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शुक्रवार, 7 जून 2019

क्यों है यह हाल मेरे (प्र)देश में - ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |

आज एक सवाल है आप सब से ... क्यों है यह हाल मेरे (प्र)देश में ...


सादर आपका

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😥 क्या हुआ है आज मेरे देश को ... ! 😔

Justice for Twinkle.

रात

ऊष्मा

एक ऐसा शायर जो ताउम्र आग से खेलता रहा

लम्हा भर रोशनी

उजाले तेरी यादों के

दहकते शोले.....

615. नहीं आता

आपकी सांस्कृतिक पूँजी

गुरु दक्षिणा की अद्भुत मिसाल 'राष्ट्रीय हिन्दी विकास सम्मेलन'

बैरी पवन दे गई धोखा

सुंदरता का पैमाना गोरा रंग ही क्यों??

किटी पार्टी, कुछ रोचक जानकारियां

कविता: अनुनय

 ~~~~~~~~~~~~~~~~~
अब आज्ञा दीजिए ... 

जय हिन्द !!!

शनिवार, 25 मई 2019

स्व.रासबिहारी बोस जी की १३३ वीं जयंती - ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |
भारत के महान क्रान्तिकारी एवं स्वतंत्रता-संग्राम-नेता : रासबिहारी बोस

रासबिहारी बोस (बांग्ला: রাসবিহারী বসু, जन्म:२५ मई, १८८६ - मृत्यु: २१ जनवरी, १९४५) भारत के एक क्रान्तिकारी नेता थे जिन्होने ब्रिटिश राज के विरुद्ध गदर षडयंत्र एवं आजाद हिन्द फौज के संगठन का कार्य किया। इन्होंने न केवल भारत में कई क्रान्तिकारी गतिविधियों का संचालन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी, अपितु विदेश में रहकर भी वह भारत को स्वतन्त्रता दिलाने के प्रयास में आजीवन लगे रहे। दिल्ली में तत्कालीन वायसराय लार्ड चार्ल्स हार्डिंग पर बम फेंकने की योजना बनाने, गदर की साजिश रचने और बाद में जापान जाकर इंडियन इंडिपेंडेस लीग और आजाद हिंद फौज की स्थापना करने में रासबिहारी बोस की महत्वपूर्ण भूमिका रही। यद्यपि देश को स्वतन्त्र कराने के लिये किये गये उनके ये प्रयास सफल नहीं हो पाये, तथापि स्वतन्त्रता संग्राम में उनकी भूमिका का महत्व बहुत ऊँचा है।


निधन 
भारत को ब्रिटिश शासन की गुलामी से मुक्ति दिलाने की जी-तोड़ मेहनत करते हुए किन्तु इसकी आस लिये हुए २१ जनवरी, १९४५ को इनका निधन हो गया। उनके निधन से कुछ समय पहले जापानी सरकार ने उन्हें आर्डर आफ द राइजिंग सन के सम्मान से अलंकृत भी किया था।
आज स्व॰ श्री रासबिहारी बोस जी की १३३ वीं जयंती के अवसर पर  ब्लॉग बुलेटिन टीम और हिन्दी ब्लॉग जगत की ओर से हम सब उनको शत शत नमन करते है !
सादर आपका
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दुर्घटना से बचाव भला ---------mangopeople

हे! ईश्वर

३६०.गाँव पर कविता

बोनसाई

गांधीजी का छल

सूरत हादसा ...भावभीनी श्रद्धांजलि... वे अभी बच्चे ही तो थे - डॉ शरद सिंह

भाजपा की जीत पर

संसृति की मादकता

जब परिचित लोगों में ज़्यादा संख्या मरे हुओं की हो जाती है

भारत में उद्देश्यहीन विपक्ष का कोई भविष्य नहीं -सतीश सक्सेना

मोदी 2.0

~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
अब आज्ञा दीजिए ... 

जय हिन्द !!!

रविवार, 9 सितंबर 2018

पुलिस और पत्नी में समानताऐं

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |

क्या आप जानते है कि पुलिस और पत्नी में कुछ समानताऐं  पाई जाती हैं ... आइये आपको बताते हैं ...

1. ना इनकी दोस्ती अच्छी और ना ही दुश्मनी।

2. इनसे बनाकर रखना मजबूरी है।

