आज हिंदी सिनेमा के मशहूर अभिनेता, निर्माता - निर्देशक और अगर एक शब्द में कहे तो हिंदी सिनेमा के "शो मैन"राज कपूर (14 दिसंबर, 1924 - 2 जून, 1988)जी का जन्म दिवस है और आज ही हिंदी सिनेमा के प्रसिद्ध गीतकार शैलेन्द्र (30 अगस्त, 1923 - 14 दिसंबर, 1966) जी की पुण्यतिथि भी है। इन दोनों ही महान हस्तियों का भारतीय सिनेमा में निसंदेह ही महान योगदान रहा है। इन दोनों ने ही मिलकर हिंदी सिनेमा को कई बेहतरीन फ़िल्में और गीत दिए है। आवारा, श्री 420, अनाड़ी और संगम जैसी बेहतरीन फ़िल्में और इन फिल्मों के कई प्रसिद्ध गीतों में इन दोनों ने मिलकर काम किया है।
आज इन दोनों महान हस्तियों को पूरा हिंदी ब्लॉगजगत और ब्लॉग बुलेटिन की टीम हार्दिक श्रद्धांजलि अर्पित करती है। सादर।।
भारतीय सिनेमा को एक से बढ़कर नायाब फिल्में देने वाले पहले शोमैन बचपन के दिनों से अभिनेता बनना चाहते थे, उनके पिता पॄथ्वी राज कपूर को विश्वास ही नहीं था कि राज कपूर कोई अच्छा काम कर पाएंगे इसके लिए उन्होंने सहायक या क्लैपर ब्वाय जैसे छोटे काम में लगवा दिया था। लेकिन अपनी लगन और अपने जुझारुपन के कारण हिन्दुस्तान की फ़िल्म इंडस्ट्री नें अपना पहला शो-मैन देखा। पृथ्वीराज कपूर ने अपने पुत्र राज को केदार शर्मा की यूनिट में क्लैपर बॉय केरूप में काम करने की सलाह दी। फिल्म की शूटिंग के समय वह अकसर आइने के पास चले जाते थे और अपने बालो में कंघी करने लगते थे। कलैप देते समय इस कोशिश में रहते कि किसी तरह उनका भी चेहरा कैमरे के सामने आ जाये। एक बार फिल्म 'विष कन्या' की शूटिंग के दौरान राज कपूर का चेहरा कैमरे के सामने आ गया और हड़बडाहट में चरित्र अभिनेता की दाढी कलैप बोर्ड में उलझकर निकल गयी। बताया जाता है केदार शर्मा ने राज कपूर को अपने पास बुलाकर ज़ोर का थप्पड़ लगाया। हालांकि केदार शर्मा को इसका अफसोस रात भर रहा। अगले दिन उन्होंने अपनी नई फिल्म 'नील कमल' के लिए राज कपूर को साइन कर लिया। यह केदार शर्मा ही थे जिन्होनें राज कपूर मे छिपे कलाकार को ठीक समय पर पहचाना और उन्हे अपनी फ़िल्म में प्रमुख भूमिका के लिए लिया। राजकपूर फिल्मों मे अभिनय के साथ ही कुछ और भी करना चाहते थे। वर्ष 1948 में महज़ २४ वर्ष की अवस्था में आर.के.फिल्म्स की स्थापना कर 'आग' का निर्माण किया। राजकपूर सबसे कम उम्र के निर्माता और निर्देशक बनें और वर्ष 1952 में प्रदर्शित फिल्म 'आवारा', 'राज कपूर' के सिने करियर की अहम फिल्म साबित हुई। फिल्म की सफलता ने राज कपूर को अंतराष्ट्रीय ख्याति दिलाई। फिल्म का शीर्षक गीत 'आवारा हूं या गर्दिश में आसमान का तारा हूं' देश-विदेश में बहुत लोकप्रिय हुआ।
(शो-मैन राज कपूर)
