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शनिवार, 17 फ़रवरी 2018

बैंक की साख पर बट्टा है ये घोटाला : ब्लॉग बुलेटिन


नमस्कार साथियो,
जनता अपनी मेहनत की कमाई को बैंकों में जमाकर निश्चिन्त हो जाती है. अब जबकि पंजाब नेशनल बैंक का घोटाला सामने आया है तबसे बैंकों की साख पर प्रश्नचिन्ह लग गया है. पीएनबी का घोटाला हीरा कारोबारी की कंपनी और बैंक अधिकारी की मिलीभगत से 11 हज़ार करोड़ रुपए से अधिक का घोटाला सामने आया है. ये घोटाला मुंबई की एक ब्रांच में हुआ. इस घोटाले में हीरा कारोबारी नीरव मोदी और उसके साथी दोषी पाए गए हैं साथ ही पंजाब नेशनल बैंक के कुछ अधिकारियों की भी मिलीभगत सामने आई है. नीरव मोदी और उनके साथियों ने सन 2011 में बिना तराशे हुए हीरे आयात करने के लिए पंजाब नेशनल बैंक की मुंबई स्थित एक ब्रांच से संपर्क किया. सम्बंधित शाखा से गारंटी पत्र या लेटर ऑफ़ अंडरटेकिंग (LoU) जारी किये गए. 


कोई बैंक विदेश से आयात को लेकर होने वाले भुगतान के लिए गारंटी पत्र या लेटर ऑफ़ अंडरटेकिंग (LoU) जारी करता है. इसका ये मतलब होता है कि बैंक किसी कंपनी के विदेश में मौजूद सप्लायर को 90 दिन के लिए भुगतान करने को राज़ी हो जाता है और बाद में पैसा कंपनी को चुकाना होता है. पंजाब नेशनल बैंक के कुछ कर्मचारियों ने कथित तौर पर नीरव मोदी की कंपनियों को फ़र्ज़ी LoU जारी किए और ऐसा करते वक़्त उन्होंने बैंक मैनेजमेंट को अंधेरे में रखा. इन्हीं फ़र्ज़ी LoU के आधार पर भारतीय बैंकों की विदेशी शाखाओं ने पंजाब नेशनल बैंक को लोन देने का फ़ैसला किया. बैंक अधिकारियों ने जारी किये LoU की जानबूझकर कोर बैंकिंग सिस्टम में एंट्री नहीं की गई ताकि बैंक उच्च अधिकारियों को इसके बारे में जानकारी ही ना हो पाए.
इन लोगों ने एक क़दम आगे जाकर सोसाइटी फ़ॉर वर्ल्डवाइड इंटरबैंक फ़ाइनेंशियल टेलीकम्युनिकेशन या स्विफ़्ट (SWIFT) का नाजायज़ फ़ायदा उठाना शुरू किया. स्विफ्ट एक तरह का इंटर-बैंकिंग मैसेजिंग सिस्टम है जो विदेशी बैंक पैसा जारी करने से पहले लोन ब्योरा पता लगाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. इसके इस्तेमाल से दोनों बैंक शाखाओं में आपस में विश्वास बना रहता है. जिससे वे बिना किसी अविश्वास के लेन-देन का कार्य करते रहते हैं. शाखा प्रबंधक द्वारा लेनदेन के लिए वैश्विक वित्तीय संदेश सेवा स्विफ्ट का इस्तेमाल किया. स्विफ्ट एकाउंट का उपयोग किये जाने के चलते भारतीय बैंकों की विदेशी शाखाओं को कोई शक़ नहीं हुआ और उन्होंने नीरव मोदी की कंपनियों को फ़ॉरेक्स क्रेडिट जारी कर दिया.
नीरव मोदी और उसके सहयोगियों की कम्पनियाँ बीती पांच जनवरी तक इसी विधि से पीएनबी के साथ लेनदेन करती रही. इस फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब पीएनबी के शाखा प्रबंधक गोकुलना‌थ शेट्टी सात साल तक एक ही पद पर रहने के बाद रिटायर हुए. यह बैंकिग गाइडलाइन सीवीसी का उल्लंघन करता है क्योंकि नियमानुसार बैंकों को नियमित रूप से दो या तीन साल पर तबादला करना होता है. जबकि पीएनबी की यह कोर ब्रांच और संवदेनशील ब्रांच होने के बाद भी यहां के मैनेजर का ट्रांसफर होने के बाद भी रोका जाता रहा.
इसी वर्ष 16 जनवरी को नीरव मोदी से जुड़ी कंपनियों ने बैंक को संपर्क कर बायर्स क्रेडिट की मांग की जिससे वे अपने विदेश के कारोबारियों को भुगतान कर सकें. नये ब्रांच मैनेजर ने इसके उनसे उतनी ही नकदी की मांग की तो कंपनियों के अधिकारियों ने जवाब दिया कि वे सन 2010 से इस तरह की सुविधा पाते आये हैं. उन्होंने इसके लिए कभी नकद भुगतान नहीं किए. इसके बाद ही सारा मामला पकड़ में आया. नए अधिकारियों ने ये ग़लती पकड़ ली और स्कैम से पर्दा हटाने के लिए आंतरिक जांच शुरू कर दी. पंजाब नेशनल बैंक ने खुलासा किया कि उसने 1.77 अरब डॉलर (करीब 11,400 करोड़ रुपये) के घोटाले को पकड़ा है. इस मामले में अरबपति हीरा कारोबारी नीरव मोदी ने कथित रूप से बैंक की मुंबई शाखा से फ़र्ज़ी गारंटी पत्र (LoU) हासिल कर अन्य भारतीय ऋणदाताओं से विदेशी ऋण हासिल किया. इस संबंध में बैंक ने अपने 10 कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है और इस मामले की शिकायत केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआई) से की है.
हाल फ़िलहाल तो कहा जा रहा है कि इस घोटाले का प्रभाव अन्य बैंकों पर नहीं पड़ेगा किन्तु अभी कुछ भी कहना अंतिम रूप से सही नहीं लगता है. इस बारे में सरकार को, जान एजेंसी को पर्याप्त जाँच करनी चाहिए ताकि जनता का बैंकों पर विश्वास बना रहे.  

