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मंगलवार, 9 अगस्त 2016

वर्तमान से अतीत की ऐतिहासिक यात्रा कराती ब्लॉग बुलेटिन

नमस्कार साथियो,
आज 9 अगस्त का दिन भारतीय सन्दर्भों में कई-कई मायनों में याद रखने वाला है. वर्तमान सन्दर्भों में और अतीत के सन्दर्भों में. सभी सन्दर्भों में इसके साथ अपनी ही ऐतिहासिकता जुड़ी हुई है. इससे परिचित होने के लिए हम-आप वर्तमान से अतीत की ओर चलेंगे.
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आज़ाद देश के सत्तर वर्षों में आज पहली बार हुआ है कि देश का प्रधानमंत्री ‘आज़ाद’ भूमि पर पहुँचा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शहीद चंद्रशेखर आजाद की जन्मस्थली भाभरा (अलीराजपुर) से सत्तर साल आजादी, याद करो कुर्बानी  कार्यक्रम शुरु किया. मध्य प्रदेश की मौजूदा भाजपा सरकार ने अमर शहीद के सम्मान में गाँव का नाम बदलकर चंद्रशेखर आजाद नगर कर दिया था. इसके साथ ही जिस मकान में 23 जुलाई 1906 को आजाद का जन्म हुआ था उसे स्मारक के रूप में विकसित कर आजाद स्मृति मंदिर नाम दिया था. 


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आर्म्ड फोर्सेस स्पेशल पॉवर एक्ट (AFSPA-अफस्पा) को हटाये जाने हेतु 02 नवम्बर 2000 से लगातार भूख हड़ताल कर रही इरोम शर्मिला ने आज अपना अनशन समाप्त किया. उनको नाक की नली के सहारे भोजन दिया जाता रहा है. अनशन समाप्ति के बाद उन्होंने विवाह करने और चुनाव लड़ने की भी बात कही. सोलह वर्षों में सरकार ने AFSPA-अफस्पा में किसी संशोधन का मन नहीं बनाया. सवाल उठता है कि आखिर इतने लम्बे संघर्ष के बाद हासिल क्या हुआ? कहीं ऐसा तो नहीं कि सोलह वर्षों के अपने संघर्ष के बाद भी किसी तरह का परिणाम न आते देख इरोम अन्दर से टूटने लगी हों? सरकारों की चुप्पी भी अनेक सवालों को जन्म देती है. क्या शांतिपूर्ण चलने वाले अनशन का कोई महत्त्व नहीं? AFSPA-अफस्पा समाप्त करना तर्कसंगत न हो किन्तु सोलह वर्षों के संघर्ष को सरकारों द्वारा नजरअंदाज करना क्या तर्कसंगत है?


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भारतीय इतिहास में 9 अगस्त को अगस्त क्रांति दिवस  के रूप में जाना जाता है. द्वितीय विश्व युद्ध में समर्थन लेने के बावज़ूद जब अंग्रेज़ भारत को स्वतंत्र करने को तैयार नहीं हुए तो राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी ने 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के रूप में आज़ादी की अंतिम जंग का ऐलान कर दिया. 4 जुलाई 1942 को एक प्रस्ताव पारित किया गया कि अंग्रेजों के ख़िलाफ़ नागरिक अवज्ञा आंदोलन चलाया जाए. इसे लेकर पार्टी में मतभेद हो गए. राजगोपालाचारी ने पार्टी छोड़ दी. नेहरू और अबुल कलाम आज़ाद शुरुआत में संशय में रहे फिर गाँधी के आह्वान पर समर्थन में आये. अंग्रेज पहले से सतर्क थे. इसलिए गाँधीजी को अगले दिन क़ैद कर लिया गया. लगभग सभी नेता गिरफ़्तार हुए लेकिन अरुणा आसफ अली गिरफ़्तार नहीं की गई. उन्होंने तिरंगा फहराकर भारत छोड़ो आंदोलन का शंखनाद किया.


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9 अगस्त 1925 को क्रांतिकारियों द्वारा हथियार खरीदने के लिये अंग्रेजों का खजाना लूट लेने की ऐतिहासिक घटना को अंजाम दिया गया. भारतीय इतिहास में इसे काकोरी कांड के नाम से जाना गया. इस ट्रेन डकैती में जर्मनी के बने चार माउज़र पिस्तौल काम में लाये गये थे. इन पिस्तौलों की विशेषता यह थी कि इनमें बट के पीछे लकड़ी का बना एक और कुन्दा लगाकर रायफल की तरह उपयोग किया जा सकता था. हिन्दुस्तान रिपब्लिकन ऐसोसिएशन के केवल दस सदस्यों ने इस पूरी घटना को अंजाम दिया था. शाहजहाँपुर में हुई बैठक में रामप्रसाद बिस्मिल ने अंग्रेजी खजाना लूटने की योजना बनायी. योजनानुसार राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी ने काकोरी रेलवे स्टेशन से छूटी आठ डाउन सहारनपुर-लखनऊ पैसेन्जर को चेन खींच कर रोका. क्रान्तिकारी रामप्रसाद बिस्मिल के नेतृत्व में अशफाक उल्ला खाँ, चन्द्रशेखर आज़ाद तथा छह अन्य सहयोगियों ने ट्रेन पर धावा बोल सरकारी खजाना लूट लिया. अंग्रेजी सरकार ने हिन्दुस्तान रिपब्लिकन ऐसोसिएशन के कुल चालीस क्रान्तिकारियों पर सम्राट के विरुद्ध सशस्त्र युद्ध छेड़ने, सरकारी खजाना लूटने तथा मुसाफिरों की हत्या करने का मुकदमा चलाया. जिसमें राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी, रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खाँ तथा ठाकुर रोशन सिंह को फाँसी की सजा सुनायी गयी. सोलह अन्य क्रान्तिकारियों को चार वर्ष से लेकर अधिकतम काला पानी तक का दण्ड दिया गया. दो व्यक्ति अभियोजन पक्ष के मुखबिर बन गए. चन्द्रशेखर आज़ाद को पुलिस खोजती रही.


