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गुरुवार, 23 मई 2019

पक्ष-विपक्ष दोनों के लिए राजनीति का नया दौर शुरू - ब्लॉग बुलेटिन


नमस्कार साथियो,
आज समूचा देश लोकसभा चुनाव परिणामों को जानने की चाह में किसी न किसी रूप में मीडिया से जुड़ा हुआ है. अभी तक जिस तरह से रुझान आये हैं, उनसे स्थिति एकदम साफ़ हो चुकी है. भाजपा की, NDA की धमाकेदार वापसी दिख रही है. विपक्ष और महागठबंधन जैसी स्थितियों को मतदाताओं ने नकारा है. यदि इन रुझानों, जो जल्द ही अंतिम परिणाम के रूप में भी पहचाने जायेंगे, को पूर्वाग्रहरहित होकर देखा जाये तो इस बार मतदाताओं ने निवर्तमान केंद्र सरकार के कार्यों पर भरोसा जताते हुए उसे एक अवसर और दिया है. इसके साथ ही उसने विगत लम्बे समय से चले आ रहे विपक्ष के तमाम आरोपों को एकतरह से खारिज भी किया है. 

इस परिणाम के बाद दोनों पक्षों के लिए राजनीति का नया ट्रेंड शुरू होने वाला है. अभी तक भाजपा को साम्प्रदायिक, हिन्दू ध्रुवीकरण के रूप में ही प्रचारित किया जाता रहा है किन्तु इन चुनावों परिणामों के बाद इससे बहुत हद तक मुक्ति मिलेगी. ऐसे में केंद्र की भाजपा को अपनी वर्तमान ईमानदारी वाली, कार्य करने वाली सरकार की छवि को और निखारना होगा. महज मोदी के नाम पर टिके रहने की प्रवृत्ति से उसके सभी जनप्रतिनिधियों को बाहर आना होगा. 


इसी तरह विपक्ष को भी विचार करना होगा कि हर बार महज ईवीएम के नाम पर, राफेल, नोटबंदी अथवा किसी अन्य मुद्दे के नाम पर शोर मचाकर सरकार को कटघरे में खड़ा नहीं किया जा सकता है. महज जाति के नाम पर लामबंदी करके मतदाताओं को लुभाया नहीं जा सकता है. मुफ्तखोरी के नाम पर मतदाताओं को आकर्षित नहीं किया जा सकता है. अब आम मतदाता भी तकनीकी रूप से अपडेट है. उसके हाथ में भी तकनीक होने से उसको भी पल-पल की जानकारी मिल रही है. उसे भी सही, गलत का आभास हो रहा है. ऐसे में विपक्ष को आने वाले समय के लिए सशक्त बनने के लिए, केंद्र सरकार के कार्यों की पारदर्शिता को बनाये रखने के लिए उसे जनता के बीच जाकर काम करना होगा. सरकार की छवि को झूठे आरोपों के द्वारा धूमिल करने की कोशिशों के बजाय खुद अपनी छवि को सशक्त, मजबूत, स्वच्छ करना होगा.

फ़िलहाल, अंतिम परिणामों का सभी को इंतजार है. सभी को शुभकामनायें कि आने वाले समय के देश और सशक्त हो, मजबूत हो, सुरक्षित हो.

