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बुधवार, 21 अगस्त 2019

24वीं पुण्यतिथि - सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर - ब्लॉग बुलेटिन

सभी हिन्दी ब्लॉगर्स को मेरा नमस्कार।
सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर (जन्म- 19 अक्तूबर, 1910 - मृत्यु- 21 अगस्त, 1995) खगोल भौतिक शास्त्री थे और सन् 1983 में भौतिक शास्त्र के लिए नोबेल पुरस्कार विजेता भी थे। उनकी शिक्षा चेन्नई के प्रेसीडेंसी कॉलेज में हुई। वह नोबेल पुरस्कार विजेता सर सी. वी. रमन के भतीजे थे। बाद में डा. चंद्रशेखर अमेरिका चले गए। जहाँ उन्होंने खगोल भौतिक शास्त्र तथा सौरमंडल से संबंधित विषयों पर अनेक पुस्तकें लिखीं।

20वीं शताब्दी के महानतम वैज्ञानिकों में से एक वैज्ञानिक सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर अपने जीवन काल में ही एक किंवदंती बन गए थे। 'कामेश्वर सी. वाली' चन्द्रशेखर के जीवन के बारे में लिखते हैं कि 'विज्ञान की खोज में असाधारण समर्पण और विज्ञान के नियमों को अमली रूप देने और जीवन में निकटतम संभावित सीमा तक उसके मानों को आत्मसात करने में वह सब से अलग दिखाई देते हैं।' उसके बहुसर्जक योगदानों का विस्तार खगोल - भौतिक, भौतिक - विज्ञान और व्याहारिक गणित तक था। उनका जीवन उन्नति का सर्वोत्तम उदाहरण है जिसे कोई भी व्यक्ति प्राप्त कर सकता है बशर्ते कि उसमें संकल्प, शक्ति, योग्यता और धैर्य हो। उसकी यात्रा आसान नहीं थी। उन्हें सब प्रकार की कठिनाईयों से जूझना पड़ा। वह एक ऐसा व्यक्तित्व था जिसमें भारत, जहां उनका जन्म हुआ, इंग्लैंड और यू.एस.ए. की तीन अत्यधिक भिन्न संस्कृतियों की जटिलताओं द्वारा आकार मिला।

वह मानवों की साझी परम्परा में विश्वास रखते थे। उन्होंने कहा था, 'तथ्य यह है कि मानव मन एक ही तरीके से काम करता है। इससे हम पुन: आश्वस्त होते है कि जिन चीज़ों से हमें आनन्द मिलता है, वे विश्व के हर भाग में लोगों को आनन्द प्रदान करती है। हम सबका साझा हित है और इस तथ्य से इस बात को बल मिलता है कि हमारी एक साझी परम्परा है।' वह एक महान् वैज्ञानिक, एक कुशल अध्यापक और दुर्जेय विद्वान थे।


आज हम सब महान वेज्ञानिक सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर जी की 24वीं पुण्यतिथि पर उनका स्मरण करते हुये उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। सादर।। 


~ आज की बुलेटिन कड़ियाँ ~











आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर ... अभिनन्दन।।  

मंगलवार, 13 अगस्त 2019

अंग दान दिवस और ब्लॉग बुलेटिन

सभी हिंदी ब्लॉगर्स को नमस्कार।
अंग दान दिवस (अंग्रेज़ी: Organ Donation Day) भारत में प्रतिवर्ष '13 अगस्त को मनाया जाता है। किसी व्यक्ति के जीवन में अंग दान के महत्व को समझने के साथ ही अंग दान करने के लिये आम इंसान को प्रोत्साहित करने के लिये सरकारी संगठन और दूसरे व्यवसायों से संबंधित लोगों द्वारा हर वर्ष यह दिवस मनाया जाता है। अंग दान-दाता कोई भी हो सकता है, जिसका अंग किसी अत्यधिक जरुरतमंद मरीज को दिया जा सकता है। मरीज में प्रतिरोपण करने के लिये आम इंसान द्वारा दिया गया अंग ठीक ढंग से सुरक्षित रखा जाता है, जिससे समय पर उसका इस्तेमाल हो सके। किसी के द्वारा दिये गये अंग से किसी को नया जीवन मिल सकता है।


