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रविवार, 19 अगस्त 2018

परमात्मा को धोखा कैसे दोगे ? - ओशो

 
सम्राट सोलोमन के जीवन में कथा है। एक रानी उसके प्रेम में थी और वह उसकी परीक्षा करना चाहती थी कि सच में वह इतना बुद्धिमानं है जितना लोग कहते हैं? अगर है, तो ही उससे विवाह करना है। तो वह आई। उसने कई परीक्षाएं लीं। वे परीक्षाएं बड़ी महत्वपूर्ण हैं।

उसमें एक परीक्षा यह भी थी-वह आई एक दिन, राज दरबार में दूर खड़ी हो गई। हाथ में वह दो गुलदस्ते, फूलों के गुलदस्ते लाई थी। और उसने सोलोमन से कहा दूर से कि इनमें कौन से असली फूल हैं, बता दो। बड़ा मुश्किल था। फासला काफी था। वह उस छोर पर खड़ी थी राज दरबार के। फूल बिलकुल एक जैसे लग रहे थे।

सोलोमन ने अपने दरबारियों को कहा कि सारी खिड़कियां और द्वार खोल दो। खिड़कियां और द्वार खोल दिए गए। न तो दरबारी समझे और न वह रानी समझी कि द्वार-दरवाजे खोलने से क्या संबंध है। रानी ने सोचा कि शायद रोशनी कम है, इसलिए रोशनी की फिकर कर रहा है, कोई हर्जा नहीं। लेकिन सोलोमन कुछ और फिकर कर रहा था। जल्दी ही उसने बता दिया कि कौन से असली फूल हैं, कौन से नकली। क्योंकि एक मधुमक्खी भीतर आ गई बगीचे से और वह जो असली फूल थे उन पर जाकर बैठ गई। न दरबारियों को पता चला, न उस रानी को पता चला।

वह कहने लगी, कैसे आपने पहचाना? सोलोमन ने कहा, तुम मुझे धोखा दे सकती हो, लेकिन एक मधुमक्खी को नहीं।

एक छोटी सी मधुमक्खी को धोखा देना मुश्किल है, तुम तो परमात्मा को भी धोखा देना चाहते हो। परमात्मा को कैसे धोखा दोगे?
🌹ओशो 🌹

~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~

हिन्दी की लोकप्रिय पत्रिका 'उदंती' में प्रकाशित अशोक चक्र विजेता मेजर अरुण जसरोटिया को दी गई श्रद्धांजलि स्वरूप मेरा लिखा एक संस्मरण -----

आवाहनं ना जानामि

बुलबुल ने बचाया गोरैया को

बात दिल की सुना गया कोई...

Rape संबंधी आरोपों के लिए नज़ीर पेश करता एक महिला जज का फैसला

'हाँ मै भी हूँ अटल' - अटल जी को एक श्रद्धांजलि

निराशाओं के दौर में जीना कर्तव्य बन जाता है : सतीश सक्सेना

इतवार...एक लघु कथा

सिद्धान्त गुजरे जमाने की बात है

'महाकाल' की विलुप्तता के ७३ वर्ष

...ढ़लने लगी सॉंझ


शनिवार, 18 अगस्त 2018

ब्लॉग लिखें - ब्लॉग पढ़ें (चिट्ठा चर्चा )

गुप्तकाशी में बारिश 



अब ये बात भी बहुत बार हम आप ही दोहरा चुके हैं की ब्लॉगिंग  की रफ़्तार को धीमा करने या ऐसा महसूस होने में जितना बड़ा रोल फेसबुक और अन्य जैसी सोशल नेट्वर्किंग साइट्स ने किया उतनी ही बड़ी भूमिका खुद हम ब्लॉगर्स की भी रही | अपनी हाथों से सींची बगिया को सबने बड़ी ही उदासीनता से उपेक्षित छोड़ दिया | आखिर ब्लॉग भी कब तक एकतरफा साथ देता उसने भी ऐसा ही किया और जब आज मौजूद दोनों  संकलकों को देखता पाता हूँ तो इतने बड़े हिंदी अंतरजाल पर रोज़ाना की कुल पचास पोस्टें भी नहीं लिखी जाती और उससे भी बड़ी बात की वो पचास भी शायद ही पढ़ी जाती हों |