राजकपूर के सिने करियर में उनकी जोड़ी अभिनेत्री नरगिस के साथ काफी पसंद की गई। राज कपूर ने अपनी बनाई फिल्मों के जरिए कई छुपी हुई प्रतिभा को आगे बढ़ने का मौका दिया इनमें संगीतकार शंकर जयकिशन गीतकार हसरत जयपुरी, शैलेन्द्र और पाश्र्वगायक मुकेश जैसे बड़े नाम शामिल है। मुकेश की आवाज़ तो मानों राज साहब की अपनी आवाज़ बन गई। हर फ़िल्म के लिए मुकेश की आवाज़ और शंकर जयकिशन का संगीत। उन दिनों एक अजीब सी प्रतिस्पर्धा बन चली थी। लक्ष्मीकांत प्यारेलाल राज साहब के साथ काम करना चाहते थे लेकिन शंकर जयकिशन के रहते उनका यह सपना सम्भव भी न था। बाद में उन्हे मौका मिला और उन्होनें राज साहब के लिए कई फ़िल्मों को संगीतबद्ध किया। वर्ष 1971 में राजकपूर ने फिल्म 'मेरा नाम जोकर' का निर्माण किया, आज इस फ़िल्म को हम क्लासिक का दर्ज़ा देते हैं लेकिन यह फ़िल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह नकार दी गई थी। अपनी फिल्म 'मेरा नाम जोकर' की असफलता से राज कपूर को गहरा सदमा पहुंचा। उन्हें काफी आर्थिक क्षति भी हुई। उन्होंने निश्चय किया कि भविष्य में यदि वह फिल्म का निर्माण करेंगे तो मुख्य अभिनेता के रूप में काम नहीं करेंगे। आरके के इस बैनर को बाबी के रूप में एक हिट मिली और ॠषि कपूर के रूप में एक नया नायक। राज कपूर को अपने सिने करियर में मान सम्मान खूब मिला। वर्ष 1971 में राज कपूर पदमभूषण पुरस्कार और वर्ष 1987 में हिंदी फिल्म जगत के सवोच्च सम्मान दादा साहब फाल्के पुरस्कार से भी सम्मानित किए गए। वर्ष 1985 में राज कपूर निर्देशित अंतिम फिल्म 'राम तेरी गंगा मैली' प्रदर्शित हुई।
राज साहब की फ़िल्में
1982गोपीचन्द जासूस
1982वकील बाबू
1981नसीब
1980अब्दुल्ला
1978सत्यम शिवम सुन्दरम
1978नौकरी
1977चाँदी सोना
1976ख़ान दोस्त
1975धरम करम
1975दो जासूस
1973मेरा दोस्त मेरा धर्म
1971कल आज और कल
1970मेरा नाम जोकर
1968सपनों का सौदागर
1967एराउन्ड द वर्ल्ड
1967दीवाना
1966तीसरी कसम
1964संगम
1964दूल्हा दुल्हन
1963दिल ही तो है
1963एक दिल सौ अफ़साने
1962आशिक
1961नज़राना
1960जिस देश में गंगा बहती है
1960छलिया
1960श्रीमान सत्यवादी
1959अनाड़ी
1959कन्हैया
1959दो उस्ताद
1959मैं नशे में हूँ
1959चार दिल चार राहें
1958परवरिश
1958फिर सुबह होगी
1957शारदा
1956जागते रहो
1956चोरी चोरी
1955श्री ४२०
1954बूट पॉलिश
1953धुन
1953आह
1953पापी
1952अनहोनी
1952अंबर
1952आशियाना
1952बेवफ़ा
1951आवारा
1950सरगम
1950भँवरा
1950बावरे नैन
1950प्यार
1950दास्तान
1950जान पहचान
1949परिवर्तन
1949बरसात
1949सुनहरे दिन
1949अंदाज़
1948अमर प्रेम
1948गोपीनाथ
1948आग
1947नीलकमल
1947चित्तौड़ विजय
1947दिल की रानी
1947जेल यात्रा
1946वाल्मीकि
1943गौरी
1943हमारी बात
1935इन्कलाब
राज साहब का ज़िक्र हो और उनके संगीत की बात न हो तो फ़िर बात कैसे बनें... लीजिए यू-ट्यूब के सौजन्य से आनन्द लीजिए.. किसी की मुस्कुराहटों पे हो निसार... वाकई जीना इसी का नाम है।
पूरे ब्लाग जगत की ओर से राज साहब को उनकी पच्चीसवी पुण्यतिथि पर नमन।
आज 2 जून है ठीक 24 साल पहले आज ही के दिन राज कपूर साहब का निधन हुआ था ... काफी छोटा था तब मैं ... पर इतना छोटा भी नहीं कि यह न समझ सकूँ कि भारतीय फिल्म जगत का मास्टर शोमैन अपना एक्ट पूरा कर जा चुका था सब से बड़े डाइरेक्टर के पास ... शायद किसी ओर स्क्रिप्ट पर काम करने ... क्यूँ कि वो जानता था ...
