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शनिवार, 23 मार्च 2019

वास्तविक राष्ट्र नायकों का बलिदान दिवस - २३ मार्च

प्रिय  ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |

ये हमारे देश का दुर्भाग्य है कि कुछ स्वार्थी, बेग़ैरत, सत्ता लोलुप तथाकथित "देशभक्तों और राष्ट्र नायकों" द्वारा, केवल अपने राजनीतिक विचारों और मतभेदों के कारण, "हिंसावादी और आतंकी" घोषित किए गए अमर क्रांतिकारियों को उनकी शहादत के ८८ वर्षों बाद भी न्याय नहीं मिला है।

जबकि इस के उलट उन्हीं तथाकथित "देशभक्तों और राष्ट्र नायकों" के अजन्में वंशज भी "सर्टिफाईड देशभक्त" कहलाते हैं।

एक के बाद एक सरकारें आती रही पर किसी ने भी इतिहास में हुई इस भूल को सुधारने का कोई प्रयास नहीं किया। मौजूदा सरकार भी इस मामले में अब तक उदासीन ही दिखी।

पर अब समय आ गया है कि हम अपने वास्तविक राष्ट्र नायकों को पहचाने और उन्हें सम्मानित करें।

ब्लॉग बुलेटिन टीम और हिन्दी ब्लॉग जगत की ओर से ८८ वें बलिदान दिवस पर अमर शहीद सरदार भगत सिंह जी , सुखदेव जी और राजगुरु जी को शत शत नमन !

वंदे मातरम।

इंक़लाब ज़िंदाबाद।

सादर आपका
शिवम् मिश्रा
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शहिदे आजम ! सरदार भगत सिंह जी

चुनाव

बचपन का डर

रेल्वे राजू 

मोदी ने वास्तव में बर्बाद कर दिया

उनकी आँखों से यात्रा का सुख

दुलरुआ फाग (गीत)

शहीदी दिवस 23 मार्च पर कविता।

उपनिषद का श्रवण

नीले पीले जमीन पर

८८ वें बलिदान दिवस पर शत शत नमन

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अब आज्ञा दीजिए ... 

जय हिन्द !!! 

शुक्रवार, 22 मार्च 2019

विश्व जल दिवस और ब्लॉग बुलेटिन

सभी हिंदी ब्लॉगर्स को नमस्कार। 
विश्व जल दिवस प्रत्येक वर्ष 22 मार्च को मनाया जाता है। आज विश्व में जल का संकट कोने-कोने में व्याप्त है। लगभग हर क्षेत्र में विकास हो रहा है। दुनिया औद्योगीकरण की राह पर चल रही है, किंतु स्वच्छ और रोग रहित जल मिल पाना कठिन हो रहा है। विश्व भर में साफ़ जल की अनुपलब्धता के चलते ही जल जनित रोग महामारी का रूप ले रहे हैं। कहीं-कहीं तो यह भी सुनने में आता है कि अगला विश्व युद्ध जल को लेकर होगा। इंसान जल की महत्ता को लगातार भूलता गया और उसे बर्बाद करता रहा, जिसके फलस्वरूप आज जल संकट सबके सामने है। विश्व के हर नागरिक को पानी की महत्ता से अवगत कराने के लिए ही संयुक्त राष्ट्र ने "विश्व जल दिवस" मनाने की शुरुआत की थी।

विश्व जल दिवस का प्रारम्भ

'विश्व जल दिवस' मनाने की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 1992 के अपने अधिवेशन में 22 मार्च को की थी। 'विश्व जल दिवस' की अंतरराष्ट्रीय पहल 'रियो डि जेनेरियो' में 1992 में आयोजित 'पर्यावरण तथा विकास का संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन' (यूएनसीईडी) में की गई थी, जिस पर सर्वप्रथम 1993 को पहली बार 22 मार्च के दिन पूरे विश्व में 'जल दिवस' के मौके पर जल के संरक्षण और रख-रखाव पर जागरुकता फैलाने का कार्य किया गया।