~ आज की बुलेटिन कड़ियाँ ~ 













आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर ... अभिनन्दन।।

बुधवार, 7 अगस्त 2019

अश्रुपूरित श्रद्धांजलि - सुषमा स्वराज जी - ब्लॉग बुलेटिन

सभी हिंदी ब्लॉगर्स को नमस्कार। 

बेटी बांसुरी स्वराज 
पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज (Sushma Swaraj) अब इस दुनिया में नहीं रहीं। अचानक दिल का दौरा पड़ने की वजह से मंगलवार की देर रात वह इस दुनिया को छोड़कर चली गईं। 67 साल की बीजेपी नेता सुषमा स्वराज का पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। सुषमा स्वराज के अंतिम संस्कार की रस्म बेटी बांसुरी स्वराज ने पूरा किया। समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, सुषमा स्वराज की बेटी बांसुरी ने अंतिम संस्कार की पूरी प्रक्रिया को पूरा किया। हालांकि, इस दौरान उनके साथ सुषमा स्वराज के पति स्वराज कौशल भी मौजूद थे।

पंचतत्व में विलीन होने से पहले सुषमा स्वराज को श्रद्धांजलि देने के लिए बड़ी भीड़ देखने को मिली। सरकार से लेकर विपक्षी पार्टिोयों के नेताओं की लंबी कतारें दिखीं। उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला ने भी सुषमा स्वराज को अंतिम श्रद्धांजलि दी। इतना ही नहीं, सुषमा को श्रद्धांजलि देते वक्त वेंकैया नायडू फफक-फफक कर रो पड़े।

इसके अलावा, लालकृष्ण आडवाणी, मनीष सिसोदिया, शरद यादव, अशोक गहलोत, बिप्लब देव, अरविंद केजरीवाल समेत कई बड़े नेताओं ने सुषमा स्वराज को अंतिम श्रद्धांजलि दी।

बता दें कि सुषमा स्वराज का मंगलवार रात यहां दिल का दौरा पड़ने से अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में निधन हो गया था। वहां से उनका पार्थिव शरीर रात में ही उनके आवास पर लाकर लोगों के दर्शनार्थ रखा गया है। कई केन्द्रीय मंत्री, भाजपा के नेता तथा कार्यकर्ता और कई अन्य लोग रात में ही उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे गए थे। बड़ी संख्या में उनके प्रशंसक और समर्थक सुबह से ही अपनी प्रिय नेता को श्रद्धांजलि देने पहुंच थे।

उनके पार्थिव शरीर को आज दोपहर 12 बजे से भाजपा मुख्यालय में रखा गया, जहां पार्टी के नेता एवं कार्यकर्ता उनके अंतिम दर्शन कर सकें। भाजपा मुख्यालय पर भी सैकड़ों की भीड़ थी। इसके बाद उनका पार्थिव शरीर अपराह्न तीन बजे लोदी रोड स्थित विद्युत शवदाह गृह ले जाया गया, जहां उनका पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।



आज हम सब अपनी प्रिय नेता सुषमा स्वराज जी को अश्रुपूरित श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। जय हिन्द। जय भारत।।