3. इनका पता नहीं कब बिगङ जाऐं।

4. अगर ये प्यार से बात करे तो अलर्ट हो जाऐं।

5. दोंनों ही खतरनाक धमकी देते हैं।

6. इनसे बहस में जीतना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है।

7. ये पहला हिसाब याद रखते हैं।

8. अपने राज कभी नहीं खोलते।

9. इनको जबरदस्ती तारीफ चाहिए।

10. इनसे पंगा लेना खतरनाक साबित हो सकता है।

11. विरोध मौका देखकर करते हैं।

12. सुन भले ही लें आपकी लेकिन करेंगे मन की ही।

13. ये दुश्मन से भी ज्यादा खतरनाक साबित हो सकते हैं।

14. प्यार में लेकर भी वार करते हैं।

15. दोंनों ही रौब से काम लेते हैं।

16. अपना राज इन्हें बताना खतरनाक साबित हो सकता है।

17. इनकी नजर जेब पर ही रहती है।


इन के अतिरिक्त यदि आप को भी कोई समानता दिखे तो कृपया बतावें |

सादर आपका
शिवम् मिश्रा

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पहले स्वयं को जाँच ले की हम कितने प्राकृतिक कर्म करतें हैं --------mangopeople

मोल्ठी #2 :बस्ग्याल तभी मनेलु जब छोया फुट्ला(बरसात तभी मानी जायेगी जब छोया फूटेंगे)

खामोशियों की जुबान

सखी री मैं उनकी दिवानी

अमर शहीद कैप्टन विक्रम 'शेरशाह' बत्रा जी की ४४ वीं जयंती

घुटने के दर्द ,सूजन से मुक्ति के उपाय

428. भाषा

दिवालिया दिल

खमोशी : हलचल

गिरकर उठने का सुख !

धिना धिन धा !!

ज़िन्दगी आग हैं पानी डालते रहिये

" ज़िंदगी का तर्जुमा ....."

सुनो मेरे मन मितवा

बंधन

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अब आज्ञा दीजिये ... 

जय हिन्द !!!

रविवार, 5 अगस्त 2018

हैप्पी फ्रेंड्शिप डे - ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |

एक बार दो दोस्तों को स्कूल में पहले पीरियड से ले कर लंच तक क्लास के बाहर रहने की सज़ा मिली, सज़ा के दौरान ही दोनों ने तय किया कि लंच के बाद स्कूल से भाग किसी होटल में खाना खाने जाएंगे | लंच हुआ आर ये दोनों दोस्त स्कूल से भाग कर होटल पहुंचे और वेटर को एक प्लेट बटर चिकन लाने के लिए कहा। 

जब वेटर बटर चिकन लेकर आया तो एक दोस्त ने झट से चिकन का बड़ा टुकड़ा उठा लिया और खाना शुरू कर दिया।

यह देख कर दूसरे दोस्त को बहुत बुरा लगा और बोला, "तुम्हें खाने में थोड़ा धैर्य रखना चाहिए और खाने की मेज़ पर थोड़ी तमीज से पेश आना चाहिए।"

यह सुन पहला दोस्त बोला, "अच्छा अगर तुम्हें पहले चिकन उठाने का मौका मिलता तो तुम कौन सा टुकड़ा उठाते?"

दूसरे दोस्त ने बड़ी सहजता से जवाब दिया, "मैं निसंदेह ही छोटे वाला टुकड़ा उठता।"

यह सुन पहला दोस्त बोला, "जब तुम्हें छोटा टुकड़ा ही खाना था, तो अब तुम किस बात के लिए इतना तड़प रहे हो? चुप-चाप खाओ ना।"

दरअसल पक्की दोस्ती कुछ ऐसी ही होती है ... सारी शरारतें और मस्तियों ... के बीच जब भी मौका मिले एक दूसरे की भी खिंचाई कर दी ... बिलकुल मौके पर चौका !!

आज फ्रेंड्शिप डे पर सभी मित्रों को हार्दिक शुभकामनाएं |

सादर आपका
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दोस्ती क्या है?

दिलों को जोड़ती है दोस्ती - डॉ शरद सिंह

जब दोस्त, दोस्त के लिए पथरीली राहों पर चला नंगे पांव

मित्रता दिवस

दोस्ती

कोई दोस्त है ना रकीब है....

मितान-मितानिन

मित्र

दोहे "कभी न टूटे मित्रता" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मित्र छाँव है, पूरा एक गाँव है !

