Subscribe:

Ads 468x60px

कुल पेज दृश्य

होली लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
होली लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

गुरुवार, 21 मार्च 2019

बुरा मानना हो तो खूब मानो, होली है तो है... ब्लॉग बुलेटिन


नमस्कार साथियो,
आखिरकार होली हो ली. दिन भर धमाचौकड़ी चलती रही, कभी बच्चों की, कभी बड़ों की. इसी धमाचौकड़ी में मित्र-मंडली संग शहर की सुनसान पड़ी सड़कों पर टहलना हुआ. अलग-अलग रंग के, अलग-अलग जीव दिखाई दिए. कुछ रंग में मस्त, कुछ भंग में मस्त. कुछ तेज रफ़्तार बाइक में मगन, कुछ दारू के नशे में टुन्न. एक मित्र मिले, अनजाने से. अनजाने से इसलिए क्योंकि पूरी तरह अपने रंग में थे. न कदमों का होश था, न हमें पहचान पाने का. पता नहीं किस झोंक में चले आये सड़क के इस पार. आकर गले लगे और बोले बुरा न मानो होली है. हमने कहा इसमें बुरा क्या मानना मित्र, आखिर होली है ही ऐसा त्यौहार. उनके चेहरे पर एकदम चमक आ गई, बोले वाह दोस्त, क्या बात कही. फिर एकदम से उनके अन्दर के तरल पदार्थ ने शायद किक मारी. चेहरे को जरा सा सख्त करके बोले, बुरा मानना हो तो खूब मानो. होली है तो है.


हम समझ गए कि उनके और उनके तरल पदार्थ के बीच रस्साकशी चल रही है. अन्दर का तरल पदार्थ उन्हें नाली में पटकने को आतुर दिख रहा था और हमारे मित्र थे कि बिना गिरे-पड़े घर पहुँचने की आतुरता में थे. उनको एक पान की दुकान के किनारे पड़ी बेंच पर बिठाया और सलाह दी कि उतनी ही लिया करो अपने प्याले में, जो न पटके किसी नाले में.

वे हमारा मंतव्य समझ गए तो हो-हो-हो करके हँस दिए. इतनी देर में उनके दिमागी कंप्यूटर ने अपने सॉफ्टवेयर को अपडेट किया और वे हमें पहचान गए. भटकती जीभ के सहारे हमारे हाथ को थाम बड़े भावुक हो गए और बोले, कहाँ रोज-रोज प्याले में भरते हैं, कहाँ रोज-रोज नाले में गिरते हैं. हमने भी उसी भावुकता में वाह-वाह कह दिया.

उस वाह-वाह ने उनके अन्दर के कवित्व को जगा दिया और चंद पंक्तियाँ पटक दी सामने. उसके बाद लगा कि उसे अकेले छोड़ना सही नहीं, सो मित्र-मंडली ने उसे अपने में समेटा और बजाय मयखाने के घर ले जाकर छोड़ा.

उसकी पटकी-पटकाई वही पंक्तियाँ आपके सामने ज्यों की त्यों, बिना लड़खड़ाए. होली की शुभकामनाओं के साथ आनंद लीजिये, आज की बुलेटिन का. 



लोगों ने बड़ा ही गलत काम किया है,
नाहक ही पीने-पिलाने को बदनाम किया है.
कहाँ बह गए लोगों के दरो-दीवार जश्न में,
बैठकर मयखाने में जाम को ही पिया है.

पीने का मजा क्या जानें दूर रहने वाले,
पूछो उसे जो हैं नशे में चूर रहने वाले.
अपने में खोये रहते हैं दीवानों की तरह,
शहंशाह खुद को जहाँ का बना लिया है.

जाम पर जाम टूट कर बिखर गए कितने,
महकती शाम के दीवाने हो गए कितने.
मदहोशी के आलम में अब होश नहीं अपना,
जाना है घर पता मयखाने का दिया है.

++++++++++













गुरुवार, 16 मार्च 2017

फागुनी बहार होली में - ब्लॉग बुलेटिन

नमस्कार साथियो,
सभी को होली की भंगाभंग अरररे, मेरा मतलब है कि होली की रंगारंग शुभकामनायें. जुबान तो बिना भांग के ही फिसल गई. असल में होली का हुडदंग और उस पर चुनावी चक्कर तो जुबान भी चक्कर खा गई. अरे भाई, इसमें हंसने वाली बात नहीं है. एक अच्छा भला आदमी गीली जगह पर जरा सी लापरवाही पर फिसल जाता है, ये बेचारी जुबान तो चौबीसों घंटे गीली रहती है, अब फिसल गई तो फिसल गई. हाँ तो जी, होली तो हो ली, अब? अब क्या, अब चुनावी चकल्लस खेली जा रही है. कहीं बहुमत है तो नेता नहीं, कहीं नेता है तो बहुमत नहीं. कहीं सीट ही नहीं है तो कहीं सीट पर बैठने वाले लोग नहीं हैं. कुछ इधर से भागकर उधर आये हैं, कुछ उधर से भागकर इधर आये हैं. कोई किसी व्यक्ति को दोष दे रहा है तो कोई मशीन को. जीतने वाले भी, हारने वाले भी सबके सब ऐसी हरकतें कर रहे हैं जैसे बौरा गए हों. और ऐसा सही भी हो सकता है क्योंकि होली का ये पर्व, फागुन का ये मौसम ऐसा मतवाला होता ही है कि अच्छे-अच्छों को बौरा देता है. कहते हैं न कि इस मौसम में बहुएँ भी भौजाई दिखाई देती हैं, बूढ़े भी जवान हो जाते हैं. इसी बौराएपन में सभी की होली मस्ती से गुजरी होगी, जिनकी चुनावी परिणामों के चक्कर में नहीं गुजर पाई उनकी भी मस्ती बनी रहे, ऐसी अपेक्षा है. 