~ आज की बुलेटिन कड़ियाँ ~ 














आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। जय हिन्द। जय भारत।।

मंगलवार, 6 अगस्त 2019

60 साल के हुए - पर्यावरण कार्यकर्ता राजेन्द्र सिंह - ब्लॉग बुलेटिन

सभी हिंदी ब्लॉगर्स को नमस्कार। 
राजेन्द्र सिंह
राजेन्द्र सिंह (अंग्रेज़ी: Rajendra Singh, जन्म- 6 अगस्त, 1959, बागपत ज़िला, उत्तर प्रदेश) भारत के प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता हैं। वे जल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करने के लिए प्रसिद्ध हैं। राजस्थान का अलवर ज़िला शुरू से एक सूखा इलाका माना जाता रहा है, जहाँ पानी एक दुर्लभ वस्तु मानी जाती थी। उस दौर में पानी के जलाशय बनाकर उनमें वर्षा का पानी इकट्ठा करके उन्हें सुरक्षित रखना एक पारम्परिक तरीका था, जिससे पानी की कठिनाई को दूर किया जाता था। इन जलाशयों को 'जोहड़' कहा जाता था। विकास के दौर में खदानों और पहाड़ियों के तलहटी के जंगलों की कटाई के काम ने इन जोहड़ों को लगभग खत्म कर दिया। पुरुष ज्यादातर शहर भाग गए और इलाका पानी के गम्भीर संकट में आ गया। राजेंद्र सिंह ने इस संकट की स्थिति को बुनियादी तौर पर समझकर उसे दूर करने की ठानी और "तरुण भारत संघ" की स्थापना की, जिसमें स्वयंसेवी युवकों ने फिर से परम्परागत जोहड़ों की वापसी की, जिससे पानी की समस्या का काफ़ी हद तक हल हो पायी। राजेन्द्र सिंह के इस काम के लिए उन्हें 2001 का 'रेमन मैग्सेसे पुरस्कार' प्रदान किया गया।


आज पर्यावरण कार्यकर्ता राजेन्द्र सिंह जी को 60वें जन्मदिन की ढेर सारी बधाई और शुभकामनाएं। सादर ... अभिनन्दन।। 

~ आज की बुलेटिन कड़ियाँ ~ 













आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर ... अभिनन्दन।। 

सोमवार, 5 अगस्त 2019

नये भारत का उदय - अनुच्छेद 370 और 35A खत्म - ब्लॉग बुलेटिन

सभी हिंदी ब्लॉगर्स को नमस्कार। 
केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर से धारा 370 (Article 370) हटाने का ऐलान कर दिया. इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर को मिला विशेष राज्य का दर्जा भी खत्म हो गया. वहीं सरकार ने जम्मू-कश्मीर को दो हिस्सों में बांटने का ऐलान भी किया. इसके अनुसार जम्मू कश्मीर और लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाया जाएगा. सरकार के इस फैसले को बीजेपी और उसके सहयोगियों के अलावा कुछ विपक्षी पार्टियों ने भी समर्थन किया है. उधर, जम्मू कश्मीर से धारा 370 (Article 370) को हटाए जाने के बाद राज्‍यसभा में जवाब देते गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने कहा कि आर्टिकल 370 (Article 370) के कारण आज जम्मू-कश्मीर के लोग गुरबत की जिंदगी जी रहे हैं. उन्होंने कहा कि इसकी छाया में 3 परिवारों ने आजादी से लेकर आज तक राज्य को लूटा है. उऩ्होंने कहा कि धारा 370 के कारण ही जम्मू कश्मीर में भ्रष्टाचार पला और चरम सीमा पर पहुंचा. उन्होंने कहा कि धारा 370 ने जम्मू कश्मीर, लद्दाख और घाटी के लोगों का बहुत नुकसान किया है.

गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने कहा कि जम्मू कश्मीर में आतंकवाद की जड़ भी 370 (Article 370) है. उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर की जनता जम्हूरियत चाहती है. उन्होंने कहा कि 370 की वजह से ही जम्मू कश्मीर का विकास नहीं हुआ. उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर में गरीबी के पीछे भी धारा 370 ही है. उन्होंने कहा कि 35 A के कारण ही हुनरमंद लोग जम्मू कश्मीर नहीं जाते.

उन्होंने कहा कि हम धर्म की राजनीति नहीं करते हैं. जम्मू कश्मीर में सिर्फ मुस्लिम नहीं रहते हैं. घाटी में मुसलमान, हिंदू, सिख, जैन सभी रहते हैं. उन्होंने कहा कि धारा 370 (Article 370) अच्‍छी है तो सबके लिए है और बुरी है तो सबके लिए बुरी है. अमित शाह ने कहा कि धारा 370 ने जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और घाटी के लोगों का बहुत नुकसान किया है. शरणार्थियों को आज तक नागरिकता नहीं मिली है. उन्होंने कहा कि आर्टिकल 370 (Article 370) अस्थाई था और इसे कभी न कभी हटना था, लेकिन पिछली सरकारों ने वोट बैंक के लिए इसे हटाने की हिम्मत नहीं की. कैबिनेट ने आज हिम्मत दिखाकर और जम्मू-कश्मीर के लोगों के हित के लिए यह फैसला लिया है. उन्होंने कहा कि केंद्र ने पैसा दिया फिर भी जम्मू और कश्मीर का विकास नहीं हुआ.

