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शुक्रवार, 20 अप्रैल 2018

ज़िन्दगी का हिसाब

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |


आज का ज्ञान :- 
"ज़िन्दगी' जब देती है - तो 'अहसान' नहीं करती . . .
और जब लेती है - तो 'लिहाज़' नहीं करती !"

सादर आपका

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घर का जोगी जोगड़ा












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अब आज्ञा दीजिये ...

जय हिन्द !!!

गुरुवार, 19 अप्रैल 2018

ग़लत और सही के बीच


अक्सर, हर बार 
अपने स्नेह के वशीभूत वह चुप रह जाती रही 
बहस किया, फिर चुप हो गई   ... 
जब भी वह कहती , 
फलां व्यक्ति ने ऐसा किया 
अपने खामोश हो जाते 
फिर कहते ,
इस बात को अपने तक रखो 
वे बड़े हैं 
उनसे जुड़े और रिश्ते हैं 
किस किससे रिश्ता तोड़ लें !
वह चुप रहती 
लोग कहते ,
ये क्या मनहूसियत है 
हँसो 
ऐसा क्या हो गया कि  ... 
 मातमी चेहरा बना रखा है 
जैसे कोई मर गया है !!!
वह हँसती  ... 
बिना वजह  ... निःसंदेह, अपनी स्थिति पर 
एक एक हँसी 
और अपनों की ख़ामोशी ने 
गलत को बढ़ावा दिया 
स्नेह का हवाला दे देकर 
उसे ही ग़लत बना दिया !
धीरे धीरे वह चिंगारी बनी 
फिर धधकता लावा। 
अब अपने कुछ कहते नहीं 
लेकिन उनकी उम्मीदें आज  भी यही है 
कि ग़लत को मान लिया जाए 
आगे बढ़कर हाथ मिला लिया जाए 
बात को आई गई किया जाए  ... 

ऐसे अपने प्रायः हर घर में मौजूद हैं, थोड़ा बहुत सबके भीतर , 
हादसे तो होंगे न !!!


अल्प विराम: ये मेरा जीवन दीप

"मेरा मन": तुम जानो या मैं

हरिहर: महिला असुरक्षा की व्यापकता

उलूक टाइम्स: उसी समय लिख देना जरूरी होता है जिस समय ...

कठुआ और उसके मायने : अफवाहों से पीड़ित ... - काव्य सुधा

ज़ख्म…जो फूलों ने दिये: स्त्रियों के शहर में आज जम ...

सरोकार: तुम प्रकृति हो

sapne(सपने): मन का हो उपचार

शेष फिर...: स्त्री होना


आबे दरिया हूं मैं,कहीं ठहर नहीं पाउंगा,
मेरी फ़ितरत में है के, लौट नहीं आउंगा।
जो हैं गहराई में, मिलुगां उन से जाकर ,
तेरी ऊंचाई पे ,मैं कभी पहुंच नहीं पाउंगा।
दिल की गहराई से निकलुंगा ,अश्क बन के कभी,
बद्दुआ बनके कभी, अरमानों पे फ़िर जाउंगा।
जलते सेहरा पे बरसुं, कभी जीवन बन कर,
सीप में कैद हुया ,तो मोती में बदल जाउंगा।
मेरी आज़ाद पसन्दी का, लो ये है सबूत,
खारा हो के भी, समंदर नहीं कहलाउंगा।
मेरी रंगत का फ़लसफा भी अज़ब है यारों,
जिस में डालोगे, उसी रंग में ढल जाउंगा।
बहता रहता हूं, ज़ज़्बातों की रवानी लेकर,
दर्द की धूप से ,बादल में बदल जाउंगा।
बन के आंसू कभी आंखों से, छलक जाता हूं,
शब्द बन कर ,कभी गीतों में निखर जाउंगा।
मुझको पाने के लिये ,दिल में कुछ जगह कर लो,
मु्ठ्ठी में बांधोगे ,तो हाथों से फ़िसल जाउंगा। 

