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गुरुवार, 21 फ़रवरी 2019

अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस और ब्लॉग बुलेटिन


नमस्कार साथियो,
आज, 21 फरवरी अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस है. इसको मनाये जाने का उद्देश्य भाषाओं और भाषाई विविधता को बढ़ावा देना है. देखा जाये तो मातृभाषा व्यक्ति के संस्कारों की संवाहक है. मातृभाषा के बिना किसी भी देश की संस्कृति की कल्पना बेमानी है. यही हमें राष्ट्रीयता से जोड़ती है और देश प्रेम को उत्प्रेरित करती है. मातृभाषा वह भाषा नहीं जो किसी व्यक्ति की माँ बोलती है बल्कि मातृभाषा वह है जो किसी इन्सान को सबसे पहले सोचने-समझने और व्यवहार की अनोपचारिक शिक्षा और समझ देती है.


अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मनाये जाने के पीछे बांग्लादेश का अपनी भाषा के प्रति समर्पण और उसके लिए संघर्ष प्रमुख है. सन 1948 में पाकिस्तान सरकार ने उर्दू को राष्ट्रभाषा का दर्ज़ा दिया. वर्तमान बांग्लादेश को उस समय पूर्वी पाकिस्तान के रूप में जाना जाता था. 21 फरवरी 1952 को ढाका विश्विद्यालय के विद्यार्थियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं ने संयुक्त रूप से पाकिस्तान सरकार के इस कदम का कड़ा विरोध करते हुए बांग्ला भाषा को आधिकारिक भाषा के रूप में मान्यता देने के लिए प्रदर्शन किया. इस प्रदर्शन को दबाने के लिए पुलिस ने बड़ी बेरहमी दिखाते हुए गोलियाँ बरसाना शुरू कर दिया. इसमें अनेक विद्यार्थी मारे गए. इसके बाद भी विरोध प्रदर्शन बंद न हुए. अंततः 29 फरवरी 1956 को पाकिस्तान सरकार को बांग्ला भाषा को आधिकारिक दर्ज़ा देना पड़ा. बांग्लादेश की मातृभाषा की विजय हुई. परिणामतः यूनेस्को ने 1999 में 1952 के प्रदर्शन में शहीद हुए युवाओं की स्मृति में 21 फरवरी को अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मनाये जाने की घोषणा की. पहला अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस 21 फरवरी 2000 को मनाया गया.

आइये अपनी मातृभाषा का सम्मान करते हुए आज की बुलेटिन का आनंद लें.

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बुधवार, 21 फ़रवरी 2018

अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस और ब्लॉग बुलेटिन

सभी हिन्दी ब्लॉगर्स को नमस्कार।
अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस
अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस (अंग्रेज़ी: International Mother Language Day) 21 फरवरी को मनाया जाता है। 17 नवंबर, 1999 को यूनेस्को ने इसे स्वीकृति दी। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य है कि विश्व में भाषाई एवं सांस्कृतिक विविधता और बहुभाषिता को बढ़ावा मिले।

यूनेस्को द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस की घोषणा से बांग्लादेश के भाषा आन्दोलन दिवस को अन्तर्राष्ट्रीय स्वीकृति मिली, जो बांग्लादेश में सन 1952 से मनाया जाता रहा है। बांग्लादेश में इस दिन एक राष्ट्रीय अवकाश होता है। 2008 को अन्तर्राष्ट्रीय भाषा वर्ष घोषित करते हुए, संयुक्त राष्ट्र आम सभा ने अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के महत्व को फिर महत्त्व दिया था।

(साभार : http://bharatdiscovery.org/india/अंतर्राष्ट्रीय_मातृभाषा_दिवस)


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आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर ... अभिनन्दन।। 

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