अमित शाह ने कहा, 'भारत सरकार ने हजारों करोड़ रुपये जम्मू और कश्मीर के लिए भेजे, लेकिन वो भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गए, 370 का उपयोग करके वहां भ्रष्टाचार को कंट्रोल करने वाले कानून लागू नहीं होने दिए गए. हम तो राष्ट्र हित का बिल लेकर आए हैं. आपने इंदिरा जी को इलाहाबाद के जजमेंट से बचाने का संवैधानिक सुधार उसी दिन लाकर, उसी दिन पारित करके देश की डेमोक्रेसी को खत्म किया था. और आज हमें उपदेश देते हैं. आर्टिकल 370 और 35A हटाने से घाटी का, जम्मू का, लद्दाख का भला होने वाला है. आर्टिकल 370 और 35A हटने के बाद जम्मू और कश्मीर भारत का अभिन्न अंग बनने वाला है. आर्टिकल 370 के कारण जम्मू और कश्मीर में पर्यटन व्यवसाय से जुड़ी बड़ी कंपनियां नहीं जा सकती. ये कंपनियां वहां गई तो वहां के लोगों को रोजगार मिलेगा. बड़ी कंपनियां वहां गईं तो पर्यटन बढ़ेगा. लेकिन 370 के कारण ये संभव नहीं है. 370 के कारण जम्मू कश्मीर में देश का कोई बड़ा डॉक्टर नहीं जाना चाहता, क्योंकि वहां वो अपना घर नहीं खरीद सकता, वहां का मतदाता नहीं बन सकता और वहां खुद को सुरक्षित नहीं महसूस करता. 370 आरोग्य में भी बाधक है.'

आर्टिकल 370 है क्‍या और इसके हटाने के क्‍या मायने है? धारा 370 के प्रावधानों के अनुसार, संसद को जम्मू-कश्मीर के बारे में रक्षा, विदेश मामले और संचार के विषय में कानून बनाने का अधिकार है लेकिन किसी अन्य विषय से सम्बन्धित कानून को लागू करवाने के लिए केन्द्र को राज्य सरकार का अनुमोदन चाहिए. इसे आप इस तरह समझ सकते हैं:


  • इसी विशेष दर्जे के कारण जम्मू-कश्मीर राज्य पर संविधान की धारा 356 लागू नहीं होती.
  • इस कारण राष्ट्रपति के पास राज्य के संविधान को बर्खास्‍त करने का अधिकार नहीं है.
  • जम्मू-कश्मीर के नागरिकों के पास दोहरी नागरिकता (भारत और कश्मीर) होती है.
  • भारत की संसद जम्मू-कश्मीर के सम्बन्ध में अत्यन्त सीमित क्षेत्र में कानून बना सकती है.
  • जम्मू-कश्मीर का राष्ट्रध्वज अलग है. वहां के नागरिकों द्वारा भारत के राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान करना अनिवार्य नहीं है.
  • इसके तहत भारतीय नागरिक को विशेष अधिकार प्राप्त राज्यों के अलावा भारत में कहीं भी भूमि खरीदने का अधिकार है. यानी भारत के दूसरे राज्यों के लोग जम्मू-कश्मीर में जमीन नहीं खरीद सकते.
  • भारतीय संविधान की धारा 360 जिसके अन्तर्गत देश में वित्तीय आपातकाल लगाने का प्रावधान है, वह भी जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं होती.
  • जम्मू-कश्मीर की विधानसभा का कार्यकाल 6 वर्षों का होता है जबकि भारत के अन्य राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है.
  • भारत के उच्चतम न्यायालय के आदेश जम्मू-कश्मीर के अन्दर मान्य नहीं होते हैं.
  • जम्मू-कश्मीर की कोई महिला अगर भारत के किसी अन्य राज्य के व्यक्ति से विवाह कर ले तो उस महिला की नागरिकता समाप्त हो जाएगी. इसके विपरीत अगर वह पकिस्तान के किसी व्यक्ति से विवाह कर ले तो उसे भी जम्मू-कश्मीर की नागरिकता मिल जाएगी.
  • धारा 370 की वजह से कश्मीर में आरटीआई और सीएजी (CAG) जैसे कानून लागू नहीं होते हैं.
  • कश्मीर में महिलाओं पर शरियत कानून लागू है.
  • कश्मीर में पंचायत को अधिकार प्राप्त नहीं है.
  • धारा 370 की वजह से ही कश्मीर में रहने वाले पाकिस्तानियों को भी भारतीय नागरिकता मिल जाती है.


