आदरणीय ब्लॉगर मित्रगण सादर नमस्कार,
आज दिल बहुत प्रसन्न है तो कुछ संजीदा लिखने का दिल नहीं है | तो आज प्रस्तुत है उमंग, तरंग और ठहाको से भरपूर रंगारंग, मसालेदार बुलेटिन |
अध्यापक (कक्षा मे) , बच्चो बताओ कि दूध को खराब होने से बचाने के लिए क्या करना चाहिए?
सोनू, जी उसे पी लेना चाहिए ।
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टीचर : व्हॉट इज यूअर नेम...?
बच्चा : सर, सूर्य प्रकाश...
टीचर : इंग्लिश में जवाब दो...
बच्चा : सर, सनलाइट...
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एक भिखारी ने होटल में फोन करके एक नान, एक बटर चिकन और एक प्लेट पनीर टिक्का भिजवाने का ऑर्डर दिया...
दूसरी ओर से सवाल किया गया, "सर, बिल किसके नाम का बनेगा...?"
भिखारी ने तपाक से जवाब दिया, "भगवान के नाम का दे दो, बाबा..."
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तीन औरतें आपस में अपने पतियों की मूंछों के बारे में बातें कर रही थीं...
पहली ने कहा, मेरे पति की मूंछें इतनी छोटी हैं कि बहुत अजीब दिखाई देते हैं...
दूसरी बोली, मेरे पति की तो मूंछ ही नहीं है, और उन्हें देखकर मुझे हंसी आती है...
तीसरी ने तपाक से कहा, मेरे पति की मूंछें तो इतनी बड़ी-बड़ी हैं कि मुझे गुदगुदी होती है...
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प्रेमसुख जब मरकर स्वर्ग पहुंचा तो उसके सामने स्वर्ग या नरक किसी एक को चुनने का विकल्प रखा गया। यमदूत के साथ जब उसने स्वर्ग की देहरी से अंदर झांका तो पाया कि एक बड़ी उजाड़-सी जगह में कुछ लोग टहल रहे हैं, कई बीमार हैं, कई कराह रहे हैं।
फिर प्रेमसुख ने नरक के द्वार से झांका तो वहां का नजारा उलटा था- कई अप्सराएं वहां नाच रही थीं। एक ओर कॉकटेल पार्टी चल रही थी। यह सब देख उसने नरक में जाने का तय किया। अंदर जाने पर देखा कि एक गरम तेल भरी कड़ाही में लोगों को डाला जा रहा है। किसी-किसी की खाल भी खींची जा रही है, किसी पर कोड़े बरसाए जा रहे हैं। अब प्रेमसुख चकरा गया और यमदूत से पूछा- यह सब क्या है? जो बाहर से दिख रहा था, वह यहां है नहीं। ऐसा क्यों?
यमदूत ने कहा - यह तो नरक के मार्केटिंग विभाग का कमाल है।
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टीचर ने क्लास में बच्चों से सवाल किया, "तुम सबसे ज्यादा किससे नफरत करते हो...?
एक बच्चे ने जवाब दिया, "राजा राममोहन राय...
टीचर ने हैरानी से फिर पूछा, "लेकिन क्यों...?
बच्चे ने तपाक से कहा, "उन्होंने बाल विवाह बंद करवा दिया था...
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टीचर (क्लास मे पढाते हुए), "बच्चो आयकर, बिक्रीकर, भूमिकर से मिलता झुलता कोइ और शब्द बताओ।"
निशु, "सर, एक नही तीन शब्द सुने, सुनील गावासकर, सचिन तैंदुलकर और दिलीप वेंगसरकर।"
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मेली अपने पति प्रेमसुख से- जब आप चश्मा उतारते हो, तो बहुत हैंडसम दिखते हो।
प्रेमसुख चमेली को बाहों में लेकर बोला- सही है, जब मैं चश्मा उतारता हूं, तभी तुम खूबसूरत दिखती हो।
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मनु,"डेडी, ज्यादा काबिल कौन है मैं या आप?"
