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रविवार, 18 नवंबर 2018

दोस्तों का प्यार - ब्लॉग बुलेटिन


नमस्कार दोस्तो,
आज एक कविता, स्व-रचित दोस्तों के नाम समर्पित....
+
मुझ पर दोस्तों का प्यार,
यूँ ही उधार रहने दो।
बड़ा हसीन है ये कर्ज़,
मुझे कर्ज़दार रहने दो।

वो आँखें छलकती थीं,
ग़म में ख़ुशी में मेरे लिए।
उन आँखों में सदा,
प्यार बेशुमार रहने दो।

मौसम लाख बदलते रहें,
आएँ भले बसंत-पतझड़।
मेरे यार को जीवन भर,
यूँ ही सदाबहार रहने दो।

महज़ दोस्ती नहीं ये,
बगिया है विश्वास की।
प्यार, स्नेह के फूलों से,
इसे गुलज़ार रहने दो।

वो मस्ती, वो शरारतें,
न तुम भूलो, न हम भूलें।
उम्र बढ़ती है ख़ूब बढ़े,
जवाँ ये किरदार रहने दो।


++++++++++








शनिवार, 17 नवंबर 2018

पंजाब केसरी को समर्पित १७ नवम्बर - ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |

लाला लाजपत राय ( जन्म: 28 जनवरी 1865 - मृत्यु: 17 नवम्बर 1928)
लाला लाजपत राय (अंग्रेजी: Lala Lajpat Rai, पंजाबी: ਲਾਲਾ ਲਾਜਪਤ ਰਾਏ, जन्म: 28 जनवरी 1865 - मृत्यु: 17 नवम्बर 1928) भारत के एक प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी थे। इन्हें पंजाब केसरी भी कहा जाता है। इन्होंने पंजाब नैशनल बैंक और लक्ष्मी बीमा कम्पनी की स्थापना भी की थी। ये भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में गरम दल के तीन प्रमुख नेताओं लाल-बाल-पाल में से एक थे। सन् 1928 में इन्होंने साइमन कमीशन के विरुद्ध एक प्रदर्शन में हिस्सा लिया, जिसके दौरान हुए लाठी-चार्ज में ये बुरी तरह से घायल हो गये और अन्तत: १७ नवम्बर सन् १९२८ को इनकी महान आत्मा ने पार्थिव देह त्याग दी।
 
लालाजी की मौत का बदला
लाला जी की मृत्यु से सारा देश उत्तेजित हो उठा और चंद्रशेखर आज़ाद, भगतसिंह, राजगुरु, सुखदेव व अन्य क्रांतिकारियों ने लालाजी की मौत का बदला लेने का निर्णय किया । इन जाँबाज देशभक्तों ने लालाजी की मौत के ठीक एक महीने बाद अपनी प्रतिज्ञा पूरी कर ली और 17 दिसंबर 1928 को ब्रिटिश पुलिस के अफ़सर सांडर्स को गोली से उड़ा दिया। लालाजी की मौत के बदले सांडर्स की हत्या के मामले में ही राजगुरु, सुखदेव और भगतसिंह को फाँसी की सज़ा सुनाई गई।
 
 
ब्लॉग बुलेटिन टीम और हिन्दी ब्लॉग जगत की ओर से शेर ए पंजाब स्व॰ लाला लाजपत राय जी को ९० वीं  पुण्यतिथि पर सादर नमन | 

सादर आपका

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593. लौट जाऊँगी...

अनायास ही गुम हो जाते हैंं...श्वेता सिन्हा

दो प्रस्तावना

फूलों की घाटी #3- गोविन्द घाट से घांघरिया

बूढ़ा हुआ अशोक

ज़िन्दगी में गुजरे..!!

चातुष्वर्णय दायरे के क्षैतिज विभाजन

महावीर चक्र विजेता ब्रिगेडियर कुलदीप सिंह चांदपुरी का निधन

मन अतिथि

यौवन गुलाबी फूलों का सेहरा तो बुढ़ापा कांटों का ताज होता है

मत पूछ इस जिंदगी में इन आँखों ने क्या मंजर देखा...

~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
अब आज्ञा दीजिए ... 

जय हिन्द !!!