ऐसे ही हुल्लड़ भरे माहौल में एक मजाकिया स्वरचित अनुभव आप सबके साथ शेयर करते हुए आज की बुलेटिन आपके समक्ष प्रस्तुत है, लीजिये.
++
प्रकृति में छाई रही फागुनी बहार होली में।
हम निठल्लों से पड़े रहे बेकार होली में।।
     संग के हमारे साथी रंगीन हो गये।
     हम तो बस ढूँड़ते रहे अपना यार होली में।।
करने को गाल लाल नया चेहरा मिले कोई।
एक भाभी को रंगेंगे कितनी-कितनी बार होली में।।
     निकल पड़े साइकिल से गलियों की खाक छानने।
     हो गया एक हसीन मुखड़े का दीदार होली में।।
नई थी मंजिल साथी भी नया-नया था।
रंगने को उसे कई तरीके बनाये जोरदार होली में।।
     कहीं गुलाल था उड़ता कहीं अबीर था घुला।
     हो रही थी हर ओर रंगों की बौछार होली में।।
बड़े धड़कते दिल से हाथों में रंग लिए हम।
पहुँचे नये साथी को रंगने उसके द्वार होली में।।
     दिल में डर का पुलिंदा बाँधे जोश में आगे बढ़े।
     हो गया उसकी अम्मा से सामना जारदार होली में।।
बँध गई घिग्घी डर से गुड़गोबर सब हो गया।
बनने लगे उसी बेरुखे चेहरे पर चित्रकार होली में।।
     होली के रंग में सराबोर तब तारे नजर आने लगे।
     पड़ी जब उसके बाप से जूतों की मार होली में।।
चमड़ा पदक प्राप्त करते देख मुस्कराकर निहारा उसने।
कहा हो मानो न बुरा किसी बात का यार होली में।।
     रोते, पड़ते, फटेहाल घर को वापस हो लिए।
     सोचा पकड़ कान भाभी है अपनी सदाबहार होली में।।

++++++++++













मंगलवार, 14 मार्च 2017

ब्लॉगर होली मिलन ब्लॉग बुलेटिन पर

प्रिय ब्लॉगर मित्रों ,
प्रणाम |
 
आज हिन्दी ब्लॉगर मित्रों का एक होली मिलन समारोह आयोजित किया गया ... मजे की बात यह की इस आयोजन कोई कहीं भी आया गया नहीं ... फिर भी होली मिलन हो ही गया | देश - विदेश के लगभग ३३ ब्लॉगर मित्रों ने इस मे अपने अपने बंधु - बांधव और परिवार के साथ शिरकत की |

अब आप सोचे रहे होंगे कि कैसे !!??

तो देखिये यह चमत्कार कैसे हुआ !!
चित्र पर क्लिक कर बड़ा करें 
 ब्लॉग बुलेटिन की पूरी टीम की ओर से आप सभी को होली की हार्दिक मंगलकामनाएँ|
 

हैप्पी होली ... ;)
सादर आपका 
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~

कान्हा संग मनाये होली

ठाकुर जी को भोग

अतीत की होली के रंगीन आंचल की तलाश

यहाँ रंग कही गहराया है

538. जागा फागुन (होली के 10 हाइकु)

हमारी नव वर्ष आई है।

बुरा न मानो, होली है!

होली ठैरी होला ठैरा ठैरा तो ठैरा ठैरा ठैरा ठैरी छोड़ ठर्रा ठर्री क्यों कहना ठैरा

होली मुबारक.....

झमकोइया मोरे लाल !!

जोगीरा सारारारारा - जोगीरा सारारारारा....

~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~  
अब आज्ञा दीजिये ...

जय हिन्द !!!

रविवार, 12 मार्च 2017

होली के रंगों में सराबोर ब्लॉग बुलेटिन

नमस्कार साथियो
आप सभी को रंगोत्सव होली की हार्दिक शुभकामनायें.


होली के ठीक पहले देश के पाँच राज्यों के चुनाव परिणामों ने होली के साथ दीपावली मनाने का अवसर विजयी दलों के समर्थकों को उपलब्ध करवा दिया है. वर्तमान चुनाव परिणामों ने आश्चर्यजनक स्थितियों को जन्म दिया है. मतदाताओं ने उत्तर प्रदेश में इस बार प्रचंड बहुमत दिया, ये अपने आपमें आश्चर्य का विषय है. इसके अलावा प्रदेश के अन्य दो दल, जो कि जातिगत, धर्मगत आधार पर राजनीति करने के लिए जाने जाते हैं, वे आशा के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर सके. भले ही यही अंतिम निष्कर्ष न कहा जाये किन्तु इतना तो दिखाई दे रहा है कि प्रदेश के मतदाताओं ने इस बार जाति, मजहब को नाकारा ही है.