बुधवार, 18 अप्रैल 2018

18 अप्रैल - विश्व विरासत दिवस और ब्लॉग बुलेटिन

सभी हिन्दी ब्लॉगर्स को मेरा सादर नमस्कार। 
Image result for विश्व विरासत दिवस
विश्व विरासत दिवस (अंग्रेज़ी: World Heritage Day) प्रत्येक वर्ष '18 अप्रैल' को मनाया जाता है। 'संयुक्त राष्ट्र' की संस्था यूनेस्को ने हमारे पूर्वजों की दी हुई विरासत को अनमोल मानते हुए और लोगों में इन्हें सुरक्षित और सम्भाल कर रखने के उद्देश्य से ही इस दिवस को मनाने का निर्णय लिया था। किसी भी राष्ट्र का इतिहास, उसके वर्तमान और भविष्य की नींव होता है। जिस देश का इतिहास जितना गौरवमयी होगा, वैश्विक स्तर पर उसका स्थान उतना ही ऊँचा माना जाएगा। वैसे तो बीता हुआ कल कभी वापस नहीं आता, लेकिन उस काल में बनीं इमारतें और लिखे गए साहित्य उन्हें हमेशा सजीव बनाए रखते हैं। विश्व विरासत के स्थल किसी भी राष्ट्र की सभ्यता और उसकी प्राचीन संस्कृति के महत्त्वपूर्ण परिचायक माने जाते हैं।



~ आज की बुलेटिन कड़ियाँ ~















आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर ... अभिनन्दन।। 

मंगलवार, 17 अप्रैल 2018

अरे हम क्या कर सकते हैं




घबराहट सी होने लगी है
पढ़ते और लिखते हुए
 .... 
अरे हम क्या कर सकते हैं !
कुछ नहीं कर सकते !

डर लगता है रास्तों पर !!

जहां जाना है 
जहां से घर लौटना है
सब कुशलता से हो 
रक्षा मन्त्र ही पढ़ती रहती हूँ ...

नहीं सुनना मुझे कोई चीख
अपनी दबी चीखें क्या कम थीं 
या हैं।?
जो चीखों के मध्य बैठ जाऊँ   !

हर चेहरा भयानक लगता है 
सारे के सारे रास्ते 
अवरुद्ध लगते हैं 
अपनेपन की खुशबू जाने कब 
कहाँ 
खत्म हो गई !
 दरवाज़े पर घण्टी बजती है
तो खोलने से पहले रूह कांपती है
सतर्क हो जाती हूँ 
.... चेहरे को एक नहीं
कई बार धोती हूँ
कहीं भूले से भी किसी लकीर में
जाति धर्म झलकें 
और कोई पढ़ ले !

मुझे खुद नहीं पता
मेरी जाति क्या है
मेरा धर्म क्या है !
बचपन से जो सुना 
वह बस यूं ही कहा गया
अब जाना है अच्छी तरह
कि बार बार वही दुहराया जाता है
जिस बात पर यकीं न हो
"हिन्दू,मुस्लिम,सिक्ख,ईसाई
आपस में हैं भाई-भाई"
कोई किसी का कुछ भी नहीं 
कुछ भी नहीं ... 

अजनबियों के देश में
हर कदम पर डर लगता है !
घर के दरवाजे बंद
गाड़ी के शीशे बन्द 
. अकेले चलते हुए 
बहुत डर लगता है
खुद अपना चेहरा भी 
अपना अपना नहीं लगता
बड़ा अजीब
डरा डरा सा लगता है
बच्चे को कोई प्यार से देखता है 
छूने को हाथ बढ़ाता है 
तो शक़ दबोच लेता है गला 
... 
किसी आधार कार्ड में 
चरित्र की पहचान नहीं 
दुर्घटना के बाद 
पुलिस,कोर्ट,सज़ा  ... 
जिसे जाना था वो गया
और सजा तब,
जब उसका कोई अर्थ नहीं रहा  
... 
खैर,
दो फांसी 
कोई एक शैतान तो कम हो जाए 
!!!