भीड़ में थे जब अकेले,तन्हा दोस्तों को साथ अपने खड़ा पाया

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अब आज्ञा दीजिये ...

जय हिन्द !!!

सोमवार, 9 जुलाई 2018

सिने जगत के दो दिग्गजों को समर्पित ९ जुलाई

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |

आज ९ जुलाई है ... आज का दिन समर्पित है हिन्दी सिने जगत के दो दिग्गज कलाकारों के नाम ... गुरु दत्त साहब और संजीव कुमार साहब | संयोग से आज इन दोनों की ही जयंती है |

अपनी बेजोड़ अदाकारी के दम पर इन दोनों की अभिनेताओं ने हिन्दी सिने जगत में अपना एक अलग मुकाम हासिल किया |

लोग आज भी इन दोनों अभिनेताओं की अभिनय क्षमता की मिसालें देते नहीं थकते| आइये जानते हैं इन के बारे में ...


गुरु दत्त (वास्तविक नाम: वसन्त कुमार शिवशंकर पादुकोणे, जन्म: 9 जुलाई, 1925 बैंगलौर, निधन: 10 अक्टूबर, 1964 बम्बई) हिन्दी फ़िल्मों के प्रसिद्ध अभिनेता,निर्देशक एवं फ़िल्म निर्माता थे। उन्होंने 1950वें और 1960वें दशक में कई उत्कृष्ट फ़िल्में बनाईं जैसे प्यासा,कागज़ के फूल,साहिब बीबी और ग़ुलाम और चौदहवीं का चाँद। विशेष रूप से, प्यासा और काग़ज़ के फूल को टाइम पत्रिका के 100 सर्वश्रेष्ठ फ़िल्मों की सूचि में शामिल किया गया है और साइट एन्ड साउंड आलोचकों और निर्देशकों के सर्वेक्षण द्वारा, दत्त खुद भी सबसे बड़े फ़िल्म निर्देशकों की सूचि में शामिल हैं। उन्हें कभी कभी "भारत का ऑर्सन वेल्स" (Orson Welles) ‍‍ भी कहा जाता है। 2010 में, उनका नाम सीएनएन के "सर्व श्रेष्ठ 25 एशियाई अभिनेताओं" के सूचि में भी शामिल किया गया। गुरु दत्त 1950वें दशक के लोकप्रिय सिनेमा के प्रसंग में, काव्यात्मक और कलात्मक फ़िल्मों के व्यावसायिक चलन को विकसित करने के लिए प्रसिद्ध हैं। उनकी फ़िल्मों को जर्मनी, फ्रांस और जापान में अब भी प्रकाशित करने पर सराहा जाता है।
10 अक्टूबर 1964 की सुबह को गुरु दत्त पेढर रोड बॉम्बे में अपने बेड रूम में मृत पाये गये। ऐसा कहा जाता है कि उन्होंने पहले खूब शराब पी उसके बाद ढेर सारी नींद की गोलियाँ खा लीं। यही दुर्घटना उनकी मौत का कारण बनी। इससे पूर्व भी उन्होंने दो बार आत्महत्या का प्रयास किया था। आखिरकार तीसरे प्रयास ने उनकी जान ले ली।


संजीव कुमार (मूल नाम : हरीभाई जरीवाला; जन्म: 9 जुलाई 1938, मृत्यु: 6 नवम्बर 1985) हिन्दी फ़िल्मों के एक प्रसिद्ध अभिनेता थे। उनका पूरा नाम हरीभाई जरीवाला था। वे मूल रूप से गुजराती थे। इस महान कलाकार का नाम फ़िल्मजगत की आकाशगंगा में एक ऐसे धुव्रतारे की तरह याद किया जाता है जिनके बेमिसाल अभिनय से सुसज्जित फ़िल्मों की रोशनी से बॉलीवुड हमेशा जगमगाता रहेगा। उन्होंने नया दिन नयी रात फ़िल्म में नौ रोल किये थे। कोशिश फ़िल्म में उन्होंने गूँगे बहरे व्यक्ति का शानदार अभिनय किया था। शोले फ़िल्म में ठाकुर का चरित्र उनके अभिनय से अमर हो गया।
उन्हें श्रेष्ठ अभिनेता के लिए राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार के अलावा फ़िल्मफ़ेयर क सर्वश्रेष्ठ अभिनेता व सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता पुरस्कार दिया गया। वे आजीवन कुँवारे रहे और मात्र 47 वर्ष की आयु में सन् 1984 में हृदय गति रुक जाने से बम्बई में उनकी मृत्यु हो गयी। 1960 से 1984 तक पूरे पच्चीस साल तक वे लगातार फ़िल्मों में सक्रिय रहे।
