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शुक्रवार, 23 अगस्त 2019

जन्माष्टमी - बाजे बधाई मगन हर कोई


 हमारे देश में कई स्थानों पर आज जन्माष्टमी का पर्व मनाया जा रहा है. कई अन्य स्थानों पर कल मनेगी कृष्ण के जन्म की अष्टमी...
कृष्ण हमारी संस्कृति का एक महत्वपूर्ण आधार स्तंभ हैं. हमारा दिन, हमारी शाम, हमारे पर्व,  हमारा खान पान, हमारी परंपरायें ..कौन सी शाखा है इस देश की जहाँ श्रीजी उपस्थित नहीं हैं... किसी के पुत्र, किसी के मित्र, किसी के पति तो किसी के प्रेमी. एक साथ  विभिन्न रूपों में जनमानस को आनंदित किये हुए आम -से  गोपाल तो ज्ञान, कर्म और भक्ति के सिद्धांत को प्रतिपादित करते बुद्धिजीवियों केे योगेश्वर श्रीकृष्ण के लिए ही संभव है.
कृष्ण का आधार पाकर सब जन हर्षित हैं परंतु इन सब दायित्वों को पूर्ण करने में स्वयं अपने से छूट गये कृष्ण की पीड़ा को किसी किसी ने ही समझा. रश्मिप्रभा जी ने इस पीड़ा को आत्मसात किया और शब्दों में व्यक्त भी किया.... क्या खोया क्या पाया में

https://lifeteacheseverything.blogspot.com/2019/08/blog-post_23.html

कृष्ण, माधव, मुरारी टेर लगाई है अनीता जी ने...
http://amrita-anita.blogspot.com/2019/08/blog-post_80.html

हम भारतीयों को अपनी बात विस्तार में कहने की आदत है जबकि कृष्ण ने कर्म करने पर बल दिया है . मगर अपनाया जापानियों नें द्वितीय विश्वयुद्ध की भारी बरबादी के बाद लगातार कर्म करते हुए आज यह देश आधुनिकतम तकनीक की मिसाल है. साहित्य के क्षेत्र में भी बातें कम कार्य अधिक अपनाते हुए 'हाइकू और 'ताँका'  को इजाद किया... इस विधा से सबंधित जानकारी मिलेगी इस ब्लॉग में.

http://pahleebar.blogspot.com/2019/08/blog-post_23.html

कृष्म की बात हो और यमुना का जिक्र न हो, यह संभव ही नहीं.  उफान पर आती यमुना बल कृष्ण के पैर को छूकर शाँंत हो गई. आजकल फिर से यमुना उफान पर है. पर इस बार कारण भिन्न है. ब्लॉग पर बहुत विस्तार से समझाया है. देखे यहाँ...

http://gustakh.blogspot.com/2019/08/blog-post_22.html

समंदर का प्रेम अपने नमकीन स्वाद में किस तरह निखर आता है. रोचक अंदाज में बता रहीं  प्रतिभा कटियार यहाँ...

http://pratibhakatiyar.blogspot.com/2019/08/blog-post_25.html

माण्डूक्योपनिषद अथर्ववेद का एक उपनिषद है। इस पर विस्तृत जानकारी के लिए खंगालिये स्मार्ट इंडियन अनुराग जी का ब्लॉग....

http://pittpat.blogspot.com/2019/08/Mandookya-Upanishad-Summary.html


बुधवार, 21 अगस्त 2019

24वीं पुण्यतिथि - सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर - ब्लॉग बुलेटिन

सभी हिन्दी ब्लॉगर्स को मेरा नमस्कार।
सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर (जन्म- 19 अक्तूबर, 1910 - मृत्यु- 21 अगस्त, 1995) खगोल भौतिक शास्त्री थे और सन् 1983 में भौतिक शास्त्र के लिए नोबेल पुरस्कार विजेता भी थे। उनकी शिक्षा चेन्नई के प्रेसीडेंसी कॉलेज में हुई। वह नोबेल पुरस्कार विजेता सर सी. वी. रमन के भतीजे थे। बाद में डा. चंद्रशेखर अमेरिका चले गए। जहाँ उन्होंने खगोल भौतिक शास्त्र तथा सौरमंडल से संबंधित विषयों पर अनेक पुस्तकें लिखीं।

20वीं शताब्दी के महानतम वैज्ञानिकों में से एक वैज्ञानिक सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर अपने जीवन काल में ही एक किंवदंती बन गए थे। 'कामेश्वर सी. वाली' चन्द्रशेखर के जीवन के बारे में लिखते हैं कि 'विज्ञान की खोज में असाधारण समर्पण और विज्ञान के नियमों को अमली रूप देने और जीवन में निकटतम संभावित सीमा तक उसके मानों को आत्मसात करने में वह सब से अलग दिखाई देते हैं।' उसके बहुसर्जक योगदानों का विस्तार खगोल - भौतिक, भौतिक - विज्ञान और व्याहारिक गणित तक था। उनका जीवन उन्नति का सर्वोत्तम उदाहरण है जिसे कोई भी व्यक्ति प्राप्त कर सकता है बशर्ते कि उसमें संकल्प, शक्ति, योग्यता और धैर्य हो। उसकी यात्रा आसान नहीं थी। उन्हें सब प्रकार की कठिनाईयों से जूझना पड़ा। वह एक ऐसा व्यक्तित्व था जिसमें भारत, जहां उनका जन्म हुआ, इंग्लैंड और यू.एस.ए. की तीन अत्यधिक भिन्न संस्कृतियों की जटिलताओं द्वारा आकार मिला।

