इस तार के मिलने पर ही अंग्रेजों ने लंदन और कोलकाता में बैठे उच्चाधिकारियों को सूचित कर प्रशासनिक सेवाएं उपलब्ध करायी थीं। तार में लिखा था-'द रानी ऑफ झांसी इज किल्ड। ब्रिगेडियर स्मिथ टुक फोर गन्स इन फाइट यस्टरडे'। झांसी की रानी के साथ हुए इस युद्ध को अंग्रेज सरकार ने इतना प्रमुख माना था कि इसकी गूंज यूरोपियन देशों में भी रही।
इतिहासविद राजकिशोर राजे के मुताबिक, दिल्ली अंिभलेखागार में आगरा की सीट से गदर के दौरान हुए पत्राचार व टेलीग्राफिक मैसेज सिस्टम के सौ से ज्यादा टेलीग्राम मौजूद हैं। इनमें से 27 केवल झांसी से संबंधित हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण हैं 13 अप्रैल, 1858 का, जिसमें सूचना दी गयी थी कि झांसी पर अंग्रेजों ने दोबारा कब्जा कर लिया।
*दे*श के जाने माने वैज्ञानिक और पूर्व राष्ट्रपति ए पी जे अबुल कलाम को इन नेताओं ने मुसलमान बनाकर रख दिया है। देश ही नहीं दुनिया कलाम साहब की योग्यता का लोहा मानती है। उनकी काबिलियत के आधार पर ही वो 2002 म...
पुलिस कहीं भी हो हमेशा ही डरावनी सी होती है .इस नाम से ही दहशत का सा एहसास होता है .पुलिस नाम के साथ ही सख्त, क्रूर, डरावना, भ्रष्ट, ताक़तवर, असंवेदनशील और भी ना जाने कितनी ही ऐसी उपमाएं स्वंम ही दिमाग म...
*16 जून लगभग ५:३० सायं हिन्दी के प्रख्यात हस्ताक्षर डॉ राजेंद्र अग्रवाल जी, डॉ योगेन्द्र दत्त शर्मा , डॉ भारतेंदु मिश्र जी, श्री अशोक गुप्ता ,एवं प्रोफ़ेसर डॉ अम्बरीश सक्सेना, जिन्हें देश में मीडिया गुरु...
नि: शब्द हूँ मैं तुम्हारे मौन को पालती हूँ पोसती हूँ और जब होता है मौन मुखरित तो हतप्रभ सी रह जाती हूँ , हमारी सोचें कितनी भी हों विरोधाभासी फिर भी कभी "हम" के वजूद से नहीं टकरातीं जब तुम्ह...
जो जीता वही सिकंदर पर हर परिणाम सत्य तो नहीं होता ! अधिकतर सत्य तो बस एड़ियां उचकाता रह जाता है और परिणाम अपनी मंशा की सत्यता पर इतराता है ! एक सच सत्य का होता है एक सच झूठ का .... जीत गया था अर्जुन क...
आज कुछ भी शुरू करने से पहले ही बता दूँ, इस पोस्ट को पढ़ने के बाद हो सकता है मेरी कुछ महिला ब्लॉगर दोस्तों को बुरा लगे मगर जो मुझे लगा जो मैंने महसूस किया वही मैंने लिखा। कमाल की बात है ना, आज के ज़माने ...
ऐतिहासिक वृत्तान्त को कविता का रूप देती , मैं गुनगुनाती-मतवाली बुलबुल बन जाती .... इधर डोलती उधर डोलती सबका मन मोह लेती .... स्तब्ध निगाहें ,नि:शब्द जुबां नहीं देख पाती , एक भूखे आदमी के हाथ का कौर...