शुक्रवार, 16 नवंबर 2018

अरेसीबो मैसेज और ब्लॉग बुलेटिन

सभी हिंदी ब्लॉगर्स को नमस्कार। 
Arecibo Message, Google Doodle: 44 साल पहले आज ही भेजा गया था पहला रेडियो मैसेज
करीब 44 साल पहले आज ही के दिन इंसान ने धरती से बाहर तारों को पहला रेडियो मैसेज भेजा था. गूगल ने इंसान की इस उपलब्धि को सम्मानित करते हुए एक स्पेशल डूडल (Google Doodle On Arecibo Message) तैयार किया है. यह ब्रॉडकास्ट काफी शक्तिशाली था और इसे अरेसीबो मैसेज (Arecibo Message) नाम दिया गया था. गूगल के अनुसार वैज्ञानिकों का एक समूह Puerto Rico के जंगलों में स्थित अरेसीबो ऑब्ज़र्वेटरी में इकट्ठे हुए और पहली बार पृथ्वी के बाहर रेडियो मेसेज भेजा.

3 मिनट के इस रेडियो मेसेज में 1,679 बाइनरी डिजिट्स थे, जिन्हें एक ग्रिड यानी 23 कॉलम और 73 पंक्तियों में व्यवस्थित किया जा सकता था. इन नंबरों की सीरीज का लक्ष्य सितारों का वह समूह था जो पृथ्वी से M-13, 25,000 प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित था. यह ब्रॉडकास्ट काफी पावरफुल था क्योंकि इसमें वैज्ञानिकों ने 305 मीटर के एंटीना से जुड़े अरेसीबो के मेगावाट ट्रांसमीटर का इस्तेमाल किया था.

इस ट्रांसमिशन का मुख्य उद्देश्य अरेसीबो द्वारा हाल ही में अपग्रेड किए गए रेडियो टेलिस्कोप की क्षमताओं का प्रदर्शन करना था. जानकारी के मुताबिक भेजा गए अरेसीबो मैसेज को अपने लक्ष्य तक पहुंचने में 25 हजार साल लगेंगे और अभी तक इसने सिर्फ 259 ट्रिलियन माइल (259 trillion miles) का सफर तय किया है. हालांकि यह मैसेज तारों तक पहुंचा या नहीं यह जानने के लिए मानवजाति को लंबे वक्त तक इंतज़ार करना होगा.


~ आज की बुलेटिन कड़ियाँ ~













आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर  ... अभिनन्दन।। 

गुरुवार, 15 नवंबर 2018

इंक्रेडिबल इंडिया के इंक्रेडिबल इंडियंस - ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |

एक बार एक पजामा पहने हुए हिन्दुस्तानी से एक अंग्रेज ने पूछा, "आप का यह देशी पैंट (पजामा) कितने दिन चल जाता है?

हिन्दुस्तानी ने जवाब दिया, "कुछ ख़ास नहीं, मै इसे एक साल पहनता हूँ। उसके बाद श्रीमति जी इसको काट कर राजू के साइज़ का बना देती है। फिर राजू इसे एक साल पहनता है। उसके बाद श्रीमति जी इसको काट छांट कर तकियों के कवर बना लेती है। फिर एक साल बाद उन कवर का झाडू पोछे में इस्तेमाल करते हैं।"

अंग्रेज बोला, "फिर फेंक देते होंगे?"

हिन्दुस्तानी ने फिर कहा, "नहीं-नहीं इसके बाद 6 महीने तक मै इस से अपने जूते साफ़ करता हूँ और अगले 6 महीने तक बाइक का साइलेंसर चमकाता हूँ। बाद में मारदडी की हाथ से बनायीं जाने वाली गेंद में काम लेते हैं और अंत में कोयले की सिगडी (चूल्हा) सुलगाने के काम में लेते हैं और सिगड़ी (चुल्हे) की राख बर्तन मांजने के काम में लेते हैं।"

इतना सुनते ही अंग्रेज रफू चक्कर हो गया।

किसी भी चीज का सम्पूर्ण इस्तेमाल कोई हम हिन्दुस्तानियों से सीखे। हमें हिंदुस्तानी होने पर गर्व है।

सादर आपका

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एक ब्रह्मा का अवसान


सांत्वना नागफनी है, गहरे भेदती है

abhishek shukla at वंदे मातरम् 

मैं अपने घर का मेहमान.......


सरदार पटेल की जयंती


...शाम

सु-मन (Suman Kapoor) at अर्पित ‘सुमन’

घूंघट की आड़ में प्रत्याशी

varsha at likh dala

प्रिय तुम तक कैसे मैं आती.....