उन्हें उनके शिष्ट व्यवहार व विशिष्ट अभिनय शैली के लिये फ़िल्मजगत में हमेशा याद किया जायेगा।

ब्लॉग बुलेटिन टीम और हिन्दी ब्लॉग जगत की ओर से इन दोनों महान कलाकारों को शत शत नमन |

सादर आपका 
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मेरी पहली रचना

राग बोती ग़ज़ल

संजीव कुमार: इस मोड़ से जाते हैं....!

जो न मिल सके वही बेवफा, ये बड़ी अजीब सी बात है

कार्टून :- जेल में मर्डर

परदे न हों तो दीप जलाते नहीं ... सुनो ...

ईश्वरीय प्रतिमान .......

क्रिकेट के कुछ अजीबो-गरीब नियम !

दरदी बंधु

तुम्हारी नज़र में दिल्ली क्या है ?

गुरु दत्त साहब की ९३ वीं जयंती

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अब आज्ञा दीजिये ...

जय हिन्द !!!

मंगलवार, 31 अक्टूबर 2017

जब तक हम अनुभवों से नहीं गुजरते, तब तक सिर्फ रोते हैं !




"जब तक मैं उस आदमी से नहीं मिली थी जिसके पाँव नहीं थे, मैं मेरे पास जूते न होने पे बहुत रोती थी।"हेलेन केलर

जब तक हम अनुभवों से नहीं गुजरते, तब तक सिर्फ रोते हैं, 
अपना दुःख सबसे बड़ा लगता है !
जब तक अपना दुःख सबसे बड़ा लगे, समझो - दर्द को तुमने जिया ही नहीं, उससे रिश्ता बनाया ही नहीं  ... 


रविवार, 15 अक्टूबर 2017

८६ वीं जयंती पर डॉ॰ कलाम साहब को ब्लॉग बुलेटिन का सलाम

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |
"मेरा संदेश, विशेष रूप से युवाओं के लिए, है कि वे अलग सोचने का साहस रखें, आविष्कार करने का साहस रखें, अनदेखे रास्तों पर चलने का साहस रखें, असंभव को खोजने और समस्याओं पर जीत हासिल करके सफल होने का साहस रखें। ये महान गुण हैं जिनके लिए उन्हें ज़रूर काम करना चाहिए। युवाओं के लिए ये मेरा सन्देश है।"
- डॉ॰ ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम
 ब्लॉग बुलेटिन टीम और हिन्दी ब्लॉग जगत की ओर से आज पूर्व राष्ट्रपति डॉक्टर ए पी जे अब्दुल कलाम साहब को उनकी ८६ वीं जयंती पर हम सब शत शत नमन करते हैं|
सादर आपका
 
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झटपट खजूर - नट बम.

शिकारी माता देवी मन्दिर यात्रा

अपना घर

बारात में चलाये जाने वाले पटाखे क्यूँ नहीं नुकसान पहुँचाते?

अधिरचना की प्रणाली में राज्य - १

दर-ब-दर

कंचनगढ़ की गुफा

लाहुल स्पीती यात्रा वृत्तांत -- 6 (रोहतांग पास, मनाली )

रघुपति भगति सजीवनि मूरी

बादलों की ओट धरकर सूर्य ने ले ली जल-समाधि...

पूर्व राष्ट्रपति डॉक्टर ए पी जे अब्दुल कलाम साहब की ८६ वीं जयंती

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अब आज्ञा दीजिये ...

जय हिन्द !!!

सोमवार, 30 मई 2016

मिट्टी के घड़े - ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |

"उन घरों में जहाँ मिट्टी के घड़े रहते हैं;
क़द में छोटे हों मगर लोग बड़े रहते हैं..."

सादर आपका
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सुन जीवन !

लोग अपनों के हुनर पर फब्तियां कसने लगे

सन्डे क्रिकेट- पार्ट टू [पार्ट वन- "सन्डे मैच- त्यागी उवाच की सेंचुरियन पोस्ट"]

स्कूल फीस और लोकतान्त्रिक तानाशाही

कलम नहीं चला पाई

वो

ईमानदार सरकार के शानदार दो साल

जवान होता एक बूढ़ा घर..

नारी शोषण

दोहे !

एक पाती विद्यार्थियों के नाम 

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अब आज्ञा दीजिये ...

जय हिन्द !!!

शनिवार, 16 मार्च 2013

