प्रिय ब्लॉगर मित्रों ,
प्रणाम !
आज दोपहर सरबजीत सिंह का अंतिम संस्कार कर दिया गया ! इस बीच यह चर्चा ज़ोरों पर रही कि सरबजीत को 'शहीद' का दर्जा दिया जाये या नहीं ???
कल आई बुलेटिन पर भी इस बारे मे राय रखी गई ... सब का अपना अपना नज़रिया है ... सब का अपना अपना मत है !
वैसे जिस देश मे जीते जी लोग न जाने क्या क्या बने बैठे है ... वहाँ एक सरबजीत 'शहीद' हो भी गया तो क्या फर्क पड़ता है ???
जिस ने अपनी ज़िन्दगी के २२ साल दुश्मन देश की कैद मे गुजारे हो केवल इस जुर्म के लिए कि वह एक भारतीय नागरिक है ... फिर उसका जुर्म तो कभी साबित हुआ भी नहीं था ... और एक बार को यह मान भी लें कि उस ने पाकिस्तान मे बम धमाके किए ... तो किस के कहने पर किए ... भारत सरकार के कहने पर ही न ... एक विशेष सियासी नीति के तहत ही न ... मतलब कि वो अपना फर्ज़ अदा कर रहा था एक जासूस के रूप मे ... एक रॉ एजेंट के रूप मे ... और फिर यह मत भूलिए उसको पाकिस्तान मे मौत उसके जुर्म के लिए नहीं मिली ... उसकी हत्या हुई !!
फिर वो 'शहीद' कैसे नहीं हुआ ???
जब हमारे देश मे यह प्रथा रही है कि कोई नेता अगर मारा जाये तो उसे हाल 'शहीद' घोषित कर दिया जाता है ... कई सौ एकड़ जमीन पर उस की समाधि बनती है तो आज वक़्त आ गया है कि एक आम बंदा भी 'शहीद' कहलाए ... क्यों कि 'शहादत' पर किसी नेता की बपौती नहीं है !!
ब्लॉग बुलेटिन टीम की ओर से अमर शहीद सरबजीत सिंह जी को शत शत नमन !!
सादर आपका
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अब आज्ञा दीजिये ...
जय हिन्द !!!