लेकिन ऐसा नहीं की तालाबंदी वाले हालात हैं | नियमित लेखन पठन भी ब्लॉग लिखने पढ़ने वाले कर ही रहे हैं | ऐसा ही जुनून ज़ज़्बा इस ब्लॉग की शुरूआत करने वाले शिवम भाई , बहुत बार सिर्फ अकेले अपने श्रम और दम पर बुलेटिन को प्रसारित/प्रकाशित करते रहे हैं | यही हाल कमोबेश हमारा भी था , लेकिन अब हम भी मोर्चे पर आ गए हैं | और ब्लॉग की रफ़्तार को जरूर ही गति देने के बहुत सारे नए नए प्रयोग की योजनाओं के साथ आ रहा हूँ | तैयार हो जाइये ब्लॉग लिखने पढ़ने के लिए , और खूब सारा लिखने पढ़ने के लिए

देखते हैं कुछ चुनिंदा ब्लॉग पोस्ट

आज पढ़िए सबसे पहले पढ़ते हैं भाई रोहिताश को जो इन दिनों सुकूं की तलाश में पोस्ट लिख रहे हैं , वे लिखते हैं

इस पिजरे में कितना सकूँ है
बाहर तो मुरझाए फूल बिक रहे है
कोई ले रहा गंध बनावटी
भागमभाग है व्यर्थ ही
एक जाल है;मायाजाल है
घर से बंधन तक
बंधन से घर तक
स्वतंत्रता का अहसास मात्र लिए
कभी कह ना हुआ गुलाम हैं
गुलामी की यही पहचान है।
मर रहे रोज कुछ कहने में जी रहे
सब फंसे हैं
सब चक्र में पड़े हैं




ब्लॉग शिरोमणि अपने लंठ महाराज यानी गिरिजेश राव एक आलसी के चिट्ठे को जगा कर देखें कह रहे हैं , यह दृष्टि है  | प्रकृति से लगातार छेड़छाड़ का नतीज़ा हम सब भुगत रहे हैं मगर अफ़सोस की फिर भी सुधार और उपाय तो दूर हमने अभी वो गलतियां  करना ही नहीं छोड़ा है | हरेश कुमार इसलिए कह रहे हैं , अपने आसपास की प्रकृति को बचाएं ये हम सबकी जिम्मेदारी है | सच है , और  ये अभी से करना जरूरी है | 


हम सबके प्रिय और देश के सर्वप्रिय राजनेता श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी का जाना अभी बहुत समय तक सालते रहेगा | यूं तो पिछले दो दिनों से लगातार सोशल नेट्वर्किंग साइट्स पर उनके ऊपर लिखा जा रहा है | ब्लॉग पोस्टों में
शब्द तूलिका पर मुझे इतनी ऊँचाई मत देना , और अनुराधा चौहान अपने ब्लॉग पर कहती हैं वे सदा अटल थे  

"
जिंदगी की धूप छांव में
हरदम वो अटल खड़े थे
मौत से ठान युद्ध
वो अटल जिए थे
न हार कभी मानी थी
न हार कभी मानेंगे
जिंदगी में हरदम
उनके अटल इरादे थे
काल के कपाल पर
गीत नए लिखते थे
साथ सभी के सुख-दुख में
कदम मिलाकर चलते थे"


जबकि अटल जी द्वारा कहे गए अनमोल वचनों को एक साथ संग्रहित करके खूबसूरत पोस्ट तैयार की है युवा ब्लॉगर हर्षवर्धन ने अपनी इस पोस्ट में 

  1. मेरे पास न दादा की दौलत है न बाप की, मेरे पास सिर्फ मां का आशीर्वाद है। 
  2. कड़ी मेहनत कभी भी आप पर थकान नहीं लाती, वो आपके लिए संतोष ही लाती है। 
  3. सत्य सबसे शक्तिशाली हथियार है, हर कोई जानता है सरकारी जगहों पर हथियार लेकर नहीं जा सकते।
  4. हम दोस्त बदल सकते हैं, लेकिन पड़ोसी नहीं, इसीलिए पड़ोसियों से अच्छे संबंध होने चाहिए। 
  5. जब मैं बोलना चाहता हूं तो लोग सुनते नहीं, जब लोग चाहते हैं, मैं बोलूं तो मेरे पास कुछ नहीं होता। 
  6. अगर किसी देश में हलचल नजर आए तो समझिये वहां का राजा ईमानदार है। 
  7. मैं हमेशा की तरह वादे लेकर नहीं आया बल्कि अपने इरादे लेकर आया हूं।

