आइये आज के बुलेटिन में चर्चा करें नैतिक मूल्यों की और सामाजिक ताने बाने की... कबीर दास जी कहते थे...
पोथी पढ पढ जग मुआ , पंडित भया न कोय.. ढाई अक्षर प्रेम के पढे सो पंडित होय
बात तो सही है.. बे मतलब की बहस-बाज़ी में क्यों पड़ा जाये... सृजनात्मकता और रचनात्मकता को बढाया जाये और प्रोत्साहित किया जाए... समाज है तो विरोध भी होंगे लेकिन विरोध दर्ज कराने का भी अपना स्टैण्डर्ड होना चाहिए... नैतिकता और सामाजिक सरोकार की भावना सर्वोप्परी है.. जी बिलकुल... बशीर बद्र साहब का एक शेर है..
दुश्मनी जम के करो लेकिन यह गुंजाईश रखना
जब कभी हम दोस्त हो जाये तो फिर शर्मिंदा ना हो..
नफरत से दुनिया टूट जाएगी.. और प्रेम से दुनिया एक हो जाएगी... आइये एक स्वर में ब्लॉग जगत की एकता को माने.. और अपनी असल शक्ति को पहचाने..
चलिये आज के बुलेटिन की ओर आपको लेकर चलते हैं...
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तो मित्रों ब्लाग एकता ज़िन्दाबाद है और हमेशा रहेगी... आज का बुलेटिन यहीं तक... कल फ़िर मिलेंगे एक नये तेवर और मिज़ाज के साथ... तब तक देव बाबा को इज़ाजत दीजिए...
जय हिन्द