डैडी, " मै, क्योकि मैं एक तो तुम्हारा बाप हुँ, दुसरे उम्र मे भी तुम से बडा हुँ और मेरा तजुर्बा भी तुम से ज्यादा है।"
मनु, "फ़िर तो आप जानते होगें कि अमेरिका की खोज किस ने की थी? "
डैडी, "कोलम्बस ने की थी"
मनु, "कोलम्बस के बाप ने क्यों नही की, उसका तजुर्बा तो कोलम्बस से कही ज्यादा होगी?"
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एक छोटा बच्चा दुसरे बच्चे से, अगर दिन को सूर्य न निकला तो क्या होगा?
दुसरे बच्चे ने जवाब दिया, "बिजली का बिल बढ जाएगा।"
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टीचर (मिन्नी से), "आज स्कूल मे देर से आने का तुमने क्या बहाना ढूंढा है?"
मिन्नी, "सर आज मै इतनी तेज दौड कर आई कि बहाना सोचने का मौका ही नही मिला।"
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मरते समय पति ने अपने पत्नी को सब कुछ सच बताना चाहा । उस ने कहा " मै तुम्हे जीवन भर धोखा देता रहा। सच तो यह है कि दर्जनो औरतों से मेरे नाजायज संबंध थे।"
पत्नी बोली, "मै भी सच बताना चाहूँगी । तुम बीमारी से नही मर रहे मैने तुम्हे धीरे-धीरे असर करने वाला जहर दिया है।"
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पत्नी: मैने आज सपनो मे देखा है कि तुम मेरे लिए हीरों का हार लाए हो, इस सपने का क्या मतलब है?
पति: आज शाम को बताऊगा। शाम को पति ने एक पैकेट पत्नी को लाकर दिया। पत्नी ने खुशी-खुशी पैकेट खोला तो उस मे एक किताब निकली । किताब का नाम था, 'सपनो का मतलब' ।
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नया सिपाही (इंस्पैक्टर से), "सर ये बिलकुल गलत है कि मैं उस चोर से डर गया था।"
इंस्पैक्टर, "तो तुम उस गाडी के पिछे क्यों छिपे थे?"
नया सिपाही, "जी वह तो मैं कुत्ता देख कर छिपा था ।"
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मैनेजर ने आने वाले से पूछा, " क्या तुम्हें पता नही कि आज्ञा के बिना अन्दर आना मना है।"
आने वाला, "जनाब मैं आज्ञा लेने के लिए ही अन्दर आया हूं।"
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अध्यापक," बाबर भारत मे कब आया?"
बंटी, "पता नही सर।"
अध्यापक, " बोर्ड पर नही देख सकते, नाम के साथ ही लिखा है।"
बंटी, मैने सोचा, शायद वह उसका फ़ोन नम्बर है।"
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मेली - मां, मैं प्रेमसुख से शादी नहीं करूंगी।
शीला - क्यों बेटी, क्या तेरी नजर में कोई और है?
चमेली - नहीं मां!
शीला - क्या कोई परेशानी है?
चमेली - हां! प्रेमसुख को तो स्वर्ग-नरक में विश्वास ही नहीं है।
शीला - तू घबरा मत बेटी, पहले उससे शादी तो कर ले। उसके बाद उसे स्वर्ग-नरक में विश्वास अपने आप ही हो जाएगा।
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एक बहानेबाज कर्मचारी का दादा उस के दफ़तर में जा कर उस के बाँस से बोला, " इस दफ़तर मे सुनिल नाम का व्यक्ति कार्य करता है, मुझे उस से मिलना है, वह मेरा पोता है।"
बाँस ने मुस्करा कर कहा, " मुझे अफ़सोस है, आप देर से आए है, वह आप के आर्थी को कंधा देने के लिए छुट्टी लेकर जा चुका है।"
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सेठानी (नौकरानी से), "क्यों महारानी जी आज आने मे इतनी देर क्यों लगा दी?"