आइए इस बुलेटिन के आखिर में आपको लिए चलता हूँ हर्षवर्धन जोग जी के ब्लॉग की इस खूबसूरत पोस्ट बारिश  , की ओर | खूबसूरत चित्रों से सजी  इस पोस्ट में आज आप पढ़िए गुप्तकाशी के बारे में | रात गहराती जा रही है इसलिए अब विराम लेता हूँ |

एक , नहीं नहीं दो दो सूचनाएं हैं ,

ब्लॉग पोस्टों को अखबारों तक पहुंचाने वाले स्तम्भ "ब्लॉग बातें |" इसी सप्ताह से शुरू करने जा रहा हूँ |

अगले कुछ समय में दिल्ली में , राष्ट्रीय ब्लॉगर मिलन का आयोजन करने जा रहा हूँ , इस बार मीडिया के मित्रों की सहभागिता के साथ

चलते चलते एक और बात , कल रविवार है , कल आपको ले चलूँगा ब्लॉग पोस्टों के ऐसे सफर पर की यकीनन जब यहाँ से आप निकलेंगे तो सबसे पहले अपने ब्लॉग पर जाकर पोस्ट करे बिना नहीं निकल सकेंगे |

शुभ रात्रि , खूब पढ़ें , खूब लिखें

शुक्रवार, 17 अगस्त 2018

विनम्र श्रद्धांजलि - श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी - ब्लॉग बुलेटिन परिवार

सभी भारत वासियों को नमस्कार।







महान पत्रकार, साहित्यकार, राजनीतिज्ञ तथा देश के पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के देहावसान पर ब्लॉग बुलेटिन परिवार और समस्त हिन्दी ब्लॉग जगत उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता है। 

जय जवान। जय किसान। जय विज्ञान


~  आज की बुलेटिन कड़ियाँ ~ 



















आज की बुलेटिन में सिर्फ इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। जय हिन्द। जय भारत। 

गुरुवार, 16 अगस्त 2018

मौत से बेख़बर, ज़िन्दगी का सफ़र तय करने वाले सर्वप्रिय अटल जी को सादर नमन

नमस्कार साथियो,
आज की तारीख भारतीय इतिहास में अमर हो गई. एक दिन पहले 15 अगस्त को देशवासियों ने आज़ादी का जश्न मनाया और आज 16 अगस्त को सौम्य, सरल, सहृदय, संवेदनात्मक व्यक्तित्व भी मोह-माया की दुनिया से आज़ाद होकर अनंत यात्रा को चला गया. सभी के प्रिय अटल बिहारी वाजपेयी (25.12.1924 – 16.08.2018) के व्यवहार, उनकी कार्यशैली, वाकपटुता, वैचारिकी, भाषण शैली का अंदाज ही निराला था. विपक्ष के हमलों के बीच बड़ी साफगोई के साथ संसद में मैं अविवाहित जरूर हूं, लेकिन कुंवारा नहीं कहने वाले अटल जी का जीवन किसी खुली किताब की तरह था. उनकी सहजता, सरलता, मुस्कुराता चेहरा किसी को भी मोहित करने की क्षमता रखता था. यही कारण है कि राजनैतिक जगत में उनके साथी तो उनके कायल थे ही, उनके विपक्षी भी उनका सम्मान करते थे.  
उनके बारे में बहुत कुछ न कहते हुए, उन्हीं की एक कविता के द्वारा बुलेटिन परिवार की तरफ से विनम्र श्रद्धांजलि.
++
ठन गई!
मौत से ठन गई!

जूझने का मेरा इरादा न था,
मोड़ पर मिलेंगे इसका वादा न था,

रास्ता रोक कर वह खड़ी हो गई,
यों लगा ज़िन्दगी से बड़ी हो गई।

मौत की उमर क्या है? दो पल भी नहीं,
ज़िन्दगी सिलसिला, आज कल की नहीं।

मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूँ,
लौटकर आऊँगा, कूच से क्यों डरूँ?

