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गुरुवार, 21 दिसंबर 2017

चापलूसी की जबरदस्त प्रतिभा : ब्लॉग बुलेटिन

नमस्कार साथियो,
आज कुछ हल्का-फुल्का सा. इधर कुछ दिनों से महसूस हो रहा था कि कुछ लोगों में चापलूसी की जबरदस्त प्रतिभा होती है. बस अवसर मिलते ही उसे बाहर निकालने की देर होती है. इस एक कहानी से आप सब समझ लेंगे. हाँ, इसका सन्दर्भ किसी राजनीति से न लगाने लगिएगा. बस पढ़िए और हँसिये.
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एक थे राजा साहब. आये दिन अपनी छर्रे वाली बन्दूक लेकर निकल पड़ते शाम को, अपने अनगिनत चापलूसों के साथ. उड़ती हुई चिड़ियों के झुण्ड पर फायर झोंकते. आसमान में फैलते छर्रे किसी न किसी चिड़िया को घायल कर जमीन पर गिरा देते.
चापलूस चिल्लाते-
वाह-वाह!!! क्या निशाना लगाया है मालिक... क्या निशाना है मालिक.
+
एक दिन गड़बड़ हो गई, पता नहीं चिड़ियों से हुई या फिर छर्रों से हुई या फिर उस राजा से. उड़ती चिड़ियों के झुण्ड पर फायर झोंका. कोई भी चिड़िया घायल न हुई.
दोबारा दूसरे झुण्ड पर फायर झोंका, फिर वही परिणाम.
कई-कई बार, कई-कई झुंडों पर छर्रे झोंके मगर एक भी चिड़िया घायल होकर जमीन पर न गिरी.
अब... अब क्या, चापलूस परेशान.. सशंकित कि मालिक की तारीफ कैसे करें?
तभी उन चापलूसों की भीड़ में से उच्च कोटि का चापलूस बाहर निकला और अपने मालिक के सामने आकर बड़े गर्व से बोला-
वाह साहब जी!!! क्या बचा-बचा के मारा है, सभी झुंडों में. एक चिड़िया को भी घायल न होने दिया.
राजा प्रसन्न हुआ और ख़ुशी-ख़ुशी अन्य मुदित चापलूसों संग घर लौट पड़ा.
++ 


उस राजा को झूठे ही प्रसन्न होने दीजिये. आप प्रसन्न होइए आज की वास्तविक बुलेटिन के साथ.

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सोमवार, 5 अगस्त 2013

कब कहलायेगा देश महान ?

प्रिये मित्रों 
सादर नमस्कार

आज अपने मन में उठ रहे कुछ प्रश्नों को आपके सामने प्रस्तुत करना चाह रहा हूँ । जवाब की उम्मीद करता हूँ पर जवाब ऐसे हों जो क्रियात्मक और व्यवहारिक हों । सवाल बहुत ही बड़े हैं और स्पष्ट हैं तो जवाब भी उन्ही ही तरह होने लाज़मी हैं । उम्मीद करता हूँ शायद कहीं से कोई प्रयोगात्मक प्रेरणा सामने आएगी ।



मेरा भारत है महान
हर एक बंदा परेशान
जनता इसकी है हैरान 
क्या यही है इसकी शान ?

नेता सारे हैं बेईमान
करते सबका नुक्सान
हरकतों से सब शैतान 
फिर भी पाते क्यों ईनाम ?

नारी रूप दुर्गा समान
करुणा ममता की खान
घुटती रहती अबला जान 
कब लेगी वो इन्तकाम ?

युवा देश की पहचान 
चलता अपना सीना तान 
खटता रहता सुबह शाम 
मिलता नहीं उसे क्यों मान ?

फौजी देते हैं बलिदान 
फिर भी पाते न सम्मान
परिवार उनके गुमनाम 
घर उनके है क्यों वीरान ?

चापलूसों की देखो शान 
करते अपना जो गुणगान
बनते दिनों दिन धनवान 
उन गद्दारों का क्या ईमान ?

आम जनता छोटी जान 
पालन करती हर फरमान 
इज्ज़त पर देती है जान 
क्या यही है इसका काम ?

'निर्जन' सोच सोच हैरान 
कैसे बढ़ेगा देश का मान ?
कब टूटेगी लगी ये आन ?
कब कहलायेगा देश महान ?

आज की कड़ियाँ 

आरएसएस भड़काती है दंगे - सलीम अख्तर सिद्दीकी

तुम्हारे देश में इतना कीचड़ कहाँ से आया हिन्दी - चन्द्रिका

इंडिया फर्स्ट या उच्च जातियों का कुलीन वर्ग फर्स्ट ? - रंधीर सिंह सुमन

लिफाफे में सादा कागज़ निकलने से हड़कंप - देवांशु निगम

आज चारों ओर झूठ कपट भ्रष्टता का माहौल है ऐसे में नैतिक व आदर्श जीवन-मूल्य अप्रासंगिक है - सुज्ञ

नारी शक्तिकरण आज़ादी से पहले और बाद - रेखा जोशी

ईमानदारी का जनाज़ा - ज़ील

दुर्गा शक्ति नागपाल - नीरा जैन

आश्रित नागरिक देश क्या गढ़ेंगे - डॉ. मोनिका शर्मा

लोकतंत्र को छद्म लोकतंत्र में परिवर्तित कर दिया - पूरण खंडेलवाल

कैसे कैसे चीप मिनिस्टर -सतीश सक्सेना

अब इजाज़त | आज के लिए बस यहीं तक | फिर मुलाक़ात होगी | आभार

जय श्री राम | हर हर महादेव शंभू | जय बजरंगबली महाराज 

लेखागार