Subscribe:

Ads 468x60px

कुल पेज दृश्य

धनतेरस लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
धनतेरस लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

सोमवार, 5 नवंबर 2018

धन्वन्तरि दिवस, धनतेरस और ब्लॉग बुलेटिन

सभी हिंदी ब्लॉगर्स को नमस्कार।
धन्वन्तरि
धन्वन्तरि हिन्दू धर्म में मान्य देवताओं में से एक हैं। भगवान धन्वन्तरि आयुर्वेद जगत् के प्रणेता तथा वैद्यक शास्त्र के देवता माने जाते हैं। भारतीय पौराणिक दृष्टि से 'धनतेरस' को स्वास्थ्य के देवता धन्वन्तरि का दिवस माना जाता है। धन्वन्तरि आरोग्य, सेहत, आयु और तेज के आराध्य देवता हैं। धनतेरस के दिन उनसे प्रार्थना की जाती है कि वे समस्त जगत् को निरोग कर मानव समाज को दीर्घायु प्रदान करें।

देवता एवं दैत्यों के सम्मिलित प्रयास के श्रान्त हो जाने पर समुद्र मन्थन स्वयं क्षीर-सागरशायी कर रहे थे। हलाहल, कामधेनु, ऐरावत, उच्चै:श्रवा अश्व, अप्सराएँ, कौस्तुभमणि, वारुणी, महाशंख, कल्पवृक्ष, चन्द्रमा, लक्ष्मी और कदली वृक्ष उससे प्रकट हो चुके थे। अन्त में हाथ में अमृतपूर्ण स्वर्ण कलश लिये श्याम वर्ण, चतुर्भुज भगवान धन्वन्तरि प्रकट हुए। अमृत-वितरण के पश्चात् देवराज इन्द्र की प्रार्थना पर भगवान धन्वन्तरि ने देव-वैद्य का पद स्वीकार कर लिया। अमरावती उनका निवास बनी। कालक्रम से पृथ्वी पर मनुष्य रोगों से अत्यन्त पीड़ित हो गये। प्रजापति इन्द्र ने धन्वन्तरि जी से प्रार्थना की। भगवान ने काशी के राजा दिवोदास के रूप में पृथ्वी पर अवतार धारण किया। इनकी 'धन्वन्तरि-संहिता' आयुर्वेद का मूल ग्रन्थ है। आयुर्वेद के आदि आचार्य सुश्रुत मुनि ने धन्वन्तरि जी से ही इस शास्त्र का उपदेश प्राप्त किया था।

आज धन्वन्तरि दिवस और धनतेरस पूजा की सभी देशवासियों को बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएं।



~ आज की बुलेटिन कड़ियाँ ~













आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर ... अभिनन्दन।। 

मंगलवार, 17 अक्टूबर 2017

धनतेरस की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ - ब्लॉग बुलेटिन

सभी हिन्दी ब्लॉगर्स को मेरा सादर नमस्कार।
धनतेरस के लिए चित्र परिणाम
सभी देशवासियों को धनतेरस की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ। सादर ... अभिनन्दन।। 


~ आज की बुलेटिन कड़ियाँ ~















आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर .... अभिनन्दन।।

शुक्रवार, 1 नवंबर 2013

ब्लॉग बुलेटिन की धनतेरसिया बुलेटिन

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम ! 

http://mauryareena.blogspot.com/2013/11/blog-post.html

http://hindihaiga.blogspot.com/2013/11/blog-post.html

http://sunilchitranshi.blogspot.com/2013/11/blog-post.html

http://kkyadav.blogspot.com/2013/11/blog-post.html

http://albelakhari.blogspot.com/2013/11/blog-post_1.html

http://kuchhalagsa.blogspot.com/2013/11/blog-post.html

पूरी ब्लॉग बुलेटिन टीम की ओर से आप सभी को सपरिवार धनतेरस की बहुत बहुत हार्दिक बधाइयाँ और मंगलकामनायें !!

सादर आपका 

=======================
यहाँ दिये हर एक चित्र पर एक पोस्ट का लिंक लगा हुआ है ... चित्र पर क्लिक कर उस पोस्ट को पढ़िये ... थोड़ा सस्पेंस बना रहेगा ... पर दिवाली पर सस्पेंस का खेल तो होता ही है न ... पटाखे को आग लगाने के बाद का सस्पेंस याद लीजिये ... फटेगा ... या फुस्स हो जाएगा !!

हाँ आज लिंक जरूर कुछ कम है  !!
=======================
अब आज्ञा दीजिये ...

जय हिन्द !!!
 

रविवार, 11 नवंबर 2012

आइये आज हो ही जाये साथ साथ धनतेरस की पूजा


पूजा में भूमिका कैसी .... हाथ जोड़िये और प्रार्थना एवं औचित्य से आरम्भ कीजिये 

डॉ कौशलेन्द्र - 

बस्तर की अभिव्यक्ति -जैसे कोई झरना....: आयुष्यदाता


धन्वंतरिदेव आयुष्यदाता!
नमन देव स्वीकार कर लो हमारा।
अज्ञान से जन्म लेते रहे हम
अज्ञान में मृत्यु बुनते रहे हम॥
पुरुषार्थ का मंत्र अब गुनगुना दो
हमें मुक्ति का मार्ग अब तो बता दो॥
रहस्य तन औ मन का है क्या कहो तो
जीवन सहजतम ये कर दो हमारा॥

वंदना गुप्ता -

सिर्फ फूलझड़ियाँ जला लेना , पटाखे चला लेना , दिए जला लेना ,घर आँगन बुहार लेना और पकवान बना लेना ही दिवाली मनाना  नहीं होता .अपने घर की सुख शांति के लिए लक्ष्मी गणेश की पूजा कर लेना , उनसे वैभव रिद्दी सिद्धि मांग लेना ही दिवाली मनाना नहीं होता .

आकाश मिश्रा -
एक दिया ऐसा भी हो , जो 
भीतर तलक प्रकाश करे , 
एक दिया मुर्दा जीवन में , 
फिर आकर कुछ श्वास भरे | 

अनीता -

हर दीप जैसे तकता हो किसी की राह जगकर,
दिल में उठने लगी... खुशियों की थिरकती लहर देखो ..!

पर्व त्यौहार में हमें जानना चाहिए अपने अतीत की सुगमताएँ, सीखने के लिए उनकी पुनरावृति आवश्यक है -
सलिल वर्मा -
कमाल का रिस्ता है ई दोस्ती... कभी प्रेम बन जाता है, कभी भक्ति बनकर सामने आता है. एतना मीठा रिस्ता कि जहाँ एक अऊर एक मिलकर दू नहीं, एक बनता है. जिसके होने में न सुख का पता चलता है, न दुःख का. सबकुछ भुला जाता है अऊर एगो परम सांति का अनुभव होता है.

माँ लक्ष्मी इस पुरे प्रकरण में मुस्कुरा उठी हैं ..... आप भी फुलझड़ी जलाएं और दुआ करें कि कभी हम जुदा न होंगे 

लेखागार