल ट्रेजडी' था ना, इसलिए नहीं आ पाया।

टीचर – ब्युटीफुल ट्रेजडी से मतलब ?

स्टुडेंट – मतलब सुन्दर काण्ड था।


टीचर अभी भी सदमें है… 😏


सादर आपका 

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दूध पिलाती मॉडल की तस्वीर अश्लील नहीं गैर ज़रूरी है

varsha at likh dala

मंगलवार, 27 फ़रवरी 2018

अमर शहीद पण्डित चन्द्रशेखर 'आजाद' जी की ७९ वीं पुण्यतिथि

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |
पण्डित चन्द्रशेखर 'आजाद' (२३ जुलाई, १९०६ - २७ फरवरी, १९३१) ऐतिहासिक दृष्टि से भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के अत्यन्त सम्मानित और लोकप्रिय स्वतंत्रता सेनानी थे। वे पण्डित राम प्रसाद बिस्मिल व सरदार भगत सिंह सरीखे महान क्रान्तिकारियों के अनन्यतम साथियों में से थे। सन् १९२२ में गाँधीजी द्वारा असहयोग आन्दोलन को अचानक बन्द कर देने के कारण उनकी विचारधारा में बदलाव आया और वे क्रान्तिकारी गतिविधियों से जुड़ कर हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसियेशन के सक्रिय सदस्य बन गये। इस संस्था के माध्यम से उन्होंने राम प्रसाद बिस्मिल के नेतृत्व में पहले ९ अगस्त १९२५ को काकोरी काण्ड किया और फरार हो गये। इसके पश्चात् सन् १९२७ में 'बिस्मिल' के साथ ४ प्रमुख साथियों के बलिदान के बाद उन्होंने उत्तर भारत की सभी क्रान्तिकारी पार्टियों को मिलाकर एक करते हुए हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन ऐसोसियेशन का गठन किया तथा भगत सिंह के साथ लाहौर में लाला लाजपत राय की मौत का बदला सॉण्डर्स का वध करके लिया एवम् दिल्ली पहुँच कर असेम्बली बम काण्ड को अंजाम दिया।

जन्म तथा प्रारम्भिक जीवन

पण्डित चन्द्रशेखर आजाद का जन्म उत्तर प्रदेश में उन्नाव जिले के बदरका गाँव में २३ जुलाई सन् १९०६ को हुआ था। आजाद के पिता पण्डित सीताराम तिवारी संवत् १९५६ में अकाल के समय अपने पैतृक निवास बदरका को छोडकर पहले कुछ दिनों मध्य प्रदेश अलीराजपुर रियासत में नौकरी करते रहे फिर जाकर भावरा गाँव में बस गये। यहीं बालक चन्द्रशेखर का बचपन बीता। उनकी माँ का नाम जगरानी देवी था। आजाद का प्रारम्भिक जीवन आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में स्थित भावरा गाँव में बीता अतएव बचपन में आजाद ने भील बालकों के साथ खूब धनुष बाण चलाये। इस प्रकार उन्होंने निशानेबाजी बचपन में ही सीख ली थी । बालक चन्द्रशेखर आज़ाद का मन अब देश को आज़ाद कराने के अहिंसात्मक उपायों से हटकर सशस्त्र क्रान्ति की ओर मुड़ गया। उस समय बनारस क्रान्तिकारियों का गढ़ था। वह मन्मथनाथ गुप्त और प्रणवेश चटर्जी के सम्पर्क में आये और क्रान्तिकारी दल के सदस्य बन गये। क्रान्तिकारियों का वह दल "हिन्दुस्तान प्रजातन्त्र संघ" के नाम से जाना जाता था।


 अमर शहीद चन्द्रशेखर 'आजाद' जी को ब्लॉग बुलेटिन टीम और हिन्दी ब्लॉग जगत की ओर से शत शत नमन ! 

इंकलाब ज़िंदाबाद ...

वंदे मातरम ||
सादर आपका

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सरगोशी .....

निवेदिता श्रीवास्तव at झरोख़ा 


वक़्त, तुम और मैं ...

रश्मि प्रभा... at कुनू और जुनू 


२९९. मेरे कस्बे का स्टेशन


गुरुवार, 15 फ़रवरी 2018

हम भारतियों की अंध श्रद्धा

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |
हमारे देश की सबसे बड़ी अंध श्रद्धा... शादी कर दो लड़का सुधर जायगा। और दूसरी अंध श्रद्धा... लड़का शादी के पहले बहुत अच्छा था, शादी के बाद ही बिगड़ा है। और तीसरी अंध श्रद्धा... जिसे सुनकर लड़के के नीचे धरती और आसमान फट जाता है ...
"हमारी बेटी तो गाय है।"
😮😯😲😮😯😲


सादर आपका 
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गुरुवार, 8 फ़रवरी 2018

८ फरवरी, प्रपोज़ डे और शूर्पणखा

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |

आजकल "आशिकों के नवराते" चल रहे हैं ...  मतलब की #Valentinesweek ... इसी के अंतर्गत आज यानि ८ फरवरी को #ProposeDay के रूप मनाया जाता है |


वैसे,ज्ञात हो कि #ProposeDay मनाने की शुरूआत शूर्पणखा ने की थी,और बदले में लक्ष्मण जी ने उस की ऐसी तैसी कर दी थी!!

न माने सिर्फ़ बता रहे हैं !! 

सादर आपका

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अब आज्ञा दीजिये ...

जय हिन्द !!!

लेखागार