तू दबे पाँव, चोरी-छिपे से न आ,
सामने वार कर फिर मुझे आज़मा।

मौत से बेख़बर, ज़िन्दगी का सफ़र,
शाम हर सुरमई, रात बंसी का स्वर।

बात ऐसी नहीं कि कोई ग़म ही नहीं,
दर्द अपने-पराए कुछ कम भी नहीं।

प्यार इतना परायों से मुझको मिला,
न अपनों से बाक़ी हैं कोई गिला।

हर चुनौती से दो हाथ मैंने किये,
आंधियों में जलाए हैं बुझते दिए।

आज झकझोरता तेज़ तूफ़ान है,
नाव भँवरों की बाँहों में मेहमान है।

पार पाने का क़ायम मगर हौसला,
देख तेवर तूफ़ाँ का, तेवरी तन गई।

मौत से ठन गई।

++


++++++++++












बुधवार, 15 अगस्त 2018

७२ वें स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

प्रिय ब्लॉगर मित्रों ,
प्रणाम |


चलो फिर से वो नजारा याद कर लें,
शहीदो के दिल में थी जो ज्वाला वो याद कर लें,
जिसमें बहकर आजादी पहुंची थी किनारे पर,
बलिदानियों के खून की वो धारा याद कर लें।
 
ब्लॉग बुलेटिन टीम की ओर से आप सभी को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं !!
सादर आपका

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आजादी

ये कैसी आजादी है?

नमन् उन्हें जो आजादी की खातिर सबकुछ भूल गये...

स्वतंत्रता दिवस की बधाई...

आओ एक संकल्प करें...

स्वतंत्रता का अनुष्ठान

15 अगस्त पर संबोधन का सफर ( आलेख ) डॉ लोक सेतिया

कोशिश (जय हिन्द )

अब हिन्दुस्तान की बारी है

835-तिरंगे की शान रहे/शत शत प्रणाम

हम सब में हो स्वतंत्रता की सच्ची भावना

~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
अब आज्ञा दीजिये ...

जय हिन्द !!!

मंगलवार, 14 अगस्त 2018

शहीदों की भाषाहीन सिसकियाँ




हम आज़ाद हो गए  ?
कब हुए ?
और किससे ?

आज हिंदी आती हो 
या न आती हो,
कोई बात नहीं,...
बच्चा रोता है अंग्रेजी में,
माँ चुप कराती है अंग्रेजी में,
रुआब है यह कहने में 
कि आजकल की शिक्षा कितनी आधुनिक है,
फर्राटे से अंग्रेजी बोलते हैं बच्चे ...
तो प्यारे देशवासियों,
हम अंग्रेजों को भारत से नहीं भगा पाए, हिंदी हमारी मातृभाषा नहीं रही,
जिन्होंने सरफ़रोशी की तमन्ना की थी,
उनका तो मर्डर हो गया,
आज़ादी दिलानेवालों के नाम नहीं जानते ये बच्चे,
क्या फर्क पड़ता है,
अंग्रेजी पर पकड़ अच्छी है 
औऱ यही हर घर की शान है,
बस कहने को हम आज़ाद हैं ।

हाँ, हम आज़ाद हैं,
परम्पराओं को तोड़ने में,
समयानुसार रूढ़िवादी होने के लिए,
हर सीख को नकारने के लिए,
सारे इल्ज़ाम ख़ामोशो के सर मढ़ने के लिए,
कुछ भी,
कभी भी,
कहीं भी ... कहने और करने के लिए ।

एक आम दिवस है यह स्वतंत्रता दिवस,
अतीत अपनी जगह है,
वर्तमान उजागर है,
शहीदों की सिसकियाँ भाषा हीन हैं ।


मेरी संवेदना : डरा हुआ हूँ उनसे जिन्होंने.....

स्टेशन नगरीय गढ़ों के गेट होते हैं और गाँवों के लिए ...

कडुवा सच ...: नवाबी ठाठ

पहलू: ओ मेरी मां

डायरी के पन्नों से: भक्ति करे कोई सूरमा

नीरज: किताबों की दुनिया - 190

भीड़ जयचंदों की क्यों फिर देश से जाती ... - स्वप्न मेरे

अनुभूति / Anubhuti...: यति !!