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बुधवार, 9 नवंबर 2016

घबराएँ नहीं, बंद नोटों की चाबुक आपके लिए नहीं - ब्लॉग बुलेटिन

नमस्कार दोस्तो,
भारतीय अर्थव्यवस्था को जाली मुद्रा से बचाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा सख्त कदम उठाते हुए एक हजार रुपये और पाँच सौ रुपये के नोटों का सञ्चालन बंद करने की अप्रत्याशित घोषणा की गई. ऐसा निर्णय करते ही जनमानस में संशय का वातावरण पैदा हो गया. अचानक से सबको लगने लगा कि आने वाले दिन बिना धन के कैसे व्यतीत किये जायेंगे? क्या उनके पास रखे रुपयों को बदला जा सकेगा? उनके रुपयों की वापसी कैसे संभव होगी? पुराने पाँच सौ और एक हजार रुपये के नोटों का कितना मूल्य उनको मिलेगा?
सबसे अच्छी बात ये है कि किसी भी उस व्यक्ति को कतई परेशान होने की आवश्यकता नहीं है जिसके पास ईमानदारी का धन है. हाँ, केंद्र सरकार के इस कठोर निर्णय के बाद से कदाचित आरंभिक एक-दो सप्ताह तक परेशानी हो सकती है किन्तु किसी का धन किसी भी रूप में असुरक्षित नहीं रहेगा. इस सम्बन्ध में भारतीय रिजर्व बैंक का कहना है कि इस निर्णय के बाद भी पाँच सौ से कम कीमत के नोटों का परिचालन यथावत होता रहेगा. बंद किये गए नोटों के सुचारू सञ्चालन के लिए नयी मुद्रा कई महीनों से गोपनीय रूप से छापी जा रही थी.  



(1) रिजर्व बैंक ने बताया कि मात्र एक दिन (9 नवम्बर) की बैंक बंदी के बाद बैंकों, डाकघरों और भारतीय रिजर्व बैंक के 19 कार्यालयों से अपनी रकम को बदला जा सकता है.
(2) एक व्यक्ति को नकद में चार हजार रुपये तक के नोट बदल कर दिए जायेंगे. इससे अधिक की रकम को उसके खाते में जमा कराया जायेगा. जिन्हें चार हजार रुपये से अधिक की नकदी की जरूरत है, वह चेक या इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों जैसे ऑनलाइन बैंकिंग, मोबाइल वॉलेट, आईएमपीएस, क्रेडिट, डेबिट कार्ड आदि के जरिए इसका भुगतान कर सकते हैं.
(3) जिनके पास कोई बैंक खाता नहीं है, वे आवश्यक केवाईसी दस्तावेजों के साथ एक खाता खोल सकते हैं.
(4) जिस व्यक्ति के पास अपना खुद का निजी खाता नहीं है, वह रिश्तेदार या मित्र के खाते के जरिए नोटों को बदलने की सुविधा ले सकता है, बशर्तें उसे लिखित अनुमति लेनी होगी और नोट बदलते समय उसे खाताधारक द्वारा दी गई अनुमति का प्रमाण और अपना वैध पहचान प्रमाण उपलब्ध कराना होगा.
(5) एटीएम से निकास के मामले में आरबीआई ने कहा कि एटीएम दो दिन (9-10 नवम्बर) बंद रहने के बाद यथावत कार्य करना आरम्भ कर देंगे. एटीएम के काम करना शुरू करते ही कोई व्यक्ति 18 नवंबर तक दो हजार रुपये प्रतिकार्ड, प्रतिदिन निकाल सकेगा.
(6) 18 नवम्बर के बाद रुपये निकासी की यह सीमा बढ़ाकर प्रतिदिन, प्रतिकार्ड चार हजार रुपये कर दी जाएगी. यह व्यवस्था 24 नवम्बर तक लागू रहेगी.
(7) इसी तरह चेक, निकासी पर्चियों के जरिए नकद निकासी हेतु एक दिन में अधिक से अधिक दस हजार रुपये निकासी की सीमा निर्धारित की गई है. यह सीमा एक सप्ताह में बीस हजार रुपये (एटीएम से निकासी सहित) होगी. ऐसा नवम्बर के पहले पखवाड़े से 24 नवंबर तक लागू रहेगा. उसके पश्चात् सामान्य निकासी व्यवस्था आरम्भ हो जाएगी.
(8) इलेक्ट्रानिक लेनदेन, इंटरनेट बैंकिंग बिना किसी सीमा के साथ किया जा सकता है.
(9) जो लोग देश से बाहर हैं, वे देश में किसी अन्य व्यक्ति को लिखित में अधिकृत कर नोटों को अपने खातों में जमा करवा सकते हैं.
(10) ऐसी व्यवस्था इसलिए की गई है ताकि उपभोक्ताओं द्वारा अधिकाधिक निकासी से अन्य दूसरे उपभोक्ताओं पर असर न पड़े.
(11) बंद किये गए नोटों को बदलने, जमा करने की योजना 30 दिसंबर, 2016 को बंद हो जाएगी.
(12) यदि इसके बाद भी कोई व्यक्ति बंद किये गए पाँच सौ, एक हजार रुपये के नोटों को बदलने अथवा जमा करने से वंचित रह जाता है तो ऐसे व्यक्ति को एक घोषणा-पत्र तथा उसके पहचान-पत्र के साथ आरबीआई के निर्धारित कार्यालयों में 31 मार्च 2017 तक एक सीमित अवसर की पेशकश की जाएगी.
(13) हाल-फ़िलहाल अगले तीन दिन (11 नवम्बर की रात्रि) तक कुछ निश्चित जगहों पर पुराने नोटों के परिचालन की छूट है. इनमें चिकित्सालय, दवाई की दुकान, रेलवे टिकट काउंटर, बस टिकट, हवाई टिकट काउंटर, पेट्रोल पम्प, सरकारी दुग्ध विक्रय केंद्र शामिल हैं.

