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शनिवार, 9 मार्च 2019

उस्ताद जाकिर हुसैन और ब्लॉग बुलेटिन

सभी हिंदी ब्लॉगर्स को नमस्कार
ज़ाकिर हुसैन (अंग्रेज़ी: Zakir Hussain, जन्म: 9 मार्च, 1951) भारत के प्रसिद्ध तबला वादक हैं। वे मशहूर तबला वादक क़ुरैशी अल्ला रक्खा ख़ान के पुत्र हैं। अल्ला रक्खा ख़ान भी तबला बजाने में माहिर माने जाते थे।

ज़ाकिर हुसैन का बचपन मुंबई में ही बीता। 12 साल की उम्र से ही ज़ाकिर हुसैन ने संगीत की दुनिया में अपने तबले की आवाज़ को बिखेरना शुरू कर दिया था। प्रारंभिक शिक्षा और कॉलेज के बाद ज़ाकिर हुसैन ने कला के क्षेत्र में अपने आप को स्थापित करना शुरू कर दिया। 1973 में उनका पहला एलबम लिविंग इन द मैटेरियल वर्ल्ड आया था। उसके बाद तो जैसे ज़ाकिर हुसैन ने ठान लिया कि अपने तबले की आवाज़ को दुनिया भर में बिखेरेंगे। 1973 से लेकर 2007 तक ज़ाकिर हुसैन विभिन्न अंतरराष्ट्रीय समारोहों और एलबमों में अपने तबले का दम दिखाते रहे। ज़ाकिर हुसैन भारत में तो बहुत ही प्रसिद्ध हैं ही साथ ही विश्व के विभिन्न हिस्सों में भी समान रुप से लोकप्रिय हैं।

आज मशहूर तबलावादक उस्ताद जाकिर हुसैन जी के 69वें जन्मदिन पर हम सब उन्हें ढेर सारी बधाई और शुभकामनाएं देते हैं।


~ आज की बुलेटिन कड़ियाँ ~

मनमौजी मिजाज का दर्शक !







आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर ... अभिनन्दन।।

शुक्रवार, 9 मार्च 2018

अरे हुजूर वाह ताज बोलिए : ब्लॉग बुलेटिन


नमस्कार साथियो,
अरे हुजूर, वाह ताज बोलिए, ये वाक्य आप सभी को आज भी याद होगा. घुंघराले हुए, उलझे से बाल लिए एक व्यक्ति बिजली की तेजी से तबले पर अपनी उँगलियों के द्वारा मनोहारी धुन निकालता दिखता है. उसी बीच वाह उस्ताद वाह! के जवाब में वह व्यक्ति चाय का एक घूँट लेने के बाद यही वाक्य बोलता है. वो व्यक्ति और कोई नहीं बल्कि मशहूर तबला वादक जाकिर हुसैन हैं. उनका जन्म आज यानि कि 9 मार्च 1951 को हुआ था. वे मशहूर तबला वादक क़ुरैशी अल्ला रक्खा ख़ान के पुत्र हैं. ज़ाकिर हुसैन का बचपन मुंबई में ही बीता. महज 12 साल की उम्र में ही उन्होंने तबले के साथ संगत बैठाना शुरू कर दिया था. कॉलेज की शिक्षा के बाद वे खुद को कला के क्षेत्र में स्थापित करने में जुट गए. सन 1973 में उनका पहला एलबम लिविंग इन द मैटेरियल वर्ल्ड आया. उसके बाद तो उन्होंने रुकने का नाम नहीं लिया. उन्होंने अपने तबले की धुनें दुनिया भर में बिखेर दीं. इसी कारण वे भारत के साथ-साथ विश्व के विभिन्न हिस्सों में भी लोकप्रिय हैं.


उनकी कला प्रतिभा के चलते उनको पद्मश्री और पद्मभूषण से सम्मानित किया जा चुका है. सन 1988 में जब उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया तब उनकी उम्र महज 37 वर्ष थी. इतनी कम उम्र में यह पुरस्कार पाने वाले वे पहले व्यक्ति हैं. इसके बाद सन 2002 में संगीत के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें पद्मभूषण से सम्मानित किया गया. इसके अतिरिक्त उनको सन 1992 और सन 2009 में संगीत का सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार ग्रैमी अवार्ड भी मिल चुका है.

आज उनके जन्मदिन पर उनको शुभकामनायें.

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