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शनिवार, 3 अगस्त 2019

जन्मदिवस - मैथिलीशरण गुप्त और ब्लॉग बुलेटिन

सभी हिंदी ब्लॉगर्स को नमस्कार। 
Maithilisharan-Gupt.jpg
मैथिलीशरण गुप्त (अंग्रेज़ी: Maithili Sharan Gupt, जन्म- 3 अगस्त, 1886, झाँसी; मृत्यु- 12 दिसंबर, 1964, झाँसी) खड़ी बोली के प्रथम महत्वपूर्ण कवि थे। महावीर प्रसाद द्विवेदी की प्रेरणा से आपने खड़ी बोली को अपनी रचनाओं का माध्यम बनाया और अपनी कविता के द्वारा खड़ी बोली को एक काव्य-भाषा के रूप में निर्मित करने में अथक प्रयास किया। इस तरह ब्रजभाषा जैसी समृद्ध काव्य भाषा को छोड़कर समय और संदर्भों के अनुकूल होने के कारण नये कवियों ने इसे ही अपनी काव्य-अभिव्यक्ति का माध्यम बनाया। हिन्दी कविता के इतिहास में गुप्त जी का यह सबसे बड़ा योगदान है।



आज मैथिलीशरण गुप्त जी के 133वें जन्म दिवस पर हम सब उनका स्मरण करते हुए उन्हें शत शत नमन करते हैं। 


~ आज की बुलेटिन कड़ियाँ ~ 













आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। जय हिन्द। जय भारत।।

गुरुवार, 3 अगस्त 2017

राष्ट्रकवि का जन्मदिन और ब्लॉग बुलेटिन

नमस्कार मित्रो,
आज राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त जी का जन्मदिन है. उनका जन्म 03 अगस्त 1886 को चिरगाँव (झाँसी) उत्तर प्रदेश में हुआ था. उनके पिता का नाम सेठ रामचरण और माता का नाम श्रीमती काशीबाई था. इनके पिता कनकलता उपनाम से कविता करते थे और राम के विष्णुत्व में अटल आस्था रखते थे. गुप्त जी को कवित्व प्रतिभा और रामभक्ति पैतृक मिली थी. वे बाल्यकाल में ही काव्य रचना करने लगे थे. उनके एक छंद को पढ़कर उनके पिता ने आशीर्वाद देते हुए कहा था कि तू आगे चलकर हमसे हज़ार गुनी अच्छी कविता करेगा. बाद में यह आशीर्वाद अक्षरशः सत्य हुआ.


उनकी प्रारम्भिक शिक्षा चिरगाँव, झाँसी के राजकीय विद्यालय में हुई. इसके पश्चात् उनका प्रवेश झाँसी के मेकडॉनल हाईस्कूल में करवाया गया किन्तु वहाँ इनका मन न लगा. इस कारण दो वर्ष पश्चात् घर पर शिक्षा का प्रबंध किया गया. इन्होंने घर पर ही संस्कृत, हिन्दी तथा बांग्ला साहित्य का व्यापक अध्ययन किया. वे स्वभाव से लोकसंग्रही कवि थे और अपने युग की समस्याओं के प्रति संवेदनशील भी थे. लाला लाजपतराय, बाल गंगाधर तिलक, विपिनचंद्र पाल, गणेश शंकर विद्यार्थी और मदनमोहन मालवीय उनके आदर्श रहे. बाद में महात्मा गांधी, राजेन्द्र प्रसाद, जवाहर लाल नेहरू और विनोबा भावे के सम्पर्क में आने के कारण वह सुधारवादी आंदोलनों के समर्थक बने.