केंद्र सरकार द्वारा भ्रष्टाचार, काला धन, अवैध धन, चुनावों में धनबल का अंधाधुंध प्रयोग, आतंकवाद के लिए प्रयुक्त होने वाले काले धन को रोकने हेतु एक बेहतर कदम उठाया है. यदि देशवासी भारत को वाकई विकसित देशों की श्रेणी में देखना चाहते हैं तो उसे नकद मुद्रा के स्थान पर चैक अथवा इलेक्ट्रॉनिक मुद्रा की तरफ बढ़ना ही होगा. बहरहाल, हम सब धैर्य के साथ सरकार के इस फैसले में सहयोग करें.

ध्यान रखें, मुद्रा बंद नहीं की गई है सिर्फ परिवर्तित की गई है. इसे 30 दिसम्बर 2016 तक सामान्य रूप में बैंक, डाकघर में जमा किया या बदला जा सकता है. इस तिथि के बाद भी 31 मार्च 2017 तक प्रतिबंधित नोटों को सामान्य सी औपचारिकता पूरी कर बदला जा सकेगा.

विस्तार से जानने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक की वेबसाइट को देखा जा सकता है.

आइये अब एक नजर डालें आज की बुलेटिन पर..

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गुरुवार, 26 मई 2016

आशाओं के रथ पर दो वर्ष की यात्रा - ब्लॉग बुलेटिन

नमस्कार मित्रो,
देश के पन्द्रहवें प्रधानमंत्री के रूप में नरेन्द्र मोदी ने आज अपने कार्यकाल के दो वर्ष पूरे कर लिए हैं. दो वर्ष का समय किसी भी केन्द्रीय नेतृत्व के कार्यों पर अंतिम परिणाम देने के लिए भले ही पूर्णतः उपयुक्त न हो किन्तु उनके आकलन के लिए अवश्य ही उपयुक्त है. मोदी जी ने अपने शपथ ग्रहण वाले दिन से ही अपनी कार्यशैली से ये दर्शा दिया था कि वे समन्वय और सहयोग की भावना से सत्ता-सञ्चालन करने की मंशा रखते हैं. शपथ ग्रहण समारोह में सार्क देशों को आमंत्रित करना और पडोसी देशों की यात्राओं के द्वारा उन्होंने सकारात्मक रुख दर्शाया. इसका सुखद परिणाम ये हुआ कि आज देश की अंतर्राष्ट्रीय साख में आशातीत उछाल आया है.