वह मानवों की साझी परम्परा में विश्वास रखते थे। उन्होंने कहा था, 'तथ्य यह है कि मानव मन एक ही तरीके से काम करता है। इससे हम पुन: आश्वस्त होते है कि जिन चीज़ों से हमें आनन्द मिलता है, वे विश्व के हर भाग में लोगों को आनन्द प्रदान करती है। हम सबका साझा हित है और इस तथ्य से इस बात को बल मिलता है कि हमारी एक साझी परम्परा है।' वह एक महान् वैज्ञानिक, एक कुशल अध्यापक और दुर्जेय विद्वान थे।


आज हम सब महान वेज्ञानिक सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर जी की 24वीं पुण्यतिथि पर उनका स्मरण करते हुये उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। सादर।। 


~ आज की बुलेटिन कड़ियाँ ~











आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर ... अभिनन्दन।।  

मंगलवार, 20 अगस्त 2019

हर एक पल को अमर बनाते हैं चित्र - विश्व फोटोग्राफी दिवस और ब्लॉग बुलेटिन


नमस्कार साथियो,
इन्सान ने अपनी भाषा का आविष्कार, शब्दों का निर्माण बाद में किया था सबसे पहले उसने चित्रों का प्रयोग करना शुरू किया था. उनके बीच बातचीत का माध्यम चित्र ही हुआ करते थे. वे चित्र या तो दीवारों पर जिंदा रहे या फिर किसी धातु के टुकड़े पर. ये चित्र मानव मन की कल्पना भी थे, उसके द्वारा देखे गए दृश्य भी थे और विचारों की अभिव्यक्ति भी मगर अनेक बार कई कारणों से ये दीर्घकालिक न रह पाते थे. कालांतर में तकनीक का विकास होता रहा और चित्र भी सदा-सदा को जीवित रहने लगे. कहा भी जाता है कि जिस पल को तस्वीरों के माध्यम से कैद कर लो वो अमर हो जाता है. इंसानों के द्वारा गुजारे गए पल इन्हीं चित्रों के द्वारा अजर-अमर हो जाते हैं. जब भी उसका मन करता है वह इन्हीं चित्रों के सहारे अपने अतीत की यात्रा कर लेता है. वर्तमान दौर की सत्यता यही है कि फोटोग्राफी की तकनीक एक वरदान के रूप में सामने आई है. इंसान के पास जब कैमरे नहीं थे तब भी वह तस्वीरें बनाता था. इनके जरिये उसने अपनी भावी पीढ़ी के लिए ज्ञान का, जानकारी का भंडार भी छोड़ा. बाद में जब कैमरे का आविष्कार हुआ तो फोटोग्राफी इंसान के लिए अपनी रचनात्मकता को प्रदर्शित करने का जरिया बना. 




विश्व फोटोग्राफी दिवस को मनाने के पीछे भी एक कहानी है. दरअसल फ्रांसीसी वैज्ञानिक लुईस जेक्स और मेंडे डाग्युरे ने सबसे पहले सन 1839 में फोटो तत्व की खोज की थी. ब्रिटिश वैज्ञानिक विलियम हेनरी फॉक्सटेल बोट ने निगेटिव-पॉजीटिव प्रोसेस का आविष्कार किया और सन 1834 में टेल बॉट ने लाइट सेंसेटिव पेपर की खोज करके खींची गई फोटो को स्थायी रूप में रखने में मदद की.  फ्रांसीसी वैज्ञानिक आर्गो की फ्रेंच अकादमी ऑफ साइंस के लिए लिखी गई एक रिपोर्ट को तत्कालीन फ्रांस सरकार ने खरीदकर 19 अगस्त 1939 को आम लोगों के लिए फ्री घोषित कर दिया था. इसी उपलब्धि की याद में 19 अगस्त को विश्व फोटोग्राफी दिवस के रूप में मनाया जाने लगा.



यह दिवस वैसे तो कल मना लिया गया किन्तु आज आपके लिए खुद की क्लिक की गई कुछ फोटो लाये हैं. उनके साथ आज की बुलेटिन का आनंद लीजिये.

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रविवार, 18 अगस्त 2019

विराट व्यक्तित्व नेता जी की रहस्यगाथा : ब्लॉग बुलेटिन


नमस्कार साथियो,
कहते हैं कि जो आया है वो जायेगा ही मगर कोई आने वाला जाने के बजाय विलुप्त हो जाये तो? क्या ऐसा भी होता है कि आने वाला विलुप्त हो जाये? यदि ऐसा होता भी है तो वह विलुप्त क्यों हुआ? यदि खुद अपनी मर्जी से विलुप्त नहीं हुआ तो फिर किसने विलुप्त करवाया? उसके खुद विलुप्त होने में, किसी के द्वारा विलुप्त करवाए जाने में लाभ किसका? विश्व की तमाम रहस्यगाथाओं से ज्यादा बड़ी और रहस्यमयी गाथा नेता जी के विलुप्त होने की गाथा है. यह रहस्यमयी इसलिए भी है कि नेता जी का व्यक्तित्व जितना विराट और चुम्बकीय रहा है, उसी अनुपात में या कहें उससे भी अधिक जनमानस के बीच उनकी गाथा तैरती रही है, आज के दिन यानि 18 अगस्त 1945 को उनके गायब हो जाने की. कोई कुछ भी कहे मगर तमाम सारे घटनाक्रम, अनेक तथ्य इशारा इस तरफ करते हैं कि आज के दिन हुई तथाकथित विमान दुर्घटना में नेता जी की मृत्यु नहीं हुई थी.