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अतीत के गौरवशाली पलों को संजोये आधुनिक पलों की साक्षी बनती आज की बुलेटिन आपके सामने है.

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(सभी चित्र गूगल छवियों से साभार)

गुरुवार, 27 फ़रवरी 2014

महादेव के अंश चंद्रशेखर आज़ाद

आदरणीय मित्रगण.... प्रणाम

कुछ समय से मैं बुलेटिन लगा पाने में असमर्थ था | इसके लिए क्षमा प्रार्थी हूँ | अब एक नए जूनून और सोच के साथ आपके सामने हाज़िर हूँ और ये मेरा छोटा सा प्रयास आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहा हूँ | आशा करता हूँ आपको मेरे विचार प्रभावित करेंगे और अपनी टिप्पणियों के माध्यम से अपनी बात, राय, सहमति, असहमति वयक्त करेंगे तो बहुत आनंद प्राप्त होगा |


आज भोले बाबा महादेव महाकालेश्वर शमशान अधिपति शिव शम्भू का जन्म दिवस है मतलब आज महाशिवरात्रि का पर्व है और दूसरी तरफ आज ही हमारे अपने शहीद-ए-आज़म महान क्रान्तिकारी अमर पूजनीय वन्दनीय पंडित चन्द्रशेखर 'आजाद' जी जिनका नाम भर सुनते ही अंग्रेज़ अफसरों की पैंट गीली हो जाती थी की ८३वीं पुण्यतिथि भी है |

वैसे अपने दिल से सोचता हूँ तो आवाज़ आती है के आज के दिन को क्यों ना 'चन्द्रशेखर दिवस' का नाम देकर एक नए रूप में याद किया जाये | आप पूछेंगे क्यों तो मैं कहूँगा कि शंकर भगवान् को भी तो इसी नाम से जाना जाता है, उनके अनेक नामों में से एक नाम ‘चन्द्रशेखर’ भी है और दूसरी तरफ पंडित जी भी तो भारत के क्रांतिकारी समूह के शिव ही थे | उनके तांडव ने अंग्रेजों और गद्दारों के दिलों में दहशत और हलचल मचा कर रख दी थी और आजादी के चाँद को वो भी अपने शीश पर लिए ही चलते थे |

लोग कहते हैं उन्हें २७ फ़रवरी, १९३१, को एक ग़द्दार की मुखबरी के कारण अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था | मैं कहता हूँ कि उन्होंने जो फैसला लिया वो सही था क्योंकि मैं 'सत्यम शिवम् सुन्दरम' और ‘सत्यमेव जयते’ में विश्वास करता हूँ और पंडितजी का शिव समान रूप सुन्दर ही नहीं उनके व्यक्तित्त्व में भी सत्य कूट कूट कर भरा था | वह भारत माता के सच्चे सपूत थे और अपने अंतिम समय तक अपने जीवन सत्य और वचन को साथ लेकर ही चलते रहे और जीवित किसी के हाथ ना आने का प्रण पूर्ण किया |  वे अमर हो गए जैसे हमारे भोले बाबा अमर हैं, अजर हैं और बा-असर हैं |

ऐसे महान क्रांतिकारी, शिव सरीखे, भोले बाबा के समान दृढ़ संकल्पी, बुलंद इरादों के पक्के, क्रांति के तांडव से अंग्रेज़ों और गद्दारों के दांत खट्टे करने वाले, सत्य के मार्ग पर चलने वाले, जूनून और वादे दे पक्के, देश प्रेमी, निष्ठावान, कर्मप्रिये, सदैव अमर स्वतंत्रता सेनानी को मेरा शत शत नमन, हार्दिक श्रद्धांजलि और नत मस्तक हो प्रणाम |

आज का ये दिवस हर सूरत में 'चंद्रशेखर दिवस' कहलाने योग्य है इसलिए भारत माता के सपूत, देशभक्त, शिवांश अमर पंडित चन्द्रशेखर 'आज़ाद' और श्रृष्टि के पालन हार और महाप्रभु महादेव शिव शम्भू को मेरा कोटि कोटि नमन | जिस प्रकार शिव सदैव अजर अमर रहेंगे उसी प्रकार 'आज़ाद' का नाम भी अजर अमर रहेगा |

जय शिव शम्भू | जय महाकाल महाकालेश्वर | जयकारा वीर बजरंगी का हर हर महादेव |

आज की कड़ियाँ 
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मैं सजदा करता हूँ उस जगह जहाँ कोई 'शहीद' हुआ हो - शिवम् मिश्रा

पॉपुलर संस्कृति में महादेव - अवनीश मिश्रा

चंद्रशेखर आजाद की दुर्लभ तस्वीर - मंजीत ठाकुर

शिवरात्रि का अवकाश - अनीता

चंद्रशेखर आजाद - अरविन्द गौरव

महाशिवरात्रि - गृहस्थ महिमा - गिरिजेश राव

चंद्रशेखर आजाद - अनीता शर्मा

विविधा - आना

चंद्रशेखर आज़ाद की बहन - अवनीश सिंह

प्रेम - इमरान अंसारी

अच्छे लगे - त्रिलोकी मोहन पुरोहित

अब इजाज़त | आज के लिए बस यहीं तक | फिर मुलाक़ात होगी | आभार
जय श्री राम | हर हर महादेव शंभू | जय बजरंगबली महाराज 

लेखागार