जब हम कोई ख्वाब देखते हैं,उसकी नींव डालते हैं तो ईश्वर से यही प्रार्थना होती है कि ख़्वाबों की यात्रा निर्विघ्न हो ..... बाधाएँ बहेलिये के समान जाल बिछाती हैं, पर मन में दृढ़ता हो इन पंक्तियों सी -
'क्षमा शोभती उस भुजंग को जिसके पास गरल हो
उसको क्या जो दंतहीन,विषहीन,विनीत,सरल हो ...'
तो समुद्र भी रास्ता देता है .... इसी भावना के साथ एक शक्स ने कुछ उँगलियों को पकड़कर ब्लॉग बुलेटिन की नींव डाली,लेखन यज्ञ में किसी ने सकारात्मक,किसी ने नकारात्मक आहुति डाली ....... पर शब्द अग्नि देवता निर्बाध जलते रहे ....हर कलम की प्रखरता के लिंक्स आप तक लाते रहे. मील के तठस्थ पत्थरों के साथ हमने उन नए पत्थरों का भी परिचय दिया - जो मील का पत्थर होने की योग्यता रखते हैं . भूले लिंक्स को भी हमने ढूँढा और आपकी नज़रों के हवाले किया . जी हाँ, इसी यात्रा का सौभाग्य है की आज हम 550 वीं पोस्ट के साथ आपके सामने हैं - कमाल है न ?
तो इस उत्सव की सार्थकता सार्थक लिंक्स के साथ हम स्थापित करते हैं ........ सभी सार्थक लिंक्स एकसाथ नहीं उपस्थित कर सकते,पर जो भी करेंगे - आपको सोचने पर मजबूर करेंगे ...