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रविवार, 13 मार्च 2016

बिजय बाबू, बैंक और बेहद बुरी ब्लॉग बुलेटिन

अभी अगिला हफ्ता (बिहार में बहुत सा लोग पिछला को अगिला कहते हैं जैसे अगिला साल आपसे मुलाकात हुआ ‘था’) के हीरो थे लाल देह लाली लसै वाले सफेद दाढ़ी मोंछ अऊर चोटी रखने वाले सिरीमान बिजय मालया जी. इस बीच उनको जेतना गाली मिला उससे जादा गाली बैंक वालों को मिला. लोग के मन में टैक्स देने (टैक्स चोराने वाले भी ई भीड़ में सामिल हो जाता है) वाले का पइसा डूब जाने का बहुत बड़ा अफसोस भी था. बहुत सा लोग के मन में गरीब-मजदूर-किसान के प्रति भी दरद देखने को मिला कि अगर ऊ बेचारा करजा नहीं चुका पाता है त बैंक वाला कइसे उसका देह का खाल उतार लेता है. मीडिया में वीडियो देखाकर साबित करने का कोसिस किया गया कि बैंक वाला भी पूँजीपति का साथ देता है अऊर गरीब-मजदूर-किसान का बिरोधी है.

जाने दीजिये ऊ सब बात. तनी इलेक्सन के टाइम में नेता लोग का भासन पर गौर कीजिये. “हमारी पार्टी अगर सत्ता में आएगी तो आप लोगों के सारे कर्ज़ माफ़ कर देगी.” “हमारी पार्टी सभी जरूरतमन्द उद्यमी और किसान को नया कर्ज़ देगी ताकि वो अपना खोया रोजगार पा सकें”. भाई साहेब, ई जो कर्जा आप माफ़ किये हैं, चाहे जो आँख बन्द करके लोन देने का घोसना कर रहे हैं ऊ पइसा का आपके पापाजी रख गये थे कि दहेज में मिला था आपको.

