प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम !
हर साल मई महीने के दूसरे रविवार को मदर्स डे मनाए जाने की रवायत है ... यूँ तो हम भारतवासियों को माँ के प्रति अपना लगाव या सम्मान दिखाने के किसी खास दिन की कभी कोई जरूरत ही नहीं रही पर अब जब एक रवायत चल ही पड़ी है तो भला हम ही पीछे क्यों रहे ???
जब जब माँ का जिक्र आता है ... अपने आप ही स्व॰ ओम व्यास ओम जी की अमर रचना "माँ संवेदना है" दिल ओ दिमाग पर छा जाती है ... लीजिये आज के दिन आप सब की नज़र है ...
माँ संवेदना हैमाँ…माँ संवेदना है, भावना है अहसास है
माँ…माँ-माँ संवेदना है, भावना है अहसास है
माँ…माँ जीवन के फूलों में खुशबू का वास है,
माँ…माँ रोते हुए बच्चे का खुशनुमा पलना है,
माँ…माँ मरूथल में नदी या मीठा सा झरना है,
माँ…माँ लोरी है, गीत है, प्यारी सी थाप है,
माँ…माँ पूजा की थाली है, मंत्रों का जाप है,
माँ…माँ आँखों का सिसकता हुआ किनारा है,
माँ…माँ गालों पर पप्पी है, ममता की धारा है,
माँ…माँ झुलसते दिलों में कोयल की बोली है,
माँ…माँ मेहँदी है, कुमकुम है, सिंदूर है, रोली है,
माँ…माँ कलम है, दवात है, स्याही है,
माँ…माँ परामत्मा की स्वयँ एक गवाही है,
माँ…माँ त्याग है, तपस्या है, सेवा है,
माँ…माँ फूँक से ठँडा किया हुआ कलेवा है,
माँ…माँ अनुष्ठान है, साधना है, जीवन का हवन है,
माँ…माँ जिंदगी के मोहल्ले में आत्मा का भवन है,
माँ…माँ चूडी वाले हाथों के मजबूत कधों का नाम है,
माँ…माँ काशी है, काबा है और चारों धाम है,
माँ…माँ चिंता है, याद है, हिचकी है,
माँ…माँ बच्चे की चोट पर सिसकी है,
माँ…माँ चुल्हा-धुंआ-रोटी और हाथों का छाला है,
माँ…माँ ज़िंदगी की कडवाहट में अमृत का प्याला है,
माँ…माँ पृथ्वी है, जगत है, धूरी है,
माँ बिना इस सृष्टी की कलप्ना अधूरी है,
तो माँ की ये कथा अनादि है,
ये अध्याय नही है…
…और माँ का जीवन में कोई पर्याय नहीं है,
और माँ का जीवन में कोई पर्याय नहीं है,
तो माँ का महत्व दुनिया में कम हो नहीं सकता,
और माँ जैसा दुनिया में कुछ हो नहीं सकता,
और माँ जैसा दुनिया में कुछ हो नहीं सकता,
तो मैं कला की ये पंक्तियाँ माँ के नाम करता हूँ,
और दुनिया की सभी माताओं को प्रणाम करता हूँ ||
- स्व॰ ओम व्यास ओम
सादर आपका
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तुम्हारे बारे में !!!!!!
कितने कर्ज़ उतारूँ माँ..... ?
**~ऊन के गोले जैसी.... "माँ " ~**
माँ
माँ ..........
माँ के बारे में क्या लिखूँ ....
माँ
मेरी माँ
माँ मुझे अपने आँचल में छुपा ले...
अम्मा कभी नहीं हुई बीमार---------
मात्र दिवस विशेष - माँ तुझे सलाम...!
तुम प्रणम्य !
साँझ ढले
आज माँ-दिवस हैं !!!
मेरे हर शब्द की प्रतिध्वनि में तुम हो ............"माँ "
माँ तुझे प्रणाम !
सभी प्यारी-प्यारी माँओं को प्यार
तलाश जारी है ...( मदर्स - डे Mother's Day ) ....गार्गी की कलम से
मातृ दिवस पर
माँ तुमने दिया जनम हमें .....................
माँ का रिश्ता सबसे अनमोल
हे ! भारत के मातायों
माँ के आँसू
"प्रतिदिन मातादिवस है" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
हैप्पी मदर्स डे ... अम्मा
मातृ दिवस पर कुछ हाइकु .........
मातृ दिवस पर हास्यकवि अलबेला खत्री द्वारा जगतमाता आदिशक्ति हिंगुलाज को श्री हिंगुलाज चालीसा की संगीतमय भेन्ट ....
मां का मतलब हां होता है
मेरी माँ (काफी पुरानी तस्वीर)
(((...मां...)))
अम्मा !
happy mother's day in hindi
माँ मेरी माँ
उस माँ को सलाम...
माँ!!! तुम्हे तो पता भी नही होगा आज माँ-दिवस हैं
माँ एक शब्द नहीं ग्रन्थ है
थपकी, चुम्बन, मीठी लोरी , ऐसे प्यार जताती है माँ
मीठी -सी याद
अथाह ममता का सागर ....माँ
माँ ,तुम थकती नही ...