उनकी मृत्यु को जिस विमान दुर्घटना में हुआ प्रचारित किया जाता है, कहा जाता है कि उस दिन कोई विमान दुर्घटना ताइवान में हुई ही नहीं. इसका ऐतिहासिक प्रमाण यह है कि 03 सितंबर 1945 को अमेरिकी सेना ने जापानी सेना को हराकर ताइवान पर क़ब्ज़ा कर लिया था. इसके बाद उसकी ख़ुफिया एजेंसी सीआईए ने अपनी रिपोर्ट में साफ़-साफ़ कहा था कि ताइवान में पिछले छह महीने से कोई विमान हादसा नहीं हुआ था. यहां यह गौर करने वाली बात है कि अपनी कथित मौत से दो दिन पहले 16 अगस्त 1945 को नेताजी वियतनाम के साइगॉन शहर से भागकर मंचूरिया गए थो जो उस समय रूस के क़ब्ज़े में था. नेता जी की मौत के रहस्य पर क़िताबें लिखने वाले और मिशन नेताजी के संस्थापक पत्रकार-लेखक अनुज धर ने अपनी लिखी क़िताबों में ताइवान सरकार के हवाले से दावा किया है कि 15 अगस्त से 05 सितंबर 1945 के दौरान कोई विमान हादसा नहीं हुआ था.

ऐसी चर्चाएँ बराबर बनी रहीं कि नेता जी रूस चले गए जहाँ से बाद में उनको भारत आने का सुरक्षित रास्ता प्रदान किया गया. भारत में उनके प्रवास की सर्वाधिक चर्चा फ़ैजाबाद के गुमनामी बाबा के रूप में रही हैं. यद्यपि बहुत से लोगों का मानना है कि नेता जी का व्यक्तित्व जिस तरह का था वैसे में संभव नहीं कि वे गुमनामी में अपना जीवन व्यतीत कर देते. इसके बाद भी सम्बंधित व्यक्ति को लेकर लोगों में विश्वास बना हुआ है कि गुमनामी बाबा और कोई नहीं बल्कि नेता जी सुभाष चन्द्र बोस ही थे. गुमनामी बाबा के निधन के बाद उनके नेताजी होने की बातें फैलने लगीं तो नेताजी की भतीजी ललिता बोस कोलकाता से फैजाबाद आईं. वे गुमनामी बाबा के कमरे से बरामद सामान देखकर यह कहते हुए फफक पड़ी थीं कि यह सब कुछ उनके चाचा का ही है. इसके बाद स्थानीय लोगों ने आन्दोलन करना शुरू कर दिया. लम्बे समय तक चले सामाजिक और न्यायिक प्रयासों के बाद मामले की सुनवाई करते हुए 31 जनवरी 2013 को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया था कि गुमनामी बाबा के सामान को संग्रहालय में रखा जाए ताकि आम लोग उन्हें देख सकें.

गुमनामी बाबा के सामान से मिली नेता जी की तस्वीर 

लखनऊ बेंच ने अपने फैसले में स्पष्ट तौर पर कहा था-
ऐसे महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की स्मृति या उनकी धरोहर आने वाली नस्लों के लिए प्रेरणादायक है. अगर फैजाबाद में रहने वाले गुमनामी बाबा, जिनके बारे में लोगों का विश्वास था कि वे नेताजी सुभाषचंद्र बोस हैं और उनके पास आने-जाने वाले लोगों व उनके कमरे में मिली तमाम वस्तुओं से इस बात का तनिक भी आभास होता है कि लोग गुमनामी बाबा को नेताजी के रूप में मानते थे तो ऐसे व्यक्ति की धरोहर को राष्ट्र की धरोहर के रूप में सुरक्षित रखा जाना चाहिए.

नेता जी की मृत्यु की जांच से सम्बंधित बने आयोगों की अपनी-अपनी रिपोर्ट्स रही हैं. जिस तरह का रहस्य, जिस तरह की गोपनीयता नेता जी की मृत्यु को लेकर बनाई जाती रही है, वैसी ही गुमनामी बाबा के निधन और उनके अंतिम संस्कार को लेकर बनाई गई. यह सब इस रहस्य को और गहरा करता है. अंतिम सत्य क्या है यह तो उसी सत्य को भोगने वाला ही जानता है मगर एक सत्य यह है कि जनमानस को विश्वास है कि नेता जी की मृत्यु आज के दिन बताई जाने वाली तथाकथित विमान दुर्घटना में नहीं हुई थी. उनकी मौत का रहस्य अभी भी रहस्य है. जब तक यह रहस्य उजागर नहीं होता तब तक उनकी मौत को स्वीकारना नेता जी के अस्तित्व को, उनकी विराटता को नकारना ही होगा. आज के दिन वे विलुप्त हुए हैं, मृत नहीं और यह भी अपने आपमें परम सत्य है कि विलुप्त होने वाले मरते नहीं वरन अमरत्व को प्राप्त कर जाते हैं. महाकाल बन जाते हैं.
जय हिन्द

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शनिवार, 17 अगस्त 2019

ब्लॉग लेखन में साहित्य की धमक कम नहीं....

हिंदी ब्लॉग लेखन से लेखक/लेखिकाओं की बढ़ती दूरियों पर बहुत बात होती है मगर ब्लॉग बुलेटिन के लिए ब्लॉग पोस्ट के चयन करते समय यह मिथ्या बयानी लगती है. आज की बुलेटिन में एक से एक दिग्गज ब्लॉगर्स जो साहित्य एवं पत्रकारिता में एक अच्छा मुकाम हासिल करने के बाद भी ब्लॉग लेखन से विमुख नहीं हुए हैं.  लिखने वाले ने लिख दिये हैं, अब पाठक की जिम्मेदारी कि पढ़ कर अपनी प्रतिक्रिया भी दे.....