'आहुति': सिर्फ तुम्हे देखना चाहती हूं..

SADA: उत्सव मनाना तुम !!!


सोमवार, 13 अगस्त 2018

अंग दान दिवस और ब्लॉग बुलेटिन

सभी हिंदी ब्लॉगर्स को नमस्कार। 
अंग दान दिवस
अंग दान दिवस (अंग्रेज़ी: Organ Donation Day) भारत में प्रतिवर्ष '13 अगस्त को मनाया जाता है। किसी व्यक्ति के जीवन में अंग दान के महत्व को समझने के साथ ही अंग दान करने के लिये आम इंसान को प्रोत्साहित करने के लिये सरकारी संगठन और दूसरे व्यवसायों से संबंधित लोगों द्वारा हर वर्ष यह दिवस मनाया जाता है। अंग दान-दाता कोई भी हो सकता है, जिसका अंग किसी अत्यधिक जरुरतमंद मरीज को दिया जा सकता है। मरीज में प्रतिरोपण करने के लिये आम इंसान द्वारा दिया गया अंग ठीक ढंग से सुरक्षित रखा जाता है, जिससे समय पर उसका इस्तेमाल हो सके। किसी के द्वारा दिये गये अंग से किसी को नया जीवन मिल सकता है।


~ आज की बुलेटिन कड़ियाँ ~













आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर ... अभिनन्दन।। 

रविवार, 12 अगस्त 2018

डॉ॰ विक्रम साराभाई को ब्लॉग बुलेटिन का सलाम

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |

विक्रम अंबालाल साराभाई (१२ अगस्त, १९१९- ३० दिसंबर, १९७१) भारत के प्रमुख वैज्ञानिक थे। इन्होंने ८६ वैज्ञानिक शोध पत्र लिखे एवं ४० संस्थान खोले। इनको विज्ञान एवं अभियांत्रिकी के क्षेत्र में सन १९६६ में भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।

डॉ॰ विक्रम साराभाई के नाम को भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम से अलग नहीं किया जा सकता। यह जगप्रसिद्ध है कि वह विक्रम साराभाई ही थे जिन्होंने अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में भारत को अंतर्राष्ट्रीय मानचित्र पर स्थान दिलाया। लेकिन इसके साथ-साथ उन्होंने अन्य क्षेत्रों जैसे वस्त्र, भेषज, आणविक ऊर्जा, इलेक्ट्रानिक्स और अन्य अनेक क्षेत्रों में भी बराबर का योगदान किया।

परिचय

डॉ॰ साराभाई के व्यक्तित्व का सर्वाधिक उल्लेखनीय पहलू उनकी रूचि की सीमा और विस्तार तथा ऐसे तौर-तरीके थे जिनमें उन्होंने अपने विचारों को संस्थाओं में परिवर्तित किया। सृजनशील वैज्ञानिक, सफल और दूरदर्शी उद्योगपति, उच्च कोटि के प्रवर्तक, महान संस्था निर्माता, अलग किस्म के शिक्षाविद, कला पारखी, सामाजिक परिवर्तन के ठेकेदार, अग्रणी प्रबंध प्रशिक्षक आदि जैसी अनेक विशेषताएं उनके व्यक्तित्व में समाहित थीं। उनकी सबसे महत्त्वपूर्ण विशेषता यह थी कि वे एक ऐसे उच्च कोटि के इन्सान थे जिसके मन में दूसरों के प्रति असाधारण सहानुभूति थी। वह एक ऐसे व्यक्ति थे कि जो भी उनके संपर्क में आता, उनसे प्रभावित हुए बिना न रहता। वे जिनके साथ भी बातचीत करते, उनके साथ फौरी तौर पर व्यक्तिगत सौहार्द स्थापित कर लेते थे। ऐसा इसलिए संभव हो पाता था क्योंकि वे लोगों के हृदय में अपने लिए आदर और विश्वास की जगह बना लेते थे और उन पर अपनी ईमानदारी की छाप छोड़ जाते थे।

९९ वीं जयंती के अवसर पर डॉ॰ विक्रम साराभाई को ब्लॉग बुलेटिन टीम और हिन्दी ब्लॉग जगत की ओर से शत शत नमन |
सादर आपका
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स्वतंत्रता के दायरे समझो, मायने नहीं...