आप सिसु, किसोर, तरुन लोन का घोसना कर दिये. अखबार में पूरा पेज का बिग्यापन छाप दिये हाथ जोड़कर फोटो लगा दिये कि अपना घर के सामने जाओ और ले लो लोन. अऊर बैंक को लाठी देखा दिये कि एतना करोड़ लोन मार्च तक करना है. अब सुनिये हमरे बैंक से का फोन आता है.
”वर्मा जी! आपके कितने शिशु हो गये?”
”सर! कोशिश कर रहा हूँ हो जाएँगे!”
”हो जाएँगे का क्या मतलब! परमार के 15 शिशु हो गये!”
”सर! वो जवान लड़का है. मेरी उम्र भी तो देखिये!”
”वो सब बहाना नहीं चलेगा. 25 तारीख़ तक 25 शिशु हो जाने चाहिये!”
उधर बैंक के दरवाजे पर मेला लगा हुआ है कि हमको लोन दो, सरकार ने हमारे लिये योजना बनाई है. सुनिये जल्दी से लोन मंजूर कीजिये यहाँ से दूसरा बैंक में भी लोन लेने जाना है.
“ठीक है! ये बताइये आपको किस काम के लिये लोन चाहिये?”
”आप लोन दे दीजिये, काम हम सोच लेंगे!”
बचपन से एही सुनते आये हैं कि चोरी चाहे हजार का हो चाहे लाख का, चोरी त चोरिये होता है. अब सरकार का दखल (सरकारी बैंक का मालिक है सरकार) एतना है कि बैंक साँप अऊर छुछुन्दर वाला हाल में होता है. सबको अपना प्रोमोसन, तरक्की का चाह हो न हो, सजा अऊर झूठा इल्जाम में सजा से बहुत डर लगता है. नतीजा “किंगफिशर”.

सब लोग बैंक को गाली दे रहे हैं अऊर सब आजकल प्रोजेक्ट फायनेंस का एक्स्पर्ट बने घूम रहे हैं. बाकी सोचिये जो बात आपको बुझाता है, ऊ स्टेट बैंक को नहीं बुझाता होगा? जबकि ऊ लोग का लोन देने का तरीका बहुत सख्त है. मगर पॉलिटिक्स जो न कराए.

बिजय बाबू को कोई नेता सफेद कॉलर वाला आतंकवादी बताया. ए भाई, ई नेता लोग पावर नाम का पिस्तौल कनपटी पर रखकर देस का हवाई जहाज हाइजैक किये जा रहा है, उसको कोई आतंकवादी नहीं कहता है.

बहुत खराब हो गया ई बुलेटिन. मगर का कीजियेगा, हम भगवान सिव थोड़े न हैं कि मुँह का स्वाद कड़वा हो तब्बो नीलकण्ठ कहाएँ. आप लोग अच्छा अच्छा पोस्ट का आनन्द लीजिये, रहे हम... त बिहारी है बिहारी के बात का क्या!!

(डिस्क्लेमर: इस पोस्ट में जहाँ भी सरकार, नेता आदि शब्दों का प्रयोग किया गया है उसका तात्पर्य देश की राजनैतिक व्यवस्था से है, न कि किसी पार्टी विशेष अथवा सरकार विशेष से है.)

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अतुल श्रीवास्तव जी की नजर में 'काँच के शामियाने '

आधी-अधूरी पंक्तियों का नशा...

सूखे फूल : उदास चिराग......दुष्यंत कुमार

159. शिवजी और हनुमानजी के गुण और हम

हींग के फायदे

रंग भरा गुब्बारा

आज एक दिन

तमाशा जात मज़हब का खड़ा करना बहाना है

विस्थापन ..

बड़ा कौन???

जनरल डायर नहीं, माइकल ओडवायर को मारा था अमर शहीद ऊधम सिंह जी ने

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शनिवार, 30 मार्च 2013

क्योंकि सुरक्षित रहने मे ही समझदारी है - ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय ब्लॉगर मित्रों ,
प्रणाम !

