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मंगलवार, 3 जुलाई 2018

कुछ इधर की - कुछ उधर की : 2100 वीं ब्लॉग-बुलेटिन

बात बहुत पुराना है, लेकिन एतना पुराना भी नहीं कि दादी-नानी के कहानी जइसा है. ऊ ब्लॉगिंग के स्वर्न काल का बात है माने सन 2011 के आस-पास का. हम दुन्नो दोस्त माने हम अऊर चैतन्य आलोक जी का फेवरिट चैनेल होता था सब-टीवी. एही नहीं, एक बार मनोज कुमार जी के साथ भी बात बात के बात में पता चला कि ऊ दुन्नो बेक्ति (पति-पत्नी) भी सब-टीवी बहुत मन लगाकर देखते हैं. असल में ई चैनेल को पसंद करनें का कारन एही था कि ई चैनेल पर जेतना भी कार्जक्रम देखाया जाता था उसका उद्देस खाली अऊर खाली मनोरंजन होता था.

जिन्नगी में एतना टेंसन पसरा हुआ है कि अगर अदमी ऊ टेंसन को बाहर निकालने का कोसिस नहीं करे, त उसका माथा फट जाए. अब हम ही को ले लीजिये. हमारा लिखना-पढना सब छूट गया खाली टेंसन के कारन. पहिले हम लिखे भी थे कि हम गाना गाना सुरू किये. लेकिन बाद में एहसास हुआ कि सुर लगाना बहुत मोस्किल काम है. ऐसा समय में अगर टीवी देखने बैठिये अऊर वहाँ भी माथा का बोझ दोगुना हो जाए, त सोचिये का हाल होगा. अइसा समय में थोड़ा देर के लिये अपना सारा दु:ख, तकलीफ, टेंसन से मुक्ति मिले अऊर खुलकर हंसने का मौका मिले त कऊन बेवकूफ अदमी नहीं चाहेगा कि ऊ मौका उचककर लपक ले.

टीवी का निऊज चैनेल पर बिमर्स के नाम पर बवाल अऊर जबर्दस्ती का चीख-पुकार मचा रहता है, बाकी का चैनेल पर कहाँई के नाम पर चुइंग गम के तरह ज़बर्दस्ती फैलता हुआ कहानी नहीं त सास, बहू अऊर साजिस. साजिस. परेसानी भूलने जाइये त अऊर बढाकर लौटता है अदमी. ई सब चैनेल के बीच में सब-टीवी एकलौता चैनेल है, जिसपर कोनो सास बहु साजिस नहीं होता है, अऊर होता है त बस मनोरन्जन.

चार साल गुजरात में रहने के बाद पता चला कि ई चैनेल केतना लोकप्रिय है. अऊर सबसे लोकप्रिय है उसमें देखाया जाने वाला सीरियल – तारक मेहता का उल्टा चशमा. बहुत सा लोग को ई बकवास लगेगा, बहुत सा लोग को ई असहनीय भी लगेगा काहे कि इसकी मुख्य कलाकार दया बेन अजीब सा आवाज निकालकर बोलती है. लेकिन कुल मिलाकर ई सीरियल बहुत सा अच्छा-अच्छा सीख हम लोग को खेल-खेल में दे जाता है.
एही नहीं, एक समय में चलने वाला मूक सीरियल गुटर गूँ, चाहे एफ. आई. आर., श्रीमान श्रीमती, वाह वाह जइसा बहुत सा मनोरंजक सीरियल. हो सकता है़ कि हमरा बात से आप्लोग सहमत नहीं होंगे. आप कहियेगा कि बेकार का कॉमेडी देखाया जाता है. त हम आपको बिस्वास करने के लिये नहीं कहेंगे. दरसल नॉन्सेंस कॉमेडी के माध्यम से मनोरंजन करना ई चैनेल का उद्देस है. याद होगा आपको... हमं मनमोहन देसाई साहब के बारे में लिखे थे. उनका कोनो सिनेमा उठाकर देखिये... सुपरहिट. लेकिन तथ्य के मामला में एकदम बकवास, बिस्वास नहीं हो त अमर अकबर ऐंथोनीका खून देने वाला सीन इयाद कर लीजिये. एही नहीं फिलिम के सुरू में बच्चा सब का भुलाना अऊर अंत में मिल जाना. ई सब एक नॉनसेंस सिल्सिला होता था, जिसका उद्देस आपका स्वस्थ मनोरंजन के अलावा कुछ नहीं.

बस ओही हाल तारक मेहता का उल्टा चश्मासीरियल का है. ई सीरियल का लोकप्रियता का अंदाजा एही बात से लगा सकते हैं कि गुजरात के हर छोटा बड़ा कस्बा में पान-सोडा के दुकान ता है लोग. हमरे घर में रहने वाली सास-बहु त दीवानी हैं ई सीरियल की.


अभी पिछला सप्ताह ई सीरियल का 2500 एपिसोड हो गया अऊर साथ-साथ हमारा, माफ कीजिये, आपके ब्लॉग-बुलेटिन का 2100 वाँ एपिसोड भी आ गया. बहुत टेंसन है अऊर लाइफ में टण्टे हो रक्खे हैं, फिर भी जब मौका मिलता है त हम आपके सामने हाजिर हो जाते हैं.

अंग्रेजी में ऊ का कहते हैं एंजॉय कीजिये!!
                                                                                  - सलिल वर्मा 
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