नौकरानी, "सेठानी जी मै सीढियों से गिर गई थी।"
सेठानी, "तो क्या उठने मे इतनी देर लगती है।"
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एक घर में चोरी की नियत से घुसे चोर को वहां की मोटी औरत ने पकड़ा और उसके ऊपर चढ़ कर बैठ गई।
फिर अपने नौकर से बोली, जा जल्दी से, पुलिस को बुला ला।
नौकर घबरा कर बोला - बीवी जी, मेरी चप्पल नहीं मिल रही।
तभी चोर जोर से चीखा - ओह... यार, मेरी पहन ले, पर जल्दी जा...।
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अध्यापक कक्षा में छात्रों को चींटी के संबंध में शिक्षाप्रद बातें बता रहे थे |
अध्यापक - अब बताओ कि चींटी से हमें क्या सिख मिलती है |
छात्र - मास्टरजी चींटीयां यह बता देती है कि मां ने मिठाई कहां रखी है |
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प्रस्तुत हैं आज की कड़ियाँ
मेरी कुछ हायकू रचनाएँ - संध्या
राजनैतिक तुकबन्दियाँ - राजीव तनेजा
चाँद - प्रियंका जैन
हाल - रेवा
तुरंत बदलिये अपना पासवर्ड और बचिये हार्टब्लीड से - माय बिग गाइड
फिल्म समीक्षा : भूतनाथ रिटर्न्स - चवन्नी चैप
प्यार वो एहसास है - अपर्णा खरे
हुआ ये क्यूँ कर? - पूनम
सागर - सुरेश राजपूत
रविकर ले हित-साध, आप मत डर खतरे से - रविकर
बहारें फिर भी आएँगी - सरोज
स्वागत है, तुम्हारा नवागत हे नए वर्ष - मोना परसाई
अब इजाज़त | आज के लिए बस यहीं तक | फिर मुलाक़ात होगी | आभार
जय श्री राम | हर हर महादेव शंभू | जय बजरंगबली महाराज
फ़ेसबुक और ट्विटर तुरंता जुमलेबाजी के माध्यम हैं। फ़ेसबुक मेरे लिये नोटिसबोर्ड की तरह है जहां अपने ब्लॉग की नोटिस लगाते हैं, जुमलेबाजी करते हैं, फ़ूट लेते हैं। ब्लॉग हमारे लिये घर की तरह है जहां हमेशा लौटने का, रहने का मन करता है।
लिखने वाले की सबसे बड़ी इच्छा होती है कि लोग उसे पढ़ें और सराहें। प्रिंट मीडिया में छपना वाह-वाही समझी जाती हैं क्योंकि ब्लॉग के मुकाबले ज्यादा लोग पढ़ते हैं उसे। प्रिंट भले ही खबरों के लिये आउटडेटेड हो गया हो लेकिन बाकी लिखे पढ़े के लिये उसमें छपने का मजा ही कुछ और है। इसे स्वीकारने में कोई संकोच नहीं करना चाहिये।
लेकिन प्रिंट मीडिया की अपनी सीमायें हैं। अगर आप बहुत बड़े सेलिब्रिटी नहीं हैं तो आपका लिखा सब कुछ वहां नहीं छप जायेगा। आपके अपने मन के भाव, उद्गार, संस्मरण , चिरकुटैयों, अपीलों , धिक्कार के लिये वहां कोई जगह नहीं होगी। उसके लिये आपको लौट के अपने यहां ही आना होगा और उसके लिये ब्लॉग से उपयुक्त कोई माध्यम नहीं है।
ब्लॉगिंग ने आम लोगों को अभिव्यक्ति का जो सहज माध्यम प्रदान किया है उसकी तुलना और किसी माध्यम से नहीं हो सकती। लोग अपने भाव, कवितायें, सोच, संस्मरण अपने ब्लॉग पर लिखते हैं। ट्विटर पर शब्द सीमा है, फ़ेसबुक पर सर्चिंग लिमिटेशन। ब्लॉग पर आप अपनी सालों पहले की किसी भी पोस्ट पर डेढ़ -दो मिनट में पहुंच सकते हैं, फ़ेसबुक अपना दस दिन पुराना स्टेटस खोजने में भी घंटा लग सकता है। ब्लॉग जैसी आजादी और सुविधा और कहां?
