नमस्कार
मित्रो,
आज जहाँ एक ओर बैसाखी के पर्व को मनाने का अवसर है वहीं जलियाँवाला बाग़
हत्याकांड के शहीदों को नमन करने का दिन भी है. बैसाखी पंजाब और आसपास के प्रदेशों
का सबसे बड़ा त्योहार है. इसे पंजाब और हरियाणा के किसान सर्दियों की फसल काटने के
बाद नए साल की ख़ुशी के रूप में मनाते हैं. आज ही के दिन 13 अप्रैल 1699 को दसवें सिख गुरु गोविंद सिंह जी ने
खालसा पंथ की स्थापना की थी. इस कारण से भी बैसाखी का त्योहार सिखों
के लिए एक बड़ा त्योहार है.
उस दिन भी रविवार होने के कारण अमृतसर के आस-पास के गाँवों के अनेक किसान बैसाखी
मनाने अमृतसर आए हुए थे. इसी दिन, 13 अप्रैल 1919 को ब्रिटिश सरकार के रॉलेट एक्ट के
शांतिपूर्वक विरोध पर हुई गिरफ्तारियों तथा गोलीकांड की भर्त्सना करने के लिए बैसाखी
के दिन शाम को क़रीब साढ़े चार बजे अमृतसर के जलियाँवाला बाग में एक सभा का
आयोजन किया गया था. इस सभा में लगभग बीस हजार व्यक्ति इकट्ठे हुए. वहाँ के तत्कालीन जनरल डायर
ने उसी दिन साढ़े नौ बजे सभा को अवैधानिक घोषित कर दिया था. ऐसी स्थिति के बाद भी
सभा हो रही थी. बाग़ तीन तरफ से दीवारों से घिरा था हुआ था और आने-जाने का एकमात्र
तंग रास्ता था. जनरल डायर ने अपने सिपाहियों को इसी एकमात्र तंग रास्ते पर तैनात कर
बिना किसी चेतावनी के 50 सैनिकों को गोलियाँ चलाने का आदेश दिया.
उसके सिपाहियों ने निहत्थे बच्चों, महिलाओं, बूढ़ों की भीड़ पर लगभग दस-पंद्रह मिनट में 1650 गोलियाँ
चलाईं. कुछ लोग अपनी जान बचाने की कोशिश में भगदड़ में कुचल कर मर गए, कुछ वहाँ
बने एक कुंए में कूद गए. सरकारी आँकड़ों के अनुसार लगभग चार सौ लोग मारे गए और बारह
सौ के आसपास घायल हुए. घायलों को कोई चिकित्सा सुविधा नहीं दी गई. आज भी अमृतसर के
डिप्टी कमिश्नर कार्यालय में 484 शहीदों की सूची है जबकि जलियाँवाला
बाग़ में 388 शहीदों की सूची लगी हुई है. ब्रिटिश शासन ने
अपने एक अभिलेख में इस घटना में 200 लोगों का घायल होना तथा
379 लोगों का शहीद होना स्वीकारा है.
इस हत्याकांड के समय ऊधम सिंह उसी बाग़ में थे. उनको भी गोली लगी थी.
उन्होंने इसका बदला लेने के लिए 13 मार्च 1940 को लंदन के कैक्सटन हॉल में बम विस्फोट किया. और इस हत्याकांड के प्रमुख
आरोपी जनरल डायर को गोली से मार डाला. ऊधम सिंह को 31 जुलाई 1940
को इसके लिए फाँसी दी गयी. गांधी जी और जवाहरलाल नेहरू ने ऊधम सिंह द्वारा
की गई इस हत्या की निंदा की थी.
जलियाँवाला बाग़ हत्याकांड आज भी विश्व के बड़े नरसंहारों में से एक के रूप
में गिना जाता है. हिन्दू, सिख और मुसलमानों की एकता से अपने
शासन को ख़तरे में देखकर ब्रिटिश शासन ने भारतीयों को सबक सिखाने के लिए यह सब किया
था. यही कारण है कि ब्रिटेन में जनरल डायर बहुतों के लिए नायक साबित हुआ. वहाँ की कंज़रवेटिव
पार्टी ने डायर को रत्नजड़ित तलवार भेंट की, जिस पर लिखा था पंजाब का रक्षक
साथ ही चंदा करके उसे दो हज़ार पौंड का इनाम भी दिया गया था. जलियाँवाला बाग़ में गोलियों
के निशान आज भी मौजूद हैं जो ब्रिटिश शासन के अत्याचार की कहानी कहते हैं. आज़ादी के
बाद अमेरिकी डिज़ाइनर बेंजामिन पोक ने जलियाँवाला बाग़ स्मारक का डिज़ाइन तैयार किया,
जिसका उद्घाटन 13 अप्रैल 1961 को किया गया.
जलियाँवाला बाग हत्याकांड के शहीदों को बुलेटिन परिवार की तरफ से विनम्र
श्रद्धांजलि.
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