आदत या अधिकार
तुम्हें पंसद थी आज़ादी
और मुझे स्थिरता
तुम्हें विस्तार
मुझे सिमटना
तुम
अंतरिक्ष में हवाओं में
मैदानों में पहाड़ों पर
कविता लिखते रहे
मैं
नयनों पर इश्क़ पर
मेहदीं पर सिंदूर पर
भाग्य सराहती रही
तुम देहरी के बाहर हरापन उगाते रहे
मैं आँगन के पेड़ों को पहचानती रही
बातें आदत की थी या अधिकारों की
खूँटे हम दोनों के थे
फ़र्क़ सिर्फ रस्सी की लम्बाई में थे

सोमवार, 16 अप्रैल 2018

एयर मार्शल अर्जन सिंह जी और ब्लॉग बुलेटिन

सभी हिन्दी ब्लॉगर्स को मेरा सादर नमस्कार।

अर्जन सिंह (अंग्रेज़ी: Arjan Singh, जन्म- 16 अप्रॅल, 1919, पंजाब; मृत्यु- 16 सितम्बर, 2017, दिल्ली) भारतीय वायु सेना के सबसे वरिष्ठ और पांच सितारा वाले रैंक तक पहुँचने वाले एकमात्र मार्शल थे। उन्हें 2002 में गणतंत्र दिवस के अवसर पर मार्शल रैंक से सम्मानित किया गया था। अर्जन सिंह को 1965 में भारत-पाकिस्तान युद्ध में अहम भूमिका निभाने के लिए जाना जाता है। उन्हें 44 साल की उम्र में ही भारतीय वायु सेना का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी दी गई थी, जिसे उन्होंने शानदार तरीके से निभाया। अलग-अलग तरह के 60 से भी ज्यादा विमान उड़ाने वाले अर्जन सिंह ने भारतीय वायु सेना को दुनिया की सबसे शक्तिशाली वायु सेनाओं में से एक बनाने और दुनिया की चौथी सबसे बड़ी वायु सेना बनाने में अहम भूमिका निभाई थी।


आज एयर मार्शल अर्जन सिंह जी के 99वें जन्म दिवस पर हम सब उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। जय हिन्द। जय भारत।। 


~ आज की बुलेटिन कड़ियाँ ~














आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर ... अभिनन्दन।। 

रविवार, 15 अप्रैल 2018

शाबाश टीम इंडिया !!

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |

जिस हिसाब से अब की बार कॉमनवेल्थ गेम्स में पदक मिले हैं, कोई ताज़्ज़ुब नहीं कि मोदी सरकार पर कॉमनवेल्थ गेम्स हैक करने का भी आरोप लगा दिया जाए। 😜

"ईवीएम का बटन कोई सा दबाओ, वोट बीजेपी को मिलता है" की तर्ज़ पर खेल कोई सा हो पदक भारत को मिल रहा है।

पर क्या आप ने सोचा ऐसा क्यों हो रहा है इस से पहले तो ऐसा प्रदर्शन देखने को नहीं मिलता था खिलाड़ियों से, फ़िर अब की बार ऐसा कौन सा चमत्कार हो गया !?

ये तो आप भी मानेंगे कि एक खिलाड़ी को जब तक विश्व स्तरीय ट्रेनिंग, साजोसामान, रहन सहन खान पान की सुविधाओं से लैस माहौल नहीं मिलेगा तब तक वो अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं कर सकता।

इस से पहले तक देखा गया है कि खिलाड़ियों के लिए आवंटित सरकारी बजट का बहुत ही कम हिस्सा खिलाड़ियों पर खर्च होता था, अधिकांश भाग तो मंत्री या अधिकारी ही चट कर जाते थे।

ये स्थिति बदली है। एक पूर्व ओलंपियन पदक विजेता को खेल मंत्री बनने का लाभ मिलता दिखाई देता है।

राजनीति को दरकिनार करते हुए सोचिएगा क्या अब की बार कॉमनवेल्थ गेम्स में मिली व्यापक सफ़लता से एक भारतीय के तौर पर आप का सीना चौड़ा नहीं होता !?

मेरा तो होता है ... शाबाश टीम इंडिया !! 🇮🇳

सादर आपका
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जहां गिनती खत्म हो, वहां शुरु होती है बराबरी












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अब आज्ञा दीजिये ...

जय हिन्द !!!