इसके अलावा यदि मणिपुर के चुनावों पर निगाह डालें तो वहाँ एक आश्चर्यजनक घटना ये हुई की विगत सोलह वर्षों से चले आ रहे अनशन को समाप्त करके राजनीति में उतरने वाली इरोम शर्मिला को महज नब्बे मत प्राप्त हुए. क्या समझा जाये इसे? क्या मणिपुर के मतदाताओं ने इरोम को नकार दिया? क्या वहाँ की जनता उस कानून के पक्ष में है जिसका विरोध इरोम करती रही हैं? क्या नक्सलियों का कोई खौफ इन चुनावों में इरोम को इतने कम मत दिलाने का कारक बना?


बहरहाल, चुनावों के सबके अपने-अपने आकलन होते हैं. अपने-अपने तर्क होते हैं. इस तर्क-वितर्क से इतर आकर रंगोत्सव का आनंद लिया जाये. रंग-बिरंगी होली के इस पर्व पर कोई प्रवचन नहीं, कोई समाज-सुधार जैसी बात नहीं. बस, खूब आनंद उठायें होली का, रंगों का, गुझिया का, रिश्तों का, संबंधों का. कमी आजकल बस आनंद की हो रही है.

तो पुनः होली की शुभकामनाओं के साथ आज की बुलेटिन आपके समक्ष प्रस्तुत है.

++++++++++














गुरुवार, 24 मार्च 2016

ब्लॉग बुलेटिन पर ब्लॉगर होली मिलन

प्रिय ब्लॉगर मित्रों ,
प्रणाम |
आज हिन्दी ब्लॉगर मित्रों का एक होली मिलन समारोह आयोजित किया गया ... मजे की बात यह की इस आयोजन कोई कहीं भी आया गया नहीं ... फिर भी होली मिलन हो ही गया | देश - विदेश के लगभग ३३ ब्लॉगर मित्रों ने इस मे अपने अपने बंधु - बांधव और परिवार के साथ शिरकत की |

अब आप सोचे रहे होंगे कि कैसे !!??

तो देखिये यह चमत्कार कैसे हुआ !!
चित्र पर क्लिक कर बड़ा करें 
 ब्लॉग बुलेटिन की पूरी टीम की ओर से आप सभी को होली की हार्दिक मंगलकामनाएँ|

हैप्पी होली ... ;)
सादर आपका 

बुधवार, 23 मार्च 2016

शहादतपूर्ण होली को नमन - ब्लॉग बुलेटिन

नमस्कार मित्रो
आज का दिन, 23 मार्च अपने आपमें बहुत ख़ास है. आज शहीद दिवस है, लोहिया जी का जन्मदिन है और इस वर्ष आज ही होली मनाई जा रही है. ये बात तो सभी लोग जानते हैं कि लोहिया जी ने जमीनी राजनीति का एक मानक स्थापित किया और इसी के चलते वे आज भी राजनीति में एक स्तम्भ के रूप में स्वीकारे जाते हैं. लोहिया जी के बारे में इस तथ्य को भी सभी को ज्ञात होना चाहिए कि उन्होंने ने अपना जन्मदिन कभी इसलिए नहीं मनाया क्योंकि इसी दिन भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव को फाँसी दी गई थी. ये अपने आपमें उनके प्रति लोहिया जी की श्रद्धांजलि है. एक तरफ राजनीति में ऐसे प्रेरक व्यक्तित्व हैं दूसरी तरफ वर्तमान में ऐसे राजनैतिक व्यक्तित्व हैं जो शहीद भगत सिंह के सापेक्ष देशद्रोही मामले के आरोपी को खड़ा कर रहे हैं. जेएनयू मामले में देशद्रोह के आरोपी कन्हैया, जो सशर्त जमानत पर रिहा होने के बाद से केंद्र सरकार-विरोधी तत्त्वों द्वारा जबरिया हीरो बनाया जा रहा है, के देशद्रोही होने न होने को अदालत में साबित किया जायेगा किन्तु जिस तरह से उसे भगत सिंह के समान बताया गया वो निंदनीय है. एक पल को कन्हैया-समर्थकों की इस दलील को स्वीकार भी लिया जाये कि जेएनयू में लगने वाले देश-विरोधी नारों में उसकी सहभागिता नहीं थी; माना कि उसने नारे नहीं लगाये थे मगर इस बात से किसी को इनकार नहीं है कि उस शाम उस संस्था में देश-विरोधी नारे लगे; देश की बर्बादी के नारे लगे; अफज़ल को शहीद घोषित करने के नारे लगे. ठीक इसी बिंदु पर आकर कन्हैया-समर्थकों से मात्र एक सवाल कि यदि ऐसे नारे भगत सिंह के सामने लगे होते तो उनकी प्रतिक्रिया क्या होती?



ऐसे हालात में अक्सर दिमाग संज्ञा-शून्य हो जाता है कि आखिर देश की राजनीति, राजनीतिज्ञ किस दिशा में जा रहे हैं? सरकार-विरोध, प्रधानमंत्री-विरोध करते-करते ये लोग देश-विरोध में संलिप्त हो गए हैं. कितनी बड़ी विडम्बना है कि एक तरफ पाकिस्तान में भगत सिंह की सजा के विरोध में अदालत में सुनवाई पुनः आरम्भ कर उनके प्रति सम्मान प्रदर्शित किया जा रहा है, दूसरी तरफ यहाँ भारत में किसी भी ऐरे-गैरे से उनकी समानता कर भगत सिंह का अपमान किया जा रहा है. लोगों का शांत रह जाना ऐसे माहौल को और बल देता है. काश कि लोग अपनी-अपनी ख़ामोशी को तोड़कर देश-विरोधी ताकतों को मुंहतोड़ जवाब दें.