रिजर्व बैंक ने एक बार फिर से बेहतर सुरक्षित चेक सिस्टम सीटीएस को बैंकिंग प्रणाली में पूरी तरह से लागू करने के लिए समय सीमा को 31 जुलाई तक के लिए टाल दिया है। पहले यह समय सीमा 31 मार्च तय की गई थी। एक निवेशक के तौर पर आपके लिए इस नए चेक सिस्टम के बारे में जानना जरूरी है। अगर आप सीटीएस यानी चेक ट्रंकेशन सिस्टम वाले चेक का इस्तेमाल करते हैं तो आपका काम जल्दी भी होता है और यह आर्थिक लेनदेन की प्रक्रिया 100 फीसद सुरक्षित होती है। अब आपके चेक को क्लीयर होने के लिए एक बैंक से दूसरे बैंक नहीं जाना होगा।
सभी जरूरी जानकारियों समेत उसकी एक इलेक्ट्रॉनिक इमेज संबंधित पार्टी को भेज दी जाएगी। ये चेक ज्यादा सुरक्षित इसलिए होते हैं, क्योंकि नए चेक सिस्टम में बाएं हिस्से पर, अकाउंट नंबर वाले खाने से ठीक नीचे वॉयड पैन्टोग्राफ होता है, जिसको कॉपी कर पाना अथवा स्कैन कर फर्जी चेक बनाना असंभव है। साथ ही, जहां आप अमाउंट भरते हैं, वहां अब रुपये का सिंबल (प्रतीक) अंकित होगा। पूरे चेक पर बैंक का अदृश्य लोगों होगा, जो कॉपी करने की दशा में आसानी से पकड़ में आ जाएगा।
अब भी 75 से 80 फीसद लेनदेन चेक के जरिये ही होता है। चेक के फर्जी इस्तेमाल के कई मामले आने के बाद आरबीआइ इसे जरूरी बनाने जा रहा है।
सीटीएस के फायदे:
-सीटीएस चेक की क्लीयरिंग 24 घंटे में संभव।
-ऐसे चेक का फर्जी इस्तेमाल असंभव।
-चेक के गुम होने की संभावना नहीं।
-देश में किसी भी जगह किसी भी बैंक में क्लीय़रिंग की सुविधा।
-सभी बैंकों द्वारा मानक चेक सिस्टम को शुरू किया जाना।

उम्मीद है कि आप सब को अब तक अपने अपने बैंक से इस नई प्रणाली से जुड़ी चेकबुक मिल गई होगी ... पर अगर अब भी आप के पास नई चेकबुक नहीं है तो अपने बैंक से संपर्क कर इस सुविधा का लाभ उठाएँ और अपनी बैंकिंग प्रणाली को और सुरक्षित करें !

सादर आपका 

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परिभाषाएं...( ३)

रिश्ते वह विश्वास ! जो अदम्य है .. अगाध है ... अद्भुत है ... जो उस खिलखिलातेबच्चे में जिसे आसमान में उछालाहै , लोकने के लिए....!! वह लक्ष्मण रेखा जो तै करतीहै सीमाएं आचरण की ... व्यवहार की... और उनसे जुड़ेसही गलत की.... वह बोझ ..! जिसे कभी चाहकर.... कभी मजबूरी में ... सहना है खुशी.... और कड़वाहटओं के बीच...!! वह सौगातें ...! जो धरोहर सी.... महफूज़ रखते हैंकभी .. और कभी... कूड़े के ढेरपर छोड़ आतेहैं ....!!! नाज़ुक से ... कभी कांच से... रेशम के धागेसे कभी ... पर बला कीकूवत संजोये रहते हैं...!!!

{ २५७ } आशाओं के दीप जलाओ

गोपाल कृष्ण शुक्ल at पाँखुरी
आशाओं के दीप जलाओगे जब चहुँ ओर प्रकाश ही प्रकाश होगा। यदि टूट गये हों सपने तो क्या यदि छूट गये हों अपने तो क्या सबके सब चलते अपनी राहों पर उजियारी- मतवारी चाहों पर। पर राहों मे फ़ूल बिखराओगे जब चहुँ ओर सुगन्ध-सुवास होगा।।१।। मौसम भी तो बदले तेवर दिशाहीन हो उडते कलेवर रक्त गँध पूरित हवायें आती छाती को चीर-चीर कर जाती। पर बसन्त के गीत गुनगुनाओगे जब चहुँ ओर मन-मुदित मधुमास होगा।।२।। कल क्या होगा किसने देखा क्यों डाल रहे माथे पर तिरछी रेखा कामना ही सबको यहाँ छलती है वर्तिका वेदना की ही जलती है। पर प्रेम का संगीत बजाओगे जब चहुँ ओर प्रेम-हास-परिहास होगा।।३।। ......................... more »