यह कमीशन खोरी आखिर कब तक चलेगी - ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम !

लीजिये आज एक लतीफा पढ़िये ... वैसे काफी हद तक यह एक सच्चाई भी है ... हमारे देश मे ... अक्सर सरकारी काम ऐसे ही निबटाया जाता है यहाँ !

तीन ठेकेदार एक पुलिया की मरम्मत के ठेके के लिए बोली लगाने पहुंचे। अधिकारी उन्हें उस पुलिया पर ले गया जिसकी मरम्मत होनी थी।
 पहले ठेकेदार ने जेब से फीता निकाला, कुछ नापतौल की, कैलकुलेटर पर कुछ हिसाब लगाया और बोला – मैं इस काम को 90000 रुपए में कर दूंगा। 40000 सामग्री के लिए, 40000 मजदूरों के लिए और 10000 मेरे लिए।

दूसरे ठेकेदार ने भी नाप तौल की, कुछ हिसाब लगाया और बोला – 70000 रुपए। 30000 सामग्री के लिए और 30000 मजदूरी के। बाकी 10000 मेरे।

तीसरे ठेकेदार ने न नापतौल की न हिसाब लगाया। अधिकारी के कान के पास मुंह ले जाकर कहा – 270000 रुपए।

अधिकारी बोला – देख नहीं रहे। दूसरा 70000 में करने को तैयार है । कुछ नापतौल तो करो, हिसाब तो लगाओ तब बोलो।

तीसरा ठेकेदार फिर उसके कान में फुसफुसाया – पूरी बात तो सुनिए …… । एक लाख मेरे, एक लाख आपके और 70000 दूसरे वाले ठेकेदार के लिए जो यह काम करके देगा।

और ठेका तीसरे ठेकेदार को दे दिया गया….

अब सवाल यह पैदा होता है कि आखिर कब तक अपने देश मे निर्माण इस तरह से होते रहेंगे ... कब तक यह कमीशन खोरी चलती रहेगी !? 

अब चलते है आज की बुलेटिन की ओर !

सादर आपका 


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रविवार, 10 मार्च 2013

गर्मी आ गई... ब्‍लॉग बुलेटिन

मित्रों, आज कल कितनी गर्मी पडनें लगी है, मार्च महिने से ही गर्मी के इस रूप से अंदाज़ा लगा सकते हैं की आगे क्या हाल होनें वाला है। इस गर्मी में हमारी हालत न बिगडे उसके लिए अभी से थोडी तैयारी करना ही समझदारी होगी।



लू से बचें


गर्मियों में यदि आप बाहर निकलते हैं तो लू लगना एक आम बात है,  इसकी सबसे बड़ी वजह है शरीर में पानी की कमी होना। इसलिए ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं और अपनें शरीर को सीधे धूप से बचाएं। हो सके तो सन-ग्लासेस लगाएं और सर पर टोपी लगाएं। गर्म हवाओं से बचें। 

कुछ घरेलू उपाय:

  • गर्मियों में कच्चे आम का शर्बत पन्ना  पीना चाहिए। यह लू से बचानें का एक रामबाण तरीका है
  • यदि घर से बाहर निकलना ही है तो फ़िर एक पानी की बोतल ले कर चलें, एक एक घूंट पानी पीते चलें और शरीर में पानी की कमी न होनें दे
  • छाता लेकर चलें, कभी कभी यह सम्भव नहीं होता लेकिन प्रयास करें
  • सलाद की मात्रा बढाएं, कच्चा प्याज़, खीरा और ककडी बहुत फ़ायदे मंद हैं
  • लू से बचने के लिए बेल या नींबू का शर्बत भी पीया जा सकता है। यह आपके शरीर में पानी की कमी को पूरा करता है।
  • बाहर से आने के बाद तुरंत पानी नहीं पीएं। जब आपके शरीर का तापमान सामान्य हो जाए तभी पानी पीएं।
  • याद रखें साफ़ और स्वच्छ पानी ही पिएं। 

खान-पान का ध्यान

  • मसालेदार भोजन से परहेज़ करें, भोजन को पचनें दें और जब भूख लगे तभी खाएं
  • भोजन में फ़ाईबर युक्त खाद्य-पदार्थ की मात्रा बढा दें
  • छाछ और दही एक बार अवश्य लें
  • सादा पानी आपको तरोताजा रखनें के लिए अहम है सो पानी पिए और स्वस्थ रहें
  • धनियां और पुदीना भी पेट को ठीक रखते हैं 
  • किसी भी तरह की अपच,अजीर्णता, पित्त की अधिकता, पेट दर्द, गैस में जलजीरा लाभकारी होता है। 