अंत में शहीदों को नमन करते हुए आप सभी को पावन पर्व होली की शुभकामनाओं सहित आज की बुलेटिन आपके समक्ष पेश है.

++++++++++











सोमवार, 17 मार्च 2014

ब्लॉग बुलेटिन पर हिन्दी ब्लॉगर मित्रों का होली मिलन

प्रिय ब्लॉगर मित्रों ,
प्रणाम |

आज हिन्दी ब्लॉगर मित्रों का एक होली मिलन समारोह आयोजित किया गया ... मजे की बात यह की इस आयोजन कोई कहीं भी आया गया नहीं ... फिर भी होली मिलन हो ही गया | देश - विदेश के लगभग ३३ ब्लॉगर मित्रों ने इस मे अपने अपने बंधु - बांधव और परिवार के साथ शिरकत की |

अब आप सोचे रहे होंगे कि कैसे !!??

तो देखिये यह चमत्कार कैसे हुआ !!

चित्र पर क्लिक कर बड़ा करें 
 ब्लॉग बुलेटिन की पूरी टीम की ओर से आप सभी को होली की हार्दिक मंगलकामनाएँ|


हैप्पी होली ... ;)

सादर आपका 

रविवार, 16 मार्च 2014

होली की हार्दिक मंगलकामनाएँ - ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |

आप सभी को होली की हार्दिक मंगलकामनाएँ |

सादर आपका 
========================

103. 'सम्मत'

हास्यकविता/ जोरू का गुलाम

देश में भीषण महिला सशक्तिकरण हो रहा है ......

होली हाइकु

बड़ी मुश्किल है भाई…....

होली की असीम शुभकामनायें

रंग रंगीली होली आई.

काल की चक्र-गति

तुम्हारे नाम हस्ताक्षर

होली में मज़हब का रंग!

छन्न पकैया छन्न पकैया [होली

========================

अब आज्ञा दीजिये ...

जय हिन्द !!!

रविवार, 24 मार्च 2013

होली आई रे कन्हाई पर संभल कर मेरे भाई - ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय ब्लॉगर मित्रों ,
प्रणाम !

रंगों के त्योहार होली में अब कुछ ही वक्त बचा है। ऐसे में जरूरी है कि आपको इस बात की जानकारी हो कि इस दौरान आपको किस तरह की सावधानियां बरतनी हैं। होली के दौरान खतरनाक रंग और गुलाल से बचने के साथ-साथ खाने पीने के दौरान भी सचेत रहने की जरूरत है। इसके अलावा इस दिन शराब या भांग का सेवन करने से बचें और जितना हो सके सूखे रंगों से होली खेलें। खतरनाक रंगों से होने वाली स्कीन की परेशानियों को ध्यान में रखते हुए बेहतर होगा कि ऐसे कपड़े पहनें, जिनसे शरीर का ज्यादा से ज्यादा हिस्सा ढका हुआ रहे। बालों को बचाने के लिए सिर पर कैप लगाएं या कपड़ा बांध लें। बेहतर होगा कि होली खेलने से पहले सिर से लेकर पैर तक कोई ऑयल या माश्चराइजर लगा लें।
 
होली के कलर में क्या होता है जानिए :-

हरा रंग - हरे रंग में कापर सल्फेट मिला होता है, जिससे स्किन और आंखों में एलर्जी हो सकती है। दमे के मरीजों के लिए भी यह खतरनाक साबित हो सकता है।
 
सिल्वर और गोल्डन कलर - इसमें एल्युमिनियम ब्रोमाइड होता है। इससे स्किन और लंग कैंसर हो सकता है।  

लाल रंग - इस कलर में मरक्यूरी सल्फाइट होता है जो बेहद जहरीला होने के साथ-साथ स्कीन के लिए बेहद खतरनाक होता है। इससे आंखों की रोशनी तक छिन सकती है।
 
खतरनाक हो सकता है गुलाल -
गुलाल में सिलिका या एस्बेस्टस का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें चमक देने के लिए बारीक कांच भी मिलाया जाता है। इससे स्किन एलर्जी हो सकती है। ये रंग त्वचा, आंख और मुंह के जरिए शरीर के अंदर चले जाते हैं और फिर खतरनाक साबित होते हैं।

दिल के मरीजों के लिए खास टिप्स -
- शराब या भांग का नशा करने से बचें। इनसे ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है, जो होली के रंग को फीका कर सकता है।
- अधिक भागदौड़ से बचकर रहें क्योंकि यह आपकी सेहर पर भारी पड़ सकता है।
- तली हुई चीजों को खाने से परहेज करें।
- दिल के मरीज होली के हुल्लड़ में शामिल होने से पहले अपनी दवाएं लेना न भूलें।

तो साहब इस आलेख मे दी गई इन बातों का रखें ख्याल और मनाएँ होली बिंदास !!

सादर आपका

शिवम मिश्रा
======================

किताबें बहुत पढी होंगी तुमने ,कभी कोई चेहरा भी तुमने पढा है

इलेक्ट्रोनिक मीडिया का भी अजब हाल है !!

चमक रही है परों में उड़ान की खुश्बू....

