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सोमवार, 30 अक्टूबर 2017

108वां जन्मदिवस : डॉ. होमी जहाँगीर भाभा - ब्लॉग बुलेटिन

सभी हिंदी ब्लॉगर्स को मेरा नमस्कार।
डॉ. होमी जहाँगीर भाभा (अंग्रेज़ी: Homi Jehangir Bhabha, जन्म: 30 अक्तूबर, 1909, मुंबई, - मृत्यु: 24 जनवरी, 1966) भारत के एक प्रमुख वैज्ञानिक थे जिन्होंने भारत के परमाणु उर्जा कार्यक्रम की कल्पना की थी। जब होमी जहाँगीर भाभा 29 वर्ष के थे और उपलब्धियों से भरे 13 वर्ष इंग्लैंड में बिता चुके थे। उस समय 'कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय' भौतिक शास्त्र के क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ स्थान माना जाता था। वहाँ पर श्री भाभा केवल पढ़ाई ही नहीं बल्कि कार्य भी करने लगे थे। जब अनुसंधान के क्षेत्र में श्री भाभा के उपलब्धियों भरे वर्ष थे तभी स्वदेश लौटने का अवसर उन्हें मिला। श्री भाभा ने अपने वतन भारत में रहकर ही कार्य करने का निर्णय लिया। उनके मन में अपने देश में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक क्रांति लाने का जुनून था। यह डॉ. भाभा के प्रयासों का ही प्रतिफल है कि आज विश्व के सभी विकसित देशों भारत के नाभिकीय वैज्ञानिकों की प्रतिभा एवं क्षमता का लोहा माना जाता है।




आज डॉ. होमी जहाँगीर भाभा जी के 108वें जन्मदिवस पर हम सब उनके अभूतपूर्व योगदान को याद करते हुए उन्हें शत शत नमन करते हैं। 


~ आज की बुलेटिन कड़ियाँ ~










उम्मीद की हथेली !!!


आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर ... अभिनन्दन।।

बुधवार, 30 अक्टूबर 2013

डॉ. होमी जहाँगीर भाभा और ब्लॉग बुलेटिन

सभी चिट्ठकार मित्रों को सादर नमन।।


स्वंत्रत भारत को परमाणु युग में प्रवेश दिलाने का श्रेय महान वैज्ञानिक डॉ. होमी जहाँगीर भाभा को ही जाता है। डॉ. भाभा एक ऐसे वैज्ञानिक थे जिन्होंने न केवल भारत में, बल्कि दुनिया भर में अपनी वैज्ञानिक क्षमता का परिचय दिया था।

डॉ. भाभा का जन्म बंबई (मुंबई) के एक पढ़े लिखे धनवान पारसी परिवार में 30 अक्टूबर, 1909 ई. में हुआ था। इनके पिता श्री जे. एच. भाभा बंबई (मुंबई) के सुप्रसिद्ध बैरिस्टरों में से एक थे।

डॉ. भाभा की प्रारंभिक शिक्षा बंबई (मुंबई) के केथेड्रल और जॉन कैनन हाईस्कूल में हुई। पढ़ाई में इनका काफी मन लगता था, उनकी विशेष रूचि गणित में थी, 15 वर्ष कि आयु में ही उन्होंने सीनियर कैम्ब्रिज कि परीक्षा उत्तीर्ण कर ली थी। इसके बाद उन्हें एलफिंस्टन कॉलेज में प्रवेश दिलाया गया, वहाँ भी इन्होंने अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। उसके बाद इनका प्रवेश रॉयल सोसाइटी ऑफ़ साइंस में कराया गया, यहाँ अध्ययन करते हुए उन्होंने बंबई (मुंबई) विश्वविद्यालय की आई. एस. सी. की परीक्षा सफलतापूर्वक उत्तीर्ण की। पूरा लेख यहाँ पढ़े .… 


आज उनकी 114 वीं जयंती पर पूरा हिंदी ब्लॉगजगत और ब्लॉग बुलेटिन की टीम उन्हें श्रद्धापूर्वक श्रद्धांजलि अर्पित करती है। सादर।।


अब चलते हैं आज की बुलेटिन की ओर ......














तब तक के लिए शुभ रात्रि, कल फिर मिलेंगे।।

लेखागार