(साभार : अमित शाह ने बताई वजह, आर्टिकल 370 और 35A को हटाने का क्यों लिया गया फैसला? देखें उनके पूरा भाषण)

~ आज की बुलेटिन कड़ियाँ ~ 















आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। जय हिन्द। जय भारत।।

शनिवार, 3 अगस्त 2019

जन्मदिवस - मैथिलीशरण गुप्त और ब्लॉग बुलेटिन

सभी हिंदी ब्लॉगर्स को नमस्कार। 
Maithilisharan-Gupt.jpg
मैथिलीशरण गुप्त (अंग्रेज़ी: Maithili Sharan Gupt, जन्म- 3 अगस्त, 1886, झाँसी; मृत्यु- 12 दिसंबर, 1964, झाँसी) खड़ी बोली के प्रथम महत्वपूर्ण कवि थे। महावीर प्रसाद द्विवेदी की प्रेरणा से आपने खड़ी बोली को अपनी रचनाओं का माध्यम बनाया और अपनी कविता के द्वारा खड़ी बोली को एक काव्य-भाषा के रूप में निर्मित करने में अथक प्रयास किया। इस तरह ब्रजभाषा जैसी समृद्ध काव्य भाषा को छोड़कर समय और संदर्भों के अनुकूल होने के कारण नये कवियों ने इसे ही अपनी काव्य-अभिव्यक्ति का माध्यम बनाया। हिन्दी कविता के इतिहास में गुप्त जी का यह सबसे बड़ा योगदान है।



आज मैथिलीशरण गुप्त जी के 133वें जन्म दिवस पर हम सब उनका स्मरण करते हुए उन्हें शत शत नमन करते हैं। 


~ आज की बुलेटिन कड़ियाँ ~ 













आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। जय हिन्द। जय भारत।।

शुक्रवार, 2 अगस्त 2019

जन्मदिवस - जिन्होंने राष्ट्र ध्वज तिरंगा बनाया - पिंगली वेंकैया - ब्लॉग बुलेटिन

सभी हिंदी ब्लॉगर्स को मेरा सादर नमस्कार।
पिंगलि वेंकय्या
पिंगली वेंकैया (अंग्रेज़ी: Pingali Venkayya, जन्म: 2 अगस्त, 1876, आन्ध्र प्रदेश; मृत्यु: 4 जुलाई, 1963) भारत के राष्ट्रीय ध्वज 'तिरंगा' के अभिकल्पक थे। वे भारत के सच्चे देशभक्त, महान् स्वतंत्रता सेनानी एवं कृषि वैज्ञानिक भी थे।