संकल्प का दिन

'22 मार्च' यानी कि 'विश्व जल दिवस', पानी बचाने के संकल्प का दिन है। यह दिन जल के महत्व को जानने का और पानी के संरक्षण के विषय में समय रहते सचेत होने का दिन है। आँकड़े बताते हैं कि विश्व के 1.5 अरब लोगों को पीने का शुद्ध पानी नहीं मिल रहा है। प्रकृति इंसान को जीवनदायी संपदा जल एक चक्र के रूप में प्रदान करती है, इंसान भी इस चक्र का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा हैं। चक्र को गतिमान रखना प्रत्येक व्यक्ति की ज़िम्मेदारी है। इस चक्र के थमने का अर्थ है, जीवन का थम जाना। प्रकृति के ख़ज़ाने से जितना पानी हम लेते हैं, उसे वापस भी हमें ही लौटाना है। हम स्वयं पानी का निर्माण नहीं कर सकते। अतः प्राकृतिक संसाधनों को दूषित नहीं होने देना चाहिए और पानी को व्यर्थ होने से भी बचाना चाहिए। 22 मार्च का दिन यह प्रण लेने का दिन है कि हर व्यक्ति को पानी बचाना है।



~ आज की बुलेटिन कड़ियाँ ~ 













आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के शुभसंध्या। सादर ... अभिनन्दन।।

गुरुवार, 21 मार्च 2019

बुरा मानना हो तो खूब मानो, होली है तो है... ब्लॉग बुलेटिन


नमस्कार साथियो,
आखिरकार होली हो ली. दिन भर धमाचौकड़ी चलती रही, कभी बच्चों की, कभी बड़ों की. इसी धमाचौकड़ी में मित्र-मंडली संग शहर की सुनसान पड़ी सड़कों पर टहलना हुआ. अलग-अलग रंग के, अलग-अलग जीव दिखाई दिए. कुछ रंग में मस्त, कुछ भंग में मस्त. कुछ तेज रफ़्तार बाइक में मगन, कुछ दारू के नशे में टुन्न. एक मित्र मिले, अनजाने से. अनजाने से इसलिए क्योंकि पूरी तरह अपने रंग में थे. न कदमों का होश था, न हमें पहचान पाने का. पता नहीं किस झोंक में चले आये सड़क के इस पार. आकर गले लगे और बोले बुरा न मानो होली है. हमने कहा इसमें बुरा क्या मानना मित्र, आखिर होली है ही ऐसा त्यौहार. उनके चेहरे पर एकदम चमक आ गई, बोले वाह दोस्त, क्या बात कही. फिर एकदम से उनके अन्दर के तरल पदार्थ ने शायद किक मारी. चेहरे को जरा सा सख्त करके बोले, बुरा मानना हो तो खूब मानो. होली है तो है.


हम समझ गए कि उनके और उनके तरल पदार्थ के बीच रस्साकशी चल रही है. अन्दर का तरल पदार्थ उन्हें नाली में पटकने को आतुर दिख रहा था और हमारे मित्र थे कि बिना गिरे-पड़े घर पहुँचने की आतुरता में थे. उनको एक पान की दुकान के किनारे पड़ी बेंच पर बिठाया और सलाह दी कि उतनी ही लिया करो अपने प्याले में, जो न पटके किसी नाले में.

वे हमारा मंतव्य समझ गए तो हो-हो-हो करके हँस दिए. इतनी देर में उनके दिमागी कंप्यूटर ने अपने सॉफ्टवेयर को अपडेट किया और वे हमें पहचान गए. भटकती जीभ के सहारे हमारे हाथ को थाम बड़े भावुक हो गए और बोले, कहाँ रोज-रोज प्याले में भरते हैं, कहाँ रोज-रोज नाले में गिरते हैं. हमने भी उसी भावुकता में वाह-वाह कह दिया.

उस वाह-वाह ने उनके अन्दर के कवित्व को जगा दिया और चंद पंक्तियाँ पटक दी सामने. उसके बाद लगा कि उसे अकेले छोड़ना सही नहीं, सो मित्र-मंडली ने उसे अपने में समेटा और बजाय मयखाने के घर ले जाकर छोड़ा.

उसकी पटकी-पटकाई वही पंक्तियाँ आपके सामने ज्यों की त्यों, बिना लड़खड़ाए. होली की शुभकामनाओं के साथ आनंद लीजिये, आज की बुलेटिन का. 



लोगों ने बड़ा ही गलत काम किया है,
नाहक ही पीने-पिलाने को बदनाम किया है.
कहाँ बह गए लोगों के दरो-दीवार जश्न में,
बैठकर मयखाने में जाम को ही पिया है.

