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बुधवार, 21 नवंबर 2012

चलो चला गया कसाब, अफजल की विदाई मुश्‍किल

बाल ठाकरे की न्‍यूज को साइड पर रख चुका होगा मीडिया, न्‍यूज एंकर ब्रेड बटर खाकर घर से निकल चुके होंगे, जो ज्‍लद पहुंचेगा, उसको मिलेगा एंकरिंग का अवसर ! कुछ एंकरों को तो आज का दिन ब्रेड बटर से काम चलाना पड़ेगा । कुछ चर्चा कार तो सुबह से ही तैयारी कर रहे होंगे चलो आज फिर टीवी स्‍क्रीन पर जाने का मौका मिला, भले की कसाब की फांसी से सरकार को कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन पूर्ण रूप से नहीं, क्‍यूंकि अफजल गुरू आजतक जिन्‍दा है, जिसको फांसी देना, एक फसाद को जन्‍म देना भी कुछ लोग मान रहे हैं, क्‍यूंकि वो कश्‍मीर से तालुक रखते हैं, और हमारी सरकार नहीं चाहती कि कश्‍मीर में पहले से हालात बने, देश में पथिक नेताओं की कमी नहीं।
 
सफर
कुछ लोग हैं जागे हुए
कुछ लोग हैं सोये सोये

कुछ की मंजिल पास है
कुछ दूर तलक जायेंगे   निरंतरता के लिए


काबुल वाया नई दिल्ली
ओबामा जा चुके हैं। जाते-जाते वो हमारी कानों को वो बातें सुना गए जिसे सुनने के लिए हम कब से व्याकुल थे। लेकिन शोर-शराबा खत्म होने के बाद अब वक्त आ गया है जब हम गिफ्ट बॉक्स को खोलें और देखें कि दिया गया आश्वासन हमारे कितने काम का है। सबसे पहले बात सुरक्षा परिषद में भारत के स्थाई सदस्यता की,  निरंतरता के लिए


इस शोक का कोई नाम नहीं
निजी शोक को बयान करना दुनिया में सबसे मुश्किल है...पंत जी का जाना सिर्फ मेरे लिए ही नहीं हर उस आदमी के लिए निजी से भी ज्यादा शोक की खबर है जिन्होंने उनके साथ कभी वक्त गुजारा..रविशंकर पंत लखनऊ से वाया मेरठ नोएडा आए और कब हम सबकी जिंदगी के अटूट हिस्सा बन गए पता ही नहीं चला...हम सब उन्हें प्यार से पंत जी कहते थे..सलीका और नफासत पंत निरंतरता के लिए

भेडियों का लोकतंत्र
डर सिर्फ भेड़ों को ही नहीं लगता है।
भेडिये को भी दर्द होता है।
डरते है वो भी खत्म होने से
उन्हें भी मालूम होते है मौत के मायने
इसी लिये वो भी इकट्ठा होते है  निरंतरता के लिए

एक भी मगरमच्छ फंसे नहीं, एक भी छोटी मछली बचे नहीं
कानून किसको कहते है ये हमको मत बताओं बेटा, हम से ज्यादा तुम नहीं जानते होंगे, एक चैनल के रिपोर्टर होने के नाते तुम जो भरोसा मुझे दिला रहे हो उससे बेहतर है कि हम लोगों को उस राठौर की नजरों से दूर रहने दो। ......। हां शायद ये ही शब्द थे...रूचिका गिरोत्रा के पिता के। शिमला के एक मोहल्ले में बेहद अनाम तरीके से अपनी जिंदगी गुजार रहे गिरोत्रा के साथ उनका बेटा कमरे में मौजूद रिपोर्टर और कैमरामैन से  निरंतरता के लिए

सोमवार, 12 नवंबर 2012

शोभना काव्‍य सृजन पुरस्‍कार से जुबान की कमाई तक

हमारे देश के नेता बचकाने बयान तो देते ही हैं, लेकिन हमारे मीडिया मित्र चर्चा में आने के लिए उनको प्रकाशित करने में दिलचस्‍पी रखते हैं। मगर यह हमारे समाज के लिए अच्‍छे संकेत नहीं, यह वैसा ही है, जैसा गम्‍भीर विषय पर बनी फिल्‍म में अचानक एक हास्‍यस्‍पद सीन एवं संवाद आ जाए। मीडिया  व्‍यापारिक संस्‍थान बनता जा रहा है। ऐसे में वो ही करता है, जो  पैसे वाले लोग चाहते हैं। 