कोलेस्ट्रॉल कितना चाहिए ,कैसे करें कंट्रोल?


कहाँ सरक गया रेगिस्तान!


ढलती धूप के अंतिम प्रहर में -

प्रतिभा सक्सेना at शिप्रा की लहरें

अतिथि हो कर रह गए हैं हम

Asha Saxena at Akanksha
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अब आज्ञा दीजिए ... 

जय हिन्द !!!

बुधवार, 14 नवंबर 2018

काहे का बाल दिवस ??

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |
चित्र गूगल से साभार

आजादी के सात दशक से अधिक समय गुजरने के बावजूद आज भी देश में सबके लिए शिक्षा एक सपना ही बना हुआ है। देश में भले ही शिक्षा व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त बनाने की कवायद जारी है, लेकिन देश की बड़ी आबादी के गरीबी रेखा के नीचे गुजर-बसर करने के मद्देनजर सभी लोगों को साक्षर बनाना अभी भी चुनौती बनी हुई है।
सरकार ने  छह से 14 वर्ष की आयु वर्ग के बच्चों के लिए अनिवार्य एवं मुफ्त शिक्षा प्रदान करने का कानून बनाया है, लेकिन शिक्षाविदों ने इसकी सफलता पर संदेह व्यक्त किया है क्योंकि देश की आबादी का एक बड़ा हिस्सा अभी भी अपनी मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए जद्दोजहद में लगा हुआ है। 

गरीब परिवार में लोग कमाने को शिक्षा से ज्यादा तरजीह देते हैं। उनकी नजर में शिक्षा नहीं बल्कि श्रम कमाई का जरिया है।  ग्रामीण और सुदूर क्षेत्रों में निवास करने वाले लोगों के जीवनस्तर में सुधार किए बिना शिक्षा के क्षेत्र में कोई भी नीति या योजना कारगर नहीं हो सकती है बल्कि यह संपन्न वर्ग का साधन बन कर रह जाएगी। आदिवासी बहुल क्षेत्र में नक्सलियों का प्रसार इसकी एक प्रमुख वजह है। सरकार के प्रयासों के बावजूद प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा की स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। इनमें बालिका शिक्षा की स्थिति गंभीर है।
विश्व बैंक की रपट में भारत में माध्यमिक शिक्षा की उपेक्षा किए जाने पर जोर देते हुए कहा गया है कि इस क्षेत्र में हाल के वर्षो में निवेश में लगातार गिरावट देखने को मिली है। 

भारत में माध्यमिक शिक्षा पर विश्व बैंक रपट में माध्यमिक शिक्षा के क्षेत्र में निवेश में गिरावट का उल्लेख किया गया है। शिक्षा के क्षेत्र में होने वाले खर्च का जहां प्राथमिक शिक्षा पर 52 प्रतिशत निवेश होता है वहीं दक्ष मानव संसाधान को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले माध्यमिक शिक्षा के क्षेत्र में कुल खर्च का 30 प्रतिशत ही निवेश होता है। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षा के कुल खर्च का 18 प्रतिशत हिस्सा आता है। 

भारत में माध्यमिक स्तर पर 14 से 18 वर्ष के बच्चों का कुल नामांकन प्रतिशत 40 फीसदी दर्ज किया गया जो पूर्वी एशिया और लैटिन अमेरिका में वैश्विक प्रतिद्वन्दि्वयों के कुल नामांकन अनुपात से काफी कम है। भारत से कम प्रति व्यक्ति आय वाले वियतनाम एवं बांग्लादेश जैसे देशों में भी माध्यमिक स्तर पर नामांकन दर अधिक है।
उच्च शिक्षा की स्थिति भी उत्साहव‌र्द्धक नहीं है। फिक्की की ताजा रपट में कहा गया है कि महत्वपूर्ण विकास के बावजूद भारतीय उच्च शिक्षा प्रणाली में कई तरह की खामियां हैं जो भविष्य की उम्मीदों के समक्ष चुनौती बन कर खड़ी है। रपट के अनुसार इन चुनौतियों में प्रमुख उच्च शिक्षा के वित्त पोषण की व्यवस्था, आईसीटी का उपयोग, अनुसंधान, दक्षता उन्नयन और प्रक्रिया के नियमन से जुड़ी हुई है। 

उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सकल नामांकन दर की खराब स्थिति को स्वीकार करते हुए मानव संसाधन विकास मंत्री ने कहा कि स्कूल जाने वाले 22 करोड़ बच्चों में केवल 2.6 करोड़ बच्चे कालेजों में नामांकन कराते हैं। इस तरह से 19.4 करोड़ बच्चे स्कूली शिक्षा से आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं।

सरकार का लक्ष्य उच्च शिक्षा में सकल नामांकन दर को 12 प्रतिशत से बढ़ा कर 2020 तक 30 प्रतिशत करने का है। इन प्रयासों के बावजूद 6।6 करोड़ छात्र ही कालेज स्तर में नामांकन करा पाएंगे, जबकि 15 करोड़ बच्चे कालेज स्तर पर नामांकन नहीं जा पाएंगे।

चित्र गूगल से साभार
ऐसे में ये प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि देश में शिक्षा की इस स्थिति देखते हुए बाल दिवस मानना कितना सार्थक है !?

जब आज भी हम इन बच्चो को वह माहौल नहीं दे पाये जब यह दो वक्त की रोटी की चिंता त्याग शिक्षा पर ध्यान केन्द्रित कर पाए ! 'बाल दिवस' केवल मौज मस्ती के लिए तो नहीं था ........इसका मूल उद्देश तो हर बच्चे तक सब सरकारी सुविधाओ को पहुँचाना था .......कहाँ हो पाया यह आज़ादी के ७१ साल बाद भी !!

सादर आपका

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चर्चा प्लस ... बाल दिवस विशेष : क्या उपहार दे रहे हैं हम अपने बच्चों को ? - डॉ. शरद सिंह

बचपन के दिन

तरसता बचपन

बाल दिवस

मुख्तार सिंह का नाम सुना है तुमने?

बाल दिवस और बाल श्रम

बळिहारी उण देस री, माथा मोल बिकाय ।

तुम्हारे शक्ल जैसी एक लड़की रोज मिलती है

उपवास

"माहिया"

हम हरपल हैं खोए

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अब आज्ञा दीजिए ... 

जय हिन्द !!!

मंगलवार, 13 नवंबर 2018

तुम्हारा वजूद एक ब्रह्मास्त्र है




लगे,
कि किसी ने वजूद छीन लिया
लगे,
कि हँसी कहीं खो गई है 
तो उनलोगों को याद करना 
जिनकी हर सांस में दुआओं के बोल थे
जिन्होंने हर बार कहा,
तुम्हारा वजूद एक ब्रह्मास्त्र है
जिसे कोई भी नहीं छीन सकता
....
और फिर
उनके आशीर्वचनों की सार्थकता के लिए जीना
खुश रहना,

अपना वजूद फिर से स्थापित करना। 

 रश्मि प्रभा 


सोमवार, 12 नवंबर 2018

डॉ. सालिम अली - राष्ट्रीय पक्षी दिवस और ब्लॉग बुलेटिन

सभी हिंदी ब्लॉगर्स को नमस्कार। 
सालिम अली (अंग्रेज़ी:Salim Ali, पूरा नाम: 'सालिम मोइज़ुद्दीन अब्दुल अली', जन्म: 12 नवम्बर, 1896; मृत्यु: 27 जुलाई, 1987) एक भारतीय पक्षी विज्ञानी और प्रकृतिवादी थे। सालिम अली को भारत के बर्डमैन के रूप में जाना जाता है। सलीम अली भारत के ऐसे पहले व्यक्ति थे, जिन्होंने भारत भर में व्यवस्थित रूप से पक्षी सर्वेक्षण का आयोजन किया और पक्षियों पर लिखी उनकी किताबों ने भारत में पक्षी-विज्ञान के विकास में काफ़ी मदद की है। सन् 1906 में दस वर्ष के बालक सालिम अली की अटूट जिज्ञासा ने ही पक्षी शास्त्री के रूप में उन्हें आज विश्व में मान्यता दिलाई है। पक्षियों के सर्वेक्षण में 65 साल गुजार देने वाले इस शख़्स को परिंदों का चलता फिरता विश्वकोष कहा जाता था। पद्म विभूषण से नवाजे इस 'परिंदों के मसीहा' के प्रकृति संरक्षण की दिशा में किए गए प्रयासों को कभी भुलाया नहीं जा सकता है।