पीने का मजा क्या जानें दूर रहने वाले,
पूछो उसे जो हैं नशे में चूर रहने वाले.
अपने में खोये रहते हैं दीवानों की तरह,
शहंशाह खुद को जहाँ का बना लिया है.

जाम पर जाम टूट कर बिखर गए कितने,
महकती शाम के दीवाने हो गए कितने.
मदहोशी के आलम में अब होश नहीं अपना,
जाना है घर पता मयखाने का दिया है.

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बुधवार, 20 मार्च 2019

बुरा ना मानो होली है !

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |


मैं टल्ली हूं, आशा है आप भी टल्ली होंगे !!

मैने ये बुलेटिन आपको दीवाली की शुभकामनायें देने के लिये लिखा है...आज इस आज़ादी के अवसर पर हमे ये रक्षाबंधन का त्योहार अच्छे से मनाना चाहिये और घरों मे दीपक जला कर रंग गुलाल खेलना चाहिये क्योंकि आज ही के दिन गांधी जी ने रावण का वध करके महाभारत का युद्ध विजय किया था और अमेरीका को आज़ाद कराया था...इसलिये एक बार फिर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें....ईश्वर आपको भाँग मे भीगे इस संदेश को झेलने की शक्ति दे..."MERRY X'MAS" ...

बुरा ना मानो होली है !

ब्लॉग बुलेटिन टीम और मेरी ओर से आप सभी को होली की हार्दिक शुभकामनाएं | 
सादर आपका
 शिवम् मिश्रा

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538.होली का त्यौहार

फाग सुनाये होली

हमारी पहचान हैं त्योहार

गुलाल- ए- अमन

ठहरो , फिर मैं भी मना लूं होली

होली का हुड़दंग !

हैप्पी होली --

फागुन आया है

"होली"

सात सालों के बाद इस शुभ संयोग में मनेगी होली, होलिका दहन का यह है शुभ समय

होली खेलि रहे नन्दलाल

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अब आज्ञा दीजिए ... 

जय हिन्द !!!

सोमवार, 18 मार्च 2019

श्रद्धांजलि - मनोहर पर्रिकर और ब्लॉग बुलेटिन

सभी हिंदी ब्लॉगर्स को नमस्कार।

सच्चे और सादगी पसंद व्यक्तित्व, आईआईटीएन, ईमानदार आदर्श नेता, गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री, देश के पूर्व रक्षामंत्री श्री मनोहर पर्रिकर जी को समस्त भारतवासी भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। 












आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर ... अभिनन्दन।।

रविवार, 17 मार्च 2019

होली का टोटका - ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |

इस होली पर 2588 साल बाद ऐसा योग बनने जा रहा है। अचूक टोटका जो आप सभी का जीवन बदल देगा। आजमा कर देखे।

करोबार में मंदी हो, काम पर जाने का मन ना करता हो,कही बाहर जाने का मन ना करता हो,बच्चे पढ़ ना रहे हो, उनके कम नंबर आ रहे हो ,सिर दर्द होता हो,खाना खाने में मन ना लगता हो,रात को बार बार नींद खुलती हो, बदन दर्द होता हो, आँखें दर्द करती हो, आलस आता हो,

इन सब बीमारियों का रामबाण इलाज।

होली की शाम को जब होली दहन हो, अपने सिर पर से सात बार मोबाइल घूमा कर आग में फेंक दें और पीछे मुड़ कर न देखें...

एक दो दिन परेशानी होगी, जी मिचलएगा, गुससा आयेगा, फिर सब बीमारियों में आराम आ जायेगा |

सादर आपका

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झटपट, चटपटी केक

किनारे को भी हमसे किनारा चाहिए - चिन्मय शर्मा

जो हम कभी हो नहीं सकते

झण्डे को तो एक सा रहने दो .....

गुरुजी की होली

वह दिन जरूर आएगा

याद किया करना तर्पन में

तानसेन

अभी सिर्फ 'बनारस' उजड़ा है

पर मानी न मैंने भी हार

१७ मार्च - भारत के दो नायाब नगीनों की जयंती का दिन

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अब आज्ञा दीजिए ... 

जय हिन्द !!! 

