Subscribe:

Ads 468x60px

कुल पेज दृश्य

दिवाली लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
दिवाली लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

रविवार, 30 अक्टूबर 2016

ब्लॉग बुलेटिन का दिवाली विशेषांक

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |

आज दिवाली है ... ब्लॉग बुलेटिन टीम और मेरी ओर से आप सभी पाठकों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं |

एक दिया ऐसा भी हो , जो
भीतर तलक प्रकाश करे ,
एक दिया मुर्दा जीवन में ,
फिर आकर कुछ श्वास भरे |
एक दिया सादा हो इतना ,
जैसे साधु का जीवन ,
एक दिया इतना सुन्दर हो ,
जैसे देवों का उपवन |
एक दिया जो भेद मिटाए ,
क्या तेरा क्या मेरा है ,
एक दिया जो याद दिलाये ,
हर रात के बाद सवेरा है |
एक दिया उनकी खातिर हो ,
जिनके घर में दिया नहीं ,
एक दिया उन बेचारों का ,
जिनको घर ही दिया नहीं |
एक दिया सीमा के रक्षक ,
अपने वीर जवानों का ,
एक दिया मानवता-रक्षक ,
चंद बचे इंसानों का |
एक दिया विश्वास दे उनको ,
जिनकी हिम्मत टूट गयी ,
एक दिया उस राह में भी हो ,
जो कल पीछे छूट गयी |
एक दिया जो अंधकार का ,
जड़ के साथ विनाश करे ,
एक दिया ऐसा भी हो , जो
भीतर तलक प्रकाश करे || 

सादर आपका

~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~

http://kamleshkumardiwan.blogspot.com/2016/10/2016.html

http://anvarat.blogspot.in/2016/10/blog-post.html

http://yehmerajahaan.blogspot.com/2016/10/blog-post.html

http://udayaveersingh.blogspot.com/2016/10/blog-post_57.html

http://amritatanmay.blogspot.com/2016/10/blog-post_30.html

http://chikotii.blogspot.com/2016/10/blog-post_30.html

http://rooparoop.blogspot.com/2016/10/blog-post_30.html

http://feedproxy.google.com/~r/udantashtari/~3/7H06hwhPmBE/blog-post_29.html

http://www.chalte-chalte.com/2016/10/blog-post_30.html

http://www.jakhira.com/2016/10/nai-hui-fir-rasm-purani.html?utm_source=feedburner&utm_medium=feed&utm_campaign=Feed%3A+Jakhira+%28Jakhira%29

डा. होमी जहांगीर भाभा की १०७ वीं जयंती
यहाँ दिये हर एक चित्र में एक ब्लॉग पोस्ट का लिंक छिपा है ... चित्र को क्लिक करते ही वो ब्लॉग पोस्ट खुलेगी ... पर यह जरूरी नहीं कि पोस्ट दिवाली पर ही लिखी गई हो |

~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
फौजी भाइयों के नाम एक संदेश 


बाहरी या आतंरिक शत्रु से देश की सुरक्षा के लिए तैनात हर एक सुरक्षा बल के जवानों और उनके परिवारों को मेरी और मेरे परिवार की ओर से दिवाली की बहुत बहुत हार्दिक शुभकामनाएं।

आप सब अपनी अपनी जिम्मेदारियों के प्रति वफ़ादार और मुस्तैद रहते हैं तभी हम सब नागरिक बेख़ौफ़ जी पाते है। आपके व आपके परिवार द्वारा राष्ट्र हित किए गए इन बलिदानों को मैं नमन करता हूँ।

#Sandesh2Soldiers
 

~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
अब आज्ञा दीजिये ...

जय हिंद।

जय हिंद की सेना।

रविवार, 3 नवंबर 2013

आई थोड़ी मीठी - थोड़ी खट्टी दिवाली - ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय ब्लॉगर मित्रों ,
प्रणाम |

ब्लॉग बुलेटिन की पूरी टीम की ओर से आप सब को दीपावली की बहुत बहुत हार्दिक मंगलकामनाएँ |
सादर आपका 
शिवम मिश्रा

=============================

89. आल्पना

जयदीप शेखर at कभी-कभार 

आरती करने की प्रक्रिया .....