सन 1916 में पिंगली वेंकैया ने एक ऐसे ध्वज की कल्पना की जो सभी भारतवासियों को एक सूत्र में बाँध दे। उनकी इस पहल को एस.बी. बोमान जी और उमर सोमानी जी का साथ मिला और इन तीनों ने मिल कर नेशनल फ़्लैग मिशन का गठन किया। वेंकैया ने राष्ट्रीय ध्वज के लिए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से सलाह ली और गांधी जी ने उन्हें इस ध्वज के बीच में अशोक चक्र रखने की सलाह दी जो संपूर्ण भारत को एक सूत्र में बाँधने का संकेत बने। पिंगली वेंकैया लाल और हरे रंग के की पृष्ठभूमि पर अशोक चक्र बना कर लाए पर गांधी जी को यह ध्वज ऐसा नहीं लगा कि जो संपूर्ण भारत का प्रतिनिधित्व कर सकता है। राष्ट्रीय ध्वज में रंग को लेकर तरह-तरह के वाद-विवाद चलते रहे। अखिल भारतीय संस्कृत कांग्रेस ने सन् 1924 में ध्वज में केसरिया रंग और बीच में गदा डालने की सलाह इस तर्क के साथ दी कि यह हिंदुओं का प्रतीक है। फिर इसी क्रम में किसी ने गेरुआ रंग डालने का विचार इस तर्क के साथ दिया कि ये हिन्दू, मुसलमान और सिख तीनों धर्म को व्यक्त करता है। काफ़ी तर्क वितर्क के बाद भी जब सब एकमत नहीं हो पाए तो सन् 1931 में अखिल भारतीय कांग्रेस के ध्वज को मूर्त रूप देने के लिए 7 सदस्यों की एक कमेटी बनाई गई।


आज पिंगली वेंकैया जी के 143वें जन्म दिवस पर सब उनका स्मरण करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।

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आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। जय हिन्द। जय भारत।।

गुरुवार, 1 अगस्त 2019

जन्म दिवस - पुरुषोत्तम दास टंडन और ब्लॉग बुलेटिन

सभी हिंदी ब्लॉगर्स को मेरा सादर नमस्कार।
पुरुषोत्तम दास टंडन
पुरुषोत्तम दास टंडन (अंग्रेज़ी: Purushottam Das Tandon, जन्म- 1 अगस्त, 1882, इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश; मृत्यु- 1 जुलाई, 1962) आधुनिक भारत के प्रमुख स्वाधीनता सेनानियों में से एक थे। वे 'राजर्षि' के नाम से भी विख्यात थे। उन्होंने अपना जीवन एक वकील के रूप में प्रारम्भ किया था। हिन्दी को आगे बढ़ाने और इसे राष्ट्रभाषा का स्थान दिलाने के लिए पुरुषोत्तम दास जी ने काफ़ी प्रयास किये थे। वे हिन्दी को देश की आज़ादी के पहले आज़ादी प्राप्त करने का साधन मानते रहे और आज़ादी मिल जाने के बाद आज़ादी को बनाये रखने का। वर्ष 1950 में वे 'भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष नियुक्त हुए थे। पुरुषोत्तम दास टंडन को भारत के राजनीतिक और सामाजिक जीवन में नयी चेतना, नयी लहर, नयी क्रान्ति पैदा करने वाला कर्मयोगी कहा गया है। वर्ष 1961 में उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' से भी सम्मानित किया गया था।


आज पुरुषोत्तम दास टंडन जी के 137वें जन्म दिवस पर हम सब उनके अतुलनीय योगदान को याद करते हुए उन्हें शत शत नमन करते हैं।  

~ आज की बुलेटिन कड़ियाँ ~ 




सावधान हो जाओ

Pushpa Priya - The Lady with a Golden Pen


आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर ... अभिनन्दन।। 

मंगलवार, 11 जून 2019

122वीं जयंती - राम प्रसाद 'बिस्मिल' और ब्लॉग बुलेटिन

सभी हिंदी ब्लॉगर्स को नमस्कार। 
राम प्रसाद बिस्मिल
राम प्रसाद 'बिस्मिल' (अंग्रेज़ी: Ram Prasad Bismil, जन्म- 11 जून, 1897 शाहजहाँपुर; मृत्यु- 19 दिसंबर, 1927 गोरखपुर) भारत के महान स्वतन्त्रता सेनानी ही नहीं, बल्कि उच्च कोटि के कवि, शायर, अनुवादक, बहुभाषाविद् व साहित्यकार भी थे जिन्होंने भारत की आज़ादी के लिये अपने प्राणों की आहुति दे दी।