शोभना काव्य सृजन पुरस्कार – 2012
शोभना काव्य सृजन पुरस्कार – 2012 योजना के अंतर्गत निम्नलिखित विषयों पर कवि / कवियित्रियों की कवितारूपी प्रविष्टियाँ आमंत्रित हैं. आपकी कविता निम्नलिखित विषयों पर आधारित होनी चाहिए : - यहां क्लिक करें।

देश में धर्मांतरण को कम्पलसरी कर दो ना
दीवाली को पटाखे मत फोडो.होली पर रंग मत खेलो.मिठाई मत खाओ.चाकलेट खाओ और खिलाओ.बलि मत दो.ये मत करो,वो मत करो.पटाखे फोडने से प्रदूषण होता है,रंग खेलने से जल संकट उत्पन्न होता है.बलि प्रथा क्रूरता का प्रतीक है.जानवरो पर अत्याचार है पाप है.ठीक है मान लेते हैं.लेकिन क्या ये सारे उपदेश सिर्फ और सिर्फ हिंदूओ.....यहां क्‍लिक करो।

gurus of dattatreya in hindi
मधुमक्खी -- फूलों का मधुर रस संचय कर दूसरों के लिए समर्पित करने वाली मधुमक्खी ने मुझे सिखाया की मनुष्य को स्वार्थी नहीं परमार्थी होना चाहिये ! भौंरा -- राग में आसक्त भोंरा अपना जीवन -मरण न सोच कर कमल पुष्प पर ही बैठा  रहा ! रात को हाथी ने वो पुष्प खाया तो भोंरा भी मृत्यु को प्राप्त हुआ ! राग  ,मोह में आसक्त प्राणी किस प्रकार अपने प्राण गँवाता है ! अपने गुरु भोंरे से यह शिक्षा मैंने ली !.....यहां क्‍लिक करो।

मीन लग्न और समस्या निवारक उपाय
जीवन में भरपूर सुख और सफलता की प्राप्ति हर मनुष्य का एक सपना होता है। लेकिन सुख-दुख, गम-खुशी, अमीरी-गरीबी तथा रोग एवं स्वास्थ्य आदि कालचक्र के ऎसे धुरे हैं, जो जीवन के चलने के साथ-साथ ही चलते हैं. दुनिया में हर इन्सान किसी न किसी समस्या से जूझ रहा है , जिनमें से एक होती है--व्यक्ति सम्बंधी समस्या जैसे अपने बारे में/अपनी पत्नि/संतान के बारे में,संतान होने या न होने इत्यादि के बारे में, दूसरी स्थान सम्बंधी मसलन किसी स्थान विशेष जैसे जमीन, जायदाद, मकान, व्यवसाय,.....यहां क्‍लिक करो।

सरकारी अस्पताल में पुरुष नर्स।
नर्सिंग एक महिला प्रधान पेशा है। पुरुष भी नर्स बन सकते हैं ये बात मुझे पता थी पर अभी तक मैंने किसी पुरुष को नर्स का कार्य करते हुए देखा नहीं था। पिछले कुछ  दिन मेरे बच्चे डेंगू की वजह से दिल्ली के एक सरकारी बाल चिकित्सालय में भर्ती  थे। वहां मैंने पहली बार किसी पुरुष को नर्स के रूप में कार्य करते हुए देखा। दो युवक मेडीसिन वार्ड में नर्स के तौर पर  कार्यरत थे। मैं दोनों के ही कार्य से बहुत प्रभावित हुआ। उनका संयम, धेर्य और बाल मरीजों से बात करने का तरीका  काबिले तारीफ था। आम तौर पर सरकारी अस्पतालों में कार्यरत नर्सें अपने कार्य के प्रति बेहद असंवेदनशील होती हैं।इसके विपरीत ये दोने युवक अपने कार्य को बेहद संजीदगी से कर रहे थे।.....यहां क्‍लिक करो।