शनिवार, 16 मार्च 2019

विश्व नींद दिवस और ब्लॉग बुलेटिन

सभी हिंदी ब्लॉगर्स को नमस्कार।
विश्व नींद दिवस
विश्व नींद दिवस (अंग्रेज़ी: World Sleep Day) प्रत्येक वर्ष 'मार्च विषुव' (21 मार्च) से पहले पड़ने वाले शुक्रवार को मनाया जाता है। नींद के महत्त्व को रेखांकित करने के लिए यह दिवस मनाया जाता है। बेहतर स्वास्थ्य के लिए अच्छी नींद जरूरी है, लेकिन एक सर्वेक्षण में पता चला है कि दुनियाभर में 10 करोड़ लोग 'स्लीप एप्निआ' यानी अच्छी नींद न आने की समस्या से जूझ रहे हैं। इनमें से 80 प्रतिशत से अधिक लोग तो इस बीमारी से ही अनभिज्ञ हैं और 30 प्रतिशत लोग नींद लेते भी हैं तो उसे नियमित बनाए नहीं रख पाते।



शुक्रवार, 15 मार्च 2019

गैरजिम्मेदार लोग और होली - ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |



बहुत गैरजिम्मेदार हो गए हैं आजकल लोग, होली सिर पर है और...
 
अभी तक किसी ने #SaveWater वाला स्यापा शुरू नहीं किया!

सादर आपका

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लिए बैठी है...

राजस्थान की होली के रंग और एक संस्मरण

चुनाव-1989.... राजीव की कंप्यूटर क्रांति पर भारी पड़ा बोफोर्स

प्यारी बिटिया - रीना मौर्या

युद्धबंदी क्या होते हैं?

साबुत लाल मिर्च की सूखी चटनी जो दो महिने तक भी ख़राब नहीं होती!

लोकतंत्र नहीं, लहर तंत्र है..

तेरे सुर मेरे गीत

आह ! ये अग्नि विरह की...!!!

मिट्टी की आशा ....

अमर शहीद संदीप उन्नीकृष्णन की ४२ वीं जयंती

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अब आज्ञा दीजिए ...

जय हिन्द !!!

गुरुवार, 14 मार्च 2019

फाउंटेन पैन का शौक और ब्लॉग बुलेटिन


नमस्कार दोस्तो, 
आज थोड़ी सी चर्चा फाउंटेन पैन की हो जाये. ऐसा इसलिए क्योंकि अपने लगभग सैकड़ा भर फाउंटेन पैन की सफाई के दौरान यह ख्याल आया. यह हम सभी जानते हैं कि यह एक ऐसा पैन होता है जिसकी निब (नोंक) नुकीली होती है. इसके अंदर स्याही के भरने के लिए जगह होती है. उपयोग के दौरान स्याही समाप्त हो जाने के बाद दोबारा स्याही भरकर उसे उपयोग में लाया जाता है. गुरुत्वाकर्षण बल के कारण स्याही नीचे निब की पिन में आती है और कागज़ पर अक्षर रूप में उतर कर रचनाओं को जन्म देती है. फाउंटेन पैन से लिखने की आदत हमारे चाचा जी द्वारा डलवाई गई है. उनका कहना था कि फाउंटेन पैन से लिखने से राइटिंग अच्छी होती है.


उनके द्वारा पैन से लिखने की जो आदत बचपने में पड़ी वो अभी तक बनी हुई है. पैन को लेकर स्थिति यह है कि एकदम लालच जैसी स्थिति है. आये दिन कोई न कोई पैन खरीदा ही जाता है, बस इसके लिए एक मौका चाहिए होता है, बहाने के रूप में. कभी अपने जन्मदिन पर, कभी अपने परिजनों के जन्मदिन पर, कभी किसी ख़ुशी के मौके पर, कभी किसी त्यौहार पर. कभी-कभी हमें उपहार में भी ये मिल जाते हैं. अपने सभी पैन की देखभाल भी हम बहुत ध्यान से करते हैं. सस्ते से सस्ता पैन भी हम कभी बर्बाद न होने देते हैं. हमारे कई मिलने वाले, कई अनजान, अपरिचित मुलाकाती करने वाले, मित्र, कॉलेज के सहयोगी, विद्यार्थी हमारे फाउंटेन पैन से लिखने को लेकर आश्चर्यचकित रहते हैं.  

बहरहाल, आज के समय में जैसी कमी फाउंटेन पैन से लिखने वालों की दिख रही है वैसी ही कमी इंटरनेट पर फाउंटेन पैन से सम्बंधित जानकारी/सामग्री की दिख रही है. हिन्दी में तो कहीं जानकारी मिली ही नहीं, एक-दो जगह अंग्रेजी में अवश्य कुछ देखने को मिला है. (पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें.) ये भी हो सकता है कि हमारी पहुँच में जानकारी न आ रही हो, तो ऐसे में यदि आपमें से किसी के पास यदि फाउंटेन पैन से सम्बंधित जानकारी-सामग्री हो तो हमें अवश्य भेजिएगा.