पंडित रामप्रसाद ‘बिस्मिल’ किसी परिचय के मोहताज नहीं। उनके लिखे ‘सरफ़रोशी की तमन्ना’ जैसे अमर गीत ने हर भारतीय के दिल में जगह बनाई और अंग्रेज़ों से भारत की आज़ादी के लिए वो चिंगारी छेड़ी जिसने ज्वाला का रूप लेकर ब्रिटिश शासन के भवन को लाक्षागृह में परिवर्तित कर दिया। ब्रिटिश साम्राज्य को दहला देने वाले काकोरी काण्ड को रामप्रसाद बिस्मिल ने ही अंजाम दिया था।


आज महान स्वतन्त्रता सेनानी राम प्रसाद 'बिस्मिल' जी की 122वीं जयंती पर हम सब उनके सर्वोच्च योगदान का स्मरण करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।

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आज की बुलेटिन में सिर्फ इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। जय हिन्द। जय भारत।।

सोमवार, 27 मई 2019

तीसरा शहादत दिवस - हवलदार हंगपन दादा और ब्लॉग बुलेटिन

सभी हिंदी ब्लॉगर्स को नमस्कार।
हवलदार हंगपन दादा
हवलदार हंगपन दादा (अंग्रेज़ी: Hangpan Dada, जन्म- 2 अक्टूबर, 1979, अरुणाचल प्रदेश; शहादत- 27 मई, 2016, जम्मू और कश्मीर) भारतीय सेना के जांबाज सैनिकों में से एक थे, जिन्होंने आतंकवादियों के साथ लड़ते हुए शहादत प्राप्त की। वे 27 मई, 2016 को उत्तरी कश्मीर के शमसाबाड़ी में आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ में शहीद हुए। वीरगति प्राप्त करने से पूर्व उन्होंने चार हथियारबंद आतंकवादियों को मौत के घाट उतार दिया। इस शौर्य के लिए 15 अगस्त, 2016 को उन्हें मरणोपरांत 'अशोक चक्र' से सम्मानित किया गया। 'अशोक चक्र' शांतिकाल में दिया जाने वाला भारत का सर्वोच्च वीरता पुरस्कार है।


आज हम सब अशोक चक्र विजेता हवलदार हंगपन दादा के तीसरे सर्वोच शहादत दिवस पर उनका स्मरण करते हुए उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। जय हिंद। जय भारत।।

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आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर ... अभिनन्दन।।

शुक्रवार, 24 मई 2019

123वीं जयंती - करतार सिंह सराभा और ब्लॉग बुलेटिन

सभी हिंदी ब्लॉगर्स को नमस्कार। 
करतार सिंह सराभा
करतार सिंह सराभा (अंग्रेज़ी: Kartar Singh Sarabha, जन्म- 24 मई, 1896, लुधियाना; मृत्यु- 16 नवम्बर, 1915) भारत के प्रसिद्ध क्रान्तिकारियों में से एक थे। उन्हें अपने शौर्य, साहस, त्याग एवं बलिदान के लिए हमेशा याद किया जाता रहेगा। महाभारत के युद्ध में जिस प्रकार वीर अभिमन्यु ने किशोरावस्था में ही कर्तव्य का पालन करते हुए मृत्यु का आलिंगन किया था, उसी प्रकार सराभा ने भी अभिमन्यु की भाँति केवल उन्नीस वर्ष की आयु में ही हँसते-हँसते देश के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया। उनके शौर्य एवं बलिदान की मार्मिक गाथा आज भी भारतीयों को प्रेरणा देती है और देती रहेगी। यदि आज के युवक सराभा के बताये हुए मार्ग पर चलें, तो न केवल अपना, अपितु देश का मस्तक भी ऊँचा कर सकते हैं।


आज हम महान क्रांतिकारी करतार सिंह सराभा जी की 123वीं जयंती पर उनका स्मरण करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। सादर।।

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आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर ... अभिनन्दन।।