ये आवारा मन

माँ बापगिरी के मुश्किल फंडे

भीख माँगने की आज़ादी !

साहित्य की अवधारणा 

जय शिव शंकर

मगर तुम्हारे दिल मे क्या हैं मुझको बता दो

मेंटल (पटना २२)

कहानी: पेट की आग

सकूँ की तलाश में

सिर्फ तुम्हे देखना चाहती हूं..

परवाज़ सलामत रहे तेरी, ए दोस्त

जाने क्या बतियाते पेड़

कोमल बचपन पर कठोर होती दुनिया...

अमर शहीद खुदीराम बोस जी की ११० वीं पुण्यतिथि

विकासनामा

#अंडमान_डायरी

व्यंग- हम सब आजाद हैं...!!!

यूट्यूब टुटोरियल्स पदवी धारी

इक तेरा ही आना बाकी है !

क़व्वाली युग की सरकार ( हास-परिहास ) डॉ लोक सेतिया

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अब आज्ञा दीजिये ...

जय हिन्द !!!

शनिवार, 11 अगस्त 2018

दो बून्द बारिश हुई, मैं ही सावन बन गई



एक वक्त था,
जब सावन आता था,
और मैं शिवानी की नायिका,
शरतचन्द्र की नायिका,
मैत्रेयी की नायिका बन जाती थी ।
हरी चूड़ियों से भरी कलाई पर,
मैं खुद ही वारी वारी जाती थी  ।
बिछिया, पायल और धानी चुनर,
मैं सर से पाँव तक एक उपन्यास बन जाती थी ।
आसमान से बाँधती थी झूला,
पहाड़ों तक पींगे लेती थी ।
नदिया, सागर की लहरें,
मेरे साथ साथ चलती थीं ...
बिना मेहंदी सावन शुरू ही नहीं होता था ,
... अचानक !
मैं नायिका होने के ख़ुमार से दूर हो गई,
जितिया, नवरात्रि, खरमास में बदली गई चूड़ियाँ,
कलाइयों में ठहर गई ।
उदासीनता गहरी होती गई,
हँसी अधिकतर बनावटी हो गई,
आँखों के मेघ भी छंट गए,
चेहरा बंजर होने लगा,
ईश्वर की लीला,
दो बून्द बारिश हुई
मैं ही सावन बन गई,
बन गई झूला,
पसंद करने लगी नन्हीं चूड़ियाँ,
ये बून्दें कभी मोर बन जाती हैं,
कभी मेघ गर्जना,
कभी बरसती हैं,
गोद को झूला बना झूलती हैं 
ये बून्दें ... 
मेरी कात्या,
मेरी अमाया हैं,
जिनसे आती है,- सोंधी सोंधी खुशबू,
और तपते दिल पर वे बरसती जाती हैं,
मेरा पूरा वजूद मिट्टी का घर बन जाता है ।
और वे शिवानी, शरतचन्द्र, मैत्रेयी की नायिका,
नज़रबटटू बन मैं उनके साथ रहती हूँ,
अब मेहंदी की खुशबू फिर बिखरेगी ...