दा शो मस्ट गो ऑन ...
दा शो मस्ट गो ऑन ... !!!
रणबीर राज पृथ्वीराज कपूर (१४ दिसम्बर १९२४ - २ जून १९८८ )
"चाहे कहीं भी तुम रहो ... तुम को न भूल पाएंगे ... "
ब्लॉग बुलेटिन की पूरी टीम की ओर से मास्टर शौमैन राज कपूर साहब की २४ वी पुण्यतिथि पर उनको शत शत नमन !
*फ़ुरसत में … * *फ़ुरसत से मीठी यादें बांटते हुए! * *[image: salil]सलिल वर्मा* घर का बरामदा, बरामदे में लगी एक आराम कुर्सी, आरामकुर्सी के बगल में एक तिपाई, तिपाई पर चाय का प्याला, प्याले के पास प्लेट मे...
जून का दूसरा दिन और दो साल पूरे करने के बाद यह ब्लॉग अब अपने 3 रे वर्ष मे प्रवेश कर रहा है। 2010-11 की तुलना मे 2011-12 काफी कुछ सिखाने और दिखाने वाला रहा। ब्लॉग के बारे मे तकनीकी जानकारी मे वृद्धि हुई;और ...
*चैतन्य * चैतन्य तुम्हारा आना जीवन में नई चेतना ले आया है उग आये हैं कुछ नए विचार मेरे ह्रदय के आँगन में और मैं गर्वित हूँ कि संवेदनशीलता से फूटती ये वैचारिक कोंपलें अपनी जड़ें जमा रही हैं ...
आओ सुनाइए , तुम्हे भविष्य की कहानी चार छः बच्चो से घिरी, बुढ़िया नानी बच्चे बोले- नानी हमें सुनाओ कोई कहानी नानी बोली- एक था राजा, एक थी रानी बच्चे- नही सुन्नी ये घिसी-पिटी कहानी जो हमने न सुनी हो, सुना...
मोहल्ले भर की दीदी एक-दूसरे को कोहनी मारते हुए किसान सिनेमा ( बिहार शरीफ) में घुसती और हम जैसे उम्र में बहुत ही छोटा भाई चपरासी की तरह पीछे-पीछे. शादी के बाद पहली बार ससुराल आए जीजाजी के साथ सालियों का फिल...
*गिला किससे करूँ ,फरियाद भी कोई सुनता नही * *हूँ वक्त का, मुरझाया फूल ,जिसे कोई चुनता नही |* *--अकेला * समय का कालचक्र ....!!! मैं वो गुज़रे ज़माने की चीज़ हूँ जो रख के, कोने में भुला दी जाती है तब उस...
पिछले ९ सालों में उस बाज़ार के सारे भिखारी अब शक्ल से पहचाने जाने लगे हैं। वो बूढ़े दादा..जिनके पास गुदड़ियों का एक पूरा भंडार है। जिनकी दाढ़ी भी उलझ उलझ कर गुदड़ी ही बन गई है। वो तीखे नाक नक्श वाली उनकी गाढ़...
आप क्या सोचते हैं?अगर आपको पहले के किसी टाईमफ्रेम में जीने का अवसर मिले तो आप किस टाईमफ्रेम में जाना पसंद करेंगे?शायद अपने बचपन के टाईमफ्रेम में..या फिर अपने वैसे समय में जिसे आप अपना गोल्डन डेज मानते हैं...
" बातों से लग तो पूरा संपादक रहे हो लेकिन संपादकों सी मक्कारी कहाँ से लाओगे. हाँ....हाँ..( राजेश शर्मा ) बिल्कुल यही नाम था उस मक्कार का. विज्ञापनों में कहीं कोई कमी नहीं की. जगह-जगह उसने स्कूल खोला. लोगो...
