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सोमवार, 17 सितंबर 2018

विश्वकर्मा जयंती और ब्लॉग बुलेटिन

सभी हिंदी ब्लॉगर्स को नमस्कार।
भगवान विश्वकर्मा
विश्वकर्मा जयन्ती सनातन परंपरा में पूरी धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाई जाती है। इस दिन औद्योगिक क्षेत्रों, फैक्ट्रियों, लोहे, मशीनों तथा औज़ारों से सम्बंधित कार्य करने वाले, वाहन शोरूम आदि में विश्वकर्मा की पूजा होती है। इस अवसर पर मशीनों और औज़ारों की साफ-सफाई आदि की जाती है और उन पर रंग किया जाता है। विश्वकर्मा जयन्ती के अवसर पर ज़्यादातर कल-कारखाने बंद रहते हैं और लोग हर्षोल्लास के साथ भगवान विश्वकर्मा की पूजा करते है। विश्वकर्मा हिन्दू मान्यताओं और धार्मिक ग्रंथों के अनुसार देवताओं के शिल्पी के रूप में जाने जाते हैं।


आप सभी को विश्वकर्मा जयंती की बहुत बहुत बधाई और हार्दिक शुभकामनाएं। सादर।।

~ आज की बुलेटिन कड़ियाँ ~ 














आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर ... अभिनन्दन।।

शुक्रवार, 20 अक्टूबर 2017

गोवर्धन पूजा की हार्दिक शुभकामनाएँ - ब्लॉग बुलेटिन

सभी हिन्दी ब्लॉगर्स को मेरा सादर नमस्कार।
गोवर्धन पूजा अथवा अन्न कूट (अंग्रेज़ी: Govardhan Puja OR Annakut) हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है। दीपावली के दूसरे दिन सायंकाल ब्रज में गोवर्धन पूजा का विशेष आयोजन होता है। भगवान श्रीकृष्ण ने आज ही के दिन इन्द्र का मानमर्दन कर गिरिराज पूजन किया था। इस दिन मन्दिरों में अन्नकूट किया जाता है। सायंकाल गोबर के गोवर्धन बनाकर पूजा की जाती है।

धार्मिक मान्यता

वेदों में इस दिन वरुण, इन्द्र, अग्नि आदि देवताओं की पूजा का विधान है। इसी दिन बलि पूजा, गोवर्धन पूजा, मार्गपाली आदि होते हैं। इस दिन गाय-बैल आदि पशुओं को स्नान कराकर, फूल माला, धूप, चंदन आदि से उनका पूजन किया जाता है। गायों को मिठाई खिलाकर उनकी आरती उतारी जाती है। यह ब्रजवासियों का मुख्य त्योहार है। अन्नकूट या गोवर्धन पूजा भगवान कृष्ण के अवतार के बाद द्वापर युग से प्रारम्भ हुई। उस समय लोग इन्द्र भगवान की पूजा करते थे तथा छप्पन प्रकार के भोजन बनाकर तरह-तरह के पकवान व मिठाइयों का भोग लगाया जाता था। ये पकवान तथा मिठाइयां इतनी मात्रा में होती थीं कि उनका पूरा पहाड़ ही बन जाता था।

अन्न कूट

अन्न कूट एक प्रकार से सामूहिक भोज का आयोजन है जिसमें पूरा परिवार और वंश एक जगह बनाई गई रसोई से भोजन करता है। इस दिन चावल, बाजरा, कढ़ी, साबुत मूंग, चौड़ा तथा सभी सब्जियां एक जगह मिलाकर बनाई जाती हैं। मंदिरों में भी अन्नकूट बनाकर प्रसाद के रूप में बांटा जाता है।


सभी देशवासियों को गोवर्धन पूजा अथवा अन्न कूट की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ। सादर ... अभिनन्दन।।


~ आज की बुलेटिन कड़ियाँ ~













आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर ... अभिनन्दन।। 

बुधवार, 18 अक्टूबर 2017

दीवा जलाना कब मना है ? - ब्लॉग बुलेटिन

सभी हिन्दी ब्लॉगर्स को मेरा सादर नमस्कार।

दीवा जलाना कब मना है ?

है अँधेरी रात पर ,
दीवा जलाना कब मना है ?
क्या हवाएँ थीं की उजड़ा 
प्यार का वह आशियाना 
कुछ न आया काम तेरा
शोर करना , गुल मचाना ,
नाश की उन शक्तियों के
साथ चलता ज़ोर किसका ,
किंतु ऐ निर्माण के प्रतिनिधि ,
तुझे होगा बताना जो बसे हैं 
वे उजड़ते हैं प्रकृति के जड़ नियम से ,
पर किसी उजड़े हुए को 
फ़िर बसाना कब मना है ?
है अँधेरी रात पर 
दीवा जलाना कब मना है ?

                                   - डॉ . हरिवंश राय 'बच्चन'


सभी देशवासियों को दीपोत्सव के पावन पर्व 'दीपावली' की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ। सादर ... अभिनन्दन।।  


~ आज की बुलेटिन कड़ियाँ ~













आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभ संध्या। सादर ...अभिनन्दन।। 

शुक्रवार, 27 दिसंबर 2013

मिर्ज़ा गालिब की २१६ वीं जयंती पर विशेष ब्लॉग बुलेटिन

सभी चिठ्ठाकार मित्रों को सादर नमस्कार।।

चित्र साभार : bhavtarangini.blogspot.com
1850 की दिल्ली में धूल और धुएं का गुब्बार नहीं था। यहां था तो बहादुरशाह जफ़र के रूप में मुगलिया सल्तनत का एक ऐसा वारिस, जिसकी नज़र में पस्तहाल मुगलिया सल्तनत को समझने की संवेदना और संस्कृति से जुड़ी रहने वाली दृष्टि थी। यूं तो हिन्दुस्तान की वास्तविक शासक ईस्ट इंडिया कंपनी थी, लेकिन कई बार इस शासन के लिए वह भी मुगलिया सल्तनत के नाम का सहारा लेती थी। बहरहाल यह अंतिम बादशाह लालकिले की चारदीवारी के भीतर अपने दरबार-ए-खास सजाता था। उसके दरबार में 'जौक' नामक मशहूर उर्दू मसनवीकार भी रहते थे। उनसे मिलने इसी वर्ष आगरे से एक व्यक्ति पहुंचा। लालकिले में पहुंचते ही उस व्यक्ति ने जो शेर पढ़ा, उसे सुनकर उस्ताद 'जौक' परेशान हो गये और बहादुरशाह जफ़र हैरान रह गए। वह शेर था -


'हैं और भी दुनिया में सुखनवर बहुत अच्छे, कहते हैं ग़ालिब का है अंदाज़-ए-बयां और।'


 आज मिर्ज़ा गालिब की २१६ वीं जयंती पर पूरा हिंदी ब्लॉगजगत और हमारी ब्लॉग बुलेटिन टीम उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करती है। सादर।।


अब चलते हैं आज कि बुलेटिन की ओर ....















कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि।। 

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