बरखा सावन में खूब बरस कर भादो में भी जलवे बिखेर रही अपने. इस मौसम की एक रोमांटिक कथा अंशुमाला पिरो रहीं अपने शब्दों में. वस्तुत: यह कथा नहीं उस विवाहित जोड़े की गाथा है जो हर मौसम में अच्छा समय चुराने का मौका निकाल लेता है.
http://mangopeople-anshu.blogspot.com/2019/08/blog-post_16.html?m=1

शिखा वार्ष्णेय जानी मानी ब्लॉगर हैं. रूस से जर्नलिज्म कोर्स करने के बाद लंदन में बसे होने के बाद भी विशुद्ध भारतीय शिखा पत्रकारिता के साथ रेडियो पर अपनी विशिष्ट रेसीपीज बनाना भी सिखाती हैं. "स्मृतियों में रूस" में अपने रूस प्रवास के अनुभव साझा करने के बाद हाल ही में अपनी पुस्तक "देशी चश्मे से लंदन डायरी" में लंदन को अपनी नजर से दिखाती हैं. उनके इस दिखाने को  एक और जानी मानी ब्लॉगर वंदना अवस्थी दुबे  ने अपने ब्लॉग पर समीक्षा के रूप में साझा किया है यहाँ पर...

http://wwwvandanablog.blogspot.com/2019/08/blog-post.html

उलूक टाइम्स पर सुशील जोशी अपने विशेष अंदाज में लिखने के पैमाने और लिखने के नशे पर लिख लिख कर ही दिखा रहे हैं....
https://ulooktimes.blogspot.com/2019/08/blog-post_17.html?m=1

बुलंद आवाज में भी शास्त्रीयता की धाक जमाने वाली शुभा मुद्गल से कौन परीचित नहीं होगा. ब्लॉगर और जानी मानी लेखिका प्रतिभा जी की कविता " ओ अच्छी लड़कियों " पर शुभा जी और अनीस जी की चर्चा को संस्मरण में लिखा खूबसूरत अंदाज में...

https://pratibhakatiyar.blogspot.com/2019/08/blog-post_17.html

निर्मल शुक्ल के नवगीत संग्रह पर शशि पुरवार जी ने मुहावरों का मुक्तांगन एक अरण्य काल (एक अध्ययन) में बहुत विस्तार से लिखा है...

http://sapne-shashi.blogspot.com/2019/08/blog-post_16.html

गुरुवार, 15 अगस्त 2019

स्वतंत्रता और रक्षा की पावनता के संयोग में छिपा है सन्देश : ब्लॉग बुलेटिन

नमस्कार साथियो,
स्वतंत्रता दिवस की और पावन पर्व रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएँ.

इस वर्ष का सावन माह अपने आपमें अभूतपूर्व घटनाओं का गवाह रहा है. इस अभूतपूर्व स्थिति में इए सुखद और पावन संयोग ही कहा जायेगा कि स्वतंत्रता का महोत्सव और भाई-बहिनों के स्नेह का पर्व एक दिन ही मनाया जा रहा है. इसी को किसी न किसी रूप में हम सभी संयोग कहते हैं, सितारों की चाल कहते हैं, सौभाग्य कहते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि यदि हम सावन माह की गतिविधियों को देखें तो देशहित में कई सारे निर्णय संपन्न हुए.


देश के वैज्ञानिकों की सफल यात्रा चंद्रयान के रूप में आरम्भ हुई. इस यात्रा की कमान देश की मातृशक्ति के हाथ में थी, यह भी अपने आपमें गौरवशाली क्षण था. इस अभियान के द्वारा जो कदम अन्तरिक्ष क्षेत्र में भारतीय वैज्ञानिकता रखने जा रही है, वैसा आज तक किसी भी देश द्वारा उठाया नहीं गया है.


चंद्रयान से शुरू वैज्ञानिक सफलता यात्रा अभी आरम्भ ही  हुई थी, देशवासी अभी इस उमंग की सराबोर से उबरे भी न थे कि एक कदम सामाजिक भेदभाव दूर करने के लिए उठाया गया. तीन तलाक की समाप्ति भले ही एक समुदाय विशेष से संदर्भित हो मगर इसके समाप्त होने से देश की मातृशक्ति को समानता का अधिकार प्रदान किया गया, उनके व्यक्तित्त्व को एक इन्सान समझने की परिभाषा से अलंकृत किया गया.


इसके ठीक एक सप्ताह बाद ही एक देश, एक संविधान के विधान को स्पष्ट स्वरूप प्रदान किया गया. किसी समय राजनैतिक प्रतिस्थितियों के चलते उठाया गया कदम कालांतर में न केवल राजनैतिक विभेद का कारक बना बल्कि देश के भूभाग को भी एक तरह से अलग-थलग किये रहा. धारा 370 की समाप्ति के साथ ही दो राज्यों का निर्माण होने ने राजनैतिक सजगता की दिशा में कदम बढ़ाया तो देश को वास्तविक रूप में कश्मीर से कन्याकुमारी तक एक होने का सन्देश दिया. यह भी देश की स्वतंत्रता के प्रति सार्थकता कही जा सकती है.