राष्ट्रीय पक्षी दिवस प्रत्येक वर्ष '12 नवम्बर' को मनाया जाता है। 12 नवम्बर (1896) डॉ. सालिम अली का जन्म दिवस है, जो कि विश्वविख्यात पक्षी विशेषज्ञ थे। इन्हें भारत में "पक्षी मानव" के नाम से भी जाना जाता था।

पक्षी विशेषक्ष सालिम अली के जन्म दिवस को 'भारत सरकार' ने राष्ट्रीय पक्षी दिवस घोषित किया हुआ है।

सालिम अली ने पक्षियों से सम्बंधित अनेक पुस्तकें लिखी थीं। 'बर्ड्स ऑफ़ इंडिया' इनमें सबसे लोकप्रिय पुस्तक है।
सालिम अली के सम्मान में जारी डाक टिकट
डाक विभाग ने इनकी स्मृति में डाक टिकट भी जारी किया है।

वर्ष 1958 में सालिम अली को 'पद्मभूषण' तथा 1976 में 'पद्मविभूषण' से अलंकृत किया गया था।

(साभार : http://bharatdiscovery.org/india/सालिम_अली , http://bharatdiscovery.org/india/राष्ट्रीय_पक्षी_दिवस)

आज महान इंसान और पक्षी वैज्ञानिक डॉ. सालिम अली जी की 122वीं जयंती पर हम सब उन्हें शत शत नमन करते हैं।


~ आज की बुलेटिन कड़ियाँ ~












आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर ... अभिनन्दन।।  

रविवार, 11 नवंबर 2018

लहू पुकारे ... बदला ... बदला ... बदला

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |

चित्र गूगल से साभार
एक बार बैंक मैनेजर अपने बीवी बच्चों के साथ होटल में गये।

बैंक मैनेजर: खाने में क्या क्या है?

वेटर: जी मलाई कोफ्ता, मटर पनीर, कढ़ाई पनीर, दम आलू, मिक्स वैज, आलू गोभी।

बैंक मैनेजर: मटर पनीर और रोटी दे दो। दाल कौन कौन सी है?

वेटर: दाल फ्राइ, दाल तड़का, मूंग की दाल और मिक्स पंचरत्न दाल।

बैंक मैनेजर: 1 फुल दाल फ्राई दे दो।

वेटर: सर पापड़ ड्रॉइ दूँ या फ्राई?

बैंक मैनेजर: फ्राई।

वेटर (बड़ी शालीनता से): सर मिनरल वाटर ला दूँ।

बैंक मैनेजर: हाँ ला दे।

वेटर: सर आपका आर्डर हुआ है - मटर पनीर, रोटी, दाल फ्राई, फ्राई पापड़ और 1 मिनरल वाटर।

बैंक मैनजर: हाँ भाई, फटाफट लगा दे।

वेटर: लेकिन सब कुछ खत्म हो चुका है अभी कुछ नहीं है।

बैंक मैनजर (विनम्रता सेे): तो महाराज आप इतनी देर से बक-बक क्यों कर रहे थे? पहले ही बता देते।

वेटर: बैंक मैनेजर साहब, मैं रोज एटीएम जाता हूँ। वो एटीएम मुझसे पिन कोड, Saving/Current Account, Amount, Receipt सब कुछ पूछता है और लास्ट में बोलता है "No Cash"। अब समझ में आया मुझे उस टाइम कैसा लगता है?

बैंक मैनेजर बेहोश!


सादर आपका
शिवम् मिश्रा 

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लिखा हुआ रंगीन भी होता है रंगहीन भी होता है बस देखने वाली आँखों को पता होता है

रात भर खिलखिलाती रही चांदनी

टिकट कटे नेता का परकाया प्रवेश !

उल्झन

डॉ रमेश यादव की कविताएं

समानता के नाम पर परम्पराओं पर प्रहार की कोशिश

मरना है तो,मरो सड़क पर मगर आज हों, ब्रेक बैरियर ! -सतीश सक्सेना

बाज़ार ना हों तो भावनाएँ सूख जाएं

३३२. नाविक से

खुद लिखती है लेखनी

ऐ मालिक तेरे बन्दे हम....

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अब आज्ञा दीजिए ... 

जय हिन्द !!!

शनिवार, 10 नवंबर 2018

सेर पे सवा सेर - ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |

पत्नी ने पति को मैसेज भेजा: ऑफिस से वापिस आते हुए सब्जियां लाना मत भूलना और हाँ, सविता आपको नमस्ते कह रही है!
 