रचना आभा को आंसू न आने की टेंशन और नयी भाषा से जूझती रंजू भाटिया

चर्चामंच, वटवृक्ष, ब्लाग4वार्ता पर चली कैंची !

भला कैसे...

इन पर कौन सा एक्ट लगेगा ?

लीजिये, बाँट ही दी उपाधियाँ... भाई, बुरा न मानो होली है ssssss

परिकल्पना की होली

हिंदी साहित्य और छायावाद की दीपशिखा -कवयित्री महादेवी वर्मा और उनकी कविताएँ

सता के मारा

======================

अब आज्ञा दीजिये ...

जय हिन्द !!!

मंगलवार, 19 मार्च 2013

होली तेरे रंग अनेक - ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय ब्लोगर मित्रों ,
प्रणाम !

भारत, नेपाल व मॉरिशस समेत दुनिया के कई देशों में रंगों का त्योहार होली बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। हिंदुओं का यह त्योहार फागुन महीने के अंत और चैत्र मास के शुरुआत में मनाया जाता है। रंगों का यह त्योहार हर उम्र के लोगों के बीच जमकर खेला जाता है। भारत में लगभग हर राज्यों में खेले जाने वाला यह त्योहार अलग-अलग नामों से जाना जाता है। आइए जानते हैं कि होली देश में किन-किन नामों से खेली जाती है।
 
फगुआ: बिहार व पूर्वी उत्तर प्रदेश में होली का त्योहार बहुत उत्साह से मनाया जाता है और इसे यहां पर फगुआ के नाम से पुकारा जाता है। इस दिन होलिका दहन के बाद से ही होली खेली जाती है। पुरुष व महिला के अलावा बच्चे अपनी-अपनी टोली बनाकर दोपहर तक होली खेलते हैं। फिर शाम को लोग अपने-अपने परिचितों के पास मिलने पहुंचते हैं और एक-दूसरे को अबीर या गुलाल लगाते हैं। होली के लिए घरों में कई दिन पहले से ही लजीज पकवान बनने शुरू हो जाते हैं। गुझिया इस त्योहार का सबसे लोकप्रिय व्यंजन है। पुणे में होली को फाल्गुन पूर्णिमा के नाम से जानते हैं।
 
दुलंडी: हरियाणा में होली को दुलंडी के नाम से जाना जाता है। यह त्योहार यूं तो हर किसी के लिए खास होता है लेकिन भाभी और देवर के लिए यह दिन कुछ ज्यादा ही मनोरंजक होता है। इस दिन भाभी की खूब चलती है और वह अपने पति के छोटे भाई यानी देवर को अपना निशाना बनाती है और मजाकिया अंदाज में जमकर धुनाई करती है। जबकि शाम को देवर अपनी भाभी को खुश करने के लिए गिफ्ट के रूप में मिठाई लाता है। यह दिन भाभी-देवर के रिश्ते को और मजबूती प्रदान करता है। इसके अलावा हरियाणा में कई जगह मटकी भी फोड़ी जाती है। मटकी फोड़ने के लिए लोग एक पिरामिड बनाते हैं और मिट्टी से बने घड़े को जिसमें दही व मक्खन रखा होता है को तोड़ते हैं। फिर प्रसाद स्वरूप इसे सभी में बांटते हैं।
 
रंग पंचमी: महाराष्ट्र में होली आमतौर पर रंग पंचमी के नाम से मनाई जाती है। इसे शिमगो या शिमगा के भी नाम से जाना जाता है। यह त्योहार होली के पांच दिन बाद मनाया जाता है जो मछली पकड़ने वाले लोगों [मछुआरों] के बीच खासा लोकप्रिय है। इस त्योहार में रंगों के अलावा लोग जमकर नाच, गाना और आमोद-प्रमोद करते हैं। महाराष्ट्र के अलावा मध्य प्रदेश में भी यह खासा हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।
 
बसंत उत्सव: देश के पूर्वी राज्य पश्चिम बंगाल में इस त्योहार को हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है लेकिन वहां पर इसे बसंत उत्सव के नाम से जाना जाता है। बसंत उत्सव की परंपरा महान कवि और नोबेल पुरस्कार विजेता रविंद्र नाथ टैगोर ने शांतिनिकेतन विश्वविद्यालय की स्थापना के दौरान की थी। इससे पूर्व लड़के-लड़कियां वसंत ऋतु का स्वागत गर्मजोशी से करते हैं। इस दौरान वे न सिर्फ रंग से बल्कि नाच, गाने के साथ नई ऋतु का स्वागत करते हैं।
 
ढोल पूर्णिमा: पश्चिम बंगाल में होली को एक अन्य नाम ढोल पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। इस दिन छात्र केसरिया रंग के कपड़े पहने होते हैं साथ ही सुगंधित फूलों से बनी माला भी धारण किए होते हैं। ये लोग दर्शकों के सामने वाद्य यंत्रों के साथ मनमोहक कार्यक्रम पेश कर उनका मन मोह लेते हैं। इस त्योहार को ढोल जतरा के नाम से भी जाना जाता है। कुछ जगहों पर शहर के मुख्य चौराहे पर भगवान कृष्ण व राधा की मूर्ति रखकर होली खेली जाती है। इस दौरान पुरुष रंगीन पानी और अबीर को एक-दूसरे पर फेंकते हैं।
 