भारतीय डाक विभाग डाक-टिकटों के क्षेत्र में नित नए और अनूठे प्रयोग कर रहा है. पिछले वर्षों में जहाँ चन्दन, गुलाब व जूही की सुगंध से सुवासित खुशबूदार डाक-टिकट और हालमार्क के साथ मिलकर सोने के डाक टिकट जारी ...
[image: 2012-05-29-628] मोबाइल अलार्म पर भूमि सूक्त बज उठा है: ...विश्वम्भरा वसुधा ....। पुरी। रात का अंतिम प्रहर 3:30। प्रथम प्रहर में पुरी तट की लहरों पर अठखेलियाँ करती अंग्रेजी कविता लुप्त हो चु...
दोस्तों, देश के सबसे मशहूर शो “सच का सामना” में आज आपकी मुलाकात एक ऐसे व्यक्ति से करायेंगे जो पैसों के लिए नहीं केवल शोहरत बटोरने आईं है । पेशे से जल बचाओ आंदोलन के अंतराष्ट्रीय ख्यातिलब्ध मोमबत्ती ब्र...
नेता-अभिनेता दोनों हो गए एक समान मंचों पर बैठकर गायें एक दूजे का गान। चिकनी चुपडी़ बातें करें खूब करें अपना बखान जनता का धन खूब लूटें गायें मेरा भारत महान। मँहगाई, बेरोजगारी खूब फैले नेताजी सोते चद्दर तान...
मैने दो दिन पूर्व अपनी पोस्ट धरती पर यमराज के एजेंट में डॉक्टरों द्वारा कम उम्र की महिलाओं को बीमारी का डर बता कर बच्चेदानी निकालने वाली घटना का जिक्र किया था। जिसमें मितानिनों की भूमिका की चर्चा भी की थी।...
पिछली पोस्ट में आपने पढ़ा , किस तरह हम ३६ साल बाद अपने पुराने निवास पर पहुंचे । अब आगे --- बंद खिड़की को देखकर हम डूब गए ख्वाबों ख्यालों में । याद आया किस तरह हम खिड़की खोलकर बाहर का नज़ारा देखा करते थ...
हम भले ही मानते रहें कि मनुष्यों की उत्पत्ति मनुस्मृति के अनुसार मनु से हुई हो.. या फिर Adam और Eve से हुई हो, पर सत्य तो यही है कि हम evolution से आये हैं.. सृष्टि पर जीवन का सृजन सूक्ष्म जैविक अणुवों ...
ओ नन्हें से परिंदेमुझे तुमसे बहुत कुछ सीखना है ! सीखना है किदिन भर की अपनी थकान कोसहज ही भुला तुमअपने छोटे-छोटे से पंखों मेंकहाँ से इतनी ऊर्जा भर लाते होकि पलक झपकते हीआकाश की ऊँचाइयों में विचरण करते घन...
बहुप्रतीक्षित उ. प्र. बजट २०१२ आखिर पारित हो गया और फिर से तुष्टिकरण की राजनीति हावी रही. चेहरे और मोहरे बदल गए बस ,बाकी कुछ नहीं बदला. आइये एक अवलोकन करते हैं... इस बजट में जो बातें हावी रहीं वो इस प्रक...
'रेमो' (Remo farnandis: the great singer)के घर गई तो ऐसा लगा 'अन्ना केरेनिना' अपना प्यार ढुंढने आई है... पुराना घर, ढेर सारी पुरानी परम्पराओ (गोवन और पुर्तगीज) को अपने आप मे समेटे हुए. बड़े-बड़े कमरे, ऊ...
कितना हँसती थी वो.... बात बात पर...हर बात पर....हंस पड़ती खिलखिलाकर....चूडियों की खनक सी ....जलतरंग सी.... फोन पर हैलो कहती- तो हँसती.... किसी से बात करती तो हँसती ज्यादा,बोलती कम.... मानों सब कुछ अच्छा अच्...
*रणबीर राज पृथ्वीराज कपूर (१४ दिसम्बर १९२४ - २ जून १९८८ *) *"चाहे कहीं भी तुम रहो ... तुम को न भूल पाएंगे ... " * * * *मास्टर शौमैन राज कपूर साहब की २४ वी पुण्यतिथि पर उनको शत शत नमन ! *
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