पति: ये सविता कौन है?
 
पत्नी: कोई भी नही, मैं तो बस पक्का कर रही थी कि आपने मेरा मैसेज पूरा पढ़ा कि नही?

कहानी में ट्विस्ट...

पति: लेकिन मैं तो खुद सविता के ही साथ हूँ! तुम किस सविता की बात कर रही हो?
 
पत्नी (गुस्से से): तुम अभी कहाँ हो?
 
पति: सब्जी मार्किट के पास!
 
पत्नी: रुको मैं अभी वहीं आती हूँ!

10 मिनट के बाद पत्नी ने फिर फ़ोन किया, "तुम हो कहाँ? मैं सब्जी मार्किट आ गई हूँ |"
 
पति: मैं अभी ऑफिस में ही हूँ, अब तुम्हें जो भी सब्जी चाहिए खरीद लेना!

सादर आपका

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रिटायर्ड पोस्टमास्टर फैजुल हसन कादरी ने पत्नी की याद में बनाया ताजमहल, अब उसी में हुए दफ़न

इस पीड़ा का क्या करें

एचआयवी एडस इस विषय को लेकर जागरूकता हेतु एक साईकिल यात्रा

स्मृति कह लो या आत्मा

छठ पर्व की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं

छठ पर्व

मीठे अनुभव

इशिता की सूझबूझ - एक बाल कथा

छठ पर्व का उत्तर भारत में उल्लास

यूँ ही ...

आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 8)

"मुक्तक"

दीपावली

रंग मुस्कुराहटों का

'बंगाल के निर्माता' - सुरेन्द्रनाथ बनर्जी की १७० वीं जयंती

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अब आज्ञा दीजिए ... 

जय हिन्द !!!

शुक्रवार, 9 नवंबर 2018

भाई दूज, श्री चित्रगुप्त पूजा और ब्लॉग बुलेटिन

सभी हिंदी ब्लॉगर्स को नमस्कार।




आप सभी को ब्लॉग बुलेटिन टीम की ओर से भाई दूज और श्री चित्रगुप्त पूजा की हार्दिक बधाईयाँ और शुभकामनाएँ।।

~ आज की बुलेटिन कड़ियाँ ~













आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर ... अभिनन्दन।। 

गुरुवार, 8 नवंबर 2018

गोवर्धन पूजा और अन्नकूट की हार्दिक शुभकामनाएं

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |

आज गोवर्धन पूजा और अन्नकूट मनाई गई है ... 

गोवर्धन पूजा और अन्न कूट हिन्दुओं के प्रमुख त्योहार हैं । दीपावली के दूसरे दिन सायंकाल ब्रज प्रांत में गोवर्धन पूजा का विशेष आयोजन होता है। भगवान श्रीकृष्ण ने आज ही के दिन इन्द्र का मानमर्दन कर गिरिराज पूजन किया था। इस दिन मन्दिरों में अन्नकूट किया जाता है। सायंकाल गोबर के गोवर्धन बनाकर पूजा की जाती है।

धार्मिक मान्यता

वेदों में इस दिन वरुण, इन्द्र, अग्नि आदि देवताओं की पूजा का विधान है। इसी दिन बलि पूजा, गोवर्धन पूजा, मार्गपाली आदि होते हैं। इस दिन गाय-बैल आदि पशुओं को स्नान कराकर, फूल माला, धूप, चंदन आदि से उनका पूजन किया जाता है। गायों को मिठाई खिलाकर उनकी आरती उतारी जाती है। यह ब्रजवासियों का मुख्य त्योहार है। अन्नकूट या गोवर्धन पूजा भगवान कृष्ण के अवतार के बाद द्वापर युग से प्रारम्भ हुई। उस समय लोग इन्द्र भगवान की पूजा करते थे तथा छप्पन प्रकार के भोजन बनाकर तरह-तरह के पकवान व मिठाइयों का भोग लगाया जाता था। ये पकवान तथा मिठाइयां इतनी मात्रा में होती थीं कि उनका पूरा पहाड़ ही बन जाता था।

अन्न कूट

अन्न कूट एक प्रकार से सामूहिक भोज का आयोजन है जिसमें पूरा परिवार और वंश एक जगह बनाई गई रसोई से भोजन करता है। इस दिन चावल, बाजरा, कढ़ी, साबुत मूंग, चौड़ा तथा सभी सब्जियां एक जगह मिलाकर बनाई जाती हैं। मंदिरों में भी अन्नकूट बनाकर प्रसाद के रूप में बांटा जाता है।


ब्लॉग बुलेटिन टीम की ओर से आप सभी को गोवर्धन पूजा अथवा अन्न कूट की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ।
सादर आपका
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दीवाली-होली का विरोध महज हिंदुफोबिया है

पूजा की थाली तुलसी का पत्ता हैं माँ.....!!!

