Subscribe:

Ads 468x60px

कुल पेज दृश्य

गुरुवार, 5 दिसंबर 2019

2019 का वार्षिक अवलोकन  (पांचवां)



आँचल पांडेय और उनका ब्लॉग




 

कोई यदि पूछे कि मृत्यु क्या है तो हम  कहेंगे जीवन का अंत है मृत्यु। जीवन सुंदर है तो मृत्यु भयंकर है,जीवन दयालु है तो मृत्यु क्रूर है। पर क्या वास्तव में जीवन जैसी सुंदर रचना के रचनाकार ऐसी  मन को व्यथित करने वाली रचना रच सकते हैं या ये केवल हमारा भ्रम है। चलिए आज दृष्टिकोण बदल कर देखते हैं कि सत्य में मृत्यु किसी कथा का अंत है या नव गाथा का आरंभ,क्रूर है या इतनी नम्र कि हमारे संघर्षों से द्रवित हो मुक्ति दे दे।
हम जानेंगे कि मृत्यु वो मोहिनी है जिसके आगे कोई योगी या निर्मोही भी मन हार जाए । वो सखी है जो हमारे दु:ख-सुख हर कर मात्र सुकून दे। वो माता है जिसकी गोद में आँख बंद करो तो समस्त चिंताओं  और थकान का अंत हो जाता है और जब आँख खुले तो एक नया जीवन स्वागत को खड़ा होता है।
अर्थात अगर हमारा तन दीपक है तो आत्मा दीपशिखा और मृत्यु वो सूत्रधार जो हमे एक अध्याय से दूसरे की ओर ले जाती है।
तात्पर्य यह है कि भेद ईश्वर की रचना में नहीं  हमारी दृष्टिकोण में है।और जो इसे जान लेता है फिर उसे मृत्यु का भय कैसा?
बस इसी दृष्टिकोण के साथ आज  मृत्यु के सुंदर स्वरूप के वर्णन का कुछ इस प्रकार प्रयास किया है -


हे कालसुता हे मुक्ति माता
हे परम सुंदरी हे सत रुपा
अमर अटल अजया हो तुम
तुम परम शांति धवल जया हो
है अंत नहीं  पर्याय तुम्हारा
तुम नव अध्याय की द्योतक हो
हे दीपशिखा की सूत्रधार
मृत्यु तुम स्वयं अप्सरा हो

हे विश्वमोहिनी हे जीव प्रिया
हे पतित पावनी हे सदया
तुम मोही-निर्मोही सब को मोह कर
माया पाश से मुक्ति देती हो
चित-परिचित का बंध छुड़ा
उस चित् से चित् को मिलाती हो
हे दीपशिखा की सूत्रधार
मृत्यु तुम स्वयं अप्सरा हो

हे चित् धरणी हे मंगल,करुणा
हे परम हठी हे श्वेत प्रभा
दु:ख,सुख,चिंता की चिता जलाकर
परमानंद का दान दे देती हो
यह जीवन यदि संघर्ष है तो
मृत्युलोक की स्वामिनी तुम संधि अवतार ले आती हो
हे दीपशिखा की सूत्रधार
मृत्यु तुम स्वयं अप्सरा हो


5 टिप्पणियाँ:

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

बुलेटिन के न दिखने पर कुछ ''ग्वाचा'' सा लगता है

Sweta sinha ने कहा…

वाह प्रिय आँचल की रचना...बहुत सुंदर।
आँचल का चिंतन और लेखन जीवन के प्रति नवीन दृष्टिकोण प्रदान करता है।
बेहद सराहनीय अवलोकन सादर आभार।

रेणु ने कहा…

बहुत खूब प्रिय आँचल। मृत्यु को यदि सब लोग इस दृष्टि से देखने लग जाये, तो जीवन कितना सरल हो जाए। छोटी उम्र और अध्यात्मिकता के प्रति ये रुझान चिंतन की उत्कृष्टता का परिचायक हॉ। इस विशिष्ट मंच पर आज तुम्हारी इस सार्थक रचना को अवलोकन के तहत देखकर अपार खुशी हो रही है। यूँ ही लिखती रहो और आजे बढती रहो । हार्दिक शुभकामनायें और प्यार 🌹🌹🌹🥞🌹🌹🥞🌹🌹🥞🌹🌹৷🥞💐💐

रेणु ने कहा…

शुक्रिया ब्लॉग बुलेटिन, एक उदीयमान युवा रचनाकार की रचना को मंच पर सजाने के लिए 🙏🙏🙏🙏

विश्वमोहन ने कहा…

वाह! सघन आध्यात्मिक अभिव्यक्ति। सुंदर दार्शनिक चित्रण। बधाई और आभार।

टिप्पणी पोस्ट करें

बुलेटिन में हम ब्लॉग जगत की तमाम गतिविधियों ,लिखा पढी , कहा सुनी , कही अनकही , बहस -विमर्श , सब लेकर आए हैं , ये एक सूत्र भर है उन पोस्टों तक आपको पहुंचाने का जो बुलेटिन लगाने वाले की नज़र में आए , यदि ये आपको कमाल की पोस्टों तक ले जाता है तो हमारा श्रम सफ़ल हुआ । आने का शुक्रिया ... एक और बात आजकल गूगल पर कुछ समस्या के चलते आप की टिप्पणीयां कभी कभी तुरंत न छप कर स्पैम मे जा रही है ... तो चिंतित न हो थोड़ी देर से सही पर आप की टिप्पणी छपेगी जरूर!

लेखागार