निवेदिता श्रीवास्तव at झरोख़ा

दीपावली की शुभकामनाएँ

रजनीश तिवारी at रजनीश का ब्लॉग

महालक्ष्मी पूजा के निहितार्थ

उजाले की उजली शुभकामनाऐं-------

तूफानों के मध्य अँधेरे में रौशनी लाने का हौसला कलम की तकदीर है...।

कुबेर ऐडविड (कुबेर वैश्रवण) उत्तर के दिक्पाल

हिंदी वालों के लिए सर्वश्रेष्ठ स्मार्टफ़ोन

 =============================
 यह तो हो गए मीठे मीठे लिंक्स ... अब एक खट्टी खबर ...
आज सुबह एक रूहानी आवाज़ हमेशा के लिए खामोश हो गई ... और वो आवाज़ थी रेशमा जी की 
ब्लॉग बुलेटिन की पूरी टीम और पूरे हिन्दी ब्लॉग जगत की ओर से हम रेशमा जी को अपनी हार्दिक विनम्र श्रधांजलि देते है |
=============================
  
=============================
अब आज्ञा दीजिये ...
 
जय हिन्द !!!

मंगलवार, 13 नवंबर 2012

शुभ दीपावली और ब्लॉग बुलेटिन का पहला हैप्पी बर्थडे

हिंदी ब्लॉगजगत में पिछले सात वर्षों में आए सुखद संयोगों में , आज एक और अनमोल दिन जुड गया । क्छ भी कहने से पहले मैं आपको ये बता दूं कि आज देश , हम आप और सब जहां दीपोत्सव मना रहे हैं वहीं ब्लॉग बुलेटिन का ये पन्ना अपनी पहली वर्षगांठ मना रहा है । पिछले वर्ष आज ही के दिन , अचानक ब्लॉग बुलेटिन के सच्चे और सबसे प्रतिबद्ध रिपोर्टर भाई शिवम मिश्रा जी ने संवाद करते हुए ये सुझाव दिया कि , चूंकि , ये वो समय था जब न सिर्फ़ एग्रीगेटर बल्कि ब्लॉग पोस्टों की चर्चा , उन पोस्टों को सहेज कर एक  पन्ने पर सहेजने का कार्य कुछ कुछ मंद सा लगने लगा था । मैं खुद “ झा जी कहिन “ पर अपनी चिर परिचित दो लाइना , लगभग छोड चुका था । ऐसे में भाई शिवम मिश्रा और देव कुमार झा ने इस विचार का सूत्रपात किया । नाम रखने की जिम्मेदारी मुझे मिली और मुझे नाम सूझा “ ब्लॉग बुलेटिन “ ॥


आज एक साल के बाद हम सारे ब्लॉग रिपोर्टस को इस बात की बहुत खुशी और प्रसन्नता है कि इतने समय में सभी पाठक मित्रों ने इस पन्ने को न सिर्फ़ बहुत पसंद किया बल्कि आज ये सबका चहेता बन गया है । यदि शुरू से लेकर आज तक के सफ़र के बारे में कुछ खास खास बातें कहनी हों तो सबसे पहली बात ये कि शिवम मिश्रा जी इस सुपरफ़ास्ट रेलगाडी के चालक है , रश्मि प्रभा दीदी इसकी पथ पथप्रदर्शक गाइड , हम सब यानि देव बाबा , मैं , सलिल भाई , मनोज जी ,  पेंट्री , मेंटेनेंस विभाग , आदि संभालने वाले , पाबला जी बुलेटिन के तकनीक विशेषज्ञ , और इनके अलावा कभी मेहमान रिपोर्टर के रूप में कभी अतिथि रिपोर्टर के रूप में सहयोग और प्रस्तुति करने वाले तमाम साथी ब्लॉगर्स का योगदान , साथ , स्नेह और विश्वास हमारे लिए किसी उपहार से कम नहीं रहा । भाई शिवम मिश्रा जी की प्रतिबद्धता और नए प्रयोग तथा रश्मि दीदी की पारखी नज़र से मास्टर स्ट्रोक वाली , ब्लॉग विश्लेषण सहित तमान अदभुत प्रयोगों ने बुलेटिन को एक विशिष्टता प्रदान की ।


ऐसा नहीं है कि सब कुछ अच्छा अच्छा ही रहा । बीच में कुछ साथी नाराज़ होकर तो कुछ किसी विशेष मकसद से , कभी टिप्पणी के द्वारा तो कभी कहीं कटाक्ष के द्वारा , इस पन्ने को अव्यवस्थित करने और हमारा ध्यान भटकाने का भी प्रयास किया किंतु इस बार हम तय कर चुके थे  ऐसी किसी भी कोशिश और किसी की भी कोशिश को पूरी तरह दरकिनार करते हुए , हम सिर्फ़ अपना काम करेंगे । हमने ऐसा ही किया , खैर ये खट्टे मीठे अनुभव तो यहां होना लाज़िमी है और इस अंतर्जालीय परिवार का अनिवार्य अंग भी । आप सबको दीपावली की बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएं ।


अब चलते चलते हम आपको ये आश्वासन देते हैं कि हमारी ये कोशिश और हमारा ये सफ़र यूं ही जारी रहेगा ,इसका भरसक प्रयास हम करते रहेंगे । चलिए अब आपको कुछ चुनिंदा पोस्टों की झलकियां दिखाते हैं , …………..