इन घटनाओं का होना शायद पूर्व-निर्धारित रहा होगा, शायद एक संयोग रहा होगा कि स्वतंत्रता दिवस और रक्षाबंधन एकसाथ, एक दिन मनाने का अवसर मिला. इसको एक सन्देश के रूप में देखने की आवश्यकता है. रक्षाबंधन को महज भाई-बहिन के पवित्र प्रेम के रूप में, सुरक्षा के रूप में देखने से इतर अब व्यापकता में देखने की आवश्यकता है. सरकारी स्तर पर स्वतंत्रता के सच्चे अर्थ स्पष्ट करते हुए वैज्ञानिकता को स्थापित किया, सामाजिकता को मान्यता दी और राष्ट्रीयता को एकता प्रदान की. अब हम सभी नागरिकों की जिम्मेवारी बनती है कि इस स्वतंत्रता को सुरक्षा प्रदान करें. अपने कार्यों से, अपनी जिम्मेवारियों से, अपने कर्तव्यों से देश को, समाज को, नागरिकों को सफलता की राह प्रदान करें, सुरक्षा की भावना का विकास करें, उनको आज़ादी का भान बना रहने दें.


आशा है कि हम सभी स्वतंत्रता दिवस और रक्षाबंधन के एकसाथ मनाये जाने के सन्देश को समझेंगे, इसमें अन्तर्निहित भावना को आपस में मिलकर और पुष्ट करेंगे. यदि हम ऐसा कर पाते हैं तो निश्चित ही हम सभी स्वतंत्रता का महोत्सव को सही आयाम प्रदान करेंगे, रक्षाबंधन की पवित्रता को अक्षुण्य रख सकेंगे. इसी पावन भावना के साथ आइये आज की बुलेटिन का आनंद उठायें और एक कदम समानता, भाईचारे, स्नेह, सुरक्षित स्वतंत्रता की ओर बढ़ाएं.

जय हिन्द

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मंगलवार, 13 अगस्त 2019

अंग दान दिवस और ब्लॉग बुलेटिन

सभी हिंदी ब्लॉगर्स को नमस्कार।
अंग दान दिवस (अंग्रेज़ी: Organ Donation Day) भारत में प्रतिवर्ष '13 अगस्त को मनाया जाता है। किसी व्यक्ति के जीवन में अंग दान के महत्व को समझने के साथ ही अंग दान करने के लिये आम इंसान को प्रोत्साहित करने के लिये सरकारी संगठन और दूसरे व्यवसायों से संबंधित लोगों द्वारा हर वर्ष यह दिवस मनाया जाता है। अंग दान-दाता कोई भी हो सकता है, जिसका अंग किसी अत्यधिक जरुरतमंद मरीज को दिया जा सकता है। मरीज में प्रतिरोपण करने के लिये आम इंसान द्वारा दिया गया अंग ठीक ढंग से सुरक्षित रखा जाता है, जिससे समय पर उसका इस्तेमाल हो सके। किसी के द्वारा दिये गये अंग से किसी को नया जीवन मिल सकता है।


~ आज की बुलेटिन कड़ियाँ ~ 













आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर ... अभिनन्दन।।

रविवार, 11 अगस्त 2019

बरखा कहीं है बहार तो कहीं ढ़ाती कहर....


आज बहुत समय बाद कुछ ब्लॉग्स चुनकर लाई हूँ.  आपने पढ़ रखे हों पहले फिर भी जिन्हें हम पढ़ते हैं,  उनको साझा करना भी लुभाता है.
ब्लॉग के लिंक पर क्लिक करें. उन्हें पढ़ कर वहाँ टिप्पणी दें और यहाँँ टिप्पणी करके यह भी बतायें कि यह संकलन कैसा है!

रात में यदि आँखें थककर भी थपकी लेने से इंकार कर दें तो अनगिनत प्रश्नों के साथ जाने कितनी लंबी हो जाती है... एक दार्शनिक सा खयाल रतजगों और उसके बाद के दिन का...

https://lifeteacheseverything.blogspot.com/2019/08/blog-post_11.html

पिट्सबर्ग में रहने वाले स्मार्ट भारतीय अनुराग अपनी बहुमुखी प्रतिभा एवं  उपलब्धियों के बारे में कम ही बोलते/लिखते हैं. जो उनके ब्लॉग को निरंतर पढ़ते हैं, उन्हें कुछ जानकारी भले मिल जाये. इस बार अपनी ब्लॉग पोस्ट में बता रहे हैं अपनी स्वयं की पुस्तकों एवं सेतु वेब पत्रिका के बारे में भी...
http://pittpat.blogspot.com/2019/08/Books-by-Anurag-Sharma.html

बरखा के मौसम सावन के महीने को हरियाला बना रखा है.  इस मौसम की हिलोर ने मन को प्रफुल्लित भी कर रखा है. ओम निश्छल जी भर लायें हैं बरखा की बूँदों से भरकर ब्लॉग पर...
http://pahleebar.blogspot.com/2019/08/blog-post.html

सावन के सुहाने मौसम में सब हरा ही नहीं है. अनेक राज्यों में बरसात ने अपना तांडव जारी रखा है जिसने बारिश के सन्नाटे के साथ कहीं  उदासी भी बसा रखी है.
https://sanyalsduniya2.blogspot.com/?m=1

जिंदगी के कई रंगों में श्वेत और श्याम भी शामिल है जिससे जिंदगी भी स्वयं निरपेक्ष प्रतीत होती है।

http://www.anusheel.in/2019/08/blog-post_11.html

प्यार शर्तों पर नहीं चलता, कहा यही जाता रहा है मगर सुबह का सूरज उगने की पहली शर्त रात का अँधेरा भी है. सृष्टि में कुछ भी बिना शर्त नहीं.बता रही हैं साधना जी यहाँ पर...
http://sudhinama.blogspot.com/2019/08/blog-post_9.html

