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शुक्रवार, 24 मई 2019

123वीं जयंती - करतार सिंह सराभा और ब्लॉग बुलेटिन

सभी हिंदी ब्लॉगर्स को नमस्कार। 
करतार सिंह सराभा
करतार सिंह सराभा (अंग्रेज़ी: Kartar Singh Sarabha, जन्म- 24 मई, 1896, लुधियाना; मृत्यु- 16 नवम्बर, 1915) भारत के प्रसिद्ध क्रान्तिकारियों में से एक थे। उन्हें अपने शौर्य, साहस, त्याग एवं बलिदान के लिए हमेशा याद किया जाता रहेगा। महाभारत के युद्ध में जिस प्रकार वीर अभिमन्यु ने किशोरावस्था में ही कर्तव्य का पालन करते हुए मृत्यु का आलिंगन किया था, उसी प्रकार सराभा ने भी अभिमन्यु की भाँति केवल उन्नीस वर्ष की आयु में ही हँसते-हँसते देश के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया। उनके शौर्य एवं बलिदान की मार्मिक गाथा आज भी भारतीयों को प्रेरणा देती है और देती रहेगी। यदि आज के युवक सराभा के बताये हुए मार्ग पर चलें, तो न केवल अपना, अपितु देश का मस्तक भी ऊँचा कर सकते हैं।


आज हम महान क्रांतिकारी करतार सिंह सराभा जी की 123वीं जयंती पर उनका स्मरण करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। सादर।।

~ आज की बुलेटिन कड़ियाँ ~ 













आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर ... अभिनन्दन।।

गुरुवार, 23 मई 2019

पक्ष-विपक्ष दोनों के लिए राजनीति का नया दौर शुरू - ब्लॉग बुलेटिन


नमस्कार साथियो,
आज समूचा देश लोकसभा चुनाव परिणामों को जानने की चाह में किसी न किसी रूप में मीडिया से जुड़ा हुआ है. अभी तक जिस तरह से रुझान आये हैं, उनसे स्थिति एकदम साफ़ हो चुकी है. भाजपा की, NDA की धमाकेदार वापसी दिख रही है. विपक्ष और महागठबंधन जैसी स्थितियों को मतदाताओं ने नकारा है. यदि इन रुझानों, जो जल्द ही अंतिम परिणाम के रूप में भी पहचाने जायेंगे, को पूर्वाग्रहरहित होकर देखा जाये तो इस बार मतदाताओं ने निवर्तमान केंद्र सरकार के कार्यों पर भरोसा जताते हुए उसे एक अवसर और दिया है. इसके साथ ही उसने विगत लम्बे समय से चले आ रहे विपक्ष के तमाम आरोपों को एकतरह से खारिज भी किया है. 

इस परिणाम के बाद दोनों पक्षों के लिए राजनीति का नया ट्रेंड शुरू होने वाला है. अभी तक भाजपा को साम्प्रदायिक, हिन्दू ध्रुवीकरण के रूप में ही प्रचारित किया जाता रहा है किन्तु इन चुनावों परिणामों के बाद इससे बहुत हद तक मुक्ति मिलेगी. ऐसे में केंद्र की भाजपा को अपनी वर्तमान ईमानदारी वाली, कार्य करने वाली सरकार की छवि को और निखारना होगा. महज मोदी के नाम पर टिके रहने की प्रवृत्ति से उसके सभी जनप्रतिनिधियों को बाहर आना होगा. 


इसी तरह विपक्ष को भी विचार करना होगा कि हर बार महज ईवीएम के नाम पर, राफेल, नोटबंदी अथवा किसी अन्य मुद्दे के नाम पर शोर मचाकर सरकार को कटघरे में खड़ा नहीं किया जा सकता है. महज जाति के नाम पर लामबंदी करके मतदाताओं को लुभाया नहीं जा सकता है. मुफ्तखोरी के नाम पर मतदाताओं को आकर्षित नहीं किया जा सकता है. अब आम मतदाता भी तकनीकी रूप से अपडेट है. उसके हाथ में भी तकनीक होने से उसको भी पल-पल की जानकारी मिल रही है. उसे भी सही, गलत का आभास हो रहा है. ऐसे में विपक्ष को आने वाले समय के लिए सशक्त बनने के लिए, केंद्र सरकार के कार्यों की पारदर्शिता को बनाये रखने के लिए उसे जनता के बीच जाकर काम करना होगा. सरकार की छवि को झूठे आरोपों के द्वारा धूमिल करने की कोशिशों के बजाय खुद अपनी छवि को सशक्त, मजबूत, स्वच्छ करना होगा.

फ़िलहाल, अंतिम परिणामों का सभी को इंतजार है. सभी को शुभकामनायें कि आने वाले समय के देश और सशक्त हो, मजबूत हो, सुरक्षित हो.

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