इस बीच एक घालमेल और हुआ है कि, ब्लॉग जो कि अभिव्यक्ति का माध्यम है और जिसकी कोई सीमा नहीं है को, साहित्यप्रेमियों और पत्रकार बिरादरी ने हाईजैक जैसा करके इसको साहित्यमंच या फ़िर पत्रकारपुरम जैसा बनाने की कोशिश करके इसको सीमित करना शुरु कर दिया है। जबकि ऐसा है नहीं- ब्लॉग आज के समय में दुनिया का सबसे तेज दुतरफ़ा माध्यम है। लेखक/पाठक के बीच अभिव्यक्ति और प्रतिक्रिया का इससे तेज और कोई खुला माध्यम नहीं है।
ब्लॉग और फ़ेसबुक से पैसे कमाने की बात जो करते हैं वे लहरें गिनकर भी पैसा कमा सकतें हैं। उसके लिये व्यक्ति को लेखन सक्षम नहीं कमाई सक्षम होना चाहिये। पैसे कमाने और नाम कमाने और इनाम जुगाड़ने के लिये भी लोग तरह-तरह की तिकड़में लगानी होती हैं। वे सब आम आदमी के बस की नहीं होती।
मैं ब्लॉग लेखन से क्यों जुड़ा हूं उसका यही कारण है कि अपनी तमाम अभिव्यक्तियों के लिये ब्लॉग ही सबसे मुफ़ीद माध्यम है। और कोई माध्यम इतना सहज और सुगम नहीं है जितना कि ब्लॉग। इसीलिये अपन इससे जुड़े हैं और इंशाअल्लाह जुड़े रहेंगे। आप भी यह पोस्ट सिर्फ़ ब्लॉग पर ही लिख सकते थे। लिख तो फ़ेसबुक पर भी सकते थे लेकिन अगर वहां लिखते तो हम इत्ता लंबा कमेंट वहां नहीं लिखते। रात को पढ़कर लाइक करके फ़ूट लिये होते। आपकी तमाम बहस-विवाद वाली तमाम पोस्टें जो ब्लॉग पर हैं वे हम फ़ौरन खोजकर पढ़ सकते हैं। फ़ेसबुक और दूसरे तुरंता माध्यमों पर -इट इज हेल ऑफ़ द टॉस्क! :)
समय के साथ लोगों की धारणायें भी बदलती हैं। डेढ़ साल पहले हमने एक पोस्ट लिखी थी - ब्लॉगिंग, फ़ेसबुक और ट्विटर . उस पर आपका कहना था- ब्लॉग जगत में निश्चय ही एक मरघटी का माहौल बन रहा है ..हमें कोई खुशफहमी नहीं पालनी चाहिए ….
इसी पोस्ट पर आपके घोषित शिष्य संतोष त्रिवेदी की टिप्पणी थी- फेसबुक की लत छूट चुकी है,ट्विटर पर यदा-कदा भ्रमण कर लेते हैं पर ब्लॉगिंग पर नशा तारी है ! जब तक खुमारी नहीं मिटती,लिखना और घोखना जारी रहेगा !
आज की स्थिति में ब्लॉग के प्रति आपका लगाव बरकरार है। और आपने लिखा भी -अपने आब्सेसन के चलते ब्लागिंग का दामन थामे हुए हैं मरघट में किसी का इंतजार करेंगे कयामत तक। संतोष त्रिवेदी उदीयमान ब्लॉगर से ब्लॉगिंग में अस्त से हो चुके हैं। फ़ेसबुक की लत दुबारा लगा गयी है। प्रिंट मीडिया में घुसड़-पैठ शुरु है और काफ़ी जम भी गयी है। आगे और जमेगी, जमे शुभकामनायें।
जो सूरमा ब्लॉग को पिछड़ा बताकर फ़ेसबुक और ट्विटर पर जाने की बात कह रहे हैं उनको यह याद रखना चाहिये कि उनकी पहचान अगर है, कुछ लोग उनको जानते हैं तो वह सब एक ब्लॉगर होने के चलते है। वर्ना फ़ेसबुक और ट्विटर में अनगिन लोगों के हजारों, लाखों फ़ालोवर होंगे। कौन जानता है उनको?
और किसी का पता नहीं लेकिन अपन ब्लॉगिंग अपन के लिये घर जैसा लगता है। जितनी सहजता यहां हैं मुझे उतना और कहीं नहीं। इसीलिये अपन ब्लॉगिंग से जुड़े हैं और लगता है कि आगे भी जुड़े सहेंगे।