मेरा परिचय

प्रवीण पाण्डेय at न दैन्यं न पलायनम्
आज से पहले अपना इतना विस्तृत परिचय किसी को नहीं दिया है। रश्मि प्रभाजी का आदेश आया तो सोच में पड़ गया, उन्हें कुछ कविताओं के साथ मेरा परिचय व चित्र चाहिये था। किसी भी लेखक को लग सकता है कि उनका लेखन ही उनकी अभिव्यक्ति है, वही उनका परिचय है। सच है भी क्योंकि लेखन में उतरी विचार प्रक्रिया व्यक्तित्व का ही तो अनुनाद होती है। जो शब्दों में बहता है वह लेखक के व्यक्तित्व से ही तो पिघल कर निकलता है। यद्यपि मैं लेखक होने का दम्भ नहीं भर सकता, पर प्रयास तो यही करता रहता हूँ कि जो कहूँ वह तथ्य से अधिक व्यक्तित्व का प्रक्षेपण हो। यदि व्यक्तित्व पूरा न उभरे तो कम से कम उसका आभास या सारांश तो ब... more »

मन

प्रतिभा सक्सेना at शिप्रा की लहरें
जान रही हूँ तुम्हें ,समझ रही हूँ , तुम वह नहीं जो दिखते हो! वह भी नहीं - ऊपर से जो लगते रूखे ,तीखे,खिन्न! चढ़ती-उतरती लहरों के आलोड़न , आवेग-आवेश के अथिर अंकन अंतर झाँकने नहीं देते ! * तने जाल हटते हैं जब, आघातों के वेगहीन होने पर , सारी उठा-पटक से परे, एक सरल-निर्मल सतह की ओझल खोह से झाँक जाता है, शान्त क्षणों में बिंबित दर्पण सा मन ! ऊपरी तहों में लिपटे भी , कितने समान हम ! *

राजस्थान के सूखे मेवे : केर, सांगरी, कुमटिया

Ratan singh shekhawat at ज्ञान दर्पण
राजस्थान में वर्षा की कमी व सिंचाई के साधनों की कमी की वजह से हरी सब्जियों की पहले बहुत कमी रहती थी वर्षा कालीन समय में जरुर लोग घरों में लोकी,पेठा आदि उगा लिया करते थे व ग्वार, मोठ की फली आदि खेतों में हो जाया करती थी पर वर्षा काल समाप्त होने के बाद सब्जियों की भयंकर किल्लत रहती थी| हालाँकि आज सिंचाई के साधनों व यातायात के साधन बढ़ने के चलते अब पूर्व जैसी परिस्थितियां नहीं है| पर पहले सब्जियों के मामले में राजस्थानी गृहणियों को बहुत कमी झेलनी पड़ती थी| प्रकृति ने राजस्थान में ऐसे कई पेड़ पौधे उगाकर राजस्थान वासियों की इस कमी को पूरा करने के लिए केर, सांगरी व कुमटिया आदि सूखे मेवों की ... more »

संभावना

देवेन्द्र पाण्डेय at बेचैन आत्मा
अटके हो किसी के आस में तो झरो! जैसे झरते हैं पत्ते पतझड़ में रूके हो किनारे साथी की तलाश में तो बहो! तेज धार वाली नदी में बिन माझी के नाव की तरह धऱती पर पड़े हो तो उड़ो! जैसे उड़ती है धूल बसंत में हाँ तुमसे भी कहता हूँ... वृक्ष हो तो नंगे हो जाओ! माझी हो तो संभालो अपनी पतवार! आँधी हो तो समझ जाओ! तुम उखाड़ नहीं पाओगे कभी भी किसी को समूल! जर्रे-जर्रे में होती है आग, पानी, हवा, मिट्टी या फिर.. आकाश बनने की संभावना। ................

घोटू के दोहे

Ravindra Prabhat at परिकल्पना
*(1)* नए नए हम सीरियल ,देखा करते नित्य । किसको फुर्सत है भला ,पढ़े नया सहित्य ॥ *(2)* ना तो मीठे बोल है,ना सुर है ना तान । चार दिनों तक गूंजते ,फिर खो जाते गान ॥ *(3)* वो गजलों का ज़माना,मन भावन संगीत । अब भी है मन में बसे ,वो प्यारे से गीत ॥ *(4)* साप्ताहिक था धर्मयुग ,या वो हिन्दुस्थान । गीत,लेख और कहानी,भर देते थे ज्ञान ॥ *(5)* कवि सम्मलेन रात भर,श्रोता सुनते मुग्ध । प्रहसन ,सस्ते लाफ्टर ,कर देते है क्षुब्ध ॥ *(6)* अंगरेजी का गार्डन ,फूल रहा है फ़ैल । एक बरस में एक दिन,बोते हिंदी बेल ॥ *(7)* छोटे छोटे दल बने,सब में है बिखराव । तो फिर कैसे आयेगा ,भारत में बदलाव ॥ ... more »