सोमवार, 20 मई 2019

119वां जन्मदिवस - सुमित्रानंदन पंत जी और ब्लॉग बुलेटिन

सभी हिंदी ब्लॉगर्स को नमस्कार। 
Sumitranandan-Pant.jpg
सुमित्रानंदन पंत (अंग्रेज़ी: Sumitranandan Pant, जन्म: 20 मई 1900; मृत्यु: 28 दिसंबर, 1977) हिन्दी साहित्य में छायावादी युग के चार स्तंभों में से एक हैं। सुमित्रानंदन पंत नये युग के प्रवर्तक के रूप में आधुनिक हिन्दी साहित्य में उदित हुए। सुमित्रानंदन पंत ऐसे साहित्यकारों में गिने जाते हैं, जिनका प्रकृति चित्रण समकालीन कवियों में सबसे बेहतरीन था। आकर्षक व्यक्तित्व के धनी सुमित्रानंदन पंत के बारे में साहित्यकार राजेन्द्र यादव कहते हैं कि 'पंत अंग्रेज़ी के रूमानी कवियों जैसी वेशभूषा में रहकर प्रकृति केन्द्रित साहित्य लिखते थे।' जन्म के महज छह घंटे के भीतर उन्होंने अपनी माँ को खो दिया। पंत लोगों से बहुत जल्द प्रभावित हो जाते थे। पंत ने महात्मा गाँधी और कार्ल मार्क्‍स से प्रभावित होकर उन पर रचनाएँ लिख डालीं। हिंदी साहित्य के विलियम वर्ड्सवर्थ कहे जाने वाले इस कवि ने महानायक अमिताभ बच्चन को ‘अमिताभ’ नाम दिया था। पद्मभूषण, ज्ञानपीठ पुरस्कार और साहित्य अकादमी पुरस्कारों से नवाजे जा चुके पंत की रचनाओं में समाज के यथार्थ के साथ-साथ प्रकृति और मनुष्य की सत्ता के बीच टकराव भी होता था। हरिवंश राय ‘बच्चन’ और श्री अरविंदो के साथ उनकी ज़िंदगी के अच्छे दिन गुजरे। आधी सदी से भी अधिक लंबे उनके रचनाकाल में आधुनिक हिंदी कविता का एक पूरा युग समाया हुआ है।


आज सुमित्रानंदन पंत जी के 119वें जन्मदिवस पर हम सभी उनको शत शत नमन करते हैं। सादर।।

~ आज की बुलेटिन कड़ियाँ ~ 












आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर ... अभिनन्दन।। 

शुक्रवार, 17 मई 2019

विश्व दूरसंचार दिवस और ब्लॉग बुलेटिन

सभी हिंदी ब्लॉगर्स को नमस्कार। 
विश्व दूरसंचार दिवस का लोगो
विश्व दूरसंचार दिवस (अंग्रेज़ी: World Telecom Day) प्रत्येक वर्ष '17 मई' को मनाया जाता है। आधुनिक युग में फोन, मोबाइल और इंटरनेट लोगों की प्रथम आवश्यकता बन गये हैं। इसके बिना जीवन की कल्पना करना बहुत ही मुश्किल हो चुका है। आज यह इंसान के व्यक्तिगत जीवन से लेकर व्यावसायिक जीवन में पूरी तक प्रवेश कर चुका है। पहले जहाँ किसी से संपर्क साधने के लिए लोगों को काफ़ी मशक्कत करनी पड़ती थी, वहीं आज मोबाइल और इंटरनेट ने इसे बहुत ही आसान बना दिया है। व्यक्ति कुछ ही सेकेंड में बेहद असानी से दोस्तों, परिवार और सगे संबधियों से संपर्क साध सकता है। यह दूरसंचार की क्रांति है, जिसकी बदौलत भारत जैसे कुछ विकासशील देशों की गिनती भी विश्व के कुछ ऐसे देशों में होती है, जिनकी अर्थव्यवस्था तेज़ी से रफ्तार पकड़ रही है।


~ आज की बुलेटिन कड़ियाँ ~ 













आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर  .... अभिनन्दन।।

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