अदरक-लहसुन के पेस्ट को दो महीने तक कैसे स्टोर करें?

बरखा की विदाई

जलेबी दही नहीं लाये

मंगलाचार : वसु गन्धर्व

महाभारत की लोककथा (भाग - 58)

आज ब्लॉग दस साल का हो गया

दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं

संविधान

ये मंजिल कैसे मिलेगी?

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अब आज्ञा दीजिए ... 

जय हिन्द !!!

बुधवार, 7 नवंबर 2018

एक अनुरोध सहित दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं - ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |

आज दिवाली है ... बाहरी या आतंरिक शत्रु से देश की सुरक्षा के लिए तैनात हर एक सुरक्षा बल के जवानों और उनके परिवारों को मेरी और मेरे परिवार की ओर से दिवाली की बहुत बहुत हार्दिक शुभकामनाएं।

सुरक्षा बलों के जवान अपनी अपनी जिम्मेदारियों के प्रति वफ़ादार और मुस्तैद रहते हैं तभी हम सब नागरिक बेख़ौफ़ जी पाते है। उन के व उन के परिवार द्वारा राष्ट्र हित किए गए इन बलिदानों को मैं नमन करता हूँ।

अमर शहीदों की याद में प्रज्वलित हमारे परिवार का दीया और कार्तिक

आज इस मौक़े पर आप सभी मित्रों से अनुरोध है कि अपने अपने घरों में कम से कम एक दीया अमर शहीदों की याद में जरूर प्रज्वलित करें।

सादर आपका
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469.दीवाली होगी

पटाखों और फुलझड़ियों से ही नहीं होती दीपावली

सुलग सुलग री जोत...माखन लाल चतुर्वेदी

हाईकू

दीप

दीप सजे

नया विवाह - मुंशी प्रेमचंद

हे माँ लक्ष्मी

आओ मिलकर दीप जलाएं

श्री विपिनचंद्र पाल जी की १६० वीं जयंती

592. रंगीली दिवाली (दिवाली पर 10 हाइकु)

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ब्लॉग बुलेटिन टीम की ओर से आप सभी को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं |
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जय हिंद।

जय हिंद की सेना।
 
#Sandesh2Soldiers #शुभ_दीपावली

मंगलवार, 6 नवंबर 2018

जल गया है दीप तो अंधियार ढल कर ही रहेगा

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |


" दीप कैसा हो, कहीं हो, सूर्य का अवतार है वह,

धूप में कुछ भी न, तम में किन्तु पहरेदार है वह,

यह सुबह का दूत हर तम को निगलकर ही रहेगा।

जल गया है दीप तो अंधियार ढल कर ही रहेगा। "

- गोपालदास नीरज 



ब्लॉग बुलेटिन टीम की ओर से हिन्दी ब्लॉग जगत के सभी मित्रों को छोटी दिवाली की हार्दिक शुभकामनाएं |

सादर आपका
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शुभ रूप चतुर्दशी 2018

जवानी,जोश,जज़्बा और अल्हड़पन निखरने दो.......

नरकासुर वध तथा सोलह हजार बंदी युवतियों की मुक्ति

लघु रामायण

दीपमालिका

ज़मीनी अनुभवों का दस्तावेज - मीडिया के दिग्गज

मकसद और मसरूफियतों के बन्ने भाई

मुर्गी को भी इंसानी भूत बना देते हैं वे

इतिहास...जो सच है......

ये “दिल्ली यूनिवर्सिटी” नॉर्थ कैम्पस दीवारें है ...

भय को देखना हो नतमस्तक...

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अब आज्ञा दीजिए ...

जय हिन्द !!!

