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रविवार, 16 अक्टूबर 2016

पहचान तो थी - पहचाना नहीं: सन्डे की ब्लॉग-बुलेटिन

महाभारत के जुद्ध में जब पूरा का पूरा खानदान खतम हो गया त बहुत सा लोग उसका इलजाम किसन भगवान पर डाल दिया. एहाँ तक कि माता गांधारी भी किसन भगवान को साप दे दीं अपना सब बच्चा के मौत का जिम्मेबार मानकर. मगर भगवान त भगवान ठहरे. धर्मवीर भारती के नाटक “अंधा युग” में किसन भगवान का जवाब तनी सुनिये.
प्रभु हूँ या परात्पर
पर पुत्र हूँ तुम्हारा, तुम माता हो!
मैंने अर्जुन से कहा -
सारे तुम्हारे कर्मों का पाप-पुण्य, योगक्षेम
मैं वहन करूँगा अपने कंधों पर
अठ्ठारह दिनों के इस भीषण संग्राम में
कोई नहीं केवल मैं ही मरा हूँ करोड़ों बार
जितनी बार जो भी सैनिक भूमिशायी हुआ
कोई नहीं था
वह मैं ही था
गिरता था घायल होकर जो रणभूमि में।
अश्वत्थामा के अंगों से
रक्त, पीप, स्वेद बन कर बहूँगा
मैं ही युग-युगान्तर तक
जीवन हूँ मैं
तो मृत्यु भी तो मैं ही हूँ माँ।
शाप यह तुम्हारा स्वीकार है।

माता गांधारी के अलावा बहुत सा लोग आज भी एही सोचता है कि भगवान क्रिस्न ई लड़ाई को रोक नहीं पाए अऊर ऊपर से अर्जुन को लड़ाई लड़ने के लिये उकसाते रहे. जैन धरम में त किसन भगवान को नरक में रख दिया गया है, काहे कि जऊन धरम का आधार अहिंसा है, ओहाँ एतना भीसन रक्तपात के लिये क्रिस्न भगवान को दोस देना अऊर नरक में जगह देना ऊ लोग के हिसाब से उचित भी है.

असल में बात दोसरा है. अर्जुन राजा का पुत्र था अऊर धनुस बिद्या में पारंगत था. मतलब उसका बेक्तित्व का बिकास एगो जोद्धा के तरह हुआ था. अब जो अदमी महान जोद्धा था, ऊ लड़ाई के मैदान में जाकर, सन्यासी के तरह बात करने लगे कि हम लड़ाई कैसे करेंगे, बंधु-बांधब को कैसे मारेंगे, बुजुर्ग अऊर गुरु लोग का बिरोध कैसे करेंगे. किसन भगवान उसको लड़ने अऊर मार-काट के लिये नहीं कहे थे, बस अर्जुन को खाली उसका धरम याद दिलाये थे.

आजकल टीवी में बहुत सा ऐसा प्रोग्राम आता है, जिसमें छोटा-छोटा बच्चा लोग हैरान कर देने वाला डांस करता है, गाना गाता है, ऐक्टिंग करता है. ई लोग के कला का अइसा परदर्सन देखकर कई बार त लगता है कि ई बच्चा लोग, बहुत सा बड़ा लोग का भी बाप है. डांस के सो में त बहुत सा गुरू लोग जो बच्चा सब का डांस कोरियोग्राफ़ करते हैं, पहिले बच्चा के तौर पर एही प्रोग्राम में अपना जादू देखा चुके हैं.

पूत का पाँव पालना में पहचानना हो चाहे होनहार बिरवान का चिकना पात चिन्ह लेना हो, असल में ई इंसान का स्वधर्म पहचान लेने जइसा है. हमारे लिये भी आज जरूरी है कि अपना बच्चा का असली टैलेण्ट अहचानें अऊर उसको सही रास्ता देखाएँ. जरूरत है कि उनको अर्जुन रहने दें अऊर हम किसन भगवान बने रहें. अगर सचिन बोर्ड का परीच्छा का तैयारी कर रहा होता, तआज भारत-रत्न कइसे बनता.

असल में हमलोग का समाज अभी तक गीता के उपदेस को अपनाने के जोग्य नहीं हुआ है. आज भी हमारे माथा में ओही लकीर बइठा हुआ है अऊर हमलोग लकीर के फकीर बने हुये हैं. हमलोग जदि एही टैलेण्ट सही समय पर पहचान लेते त केतना टैलेण्ट बरबाद नहीं होता अऊर हम आज अभिनय कर रहे होते अऊर हमरा बेटा ऐक्टिंग, चाहे निर्देसन, चाहे आर्ट का पढाई कर रहा होता, न कि एलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग का पढाई.

                                       - सलिल वर्मा 

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वक्त ने कहा- मेरे पास घड़ी नहीं है!

देवेन्द्र पाण्डेय at बेचैन आत्मा

फिर वही कथा कहो

राजीव कुमार झा at देहात 

अनुवाद

M. Rangraj Iyengar at Laxmirangam 

और मैं चुप !

प्रतिभा सक्सेना at लालित्यम्
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लेखागार