हम सभी जानते हैं कि फाउंटेन पैन का आविष्कार लेविस वाटरमैन ने 1884 में USA में किया था. उन्होंने लकड़ी को छील कर उसका निब और अंगूर के रस से स्याही बनाई. इन दोनों की सहायता से उनके द्वारा फाउंटेन पैन का जन्म हुआ. इसके बाद भी यदि देखा जाये तो समाज में मानवीय संरचना होने के काफी सालों बाद पैन जैसी चीज़ का आविष्कार भले हुआ हो मगर लेखन सम्बन्धी कार्य के लिए कोई न कोई सामग्री लगभग 24000 साल पहले ही तैयार कर ली गई थी. तत्कालीन मानव समाज द्वारा रेखाचित्र बनाने के लिए, साज-सज्जा करने के लिए पत्थर, लकड़ी आदि से इस तरह की वस्तु निर्मित कर ली गई थी. उनके द्वारा अपनी खेती, फसल, शिकार किए गए जानवरों आदि के चित्र दीवार पर बनाने के लिए पत्थर से बने औजार का प्रयोग किया गया. बाद में मिस्र के लोगों ने पेड़-पौधे का उपयोग करके कागज बनाया गया और उस पर लिखने के लिए बांस द्वारा निर्मित पैन बनाया गया. कई सालों तक इसी तरह के पैन उपयोग में लाये जाते रहे. इसके बाद अलग अलग तरीकों से पैन बनाने के लिए लिए बहुत से लोग इस काम में लग गए लेकिन हर पैन में कोई न कोई कमी बनी रही.


M. Klein and Henry W. Wynne received U.S. Patent 68,445 in 1867 for an ink chamber and delivery system in the handle of the fountain pen

लगातार होते रहे विकासपरक आविष्कारों के बाद फाउंटेन पैन का सफल आविष्कार सामने आया. यद्यपि स्याही के देर से सूखने, हाथों के स्याही से गंदे होने, पैन की स्याही बह जाने से कपड़ों के ख़राब होने सम्बन्धी दिक्कतें लगातार बनी रहीं. इसके बाद भी फाउंटेन पैन से लेखन-कार्य अनवरत चलता रहा. इसकी समस्याओं का समाधान खोजने के लिए कालांतर में बॉल पैन का आविष्कार हुआ और 1938 में बॉल पैन का पहला पैटेंट Laszlo Biro को मिला. आज अनेक तरह के रंग-बिरंगे और आकर्षक बॉल पैन बाज़ार में उपलब्ध हैं. नई पीढ़ी के लेखन का यह महत्त्वपूर्ण अस्त्र बना हुआ है, इसके बाद भी फाउंटेन पैन के शौक़ीन आज भी हैं जो अपने संग्रह में लगातार फाउंटेन पैन एकत्र करते जा रहे हैं.

यह बुलेटिन भले ही फाउंटेन पैन से न लिखी गई हो मगर आप इसका आनंद लीजिये, फाउंटेन पैन पर दी गई संक्षिप्त जानकारी के साथ.

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बुधवार, 13 मार्च 2019

तेरा, तेरह, अंधविश्वास और ब्लॉग-बुलेटिन



आज भले बुधवार का दिन होबाकी तारीख तेरह है. माने लोग एगो भयंकर मोहावरा बनाए हुये है:  फ्राइडे द थर्टींथ! कोई हमसे पूछकर देखे त त फ्राइडे द थर्टींथ से जादा भयंकर अऊर डरावना हमरे बास्ते कोनो मन-डे यानी सोमवार होता है. हमरा सारा कारीबी लोग जानते हैं कि हमको ई जनम में कोनो से डर लगता हैत ऊ सोमवार है. मगर अंधबिस्वास हैत हइये हैउसका कोनो इलाज नहीं.   