मुंशी अजमेरी और महावीर प्रसाद द्विवेदी का इनके लेखन पर गहरा प्रभाव था. मुंशी अजमेरी ने इनकी काव्य-प्रतिभा को निखारा तो महावीर प्रसाद द्विवेदी की प्रेरणा से आपने खड़ी बोली को अपनी रचनाओं का माध्यम बनाया. 1909 में उनका पहला काव्य जयद्रथ-वध आया. इसकी लोकप्रियता ने उन्हें लेखन और प्रकाशन की प्रेरणा दी. अपने साहित्यिक गुरु महावीर प्रसाद द्विवेदी की प्रेरणा से इन्होंने भारत-भारती की रचना की. भारत-भारती के प्रकाशन से ही इनको  अत्यंत प्रसिद्धि मिली. इस कृति के प्रकाशन पश्चात् गांधी ने मैथिली काव्य–मान ग्रन्थ भेंट करते हुए उन्हें राष्ट्रकवि का सम्बोधन दिया. 59 वर्षों में गुप्त जी ने गद्य, पद्य, नाटक, मौलिक तथा अनूदित आदि सहित हिन्दी को 74 रचनाएँ प्रदान की. इनमें दो महाकाव्य, 20 खंडकाव्य, 17 गीतिकाव्य, चार नाटक और गीतिनाट्य हैं. मैथिलीशरण गुप्त जी को 1952 में राज्यसभा का सदस्य मनोनीत किया गया. सन 1954 में उन्हें पद्मभूषण से सम्मानित किया गया. हिन्दी साहित्य को अनमोल कृतियाँ देने वाले मैथिलीशरण गुप्त जी का देहावसान 12 दिसंबर 1964 को चिरगांव में ही हुआ.

(मैथिलीशरण गुप्त जी के बारे में विस्तार से जानने के लिए पढ़ें)

आज उनकी जन्मतिथि पर उनको बुलेटिन परिवार की ओर से विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए बुलेटिन आपके सामने प्रस्तुत है.

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बुधवार, 3 अगस्त 2016

जन्मदिवस - मैथिलीशरण गुप्त और ब्लॉग बुलेटिन

सभी ब्लॉगर मित्रों को मेरा सादर नमस्कार।
मैथिलीशरण गुप्त जी का जन्म 3 अगस्त 1886 चिरगाँव,झाँसी, उत्तर प्रदेश में हुआ था। संभ्रांत वैश्य परिवार में जन्मे मैथिलीशरण गुप्त के पिता का नाम 'सेठ रामचरण' और माताका नाम 'श्रीमती काशीबाई' था। पिता रामचरण एक निष्ठावान प्रसिद्ध राम भक्त थे।  इनके पिता 'कनकलता' उप नाम से कविता किया करते थे और राम के विष्णुत्व में अटल आस्था रखते थे। गुप्त जी को कवित्व प्रतिभा और राम भक्ति पैतृक देन में मिली थी। वे बाल्यकाल में ही काव्य रचना करने लगे। पिता ने इनके एक छंद को पढ़कर आशीर्वाद दिया कि "तू आगे चलकर हमसे हज़ार गुनी अच्छी कविता करेगा" और यह आशीर्वाद अक्षरशः सत्य हुआ। मुंशी अजमेरी के साहचर्य ने उनके काव्य-संस्कारों को विकसित किया। उनके व्यक्तित्व में प्राचीन संस्कारों तथा आधुनिक विचारधारा दोनों का समन्वय था। मैथिलीशरण गुप्त जी को साहित्य जगत में 'दद्दा' नाम से सम्बोधित किया जाता था।

[ साभार : http://bharatdiscovery.org/india/मैथिलीशरण_गुप्त ]


आज महान कवि स्वर्गीय मैथिलीशरण गुप्त जी के 130वें जन्म दिवस पर हम सब उन्हें याद करते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।

अब चलते हैं आज कि बुलेटिन की ओर ...

आरक्षण और उसकी आवश्यकता

गृहस्थी की धुरी पर संघर्षधर्मा स्त्री का दस्‍तावेज

त्याग पत्र का सही समय

पूर्व मुख्यमंत्री और आवास

आप हिंदी से कितना प्यार करते हैं, गूगल को बताएं...

चंद्रबदनी मंदिर और लंबगांव की ओर

वेलकम टू उत्तरप्रदेश


आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे, तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर ... अभिनन्दन।।

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