बुधवार, 7 अगस्त 2019

अश्रुपूरित श्रद्धांजलि - सुषमा स्वराज जी - ब्लॉग बुलेटिन

सभी हिंदी ब्लॉगर्स को नमस्कार। 

बेटी बांसुरी स्वराज 
पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज (Sushma Swaraj) अब इस दुनिया में नहीं रहीं। अचानक दिल का दौरा पड़ने की वजह से मंगलवार की देर रात वह इस दुनिया को छोड़कर चली गईं। 67 साल की बीजेपी नेता सुषमा स्वराज का पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। सुषमा स्वराज के अंतिम संस्कार की रस्म बेटी बांसुरी स्वराज ने पूरा किया। समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, सुषमा स्वराज की बेटी बांसुरी ने अंतिम संस्कार की पूरी प्रक्रिया को पूरा किया। हालांकि, इस दौरान उनके साथ सुषमा स्वराज के पति स्वराज कौशल भी मौजूद थे।

पंचतत्व में विलीन होने से पहले सुषमा स्वराज को श्रद्धांजलि देने के लिए बड़ी भीड़ देखने को मिली। सरकार से लेकर विपक्षी पार्टिोयों के नेताओं की लंबी कतारें दिखीं। उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला ने भी सुषमा स्वराज को अंतिम श्रद्धांजलि दी। इतना ही नहीं, सुषमा को श्रद्धांजलि देते वक्त वेंकैया नायडू फफक-फफक कर रो पड़े।

इसके अलावा, लालकृष्ण आडवाणी, मनीष सिसोदिया, शरद यादव, अशोक गहलोत, बिप्लब देव, अरविंद केजरीवाल समेत कई बड़े नेताओं ने सुषमा स्वराज को अंतिम श्रद्धांजलि दी।

बता दें कि सुषमा स्वराज का मंगलवार रात यहां दिल का दौरा पड़ने से अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में निधन हो गया था। वहां से उनका पार्थिव शरीर रात में ही उनके आवास पर लाकर लोगों के दर्शनार्थ रखा गया है। कई केन्द्रीय मंत्री, भाजपा के नेता तथा कार्यकर्ता और कई अन्य लोग रात में ही उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे गए थे। बड़ी संख्या में उनके प्रशंसक और समर्थक सुबह से ही अपनी प्रिय नेता को श्रद्धांजलि देने पहुंच थे।

उनके पार्थिव शरीर को आज दोपहर 12 बजे से भाजपा मुख्यालय में रखा गया, जहां पार्टी के नेता एवं कार्यकर्ता उनके अंतिम दर्शन कर सकें। भाजपा मुख्यालय पर भी सैकड़ों की भीड़ थी। इसके बाद उनका पार्थिव शरीर अपराह्न तीन बजे लोदी रोड स्थित विद्युत शवदाह गृह ले जाया गया, जहां उनका पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।



आज हम सब अपनी प्रिय नेता सुषमा स्वराज जी को अश्रुपूरित श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। जय हिन्द। जय भारत।।

~ आज की बुलेटिन कड़ियाँ ~ 














आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। जय हिन्द। जय भारत।।

मंगलवार, 6 अगस्त 2019

60 साल के हुए - पर्यावरण कार्यकर्ता राजेन्द्र सिंह - ब्लॉग बुलेटिन

सभी हिंदी ब्लॉगर्स को नमस्कार। 
राजेन्द्र सिंह
राजेन्द्र सिंह (अंग्रेज़ी: Rajendra Singh, जन्म- 6 अगस्त, 1959, बागपत ज़िला, उत्तर प्रदेश) भारत के प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता हैं। वे जल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करने के लिए प्रसिद्ध हैं। राजस्थान का अलवर ज़िला शुरू से एक सूखा इलाका माना जाता रहा है, जहाँ पानी एक दुर्लभ वस्तु मानी जाती थी। उस दौर में पानी के जलाशय बनाकर उनमें वर्षा का पानी इकट्ठा करके उन्हें सुरक्षित रखना एक पारम्परिक तरीका था, जिससे पानी की कठिनाई को दूर किया जाता था। इन जलाशयों को 'जोहड़' कहा जाता था। विकास के दौर में खदानों और पहाड़ियों के तलहटी के जंगलों की कटाई के काम ने इन जोहड़ों को लगभग खत्म कर दिया। पुरुष ज्यादातर शहर भाग गए और इलाका पानी के गम्भीर संकट में आ गया। राजेंद्र सिंह ने इस संकट की स्थिति को बुनियादी तौर पर समझकर उसे दूर करने की ठानी और "तरुण भारत संघ" की स्थापना की, जिसमें स्वयंसेवी युवकों ने फिर से परम्परागत जोहड़ों की वापसी की, जिससे पानी की समस्या का काफ़ी हद तक हल हो पायी। राजेन्द्र सिंह के इस काम के लिए उन्हें 2001 का 'रेमन मैग्सेसे पुरस्कार' प्रदान किया गया।


आज पर्यावरण कार्यकर्ता राजेन्द्र सिंह जी को 60वें जन्मदिन की ढेर सारी बधाई और शुभकामनाएं। सादर ... अभिनन्दन।। 