वैश्विक स्तर पर देश की छवि को सुधारने में अहम् भूमिका निर्वहन करने वाले मोदी जी ने देश की स्थिति को भी सुधारने हेतु पर्याप्त एवं निरंतर कार्य किये हैं. सरकार द्वारा आम आदमी के लिए योजनाओं का सञ्चालन किया जा रहा है. जन-धन योजना, सुकन्या समृद्धि योजना, प्रधानमंत्री बीमा योजना, अटल पेंशन योजना, गैस सब्सिडी हेतु पहल योजना, उज्ज्वला योजना, स्वच्छता अभियान, मेक इन इंडिया, स्टार्टअप योजना, बेटी बचाओ बेटी पढाओ योजना आदि के द्वारा सरकार ने स्पष्ट सन्देश दिया कि उसके ऊपर भले ही उद्योगपतियों की सरकार होने का आरोप लगे किन्तु सत्यता यह नहीं है. जिस तरह से पडोसी देशों से संबंधों को विस्तार दिया गया उससे वर्षों से चले आ रहे अनेक विवादों को भी सुलझाया जा सका है. बांग्लादेश के साथ चल रहे सीमा-विवाद का सहजता से हल निकाल लिया गया. जम्मू-कश्मीर में सरकार में गठबंधन के द्वारा पाक-अधिकृत कश्मीर से और सीमा पार से आतंकी घटनाओं पर भी अंकुश लगा है. इसके अलावा महिलाओं की सुरक्षा, रेल यात्रा के सुखद अनुभव, बिजली एवं ऊर्जा के क्षेत्र में लगातार कार्य, विदेश मंत्रालय का सकारात्मक सहयोग, परिवहन व्यवस्था की सजगता आदि को सरकार की सफलता माना जा सकता है. तकनीक के क्षेत्र में, अन्तरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में, प्रक्षेपण के विषय में, रक्षा अनुसन्धान में देश आत्मनिर्भर होने के साथ-साथ सशक्त भी हुआ है. अब देश से विदेशी राकेट प्रक्षेपित किये जा रहे हैं. 



ऐसा भी नहीं है कि केंद्र सरकार इन दो वर्षों में समस्त क्षेत्रों में सफल ही रही हो. सफलता के साथ-साथ कई-कई मोर्चों पर आंशिक सफलता अथवा असफलता भी हाथ लगी है. पठानकोट हमले को इसी रूप में देखा जा सकता है. इसके अलावा काला धन वापसी को लेकर किये गए वादे पर अमल होता नहीं दिख रहा है. मंहगाई पर अंकुश लगा पाने में सरकार विफल रही है. किसानों के मुद्दे पर भी सरकार की तरफ से कोई सकारात्मक कदम उठते नहीं दिखे हैं. रुपये की कीमत सम्बन्धी, शेयर बाजार सम्बन्धी मामलों में भी वैसे परिणाम नहीं मिले हैं जैसे कि अपेक्षित थे.

दो वर्षों के कार्यों का विस्तृत लेखा-जोखा बहुत विस्तारित हो सकता है. संक्षेप में और मोटे रूप में समझना चाहिए कि इस कार्यकाल में भ्रष्टाचार होते नहीं दिखा है. मंत्री, सांसद अपने-अपने दायित्वों का निर्वहन करने में लगे हैं. देश को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने के प्रयास जारी हैं. आम आदमी में इस सरकार के प्रति विश्वास बना हुआ है. सामाजिक सौहार्द्र बढ़ाने में, समन्वय में, सहयोग में इस सरकार ने पर्याप्त कार्य किया है. लाभ-हानि के अपने-अपने समीकरण होते हैं, अपने-अपने नजरिये होते हैं. इसके बाद भी आम आदमी में देश के प्रधानमंत्री के रूप में नरेन्द्र मोदी पर विश्वास कहीं गहरे तक बना हुआ है. यही विश्वास देश को सतत उन्नति के पथ पर ले जायेगा. विश्वास रखें कि देश आगे बढ़ेगा, उन्नति करेगा और बुलेटिन से सदा की भांति आपको जानकारी और आनंद मिलेगा.

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लेखागार