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रविवार, 16 जुलाई 2017

१७५० वीं बुलेटिन - मेरी बकबक बेतरतीब: ब्लॉग बुलेटिन

इंसान का दिमाग खाली हो चाहे भरा हुआ, सैतान का घर होब्बे करता है. कुछ न कुछ सैतानी बिचार दिमाग में हमेसा चलते रहता है. एही कारण है कि हर आदमी को रहस्य बहुत पसंद आता है. अब रहस्य चाहे कोनो टाइप का काहे नहीं हो, जैसे ऑफिस में कऊन का कहता है, पड़ोस में का बात चल रहा है, किसका बेटा आजकल कोनो काम नहीं कर रहा है अऊर किसका बेटी आजकल फलाना से बहुत बतियाती है.
सिनेमा का पत्रिका में भी गॉसिप का ओही से बहुत महत्व होता है. फलाने ऐक्टर का आजकल का उसके साथ छुप छुपा कर रोमांस चालू है, उसका ब्रेक अप हो गया है, फलानी गर्भवती है, इहो बात सब गॉसिप कॉलम से पता चलता रहता है अऊर लोग को मजा भी आता है.

एही रहस्य के कारन टीवी का सीरियल एलास्टिक जइसा खींचाता चला जाता है. एगो एपिसोड के बाद लगता है कहानी आगे बढिए नहीं रहा है, लोग गरियाता है अऊर देखने का इंतज़ार भी करता है कि आखिर आगे का हुआ.

पिछला एक महीना से सोनी टीवी पर एगो नया सीरियल का प्रोमो चल रहा है. अब प्रोमो चाहे सिनेमा का हो चाहे सीरियल का एतना बढ़िया तरीका से बनाया जाता है कि देखने वाले का मन में तुरत उत्सुकता पैदा हो जाता है कि ई सिनेमा में चाहे सीरियल में का कहानी होगा. जइसे एगो सीरियल सुरू होने वाला है कल से सोनी टीवी पर – “पहरेदार पिया की”. हम सीरियल देखते नहीं हैं सिवा “क्राइम पैट्रोल” के – इहो सस्पेंस वाला सीरियल हो गया. लेकिन हर बार जब ब्रेक होता है तब एगो प्रोमो देखाता है ई आने वाला सीरियल का. एगो अठारह साल की औरत अऊर उसका पति एगो नौ साल का बच्चा. ऊ करवा चौथ का बरत भी ऊ लड़का का हाथ से पानी पीकर तोडती है, उसका हिफाजत के लिये हैंडबैग में पिस्तौल रखती है, बच्चा उसके माँग में सिन्दूर भरता है अऊर दुनो जोड़ी में फ़ोटो भी खिंचाते हैं.

अब ई प्रोमो देखकर अजीब सा सस्पेंस मन में आ गया. हमरी सिरीमती जी भी केतना बार पूछ चुकी हैं कि ए जी, ई तो गजब का खिस्सा लग रहा है, देखना पडेगा ई सीरियल. बस एही सफलता है चैनल का कि प्रोमो देखने के बाद लोग के मन में देखने का इच्छा पैदा होना. ई सीरियल में एगो डिस्क्लेमर भी देखाया जाता है कि ई सीरियल बाल विवाह को बढ़ावा नहीं देता है.

बाल विवाह का सबसे बड़ा नुकसान इतिहास में औरत लोग को उठाना पडता था. ई सीरियल के उलट छोटा-छोटा उमर में लड़की को बड़ा-बूढ़ा के साथ बियाह दिया जाता था और पति के मरने के बाद बेचारी बाल बिधवा को बहुत कस्ट का जिन्नगी गुजारना पडता था, इहाँ तक कि मरा हुआ पति के साथ सती भी हो जाना पडता था. लेकिन १८२६ में सती प्रथा का समाप्ति राजा राम मोहन राय के प्रयास से हुआ.

सती प्रथा त खतम हो गया, लेकिन बिधवा औरत के जीवन में कोई सुधार नहीं हुआ. तीस साल बाद बिधवा पुनर्विवाह क़ानून बना अऊर एक औरत को एक उपेक्छा का जिन्नगी से मुक्ति मिला. साल था १८५६ अऊर तारीख था १६ जुलाई, यानि आझे का दिन.

अऊर आज का दिन २०१७ में भी ब्लॉग बुलेटिन के लिये एगो महत्वपूर्ण दिन है काहे कि आज हम लिख रहे हैं १७५० वाँ पोस्ट. त मिलकर पूरा टीम को बधाई दीजिए अऊर सब पाठक जन को आभार कहते हुए आनन्द लीजिए सुन्दर-सुन्दर, प्यारा-प्यारा पोस्ट सब का. 

                                                                                                                       सलिल वर्मा 
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