जमाना चाहे केतना भी एड्भांस हो जाएअंधबिस्वास खतम नहीं होता है. अऊर अंधबिस्वास भी अजीब-अजीब तरह का पालता है लोग जिसका कोनो सिर पैर नहीं होता है. अब बताइए कि दही खाकर काम करने से ऊ काम सफल होता हैत सफलता में दही का हाथ है कि अदमी के मेहनत का! करिया बिलाई रस्ता काट दे त काम बिगड़ जाता है. अऊर कहीं बिलाइये का एक्सीडेण्ट हो जाए त कौन दोसी. घर से निकलते कोई छींक दिया त काम खराब. अऊर काम अच्छा हो गया तब?

अब केतना गिनाया जाए. जेतना समाजओतना अंधबिस्वास. कहाँ से सुरू हुआअऊर कब से चला आ रहा है ई सबकोई नहीं जानता है. अब देखिए नहम जोन अपार्टमेंट में रहते हैंउसमें फ्लैट नं. 420 का नम्बर मिटा के भाई लोग 421 बना दिया है. अब सोचिए तनम्बर 420 होने से अदमी दू नम्बरी हो जाता है काबाकी मन का भरम का कोनो ईलाज नहीं. 


नम्बर से एगो अऊर बात याद आ गया. होस्पिटल में कभी देखे हैं 13 नम्बर बेड नहीं होता है. अरे भाई तेरह नम्बर का पावर एतना तगड़ा हो गया कि डाक्टर का काबलियत भी हार जाता है! कमाल है!! अब इम्तेहान में रोल नम्बर 13 हो गयात पढाइए छोड़ कर बईठ थोड़े जाता है अदमी. बाबा नानक देव त 13 के नम्बर से समर्पन का दर्सन सिखा गये दुनिया को. 

अब एगो मजेदार बात बताते हैं. सायद बहुत सा लोग को मालूम होगा. बाकी जो लोग नहीं जानता है उनको बताते हैं. चंडीगढ शहर में बहुत सेक्टर हैलेकिन 13 नम्बर सेक्टर नहीं है. इहो अंधबिस्वास का नतीजा है. लेकिन इसमें भी खूब सुंदर अंधबिस्वास छिपा है. जेतना सेक्टर हैउसका नम्बर एतना हिसाब से बइठाया हुआ है कि आप कोनो आमने सामने वाला दूगो सेक्टर का नम्बर जोड़िए त ऊ 13 का गुणक होगा. जैसे 44 सेक्टर का सामने 34 सेक्टरदुनो का जोड़ हुआ 44+34=78 और 78= 13X6. अब एही फार्मूला सब सेक्टर के नम्बर पर लागू होता है. केतना खूबसूरत गणित है...चाहे खूबसूरत अंधबिस्वास. 13 नम्बर सेक्टर नहीं हैमगर सभे सेक्टर के बीच मौजूद है.


मगर आज का तारीख के साथ बहुत सा ऐतिहासिक घटना भी जुड़ा हुआ है. आज ही के रोज नाना फड़नवीस का निधन हुआ था जो पेशवा साम्राज्य में परभावसाली मंत्री थे अऊर आज भी भरत के मेकाइवली के रूप में जाने जाते हैं. महान सितार वादक उस्ताद विलायत ख़ाँ का भी निधन आज ही के रोज हुआ था. अऊर आज के दिन महान क्रांतिकारी ऊधम सिंह लंदन में एक सभा के दौरान गवर्नर माइकल ओडवायर को मारकर जालियाँवाला बाग के भीसन नरसन्हार का बदला लिये थे.

आइये उन सब महान लोग को याद करते हुये हमरे तरफ से न तीन में न तेरह में... सॉरी न तेईस में न चौबीस में यानि 2350 वाँ ब्लॉग बुलेटिन में सामिल ब्लोग-पोस्ट का आनंद लें!!

                             -      सलिल वर्मा
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मंदिर को जाती सड़क

बेटियों की जिंदगी सहेजने के लिए विदेशी दूल्हों पर सख्ती जरूरी

तितली तेरे रंग

यादें

ताकि सनद रहे ( मेरे देश की पुलिस और उसके कानून ) डॉ लोक सेतिया

बेटी कल विदा होंगी

बरगद होने के बाद तुम समझोगे

विरह गीत

पेड़ और कविता

मरुधर में बोने सपने हैं

७९ साल पहले लिया गया था जलियाँवाला नरसंहार का प्रतिशोध

कुछ पैगाम भेजे हैं

चिट्ठाजगत और घर की बगल की गली का शोर एक सा हुआ जाता है

उसकी थकान - भगवत रावत

अस्माकं विद्यालय

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लेखागार