अब दीवाली . . . .
अब नहीं बनाती मां मिठाई दीवाली पर
हम सब भाई बहन खूब रगड़ रगड़ कर पूरा घर आंगन नहीं चमकाते
अब बड़े भाई दिन रात लग कर नहीं बनाते
बांस की खपचियों और पन्नीदार कागजों से रंग बिरंगा कंदील
और हम भाग भाग कर घर के हर कोने अंतरे में
पानी में अच्छी तरह से भिगो कर रखे गए दीप नहीं जलाते
पूरा घर नहीं सजाते अपने अपने तरीके से।

दिवाली तब दिवाली हो
-- करण समस्तीपुरी
सबा हर ओर से आए, दिवाली तब दिवाली हो।
दिया हर घर में जल जाए, दिवाली तब दिवाली हो॥
जले आहुतियाँ पहले सभी कलुषित विचारों की।
अँधेरा मन का मिट जाए, दिवाली तब दिवाली हो॥
विदेशी क़ैद में विष्णु-प्रिया बैठी सिसकती हैं।
वो अपने घर चली आए, दिवाली तब दिवाली हो॥




 


माँ और दीपावली
माँ के लिए
दिवाली आ जाता है
हफ्ता भर पहले ही
घर के कोने कोने तक
पहुच जाती है माँ
जहाँ होती है
चूहों  का  बसेरा
सीलन
अँधेरा
माँ दिवाली कर आती है
घर के अँधेरे कोनो में


किसकी दीपावली?
दीपावली बाजार का, बाजार के लिए और बाजार के द्वारा त्यौहार बनती जा रही है

उदारीकरण और भूमंडलीकरण के इस दौर में बाजार की पकड़ से बच पाना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन सा हो गया है. पर्व-त्यौहार भी इसके अपवाद नहीं हैं. हालाँकि किसी भी समाज में पर्व-त्यौहार उसकी संस्कृति, उत्सवधर्मिता और सामाजिकता की पहचान होते हैं, वे लोगों की सामूहिकता, आपसी मेलजोल और खुशी बांटने के मौके होते हैं.
लेकिन ठीक इन्हीं कारणों से वे बाजार को भी लुभाते हैं. बाजार को इसमें खुशियों की मार्केटिंग और खरीदने-बेचने का मौका दिखाई देता है. खासकर एक ऐसे दौर में जब वास्तविक खुशी दुर्लभ होती जा रही है, बाजार उपभोक्ता वस्तुओं को उत्सव और खुशियों का पर्याय बनाके बेचने के मौके की तरह इस्तेमाल करता है

शुभ दीपावली


जीवन की व्यस्तताओं, परेशानियों और दुखों के बावजूद पर्व अपना आगमन नहीं रोकते क्योंकि हर पर्व का उद्देश्य एक ही होता है सदा जन हित। हर घर में, हर इंसान में खुशियाँ भरने की कोशिश करते हैं पर्व। सुख-दुःख ,जीवन-म्रत्यु सभी निश्चित है, मालूम भी है सभी को फिर भी हम भूल जाते हैं और यदि हम दुखी होते हैं तो सारे संसार को उसी नज़र से देखते हैं ,पर्व ऐसे हर पलों को हर किसी के जीवन से निकालने में मदद करते हैं। त्यौहार कभी अमीरी-गरीबी का भेद नहीं करते बल्कि दोनों को उनकी सामर्थ्य अनुसार भरपूर जीने का सन्देश देते हैं। त्यौहार कोई भी क्यूँ न हो सदा सभी लोग मुंह मीठा ही करते हैं कभी भी तीखा नहीं, फिर चाहे वो पिस्ता लौंज से किया जाये या गुड की ढली से फर्क नहीं पड़ता क्योंकि मुंह में जो घुलती है वो ‘ मिठास ‘ ही होती है। सभी व्यस्त हैं अतः पर्व आते ही घरों की साफ़-सफाई भी शुरू हो जाती है।