शनिवार, 14 अप्रैल 2018

डॉ. भीमराव अंबेडकर और ब्लॉग बुलेटिन

सभी हिन्दी ब्लॉगर्स को सादर नमस्कार।
Dr.Bhimrao-Ambedkar.jpg
डॉ. भीमराव रामजी आम्बेडकर (अंग्रेज़ी: Bhimrao Ramji Ambedkar, जन्म: 14 अप्रैल, 1891 - मृत्यु: 6 दिसंबर, 1956) एक बहुजन राजनीतिक नेता और एक बौद्ध पुनरुत्थानवादी भी थे। उन्हें बाबासाहेब के नाम से भी जाना जाता है। आम्बेडकर ने अपना सारा जीवन हिन्दू धर्म की चतुवर्ण प्रणाली और भारतीय समाज में सर्वत्र व्याप्त जाति व्यवस्था के विरुद्ध संघर्ष में बिता दिया। उन्हें बौद्ध महाशक्तियों के दलित आंदोलन को प्रारंभ करने का श्रेय भी जाता है। आम्बेडकर को भारत रत्न से भी सम्मानित किया गया है जो भारत का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार है। अपनी महत्त्वपूर्ण उपलब्धियों तथा देश की अमूल्य सेवा के फलस्वरूप डॉ. अम्बेडकर को आधुनिक युग का मनु कहकर सम्मानित किया गया।


आज भारत के संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर जी की 127वीं जयंती पर हम सब उन्हें शत शत नमन करते हैं।  

~ आज की बुलेटिन कड़ियाँ ~















आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर ... अभिनन्दन।। 

शुक्रवार, 13 अप्रैल 2018

जलियाँवाला बाग़ नरसंहार के शहीदों की ९९ वीं बरसी

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |

आज १३ अप्रैल है ... यूं तो हम में से काफी लोगो की ज़िन्दगी में इस दिन का कोई न कोई ख़ास महत्व जरूर होगा ... किसी का जन्मदिन या फिर किसी की शादी की वर्षगाँठ ... कुछ भी हो सकता है ... खैर जो भी हो ... आप आज उस खास पल को याद जरूर कीजियेगा जिस पल ने आप की ज़िन्दगी को ऐसे हजारो खुशनुमा पल दिए !

बस एक छोटी सी गुज़ारिश है ... साथ साथ याद कीजियेगा उन हजारो बेगुनाह लोगो को जिन को आज के ही दिन गोलियों से भुन दिया गया सिर्फ इस लिए क्यों की वो अपने अधिकारों की बात कर रहे थे ... आज़ादी की बात कर रहे थे ... जी हाँ ... आप की रोज़मर्रा की इस आपाधापी भरी ज़िन्दगी  में से मैं कुछ पल मांग रहा हूँ ... जलियाँवाला बाग़ के अमर शहीदों के लिए ... जिन को आजतक हमारी सरकारों ने सही मायने मे शहीद का दर्जा भी नहीं दिया जब कि देश को आजाद हुए भी अब ७१ साल हो जायेंगे !!!

अन्दर जाने का रास्ता ... तंग होने के कारण जनरल डायर अन्दर टैंक नहीं ले जा पाया था ... नहीं तो और भी ना जाने कितने लोग मारे जाते !!

बाग़ की दीवालों पर गोलियों के निशान

यहाँ से ही सिपाहियों ने भीड़ पर गोलियां चलाई थी

हत्याकांड का एक (काल्पनिक) चित्र

शहीद स्मारक

सूचना
इस से पहले भी आप से मैं ऐसी गुजारिश कर चुका हूँ ... आगे भी करता रहूँगा ... ताकि हम भी सरकार की तरह उन अमर शहीदों को भूल न जाएँ !

ब्लॉग बुलेटिन टीम और हिन्दी ब्लॉग जगत की ओर से ९९ वीं बरसी पर जलियाँवाला बाग़ के सभी अमर शहीदों को हमारा शत शत नमन !!

सादर आपका

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मुझे तेज़ धार वाली कवितायें चाहिए












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अब आज्ञा दीजिये ...

जय हिन्द !!!

लेखागार