जरा कल्पना कीजिए आप कार से कहीं जा रहे हैं एक अपाहिज भिखारी अपने पहिएँ लगे पटरे याने अपनी पटरागाड़ी पर बैठा भीख माँग रहा है। आपके मन में करुणा उभरती है और आप सौ सौ रुपए के दो नोट कार की खिड़की से अपना हाथ...
posted by Digamber Ashu at विकल्प (चार्ली चैपलिन ने “द ग्रेट डिक्टेटर” फिल्म के इस भाषण में विश्व जन-गण की आकाँक्षाओं को अनुपम कलात्मकता के साथ अभिव्यक्त किया है और आज भी प्रासंगिक है. अनुवाद- पारिजात.) माफ कीजिये, मैं सम्राट बनना नहीं च...
चुपके से खींचा गया फोटो-09/06/2012 सिर पर एक हाथ ज़रूरी है हर पल का साथ ज़रूरी है आते जाते कदमों पर एक एहसास ज़रूरी है ज़रूरी हैं कल की यादें आज और कल की बातें ज़रूरी है वही प्रेरणा वही विश्वास जो कल था और आज ...
आज फादर्स डे पर हम सब बच्चों ने स्कूल में बहुत प्यारे प्यारे कार्ड्स बनाये हैं । मैंने भी पापा के लिए ये कार्ड बनाये हैं । अगले महीने से मेरे समर वेकेशन शुरू होंगें और जम कर पापा के मस्ती करने का प्लान...
वृक्ष जब युवा था कभी, जड़ से उग आये थे उसके, कोपल नए। पहले दो निकले, दो वर्षों के अंतराल पर, और छः वर्षों बाद, एक और कोपल। धीरे धीरे तीनों कोपल, पनपते गए । उन कोपलों में , मौजूद थे गुण, उस वृक्ष जैसे ही ...
नन्हा मोहसिन... दादा जी के साथ रोज़ मस्ज़िद जाता... टोपी पहन के जब झुकता... तो लगता तारा लिपट गया हो चाँद से... बाहर निकलता, तो एक पल को ठिठक जाता... मस्ज़िद के अहाते में लगे आम के पेड़... को एकटक देखने लगत...
नमस्कार मित्रों , स्वागत है आपका देश के इस अद्भुत राजनैतिक खेल में जिसका नाम है “कौन बनेगा राष्ट्रपति” । इस खेल के नियम आपको पता है । जैसा कि लिखा हुआ है राष्ट्रपति का चुनाव कैसे होगा और कौन उन्हे च...
*'**हम रउआ सब के भावना समझतानी।**'*** * * * * ****भोजपुरी हिंदी भाषा की सशक्त पक्षधर बने, इस उम्मीद के साथ संविधान की 8वीं अनुसुची में भोजपुरी का स्वागत है***- **(**माननीय श्री पी.चिदांबरम**)*** * * * **...
*मेरा वो छोटा सा घर* मेरा वो छोटा सा घर, दो कमरों का नन्हा सा घर, कहने को तो छोटा था मेरा घर, लेकिन हम सब और बहुतेरे सारे, हँसते, गाते; समा जाते थे उसकी आगोश में. आज जब मेरे बंगले में एक म...
सुनो ! तुमसे बात करना कविता लिखने जैसा है ..बेहद नाजुक बातें होती है तुमसे ...बातें नाजुक हां ...इन गुलाबी होंठो से खुदा ना करे कोई और बातें हो ..तो मैं कह रहा था तुमसे बात करना .....तुम्हारी उंगलिया अनज...
आज फादर'स डे है ... मैं इस बहस में नहीं पड़ता कि यह रस्म देशी है या विदेशी ... मुझे यह पसंद है ! आज मैं खुद एक पिता हूँ और जानता हूँ एक पिता होना कैसा लगता है ... कितनी भावनाएं ... कितने अरमान जुड़े होते ह...
भले ही मैं इस तरह के ख़ास दिनों में कोई यकीन नहीं रखता, मेरे लिए पापा की बातें करने के लिए कोई एक दिन काफी नहीं हो सकता... लेकिन जब आस पास सब एक दूसरे को फादर्स डे की मुबारकबाद देते नज़र आते ह...