सोमवार, 5 नवंबर 2018

धन्वन्तरि दिवस, धनतेरस और ब्लॉग बुलेटिन

सभी हिंदी ब्लॉगर्स को नमस्कार।
धन्वन्तरि
धन्वन्तरि हिन्दू धर्म में मान्य देवताओं में से एक हैं। भगवान धन्वन्तरि आयुर्वेद जगत् के प्रणेता तथा वैद्यक शास्त्र के देवता माने जाते हैं। भारतीय पौराणिक दृष्टि से 'धनतेरस' को स्वास्थ्य के देवता धन्वन्तरि का दिवस माना जाता है। धन्वन्तरि आरोग्य, सेहत, आयु और तेज के आराध्य देवता हैं। धनतेरस के दिन उनसे प्रार्थना की जाती है कि वे समस्त जगत् को निरोग कर मानव समाज को दीर्घायु प्रदान करें।

देवता एवं दैत्यों के सम्मिलित प्रयास के श्रान्त हो जाने पर समुद्र मन्थन स्वयं क्षीर-सागरशायी कर रहे थे। हलाहल, कामधेनु, ऐरावत, उच्चै:श्रवा अश्व, अप्सराएँ, कौस्तुभमणि, वारुणी, महाशंख, कल्पवृक्ष, चन्द्रमा, लक्ष्मी और कदली वृक्ष उससे प्रकट हो चुके थे। अन्त में हाथ में अमृतपूर्ण स्वर्ण कलश लिये श्याम वर्ण, चतुर्भुज भगवान धन्वन्तरि प्रकट हुए। अमृत-वितरण के पश्चात् देवराज इन्द्र की प्रार्थना पर भगवान धन्वन्तरि ने देव-वैद्य का पद स्वीकार कर लिया। अमरावती उनका निवास बनी। कालक्रम से पृथ्वी पर मनुष्य रोगों से अत्यन्त पीड़ित हो गये। प्रजापति इन्द्र ने धन्वन्तरि जी से प्रार्थना की। भगवान ने काशी के राजा दिवोदास के रूप में पृथ्वी पर अवतार धारण किया। इनकी 'धन्वन्तरि-संहिता' आयुर्वेद का मूल ग्रन्थ है। आयुर्वेद के आदि आचार्य सुश्रुत मुनि ने धन्वन्तरि जी से ही इस शास्त्र का उपदेश प्राप्त किया था।

आज धन्वन्तरि दिवस और धनतेरस पूजा की सभी देशवासियों को बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएं।



~ आज की बुलेटिन कड़ियाँ ~













आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर ... अभिनन्दन।। 

रविवार, 4 नवंबर 2018

दादा जी, फेसबुक और मंदाकिनी

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |

चित्र गूगल से साभार
दादा जी: सारा दिन मोबाइल! फेसबुक...बोर नहीं होता क्या तू? ऐसा क्या है उसमें?

पोता: अरे दादा जी आप एक काम करो, आप इसमें अपने पुराने मित्रों को ढूँढो! इसे एक बार इस्तेमाल करके देखो! फिर कहना!

दादा जी: मुझे नहीं करना ये सब!

पोता: एक बार करके तो देखिये!

दादाजी: अरे, वो सब तो मेरे साथ तीसरी, चौथी तक पढ़े... उन सबको ये पता होगा क्या?

पोता: अरे, आप एक बार, ट्राय तो करो दादा जी!

और फिर 88 साल के सदानंद जी का फेसबुक अकाउंट बनाया गया! 


और आधे घंटे के भीतर, चन्द्रकान्त पाटिल, यशवंत राव और झामलू यादव, इत्यादि की फ्रेंड रिक्वेस्ट भी आ गई!

यह सब फ्रेंड रिक्वेस्ट देखते ही दादा जी की आँखें चमक उठीं और वे पोते से बोले, 


"अरे, बेटा जरा देख तो... इसमें लीलावती चौरसिया या फिर मंदाकिनी चौहान, इनका कहीं पता लगता है क्या?"


😉

सादर आपका
 शिवम् मिश्रा
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हम देखते ही रह गए दिल का मकां जलता हुआ

मैं, सोच रहा हूँ

विज्ञान संचार में पाठ्यक्रम

दीपावली का त्यौहार

स्वतंत्रता और आवश्यकता - १

468.माटी

पन्ने अतीत के

राधा रमन रेती, बलदेव जी मंदिर, रसखान समाधी, 84 खम्बा

***...और तुम चले गए ***

अपनी queen मान लोगे..!!!

भारतीय गणितज्ञ स्व॰ शकुंतला देवी जी की ८९ वीं जयंती

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अब आज्ञा दीजिए ... 

जय हिन्द !!!

लेखागार