  • खूब खाईए लेकिन पचनें योग्य, तेल और मसाले से परहेज़ कीजिए... 

अपनें शरीर को साफ़ रखें, पसीना घमौरी, खुजली और त्वचा सम्बन्धी रोग उत्पन्न करता है सो बचाव करें... 

याद रखिए सावधानी ही बचाव है। 
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चलिए अब हम अपने बुलेटिन की ओर बढते हैं
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बुरा न मानो होली है ...:):)

स्वप्न मञ्जूषा at काव्य मंजूषा
अविनाश वाचास्पत्ति : बड़े नटखट है नुक्कड़ वाले भईया                               का करें ब्लॉग लिखईया होSS ... रविन्द्र प्रभात : तन मन तेरे रंग रंगूँगा                     साया बना तुझे संग चलूँगा                     सेवा करूँगा, मेवा भी दूँगा                     परिकल्पना तू है साजना SSS  समीर लाल : अभी न जाओ छोड़ कर                   के दिल अभी भरा नहीं                   अभी
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कुछ मेरी कलम से और रंजू......

वन्दना अवस्थी दुबे at अपनी बात...
रंजू की किताब मुझे लगभग बीस दिन पहले मिल गयी थी..... सपरिवार पाठ भी हो गया. लेकिन "कुछ मेरी कलम से’ के बारे में लिखने आज बैठी हूं. उम्मीद है रंजू माफ़ कर देगी ...बल्कि कर ही दिया होगा अपने किसी की किताब मिलने पर मैं उसे बहुत देर तक हाथ में लेकर बैठी रह जाती हूं... बहुत अपना सा अहसास होता है. रंजू की किताब के साथ भी ऐसा ही हुआ कितनी देर तक तो बस कवर ही देखती रही. जब भी कवितायें पढती हूं तो चमत्कृत होती हूं. समझ में ही नहीं आता कि कवि/कवियित्री कैसे इतने गहरे भाव चंद शब्दों में भर देते हैं? रंजू की कवितायें भी चमत्कृत करती हैं. कई कविताएं तो बार-बार पढने का मन करता है, पढी भी हैं. कु...more »

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शिक्षकों की भूमिका और भविष्य की तैयारी...

वृजेश सिंह at बसंत के बिखरे पत्ते 
महान वैज्ञानिक आइंसटाइन नें कहा था कि "कल्पना ज्ञान से भी ज्यादा शक्तिशाली है।" अपने मन की कल्पनाओं को साकार करने की प्रक्रिया में इंसान नें तमाम आविष्कार किए और खूबसूरत चीजों का निर्माण किया। साइकिल का आविष्कार मैकमिलन नें किया, बल्ब का आविष्कार एडीशन नें किया। एक सहज सा सवाल मन में आता है कि उन्होनें यह आविष्कार क्यों किए ? शायद मैकमिलन लोगों के जीवन की रफ्तार को बढ़ाना चाहते थे। मशीन के माध्यम से रफ़्तार को इंसानी जिंदगी का हिस्सा बनाना चाहते थे। एडिशन लोगों की जिंदगी में रौशनी लाना चाहते थे। अपने आविष्कार की सफलता तक पहुंचने के लिए एडीशन नें सैकड़ों असफल प्रयोग किए, लेकिन हार ... more »

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तेरा अहसास....

* * *तुमसे मिलने का वो पहला अहसास* *तुमसे बार-बार मिलने को उकसा गया .....* *तुम्हारी बातों का वो सिलसिला * *मेरी नज़रों में तुम्हे खास बना गया .......* *शुक्रगुजार हूँ उन कायनातों का मैं * *जिसने मुझे तुमसे मिलाया .......* *बेरंग उदास जीवन में मेरे * *प्यार के रंग ले आया* *कुछ अफ़सोस सी थी जिन्दगी .......* *कुछ अधूरे से पलछिन थे .....* *कई जागती रातों में * *कई अधूरे सपने थे ........* *तुमने आकर जैसे * *मौसम की करवट ही बदल दी .......* *खामोश जुबान को मेरे लफ्ज दे दिए-- गुनगुनाने को* *सपनों में रंग भर दिए -- मुस्कुराने को* *अब गुजारिश है उन कायनातों से .......* *दे दुआएँ ऐसी की* *जीवन का य... more »