हर आँगन में दीप
चकाचौंध गर ना हुआ, किसको है परवाह।
दीपक इक घर घर जले, यही सुमन की चाह।।
रात अमावस की भले, सुमन तिमिर हो दूर।
दीप जले इक देहरी, अन्धेरा मजबूर।।
हाथ पटाखे हैं लिए, सुमन खुशी यह देख।
कुछ बच्चे बस देखते, यही भाग्य का लेख।।


ज्योति पर्व की हार्दिक मंगल कामनाएँ

अहो भाव का स्वप्निल नवल विहान आपके आंगन में
मन वीणा पर गुम्फित मधुरिम  तान आपके अंगन मेंअनुरंजित कर मानस अपना नव संचार संवारने दें
नृत्य चले आनंद भाव का नूपुर टूट बिखरने दें
परम शान्ति सद्भाव प्रेम का गान आपके आँगन में
मन वीणा पर गुम्फित मधुरिम  तान आपके अंगन में
मदिर फुहार झरे चंदनियां मरु अंतस को धो जाए
नर्तन हो इश्वर मय हो कर अपना पन ही खो जाए
शाश्वत अविरल विपुल कान्ति मुस्कान आपके आंगन में
मन वीणा पर गुम्फित मधुरिम  तान आपके अंगन में


 

((((.....दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं.....))))
इस दि‍ए की रौशनी सा रौशन आपकी जिंदगी का हर कोना हो


एक ख्याल और सभी ब्लोगर मित्रों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाये !
सर्वप्रथम दीपावली की पूर्व संध्या  पर सभी ब्लोगर मित्रों और पाठक मित्रो को हार्दिक शुभकामनाये और आपके समस्त पारिवारिक जनो को भी मंगलमय कामनाएं इस पावन पर्व की !
आज सुबह जब यह समाचार कहीं  पर पढ़ रहा था कि सीएजी  को भी चुनाव आयोग की तर्ज पर तोड़ने की कोशिश हो रही है तो अचानक यह ख्याल मेरे मन में आया कि  क्यों न  इस देश में प्रधानमंत्री के चार पद होने चाहिए

दीवाली : हमारी परंपरा है

सोमवार, 12 नवम्बर 2012
लो आ गई दीपावली, माफ़ कीजिएगा ..... "दीवाली" . दीपावली तो दीपो का त्यौहार होता है, परंतु यह तो दीवालिया होने का त्यौहार है। रुपयो मे आग लगाने का और खर्चे करने का। हमे बचपन से हि बताया गया है कि दीवाली पर घर मे लक्ष्मी का प्रवेश होता है, तो लो भईया माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिये खूब रुपय बहाए, पानी बरबाद किया, दीवारो का मेकअप भी करवा दिया किन्तु जब से होश संभाला है माता लक्ष्मी आती हुई कम और जाती हुई ज्यादा दिखाई दि है। इस चक्कर मे हम तो हो गये दीवालिया और हो गई हमारी दीवाली।

परन्तु कुछ लोग अभी भी इसी भ्रमजाल मे फ़से हुए है। 10-10 के रुपयो की गड्डी अलमारी मे रखने के लिये ले आये है। हाँ जी रख लो रुपयो की गड्डी कृपा आ ही जायेगी। शायद बाबा ने रखना भूल गये थे इसलिये आज उनका यह हाल है। चटनी , समोसे , कचौडी खाने मे ऐसे व्यस्त हुए की बेचारे दसबंत निकालना हि भूल गये। खैर हम बाबा के बहुत बडे भक्त है, कोई उनके बारे मे कुछ कहे तो हम सुन लेगे लेकिन कुछ कहेंगे नही। बेचारे हमारे एक ही तो बाबा है जो लीग से हटकर कुछ अलग करना चाहते है, किन्तु हाय रे ये दुनिया जो अलग सोच वालो को कभी आगे बढने नही देती।
तुम ही कहो ........ ललित शर्मा
ब्लॉ.ललित शर्मा, मंगलवार, 13 नवम्बर 2012
तुम ही कहो
कैसे मनाऊँ दीवाली?
महंगी हुई है शक्कर
महंगा हुआ आटा दाल
बाजारों में आग लगी
निर्धन का कौन हवाल
तुम ही कहो .........
रंग रोगन से
लिपे पुते घर
लक्ष्मी आए आँगन में
धन हो जिसका रोज निवाला
बरसे उस ठग के आँगन में
सत्य हमेशा ठगा रहेगा?
यह है एक सवाल
तुम ही कहो ........