लठमार होली: सर्वाधिक लोकप्रिय होलियों में से एक है लठमार होली। यह होली मथुरा के बरसाने में खेली जाती है जिसमें महिलाएं इस दिन पुरुषों को लाठियों से मारती हैं। हालांकि इस हिंसा में भी एक तरह से मनोविनोद होता है। बरसाना भगवान कृष्ण की प्रेमिका राधा की जन्मस्थली है। कृष्ण राधा और गोपियों संग यहीं पर रासलीला खेलते थे। ऐसी मान्यता है कि इस होली को निहारने के लिए तैंतीस कोटि देवता भी बरसाना आते हैं। इसकी शुरुआत के बारे में माना जाता है कि करीब पांच सौ साल पहले ब्रज उद्धारक व रासलीलानुकरण के आविष्कारक श्रील नारायण भट्ट ने लठामार होली शुरू कराई थी। मुगलकाल में हिंदू महिलाओं की लाज की रक्षा एक यक्ष प्रश्न था। नारायण भट्ट ने हिंदू नारियों को अबला से सबला बनाने के लिए इस लीला के माध्यम से महिलाओं को आत्म रक्षा के लिए तैयार किया था। लठमार होली का सबसे पहले उल्लेख नारायण भट्ट रचित 'भक्ति प्रदीप' व 'भक्तिरस तरंगिणी' पुस्तकों में मिलता है।
 
होला मोहल्ला: पंजाब में हर्षोल्लास के इस त्योहार को होला मोहल्ला के नाम से मनाया जाता है। होली के दिन आनंदपुर साहिब में मनाए जाने वाला यह एक वार्षिक त्योहार है। सिखों में आपसी सद्भाव बनाए रखने के लिए सिखों के 10वें गुरु गोविंद सिंह ने इस परंपरा की शुरुआत की थी। तीन दिनों तक इस त्योहार को मनाया जाता है। इस दिन आनंदपुर साहिब आने वाले श्रद्धालुओं के लिए लंगर की भी व्यवस्था की जाती है।
शिमगो: होली को गोवा में शिमगो के नाम से जाना जाता है। होली को स्थानीय कोंकणी भाषा में शिमगो कहा जाता है। यहां पर लोग रंगों के साथ जमकर खेलते हैं और वसंत का स्वागत करते हैं। इस दौरान गोवा के लोग चावल, स्पाइसी चिकन या मटन करी जिसे शागोटी कहा जाता है बनाते हैं साथ ही मिठाई भी बनाते हैं। यहां पर भी कुछ जगह लोग रंगपंचमी के नाम से जानते हैं।
 
कामन पंडिगई: तमिलनाडु में लोग होली को कामदेव के बलिदान के रूप में याद करते हुए मनाते हैं। यहां पर होली को तीन अन्य नामों कमान पंडिगई, कामाविलास और कामा-दाहानाम के नाम से भी जानते हैं। भगवान शिव और कामदेव पर तमिलनाडु के लोगों की अगाध श्रद्धा है। अनुश्रुतियों के अनुसार सती देव की आत्महत्या के बाद शिव बहुत दुखी हो गए थे और गहरी साधना में चले गए। शिव के क्रोध से हर कोई वाकिफ था इसलिए कोई भी उनकी साधना से उन्हें रोक नहीं सका। इस बीच पर्वत की पुत्री पार्वती ने शिव को पति के रूप में पाने के लिए तपस्या शुरू कर दी। शिव अपने पुराने रूप में प्रेम के देवता कामदेव के प्रयास से आ सके। अन्य देवगणों के अनुरोध पर शिव का ध्यान भंग करने और उन्हें पुराने रूप में लाने की चुनौती कामदेव ने स्वीकार कर ली। कामदेव ने जब गहरे ध्यान में व्यस्त शिव का ध्यान तोड़ने की कोशिश की तो इससे नाराज शिव ने अपनी तीसरी आंख खोल दी जिससे कामदेव वहीं पर जल कर नष्ट हो गए। लेकिन इससे पूर्व शिव को कामदेव का प्रेमरूपी वाण लग चुका था जिससे उनका मन बदल गया और पार्वती से विवाह करने को राजी हो गए। तमिलनाडु में होली के दिन जो गाने गाए जाते हैं उसमें कामदेव की पत्नी रती के गहरे दुख और जलने के दौरान गहरी पीड़ा से कराहते कामदेव का वर्णन जरूर रहता है। लोगों में ऐसी मान्यता है कि कामदेव होली के दिन पुन: अवतरित होते हैं इसलिए उनके नाम पर होली मनाई जाती है।
 
बनारस की होली: बनारस में एकादशी तिथि के दिन से ही अबीर-गुलाल हवा में लहराने लगते है। बनारस की होली में युवकों की टोलियां फाग के गीत गाती, ढोल, नगाडों की थाप पर नाचती नजर आती है। यहां की होली की परंपरा के अनुसार बारात निकाली जाती है। जिसमें दुल्हा रथ पर सवार होकर आता है, बारात के आगमन पर दुल्हे का परंपरागत ढंग से स्वागत किया जाता है, मंडप सजाया जाता है, सजी धजी दुल्हन आती है। मंडप में दुल्हा दुल्हन की बहस होने के साथ बारात को बिना दुल्हन के ही लौटना पड़ता है। इस प्रकार यहां एक अलग तरीके से होली मनाई जाती है। काशी के घाटों पर भंग के साथ चढ़े होली रंगों की छठा देखते ही बनती है। 