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यादों के फूल.....

रश्मि शर्मा at रूप-अरूप 
मुझे बेहद पसंद है् पलाश के फूल...जब भी देखती हूं.....बि‍ना पत्‍ते के लाल-लाल.....दग्‍ध पलाश, मुझे लगता है इसके पीछे कोई ऐसी कहानी रही होगी....लोक कथा.....दंत कथा....जि‍से समय के साथ सबने भुला दि‍या..........कि एक बेहद खूबसूरत राजकुमार थी। एक बार वह आखेट के दौरान सखि‍यों के संग प्‍यास बुझाने जंगल में झील के कि‍नारे गई......वहीं उसने देखा उसे, और प्‍यार जो गया उससे। वो था ही इतना खूबसूरत.....बि‍ल्‍कुल कि‍सी युवराज सा.... दोनों की आंखें मि‍ली......लगा...पसंद करते हैं एक-दूजे को.....मन ही मन प्रण लि‍या, कि मि‍लेंगे...... कई मुलाकातें....प्‍यार परवान चढ़ा........वहीं झील का कि‍नारा उनक...more »
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सबसे ख़तरनाक होता है

Randhir Singh Suman at लो क सं घ र्ष ! 
*सबसे ख़तरनाक होता है* *हमारे सपनों का मर जाना कुछ भी बन बस कायर मत बन।* *पाश की यह लाइन जीने की कला सिखाती है भारतीय शिक्षा आन्दोलन की शुरुआत डोरैजियो नाम के एक आयरिश और बंगाली पिता-- माता की संतान से मिलती है | जो 1830 के आस -- पास बंगाल में एक युवा शिक्षक व सामाजिक कार्यकर्ता था जो नौजवानों के बीच में प्रगतिशील सक्रियता के लिए इतना लोकप्रिय था | उसे नौकरी से निकाल दिया गया वो क्रांतिकारी नौजवान अल्प आयु में ही काल कलवित हो गया | परन्तु उसके दिए गये विचारों के मशाल को उसके शिष्यों ने उस काल परिवेश में आगे बढाया |* 1857 के बाद भारतीय पुर्न जागरण दौर आता है | उस काल खण्ड में मुख्यत:... more »

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एक मुलाकात

रश्मि प्रभा... at परिकल्पना
दीप्ति नवल का व्यक्तित्व बहुआयामी है| वे कवयित्री और चित्रकार होने के साथ साथ एक कुशल छायाकार भी हैं| इसके अतिरिक्त उन्हें संगीत से भी बहुत लगाव है और वे खुद भी कई वाद्य यंत्र बजा लेती हैं| उनकी प्रकाशित पुस्तकों में लम्हा-लम्हा मील का पत्थर साबित हुई ... उसे पढना - लम्हे को जीने जैसा है ! अपनी ही ज़िन्दगी से कुछ रौशनी लिए हम अजनबी रास्तों से पहचान बनाते हैं = कलम को वादियों में डुबो लिखते हैं अभिनीत चेहरे से परे - *अजनबी / दीप्ति नवल* अजनबी रास्तों पर पैदल चलें कुछ न कहें अपनी-अपनी तन्हाइयाँ लिए सवालों के दायरों से निकलकर रिवाज़ों की सरहदों के परे हम यूँ ही साथ चलते रहें कुछ... more 
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ए शो बाई सुपर स्टार्स ऑफ एल के जी( A Show By Superstars of LKG)

माधव( Madhav) at माधव 
माधव के स्कुल मे कल कल्चरल प्रोग्राम हुआ . फाइनेंशियल ईयर का आखिरी महीना मार्च होने के चलते मेरा ऑफिस शनिवार को भी खुल रहा है . माधव के प्रोग्राम को देखने के लिए मैंने विशेष अनुरोध कर छुट्टी ली. माधव को लेकर हम तीन बजे स्कुल पहुचे. स्कुल मे बच्चों का मेक अप किया गया . कल्चरल प्रोग्राम शाम को पांच बजे शुरू हुआ . प्रोग्राम बहुत सुन्दर और आकर्षक था . माधव ने एक Rhyme( Five Little Ducks) और एक Play ( Story of Ant & Bird) किया . इसके अलावा Grand Finale मे भी भाग लिया . माधव को स्टेज पर एक्ट करता देख बहुत अच्छा लगा .