डर

स्याह सी खामोशियों के इस मीलों लंबे सफ़र में तन्हाइयों के अलावा .. साथ देने को दूर-दूर तक कोई भी नज़र नहीं आता . जी में आता है कि कहीं तो एक उम्मीद दिखे कोई तो हो हमक़दम जिसके हाथों को थाम के चलें. पर फिर वही डर...वही खटका मन का ... कि गर कोई मिल भी गया तो.................. बीच राह में वो छोड़ कर न जाए मुझे कुछ और खाली कुछ और अधूरा सा न कर जाए . उनका क्या हो जो लोग जन्मते ही हैं ...ज़िंदगी का सारा खालीपन और उदासी अपने में समेटने के लिए .

Bhimashankar Jyotirlinga Temple भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग मन्दिर

भीमाशंकर-नाशिक-औरंगाबाद यात्रा-05 SANDEEP PANWAR मन्दिर के पास वाली दुकानों से मावे की बनी मिठाई खरीदने के बाद हमने मन्दिर प्रांगण में प्रवेश किया। हमने पहले वहाँ एक परिक्रमा रुपी भ्रमण किया ताकि वहाँ के माहौल का जायजा लिया जा सके। उसके बाद वहाँ नहाने के लिये एक कुन्ड़ तलाश लिया। कुंड़ के सामने ही एक सामान बेचने वाली मराठी महिला बैठी हुई थी। पहले मैंने कुंड़ में घुस कर स्नान किया उसके बाद सामान के पास खड़ा होने की मेरी बारी थी तब तक विशाल भी कुंड़ में स्नान कर आया। लोगों ने अंधी श्रद्धा के चक्कर में स्नान करने के कुंड़ ... more »

फ़ेसबुकिया फ़ागुन

ताऊ टीवी चैनल से ताऊ जी से मिला होली का पिरसाद …..ग्रहण करिए पिछले कुछ सालों में होली के आसपास लकडी पानी बचाने का घनघोर नारा लगाने का रिवाज़ चल निकला है , तो इसका भी तोड है न म्हारे फ़ोडू के पास , देखिए हमारे सूरमाओं ने होली पे हो हल्ला मचा के रख दिया है ..झेलिए इस फ़ेसबुकिया फ़ागुन को ……………. DrKavita Vachaknavee रंगों से खेले लगभग 15 वर्ष हो गए.... और चाह कर भी खेलना संभव नहीं। यहाँ तो अभी कल व परसों भी हिमपात का दिन है। होली आप सब के जीवन में अनन्त खुशियों के रंग भरे। अपने मित्रों परिजनों के साथ आप सौ बरस और रंग खेलें और आप पर बीस-पचास रंग हर बरस डलते रहें ... :) रंग भरी... more »

लौटना गब्बर का फिर रामगढ़

गगन शर्मा, कुछ अलग सा at कुछ अलग सा
*वह तो हफ्ते दस दिन में मंदिर, गुरुद्वारे के लंगर से चार-पांच दिन का बटोर लाता हूँ तो ज़िंदा हूं, तुमसे तो वह भी नहीं होगा. हमारे विगत को जानते हुए कोइ हमारा स्मार्ट कार्ड या आधार कार्ड भी नहीं बनाएगा. तुमने जो किया है उससे बुढापे की पेंशन भी मिलने से रही। इसलिए पर्वों-त्योहारों खासकर होली को तो भूल ही जाओ जिसने हमारी यह गत बना दी थी* * *रामगढ़ की एतिहासिक लड़ाई के बाद सब कुछ मटियामेट हो चुका था. ना डाकुओं का दबदबा रहा, ना वो हुंकार, आदमी ही ना रहे तो गिनती क्या पूछनी. ले दे कर सिर्फ सांभा बचा था, वह भी चट्टान के ऊपर किसी तरह छिपा रह गया था, इसलिए। वर्षों बाद जेल काट तथा बुढापा ओ... more »
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अब आज्ञा दीजिये ...

जय हिन्द !!!

लेखागार