सादर आपका 


=======================================  
 

धमेख स्तूप सारनाथ

देवेन्द्र पाण्डेय at चित्रों का आनंद

क्या मै कुफ्र बोलती हूँ -------

क्या मै कुफ्र बोलती हूँ -------------------------- चुप सुनसान रातों मे ख्यालों के रेशमी धागों से रोज़ रोज़ --------- ओढ़नी सीती हूँ ---- काले पड़े सितारों को उधेड़ती हूँ बार बार जानते हो पुरानी सीवन खोलने मे हाथ ही नहीं आत्मा भी जख्मी हो जाती है रिसता रहता है खून -------- रात मद्धम सुरों में गुनगुनाती है आधे चाँद के टूटे प्याले में गरम चांदनी उड़ेल आँख मूंद के --- मै घूंट घूंट पीती हूँ और वो ----- पुराने गोटे जो बरसों से चुभ रहे थे आत्मा मे उन्हें मैने उन्हें निकाल कर सालों पहले ही दफना दिया था साथ ही वो सब कुछ भी जो किस्मत कह कर पोटली में मुझे थमाया था मेरे अपनों ने ------------ वो मेरी ... more »

आधुनिक भारत की एक वीरांगना जिसने इस्लामिक आतंकियों से लगभग 400 यात्रियों की जान बचाते हुए अपना जीवन बलिदान कर दिया।

भारत योगी at BharatYogi.net * भारत योगी*
[image: @[339734349388824:274:I am Indian (Hindustani)] 5 सितम्बर 1986 को आधुनिक भारत की एक वीरांगना जिसने इस्लामिक आतंकियों से लगभग 400 यात्रियों की जान बचाते हुए अपना जीवन बलिदान कर दिया। भारत के कितने नवयुवक और नवयुवतियां उसका नाम जानते है।?? कैटरिना कैफ, करीना कपूर, प्रियंका चोपड़ा, दीपिका पादुकोण, विद्या बालन और अब तो सनी लियोन जैसा बनने की होड़ लगाने वाली युवतियां क्या नीरजा भनोत का नाम जानती हैं। नहीं सुना न ये नाम। मैं बताता हूँ इस महान वीरांगना के बारे में। 7 सितम्बर 1964 को चंडीगढ़ के हरीश भनोत जी के यहाँ जब एक बच्ची का जन्म हुआ था तो किसी ने भी नहीं सोचा था कि भारत का सबस... more »

विज्ञापन - अर्थ का अनर्थ

निवेदिता श्रीवास्तव at झरोख़ा
* **कभी आपने सोचा है कि वो कौन सी चीज है जो सुबह आँखे खुलने से लेकर एकदम बेसुध हो कर सो जाने तक भी आपका पीछा नहीं छोड़ती ..... नि:संदेह वो इकलौती चीज है विज्ञापन ! * * **नींद खुलते ही निगाहें ,अपनेआप ही किसी ख़ास चेहरे की तलाश करती हैं ! जानते हैं क्यों , क्योंकि "उसका चेहरा हमारे लिए लकी है "..... याद आया न एक साबुन का विज्ञापन ! वैसे ये तो मैं भी करती हूँ । आँखें बंद किये हुए ही अपना सेलफोन खोजती हूँ कि पहली निगाह बच्चों की तस्वीर पर ही पड़े :) दांतों को साफ़ करते समय भी आत्मविश्वास बढ़ता हुआ महसूस होता है , भई हमारी क्या गलती विज्ञापन तो यही कहता है । चाय बिस्किट से लेकर दाल - ... more »

एक दिन "लेखनी सानिध्य" में ...

shikha varshney at स्पंदन SPANDAN
मार्च ख़तम होने को है पर इस बार लन्दन का मौसम ठीक होने का नाम ही नहीं ले रहा। ठण्ड है कि कम होने को तैयार नहीं और ऐसे में मेरे जैसे जीव के लिए बहुत कष्टकारी स्थिति होती है। पैर घर में टिकने को राजी नहीं होते और मन ऐसे मौसम में बाहर निकलने से साफ़ इनकार कर देता है। ऐसी परिस्थितियों में अगर कहीं से निमंत्रण आ जाये तो मैं अपने मन को बहाना देकर ठेलने में कामयाब हो जाया करती हूँ। आखिर यही हुआ। बर्मिंघम में रहने वाली साहित्यकार, शैल अग्रवाल (लेखनी डॉट नेट वाली ) जी का सस्नेह आग्रह आ पहुंचा कि 17 मार्च रविवार को एक काव्य गोष्ठी रख रही हूँ कुछ लोगों के साथ। अपनी पसंदीदा कविताओं के साथ आ जाओ... more »

होली, आसाराम और गाली !!!