शब्द गुम हैं
फिर भी
सदियो से
कितना कुछ कह चुकी हूँ मैं
तुमने सुना नहीं शायद
(और लफ्ज़ हँस रहें हैं)
खिला हुआ है वसन्त
खुशबू पर भी है
उजाला बहका हुआ
गुम हो रही है साँसे
(और फूल हँस रहे हैं )
'आग'
'राख'
'रास'
'पंख' 
'श्वांस'
'हाड़-माँस'
'छल' नहीं
'कल' नहीं
'काल'
'वीभत्स'
'विभोर'
'समाधि'
'घनघोर अँधेरा'
'श्मशान का नृत्य'
'मृत्यु का ग़ुरूर'
'साम-दाम' नहीं
'दंड' में सम्पूर्ण
'काल' का कपाल
'मूल' की चिंघाड़
'मग्न' चिर-मग्न
'एकांत' का उजाड़
'अंधकार' का आकार
'प्रकाश' का प्राकार
'वैकुण्ठ' या 'पाताल' नहीं
'मोक्ष' का भी सार
'मौत' के गर्भ में
'ज़िंदगी' के पास
'रोष' हूँ ..
'अघोर' हूँ ..
यूँ तो घर की देहरी से वो कई बार विदा हुई..
पहली बार तब जब माँ ने स्कूल के लिए विदा किया था
हिचकियाँ बंध गईं थीं
रो रो कर आँसू सूख गए थे
माँ का आँचल छुड़ाए न छूटता था
परंतु भरोसा था जल्द लौटने का
माँ की गोदी में फिर छिप जाने का!
फिर आगे पढ़ाई के लिए विदेश विदा हुई
मन समंदर हो गया
आँखो से बहने लगा था
जैसे तैसे आँखो पर सपनों का पुल बांधा
कि साल भर बाद पुनः मिलन का भरोसा था
इंतज़ार था लौटने का!
फिर ब्याह हुआ
नए आसमान के लिए अपनी धरती त्यागी
आगे सतरंगी स्वप्न
पीछे स्निग्ध रंग
ये अलबेली विदा
माँ बाबा भाई बहन सबको छू छू कर महसूस किया
आश्वस्ति की छुवन
नेह का स्पर्श
सभी के सम्मुख अनायास बहते थे आँसू
भीतर सुदृढ़ होते थे बंधन
न !ये चिरविदा नहीं है इस देहरी से
फिर फिर लौट आना है
सुख के लम्हें तोड़ने
अनुरोधों पर न्योछावर होने
फिर फिर लौटना है..
आज बरसों बाद फिर एक विदा हुई
देहरी से बंधे धागे आहिस्ता आहिस्ता ढीले हो गए
उनमें गांठे बंध गईं
गांठे दिलों से लिपट गईं
अहसास मौन हो गए
देहरी रूठ गई
दरीचे नाराज़ हो गए.
न मनने में दिलचस्पी
न मनाने की गरज..
आज लग रहा
पूर्ण विदाई है
न लौटने की उम्मीद
न बुलाने की औपचारिकता
इस विदाई में अश्क न टूटे
इस विदाई में उम्मीद टूटी!
इस सावन
झुलस रहा है मन!


शुक्रवार, 10 अगस्त 2018

एमएलए साहब का राजनैतिक प्यार

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |

एक एमएलए साहब की दोस्ती एक फिल्म अभिनेत्री से हो गई। कुछ महीनों के बाद साहब जी को लगने लगा कि उन्हें अभिनेत्री से प्यार हो गया है। उन्होंने मन ही मन तय किया कि वे उससे शादी करेंगे। पर चूंकि लड़की फिल्मों में काम करती थी और उसका मिलना-जुलना काफी लोगों से था, अतः साहब ने सोचा कि शादी का प्रस्ताव रखने के पहले उसके चरित्र, परिवार आदि के बारे में जानकारी ले लेना बेहतर होगा।

उन्होंने अपने सेक्रेटरी से लड़की के पीछे एक प्राइवेट जासूस लगाने को कहा, साथ ही हिदायत दी कि जासूस को यह पता नहीं चलना चाहिए कि वह यह काम मेरे लिए कर रहा है।

लगभग दो महीनों की छानबीन के बाद जासूस की रिपोर्ट सेक्रेटरी के माध्यम से
एमएलए साहब को मिली, जो कुछ इस तरह से थी:

लड़की का चरित्र एकदम बेदाग़ है। आजतक उसका किसी के साथ कोई अफेयर नहीं रहा है। लड़की का परिवार, उसके रिश्तेदार और दोस्त सभी बड़े ही भले एवं संभ्रात लोग हैं, परन्तु हाँ ऐसी जानकारी मिली है कि पिछले कुछ महीनों से यह लड़की अक्सर एक निहायत ही चरित्रहीन एवं घटिया किस्म के नेता के साथ देखी जा रही है।

सादर आपका

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बंजारे हम बंजार

श्री की जगह शहीद लिखती हूं.......

तिरंगे की आह

कपालभाति के फायदे

अधरों पर मुस्कान

शहीदों को नमन

तुलसी शालिग्राम संयोग .....एक प्रश्नचिन्ह

बिछड़न

कोई बात नहीं

जनता का गीत

काकोरी काण्ड की ९३ वीं वर्षगांठ

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अब आज्ञा दीजिये ... 

जय हिन्द !!! 

लेखागार