दिल्ली से करीब पौने तीन सौ और देहरादून से २५ किलोमीटर की लगातार चढ़ाई के बाद आती है *क्वीन ऑफ़ हिल्स ( पर्वतों की रानी ) मसूरी*. यहाँ पहली बार १९८४ में आना हुआ था शादी के बाद जिसे पहला हनीमून भी कह सकते ह...
गर्मियों के अंत और बारिश की शुरूआती दिनों में कंजंक्टिवाइटिस का प्रकोप होता है। आमतौर पर यह संक्रमण पीड़ित व्यक्ति से संपर्क में आने पर दूसरों तक फैलता है। व्यक्तिगत साफ सफाई एवं चुनिंदा सावधानियों के ज़...
कभी कभी .... सुबह की सतरंगी धुप भरी भोर.. दिखती है, एकदम अलग एक अलग मायने के साथ और जिंदगी में कुछ खुबसूरत पल खिल उठते हैं कलियों से फूलो में बदलते हुए.... जिंदगी पाती है एक नया खुबसूरत अर्थ बदलता हुआ आ...
posted by विनीत कुमार at हुंकार 22 साल का तरुण. तरुण सहरावत, तहलका का फोटो पत्रकार. हम सबके बीच से चला गया,हमेशा के लिए. हमारे आदि पत्रकार, हम सबके आदर्श भारतेन्दु हरिश्चन्द्र से भी बहुत पहले. सोचिए तो,पत्रकारिता के पेशे में 22 की उम्र क...
पर याद छोड़ जाएगे.... * *हम न रहेगें पर हमारी याद रह जायेगी, जो आपको तन्हाई में हंसाएगी रुलाएगी! वो बीती यादें आपका सहारा बन जायेगीं, आप भूलना चाहें पर फिर भी याद आयेगीं! याद आएगा हर लम्हा हमारे ...
कहीं तुम्हें बुझाने का हो रहा है प्रयास कहीं तेरी सलामती की होती है अरदास कहीं करे सृजन तू कहीं करे विनाश ए अग्नि, तू वैसे ही दिखे जैसे पहने लिबास
*प्यास की कैसे लाए ताब कोई* *नहीं दरिया तो हो सराब कोई* शाइरी के शौकीनों के लिए जावेद अख़्तर का नया गज़ल/नज़्म संग्रह ‘लावा’ बेशक एक दरिया ही है, सराब तो (मृगतृष्णा) कतई नहीं। एक मुद्दत बाद जावेद अख़्...
चित्र , गूगल इमेज खोज इंजन के परिणाम से , साभार * * * * *ये न पूछ मुझसे कि ये आज मुझे हुआ क्या है ,* *जो ज़िंदगी ही मर्ज़ है तो बता इसकी दवा क्या है* *पत्थर के इस शहर में जाने हर ईंट क्यूं पराई है* *धधक र...
posted by Puja Upadhyay at लहरें ईश्क हमेशा बचा के रखता है अपना आखिरी दांव --- लो, लहरों ने अपने पाँव समेट लिए! अब किनारे की रेत में लिख सकते हो तुम अपनी प्रेमिका के लिए असंख्य कविताएं --- आखिरी सांस में ही खुलता है रहस्य कि किससे किया था...
"बदलते वक्त के सांथ बहुत कुछ बदल जाता है कोई बहुत आगे निकल जाता है तो कोई बहुत पीछे रह जाता है किन्तु वक्त अपने सांथ न तो किसी को आगे ले जाता है और न ही किसी को पीछे छोड़ता है ... वो तो कुछ इंसानों के मजबू...
यह बात तो हर कोई जानता है कि माँस कैसे प्राप्त किया जाता है. जीवन हर जीव को उतना ही प्रिय है, जितना कि हम सब को. अपनी खुशी से कोई पशु मरना नहीं चाहता. अत: उसे मारने से पूर्व अनेक क्रूर और अमानुषिक यातनाएं ...
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अब आज्ञा दीजिये ...
जय हिंद !!