~ आज की बुलेटिन कड़ियाँ ~ 













आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर ... अभिनन्दन।। 

सोमवार, 5 अगस्त 2019

नये भारत का उदय - अनुच्छेद 370 और 35A खत्म - ब्लॉग बुलेटिन

सभी हिंदी ब्लॉगर्स को नमस्कार। 
केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर से धारा 370 (Article 370) हटाने का ऐलान कर दिया. इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर को मिला विशेष राज्य का दर्जा भी खत्म हो गया. वहीं सरकार ने जम्मू-कश्मीर को दो हिस्सों में बांटने का ऐलान भी किया. इसके अनुसार जम्मू कश्मीर और लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाया जाएगा. सरकार के इस फैसले को बीजेपी और उसके सहयोगियों के अलावा कुछ विपक्षी पार्टियों ने भी समर्थन किया है. उधर, जम्मू कश्मीर से धारा 370 (Article 370) को हटाए जाने के बाद राज्‍यसभा में जवाब देते गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने कहा कि आर्टिकल 370 (Article 370) के कारण आज जम्मू-कश्मीर के लोग गुरबत की जिंदगी जी रहे हैं. उन्होंने कहा कि इसकी छाया में 3 परिवारों ने आजादी से लेकर आज तक राज्य को लूटा है. उऩ्होंने कहा कि धारा 370 के कारण ही जम्मू कश्मीर में भ्रष्टाचार पला और चरम सीमा पर पहुंचा. उन्होंने कहा कि धारा 370 ने जम्मू कश्मीर, लद्दाख और घाटी के लोगों का बहुत नुकसान किया है.

गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने कहा कि जम्मू कश्मीर में आतंकवाद की जड़ भी 370 (Article 370) है. उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर की जनता जम्हूरियत चाहती है. उन्होंने कहा कि 370 की वजह से ही जम्मू कश्मीर का विकास नहीं हुआ. उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर में गरीबी के पीछे भी धारा 370 ही है. उन्होंने कहा कि 35 A के कारण ही हुनरमंद लोग जम्मू कश्मीर नहीं जाते.

उन्होंने कहा कि हम धर्म की राजनीति नहीं करते हैं. जम्मू कश्मीर में सिर्फ मुस्लिम नहीं रहते हैं. घाटी में मुसलमान, हिंदू, सिख, जैन सभी रहते हैं. उन्होंने कहा कि धारा 370 (Article 370) अच्‍छी है तो सबके लिए है और बुरी है तो सबके लिए बुरी है. अमित शाह ने कहा कि धारा 370 ने जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और घाटी के लोगों का बहुत नुकसान किया है. शरणार्थियों को आज तक नागरिकता नहीं मिली है. उन्होंने कहा कि आर्टिकल 370 (Article 370) अस्थाई था और इसे कभी न कभी हटना था, लेकिन पिछली सरकारों ने वोट बैंक के लिए इसे हटाने की हिम्मत नहीं की. कैबिनेट ने आज हिम्मत दिखाकर और जम्मू-कश्मीर के लोगों के हित के लिए यह फैसला लिया है. उन्होंने कहा कि केंद्र ने पैसा दिया फिर भी जम्मू और कश्मीर का विकास नहीं हुआ.

अमित शाह ने कहा, 'भारत सरकार ने हजारों करोड़ रुपये जम्मू और कश्मीर के लिए भेजे, लेकिन वो भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गए, 370 का उपयोग करके वहां भ्रष्टाचार को कंट्रोल करने वाले कानून लागू नहीं होने दिए गए. हम तो राष्ट्र हित का बिल लेकर आए हैं. आपने इंदिरा जी को इलाहाबाद के जजमेंट से बचाने का संवैधानिक सुधार उसी दिन लाकर, उसी दिन पारित करके देश की डेमोक्रेसी को खत्म किया था. और आज हमें उपदेश देते हैं. आर्टिकल 370 और 35A हटाने से घाटी का, जम्मू का, लद्दाख का भला होने वाला है. आर्टिकल 370 और 35A हटने के बाद जम्मू और कश्मीर भारत का अभिन्न अंग बनने वाला है. आर्टिकल 370 के कारण जम्मू और कश्मीर में पर्यटन व्यवसाय से जुड़ी बड़ी कंपनियां नहीं जा सकती. ये कंपनियां वहां गई तो वहां के लोगों को रोजगार मिलेगा. बड़ी कंपनियां वहां गईं तो पर्यटन बढ़ेगा. लेकिन 370 के कारण ये संभव नहीं है. 370 के कारण जम्मू कश्मीर में देश का कोई बड़ा डॉक्टर नहीं जाना चाहता, क्योंकि वहां वो अपना घर नहीं खरीद सकता, वहां का मतदाता नहीं बन सकता और वहां खुद को सुरक्षित नहीं महसूस करता. 370 आरोग्य में भी बाधक है.'

आर्टिकल 370 है क्‍या और इसके हटाने के क्‍या मायने है? धारा 370 के प्रावधानों के अनुसार, संसद को जम्मू-कश्मीर के बारे में रक्षा, विदेश मामले और संचार के विषय में कानून बनाने का अधिकार है लेकिन किसी अन्य विषय से सम्बन्धित कानून को लागू करवाने के लिए केन्द्र को राज्य सरकार का अनुमोदन चाहिए. इसे आप इस तरह समझ सकते हैं:


