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मंगलवार, 4 सितंबर 2018

प्रेम-संगीत मिल के सजाएँ प्रिये - ब्लॉग बुलेटिन


नमस्कार साथियो,
कल हम सबने श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया. सभी को पुनः शुभकामनायें.

श्रीकृष्ण के साथ राधा और मीरा के नाम सहज रूप से जुड़ जाते हैं. श्रीकृष्ण, उनके कार्यों, उनकी दार्शनिकता, उनके विचार, उनकी सांसारिकता आदि पर फिर कभी, किसी और बुलेटिन में. आज आपको स्व-रचित एक कविता पढ़वाते हैं. उसका आनंद लेते हुए आज की बुलेटिन का मजा लीजिये.


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प्रेम-संगीत मिल के सजाएँ प्रिये,
अधरों की बांसुरी अधरों पर धरो.
मन-मुदित श्याम-रंग में रँग जायेगा,
राधा सी, मीरा सी बस दीवानी बनो.

बनकर आओ गुलाबी भोर महकती,
या ठहर जाओ बनकर शाम बहकती,
मेरे दिन-रात तुमसे ही रोशन रहें,
आँचल तारों का ले चाँदनी सी सजो.

गीत मेरे मगर कोई स्वर ही नहीं,
न ही संगीत है कोई लय भी नहीं,
शांत झील में हलचल मचाने को अब,
मेरे जीवन में तुम इक लहर सी बहो.

दूर सागर से मिलना है तुमको अगर,
तोड़ अवरोध सारे बनाओ डगर,
रात अंधियारी काली भी कट जाएगी,
जुगनुओं की तरह तुम जगमग जलो.

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सोमवार, 3 सितंबर 2018

श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक बधाई - ब्लॉग बुलेटिन

सभी हिंदी ब्लॉगर्स को नमस्कार।
आप सभी को श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं। सादर ... अभिनन्दन।।  

~ आज की बुलेटिन कड़ियाँ ~













आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि।

मंगलवार, 15 अगस्त 2017

71वां स्वतंत्रता दिवस और श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक बधाई - ब्लॉग बुलेटिन

सभी ब्लॉगर मित्रों को मेरा सादर नमस्कार।

तिरंगा के लिए चित्र परिणाम

श्री कृष्ण जन्माष्टमी के लिए चित्र परिणाम

आज भारत के 71वें स्वतंत्रता दिवस और स्वतंत्रता की 70वीं वर्षगांठ तथा श्री कृष्ण जन्माष्टमी की सभी भारतवासियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ। जय हिन्द। जय भारत। 


~ आज की बुलेटिन कड़ियाँ ~
















आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। जय हिन्द। जय भारत।।

बुधवार, 28 अगस्त 2013

कृष्ण जन्म सबकी अंतरात्मा में हो



जब जब धर्म का नाश होता है 
मैं अवतार लेता हूँ  …… 
तो फिर आज मैं कहाँ हूँ ?
किस में हूँ ? 
क्या अपनी गिरेबान में तुम मुझे नहीं ढूंढ पाते ?
क्या तुम सब कथन में आस्तिक 
और करने में नास्तिक हो गए हो ?
क्या उत्तरदायित्व सिर्फ भगवान् का है ???
वो भी इसलिए कि तुम मेरे मंदिर में मुझे भोग लगाते हो 
!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!
उठा लो अपने चढ़ाये भोग 
सम्भव हो तो जाओ वहां - जहाँ भूखों की भीड़ है 
जाओ वहाँ - जहाँ कंस हैवानियत पर उतर आया है 
मौसम का ख्याल मत करो 
उठो - जागो 
फिर जानो - मैं अवतार हूँ 
तुम्हारे ही ह्रदय में 
तुम्हारी ही चाह में  …। 

कृष्ण जन्म सबकी अंतरात्मा में हो - यही कामना है रसखान की कामना के साथ =

"मानुस हौं तो वही रसखान, बसौं मिलि गोकुल गाँव के ग्वारन।
जो पसु हौं तो कहा बस मेरो, चरौं नित नंद की धेनु मँझारन॥
पाहन हौं तो वही गिरि को, जो धर्यो कर छत्र पुरंदर कारन।
जो खग हौं तो बसेरो करौं मिलि कालिंदीकूल कदम्ब की डारन॥

या लकुटी अरु कामरिया पर, राज तिहूँ पुर को तजि डारौं।
आठहुँ सिद्धि, नवों निधि को सुख, नंद की धेनु चराय बिसारौं॥
रसखान कबौं इन आँखिन सों, ब्रज के बन बाग तड़ाग निहारौं।
कोटिक हू कलधौत के धाम, करील के कुंजन ऊपर वारौं॥

सेस गनेस महेस दिनेस, सुरेसहु जाहि निरंतर गावै।
जाहि अनादि अनंत अखण्ड, अछेद अभेद सुबेद बतावैं॥
नारद से सुक व्यास रहे, पचिहारे तू पुनि पार न पावैं।
ताहि अहीर की छोहरियाँ, छछिया भरि छाछ पै नाच नचावैं॥

धुरि भरे अति सोहत स्याम जू, तैसी बनी सिर सुंदर चोटी।
खेलत खात फिरैं अँगना, पग पैंजनी बाजति, पीरी कछोटी॥
वा छबि को रसखान बिलोकत, वारत काम कला निधि कोटी।
काग के भाग बड़े सजनी, हरि हाथ सों लै गयो माखन रोटी॥"



पूरी ब्लॉग बुलेटिन टीम की ओर से आप सभी को श्री कृष्णजन्माष्टमी की हार्दिक बधाइयाँ एवं शुभकामनाएँ !

लेखागार