 


दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं
प्रकाश-पर्व दीपावली, जग, जीवन तिमिरारि।
माँ लक्ष्मी तेरे सामने, मागें हाथ पसारि।।
धन धान्य परि पूर्ण करे, होय सत्कर्म की जीत।
बैर-भाव का नाश हो, उमड़े जन जन प्रीत।।

लो आई दीवाली रे ….

अजय कुमार झा |

लो आई दीवाली रे
आलू प्याज और टमाटर,
खरीद खरीद कर,
जेब हुई है खाली रे,
ऊपर से बच्चे चिल्लाएं ,
लो आयी दीवाली रे,
.
शेयर मार्केट भी हुई बेवफा,
कौन समझे ये फलसफा,
कोई पीटे माथा अपना,
कोई बजाये ताली रे,
लो आयी दीवाली रे,
.

 


ज्योति का प्रथम तीर्थ दीप ...

ज्योति का प्रथम तीर्थ दीप
कालिमा  आती नहीं समीप
आइए उजियारे की लालिमा लाते हैं
मिलकर दीपावली मनाते हैं ......
शुभ दीपावली



सर्वे भवन्‍तु सखिन:

समस्‍त कृपालुओं को मुझ अकिंचन की ओर से हार्दिक अभिनन्‍दन, बधाइयॉं और शुभ-कामनाऍं।
मेरे बडे बेटे प्रिय चि. वल्‍कल ने मेरे लिए  इस बधाई पत्र  का आकल्‍पन किया है।


शुभ दीपावली !!
आप सभी को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं !!



Diwali-2012 - दीपावली-2012




मनाएँ एक शुभ और सुरक्षित दीपावली

दीपावली के अवसर पर बच्चें पटाखों को लेकर बहुत उत्साहित रहते हैं। लेकिन पटाखे जलाते समय विशेष सावधानी की जरूरत होती हैं नही तो खुशियों और उजाले के इस त्यौहार को अंधेरे में बदलने में देर नही लगती, आइये हम इन सब बातों को ध्यान रखकर एक सुरक्षित दीपावली मनाएं-
- पटाखों को हमेशा खुली जगह पर ही जलाएं।
- पटाखे हाथ में लेकर न जलाएं। इससे दुर्घटना का खतरा रहता है।
- बहुत से पटाखे और बम धीरे-धीरे आग पकड़ते हैं। इन्हें एक बार आग लगाने के बाद इनके पास दोबारा न जाएं।
- बच्चे जब पटाखे जलाएं तो उनके आसपास ही रहें। हमेशा अपनी देखरेख में ही बच्चों को पटाखे जलाने दें। साथ ही बच्चों को बड़ी साइज के पटाखे और अन्य सामग्री न जलाने दें।
- इस बात का ध्यान रखें कि बच्चे पटाखे जलाते समय शरारत न करें। मसलन जलती हुई फुलझड़ी को इधर-उधर घुमाना आदि।
- पटाखे और बम आदि को किसी डिब्बे में रखकर न जलाएं। इससे बड़ी दुर्घटना होने की संभावना रहती है।
- पटाखे जलाते समय कभी भी उनके ऊपर झुकें नहीं।
- पटाखों को हमेशा सुरक्षित स्थान पर रखें अर्थात ऐसी जगह पर रखें जहां छोटे बच्चों की पहुंच न हो।
- पटाखे जलाते समय कभी भी बहुत ढीले-ढाले कपड़े न पहनें। हमेशा चुस्त कपड़े ही पहनें।
- आतिशबाजी का मजा लेते समय सिंथेटिक कपड़े न पहनें, सूती कपड़े ही पहनें।
- बहुत तेज आवाज वाले पटाखे और बम का प्रयोग न करें। ये आपके सुनने की क्षमता कम कर सकते हैं।
बस इन चंद बातों का ख्याल रखें और मनाएँ एक शुभ और सुरक्षित दीपावली !

आप सभी को शुभ और सुरक्षित दीपावली की बहुत बहुत हार्दिक मंगलकामनाएँ  और बधाइयाँ !
इसी के साथ हम एक बार आप सबको फ़िर से दीपावली के पर्व की बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएं देते हैं , और ब्लॉग बुलेटिन के पहले जन्मदिन पर आपसे ये वादा करते हैं कि आपके स्नेह के साथ हम इस यात्रा को ज़ारी रखेंगे । शुभकामनाएं ……………..

लेखागार