  • इसी विशेष दर्जे के कारण जम्मू-कश्मीर राज्य पर संविधान की धारा 356 लागू नहीं होती.
  • इस कारण राष्ट्रपति के पास राज्य के संविधान को बर्खास्‍त करने का अधिकार नहीं है.
  • जम्मू-कश्मीर के नागरिकों के पास दोहरी नागरिकता (भारत और कश्मीर) होती है.
  • भारत की संसद जम्मू-कश्मीर के सम्बन्ध में अत्यन्त सीमित क्षेत्र में कानून बना सकती है.
  • जम्मू-कश्मीर का राष्ट्रध्वज अलग है. वहां के नागरिकों द्वारा भारत के राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान करना अनिवार्य नहीं है.
  • इसके तहत भारतीय नागरिक को विशेष अधिकार प्राप्त राज्यों के अलावा भारत में कहीं भी भूमि खरीदने का अधिकार है. यानी भारत के दूसरे राज्यों के लोग जम्मू-कश्मीर में जमीन नहीं खरीद सकते.
  • भारतीय संविधान की धारा 360 जिसके अन्तर्गत देश में वित्तीय आपातकाल लगाने का प्रावधान है, वह भी जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं होती.
  • जम्मू-कश्मीर की विधानसभा का कार्यकाल 6 वर्षों का होता है जबकि भारत के अन्य राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है.
  • भारत के उच्चतम न्यायालय के आदेश जम्मू-कश्मीर के अन्दर मान्य नहीं होते हैं.
  • जम्मू-कश्मीर की कोई महिला अगर भारत के किसी अन्य राज्य के व्यक्ति से विवाह कर ले तो उस महिला की नागरिकता समाप्त हो जाएगी. इसके विपरीत अगर वह पकिस्तान के किसी व्यक्ति से विवाह कर ले तो उसे भी जम्मू-कश्मीर की नागरिकता मिल जाएगी.
  • धारा 370 की वजह से कश्मीर में आरटीआई और सीएजी (CAG) जैसे कानून लागू नहीं होते हैं.
  • कश्मीर में महिलाओं पर शरियत कानून लागू है.
  • कश्मीर में पंचायत को अधिकार प्राप्त नहीं है.
  • धारा 370 की वजह से ही कश्मीर में रहने वाले पाकिस्तानियों को भी भारतीय नागरिकता मिल जाती है.


(साभार : अमित शाह ने बताई वजह, आर्टिकल 370 और 35A को हटाने का क्यों लिया गया फैसला? देखें उनके पूरा भाषण)

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शनिवार, 3 अगस्त 2019

जन्मदिवस - मैथिलीशरण गुप्त और ब्लॉग बुलेटिन

सभी हिंदी ब्लॉगर्स को नमस्कार। 
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मैथिलीशरण गुप्त (अंग्रेज़ी: Maithili Sharan Gupt, जन्म- 3 अगस्त, 1886, झाँसी; मृत्यु- 12 दिसंबर, 1964, झाँसी) खड़ी बोली के प्रथम महत्वपूर्ण कवि थे। महावीर प्रसाद द्विवेदी की प्रेरणा से आपने खड़ी बोली को अपनी रचनाओं का माध्यम बनाया और अपनी कविता के द्वारा खड़ी बोली को एक काव्य-भाषा के रूप में निर्मित करने में अथक प्रयास किया। इस तरह ब्रजभाषा जैसी समृद्ध काव्य भाषा को छोड़कर समय और संदर्भों के अनुकूल होने के कारण नये कवियों ने इसे ही अपनी काव्य-अभिव्यक्ति का माध्यम बनाया। हिन्दी कविता के इतिहास में गुप्त जी का यह सबसे बड़ा योगदान है।



आज मैथिलीशरण गुप्त जी के 133वें जन्म दिवस पर हम सब उनका स्मरण करते हुए उन्हें शत शत नमन करते हैं। 


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शुक्रवार, 2 अगस्त 2019

जन्मदिवस - जिन्होंने राष्ट्र ध्वज तिरंगा बनाया - पिंगली वेंकैया - ब्लॉग बुलेटिन

सभी हिंदी ब्लॉगर्स को मेरा सादर नमस्कार।
पिंगलि वेंकय्या
पिंगली वेंकैया (अंग्रेज़ी: Pingali Venkayya, जन्म: 2 अगस्त, 1876, आन्ध्र प्रदेश; मृत्यु: 4 जुलाई, 1963) भारत के राष्ट्रीय ध्वज 'तिरंगा' के अभिकल्पक थे। वे भारत के सच्चे देशभक्त, महान् स्वतंत्रता सेनानी एवं कृषि वैज्ञानिक भी थे।

सन 1916 में पिंगली वेंकैया ने एक ऐसे ध्वज की कल्पना की जो सभी भारतवासियों को एक सूत्र में बाँध दे। उनकी इस पहल को एस.बी. बोमान जी और उमर सोमानी जी का साथ मिला और इन तीनों ने मिल कर नेशनल फ़्लैग मिशन का गठन किया। वेंकैया ने राष्ट्रीय ध्वज के लिए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से सलाह ली और गांधी जी ने उन्हें इस ध्वज के बीच में अशोक चक्र रखने की सलाह दी जो संपूर्ण भारत को एक सूत्र में बाँधने का संकेत बने। पिंगली वेंकैया लाल और हरे रंग के की पृष्ठभूमि पर अशोक चक्र बना कर लाए पर गांधी जी को यह ध्वज ऐसा नहीं लगा कि जो संपूर्ण भारत का प्रतिनिधित्व कर सकता है। राष्ट्रीय ध्वज में रंग को लेकर तरह-तरह के वाद-विवाद चलते रहे। अखिल भारतीय संस्कृत कांग्रेस ने सन् 1924 में ध्वज में केसरिया रंग और बीच में गदा डालने की सलाह इस तर्क के साथ दी कि यह हिंदुओं का प्रतीक है। फिर इसी क्रम में किसी ने गेरुआ रंग डालने का विचार इस तर्क के साथ दिया कि ये हिन्दू, मुसलमान और सिख तीनों धर्म को व्यक्त करता है। काफ़ी तर्क वितर्क के बाद भी जब सब एकमत नहीं हो पाए तो सन् 1931 में अखिल भारतीय कांग्रेस के ध्वज को मूर्त रूप देने के लिए 7 सदस्यों की एक कमेटी बनाई गई।


आज पिंगली वेंकैया जी के 143वें जन्म दिवस पर सब उनका स्मरण करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।

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