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आरम्भ से - अशोक आंद्रे

रश्मि प्रभा... at वटवृक्ष 
Sunday, August 28, 2011 अशोक आंद्रे *साकार करने के लिए * [image: [scan0004.jpg]] कविताएँ रास्ता ढूंढती हैं पगडंडियों पर चलते हुए तब पीछा करती हैं दो आँखें उसकी देह पर कुछ निशान टटोलने के लिए. एक गंध की पहचान बनाते हुए जाना कि गांधारी बनना कितना असंभव होता है यह तभी संभव हो पाता है जब सौ पुत्रों की बलि देने के लिए अपने आँचल को अपने ही पैरों से रौंद सकने की ताकत को अपनी छाती में दबा सके, आँखें तो लगातार पीछा करती रहतीं हैं अंधी आस्थाओं के अंबार भी तो पीछा कर रहे हैं उसकी काली पट्टी के पीछे रास्ता ढूंढती कविताओं को उनके क़दमों की आहट भी तो सुनाई नहीं देती मात्र वृक्षों के ब... more »

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शोभना फेसबुक रत्न सम्मान प्रविष्टि संख्या - 18

संगीता तोमर Sangeeta Tomar at सादर ब्लॉगस्ते! 
*नैनो टेक्नोलॉजी - विश्व भाग्य विधाता* नैनो टेक्नोलॉजी विश्व की एक ऐसी अद्भुत और शक्तिशाली तकनीकि है, जो विज्ञान के समस्त रूपों को परिभाषित करती है। यह तकनीकि आगामी दिनों में विकास की एक नई परिभाषा लिखेगी, जिसके बिना आम आदमी के जीवन का विकास क्रम अधूरा होगा। साधारण से शब्दों में परिभाषित किया जाये, तो ऐसी तकनीक जो वर्तमान समय की भारी भरकम तकनीक से आगे बढ़कर हल्के रूप में विज्ञान के हर अविष्कार को नियंत्रित करती हो। जैसे कि मोटर्स, रोबोट, कंप्यूटर इत्यादि हल्के और शक्तिशाली आकार की मशीनें, जिनको आजकल लोग काफी पसंद कर रहे हैं। इन दिनों साइंटिफिक और इंजीनियरिंग समुदाय में यह चर्चा जोरों... more »

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फेसबुकिया ब्लॉगिंग और ब्लॉग पर फेसबुकिंग -- यही है ज़माने की चाल !

डॉ टी एस दराल at अंतर्मंथन 
अब जब हमारे सभी ब्लॉगर मित्र बन्धु फेसबुक की ओर कूच कर चुके हैं, तो न चाहते हुए भी हम भी कुछ कुछ फेसबुकिया हो गए हैं। हालाँकि जो मज़ा यहाँ है , वह वहां कहाँ। इसलिए पिछले एक महीने में फेसबुक पर अलग अलग मूड और माहौल में जो कुछ चन्द पंक्तियाँ डाली, उन्हें यहाँ प्रस्तुत किया जा रहा है : *फेसबुकिया क्षणिकाएं * १) कभी कभी न जाने क्यों -- ऐसा लगता है, जैसे -- हम एलियन हों , और 'इंसानों' की धरती पर उतर आये हों , किसी गलती के तहत। २) आज --- सारी रात मेघा , गरजते रहे बरसते रहे --- नयनों से फिर आज , सारी रात --- ३) यूँ समझो कि बस हम ही हम हैं। ये और बात है कि हम ही हम हैं... more »

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तो मित्रों आशा है आपको आज का बुलेटिन पसन्द आया होगा, तो फ़िर अपना ध्यान रखिए, खुद बचिए और अपनें अपनों को बचाईए..

जय हिन्द
देव


बुधवार, 20 फ़रवरी 2013

लीजिये पढ़िये मेरी पहली ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय ब्लॉगर मित्रो,

प्रणाम !

मैं तुषार राज रस्तोगी | ब्लॉगर जगत विद्यालय का नवीन दाख़िला | आज से मैं भी ब्लॉग बुलेटिन में अपना योगदान करने का प्रयास करूंगा | आशा करता हूँ के आप सभी मित्रगण को मेरा यह प्रथम प्रयत्न पसंद आयेगा और आप सभी का आशीर्वाद और सहयोग मेरे साथ परस्पर बना रहेगा | मेरे द्वारा चुनी हुई कुछ कड़ियाँ कुछ इस प्रकार हैं | 

लेखागार