एक हैं आसाराम बापू। वैसे तो ये संत हैं, पर ज्यादातर चर्चा अपने विवादास्पद कार्यों और बयानों को लेकर रहते हैं। उनके आश्रमों की अव्यवस्था को लेकर खबरें आएं या फिर देश में और भी कोई घटना हो, ये अपना एक अलग ही तर्क रखते हैं और जब उनके तर्कों को लेकर सवाल खड़ा होता है तो वे गालियां बकने लगते हैं। उनका सबसे पहला टारगेट होता है मीडिया। मीडिया को कोसने, गाली बकने का वो कोई अवसर नहीं छोड़ते और खुद को बड़ा संत बताने वाले ये सज्जन अपनी जुबान से खुद को काफी छोटा कर देने से भी परहेज नहीं करते। ताजा मामला है महाराष्ट्र में उनकी होली का। आसाराम बड़े रंगीन शख्सियत हैं। उनका प्रिय त्यौहार होली है।... more »

युद्ध

जीवन जैसा वो है उसे वैसा स्वीकार करने से बड़ी आपदा कोई नहीं. हालांकि हर समझदार व्यक्ति यही सलाह देता है कि जीवन के सत्य को स्वीकार करो. शांति तभी संभव है. तो भाई, शांति नहीं चाहिए. आप समझदार, ज्ञानी लोग अपनी शांति अपने पास ही रख लो. हम तो मूरख, अज्ञानी ही भले. क्योंकि जीवन जैसा वो है वैसा मुझे स्वीकार नहीं. संभवतः यही वजह है कि युद्ध मुझे पसंद हैं. प्रतिरोध पसंद हैं. युद्ध वो नहीं जो सीमा पर लड़े जाते हैं. युद्ध वो जो अपने भीतर लड़े जाते हैं. जिसमें किसी का बेटा, किसी का भाई किसी का पिता या किसी का प्रेमी शहीद नही होते बल्कि जिसमें हर पल हम खुद घायल होते हैं और अक्सर शहीद होने से ... more »

जीवनदान देती है, देती रहेगी !!!

सदा at SADA
जिन्‍दगी को बेखौफ़ होकर जीने का अपना ही मजा है कुछ लोग मेरा अस्तित्‍व खत्‍म कर भले ही यह कहने की मंशा मन में पाले हुये हों कभी थी, कभी रही होगी, कभी रहना चाहती थी नारी उनसे मैं पूरे बुलन्‍द हौसलों के साथ कहना चाहती हूँ, मैं थी, मैं हूँ, मैं रहूँगी .... न्‍याय की अदालत में *गीता* की तरह जिसकी शपथ लेकर लड़ी जाती है हर लड़ाई - सत्‍य की, जहाँ हर पराज़य को विजय में बदला जाता है .... गीता धर्म की अमूल्‍य निधि है जैसे वैसे ही मेरा अस्तित्‍व नदियों में गंगा है, मर्यादित आचरण में आज भी मुझे सीता की उपमा से सम्‍मानित किया जाता है धीरता में मुझे सावित्री भी कहा है तो हर ... more »

ब्रेक-अप ...

उदय - uday at कडुवा सच ...
सच ! जिस्म से रूह निकल रही है मेरे तनिक और ठहर जाओ तो सुकूं मिले ? ... न कद है न काठी है, न दिमाग है न खुबसूरती फिर भी, .......................... वो सरकार हैं ? ... अब जब ब्रेक-अप हो ही रहा है तो हिसाब-किताब पूरा कर लो कहीं ऐंसा न हो, दो-चार चुम्बन तुम्हारे हमारे पास रह जाएँ ? ... जनता को मिर्गी की बीमारी है, या सत्ताधारियों को कोई तो बताये 'उदय', हम जूता सुंघायें किसे ???? ... आओ किसी पुरानी बात को याद कर के ठहाके लगा लें वर्ना अब, ............. ठहाकों की वजहें मिलती कहाँ हैं ? ...

तनाव मुक्ति के उपाय

सुज्ञ at सुज्ञ
- एक बार की गई गलती दुबारा न हो। - अपनी तुलना दूसरों के साथ न करें। - वर्तमान को श्रेष्ठ बनाने का पुरूषार्थ करें। - 'सबक' सिखाने की मानसिकता का त्याग करें। - 'जैसे को तैसा' जवाब, अन्तिम समाधान नहीं है। - बदला न लो स्वयं को बदलो। - जहाँ तक सम्भव हो सभी के सहयोगी बने रहें। - निंदा करने वाले को अपना मित्र मानें। - ईर्ष्या न करें, समता धारण करें। - अहंकार को त्यागो, विनम्रता धारण करो। - जिस परिस्थिति में आप परिवर्तन नहीं ला सकते, संयोग पर छोड़ दो। - चिंताएँ छोड़ो, मात्र चिंता से कोई समाधान नहीं होना है। संतोष धारण कर लो। - यदि मन स्वस्थ रहे तो सभी ... more »

बरसों का साथ

डॉ. मोनिका शर्मा at परवाज़...शब्दों के पंख
बरसों का साथ बहुत कुछ देकर सदा के लिए छीन लेता है आपसी संवाद स्थायी संबंधों की सामाजिक रुपरेखा जीवित रहती है पर शब्द खो जाते है शेष रह जाती है औपचारिकता संबंधों को निभाने की मन की नहीं जगत की सुनने-सुनाने की निश्चित हो जाती हैं परिसीमायें पसर जाते हैं अनचाहे सन्नाटे जो भेद जाते हैं कहीं भीतर तक सिमट जाते हैं ह्रदय के यथार्थ भाव जन्म-जन्मान्तर के साथ में जीवन चलनशील रहता है और भावनाएं गतिहीन हो जाती हैं तब संवेदनाओं को घर के आहाते में आजीवन कारावास मिलता है विस्मृति और शब्दाभाव की इन परिस्थितियों में अपनी ही चुप्पी से रिश्ता जुड़ जाता है और मौन के साथ बना सम्बन्ध ही तल्लीनता से निभाया जा... more »
 =======================================
अब आज्ञा दीजिये ...

जय हिन्द !!!

लेखागार