प्यार क्या होता है?
मिलोगी कभी तो पूछूँगा मैं तुमसे, कि प्यार क्या होता है?/ क्या प्यार वह होता है, जिसकी खातिर पेट्रेयस इस्तीफ़ा दे देता है?/ या प्यार वह होता है, जो यश चोपड़ा की फिल्मों में होता है?/.....यहां क्‍लिक करो।


एक नया अध्याय
आज कौनसा घर है घर मेरा
कभी एक दिन तुम्हारा पाणि ग्रहण कर
मैने अपना चिर परीचित नीड़ त्याग
तुम्हारे घर को अपना घर स्वीकारा था
तुम्हारा घर ही नहीं तुम्हारे सारे सम्बन्ध.....यहां क्‍लिक करो।



दीप जले एक ऐसा जिससे जग में हो उजियारा

दीप जले एक ऐसा जिससे जग में हो उजियारा
ऐसा मन में हो उजियारा।
मिटे हृदय का भेद, भेद दे जो भव का अँधियारा
जिससे जग में हो उजियारा।.....यहां क्‍लिक करो।


आईने फिर अक़्स भुनाने निकले हैं

देश को जुमलों से बहलाने निकले हैं
लगता यूं है देश बचाने निकले हैं
नाक पकड़ कर घूम रहे थे सदियों से
अंदर से जो ख़ुद पाख़ाने निकले हैं.....यहां क्‍लिक करो।




खुद क्‍यूं नहीं काटकर लाते जेठमलानी की जुबान 
भाजपा नेता राम जेठमलानी के श्रीराम भगवान पर दिए बयान को लेकर हिन्‍दु समुदाय बेहद क्रोधित है, भले ही आम आदमी श्रीराम भगवान के घर वापसी उत्‍सव को समर्पित दीवाली त्‍योहार की तैयारियों में मस्‍त है। शायद आम आदमी ही नहीं, बल्‍कि श्री हिंदू न्यायपीठ विधान परिषद के सदस्‍य भी, तभी तो उन्‍होंने श्रीराम भगवान के चरित्र पर बुरे पति का ठप्‍पा लगाने वाले नेता की जुबान काटकर लाने वाले को 11 लाख रुपए देना का एलान किया है यह कार्य तो केवल वो व्‍यक्ति कर सकता है, जिसके मुंह में राम और बगल में छुरी.....यहां क्‍लिक करो।

मंगलवार, 6 नवंबर 2012

देशी एजुकेशन बेकार, विदेशी यूनिवर्सिटी लाओ, परेशान सन ऑफ सरदार

पहले राहुल गांधी ने पॉलिटिकल सिस्‍टम को खराब बताया और अब हाल ही में मानव संसाधन राज्‍य मंत्री बने शशि थरूर ने एजुकेशन सिस्‍टम को बेकार बताते हुए फॉरेन यूनिवर्सिटीज को मौका देने की बात कही है। इन्‍हें कौन बताए केंद्र में इन्‍हीं की कांग्रेस पार्टी का राज है, सबसे ज्‍यादा देश में कांग्रेस का ही शासन रहा है तो इस खराब सिस्‍टम का जिम्‍मेदार कौन है और इसे कौन सुधारेगा?

बड़े पर्दे पर वेश्याओं की नजाकत
वेश्याओं ने भी अपनी अदाओं से दिलों को लूटा है या दिलों को आवारा बनाकर छोड़ा है. कहते हैं कि जब एक वेश्या नजाकत से बात करती है तो वो नजाकत सीधे दिल पर वार करती है. ऐसी ही कुछ अदा हिन्दी सिनेमा में दिखती है जब उमराव जान, चमेली, चांदनीबार जैसी फिल्मों में रेखा, ऐश्वर्या राय, करीना कपूर और तब्बू जैसी अभिनेत्रियों ने अपनी अदाओं से हजारों दर्शकों को अपना कायल बना दिया. बदलते समय के साथ हिन्दी सिनेमा में वेश्या के किरदारों की अदाएं भी बदली हैं जैसे उमराव जान में रेखा ने जिस नजाकत से काम किया वो नजाकत चमेली या फिर चांदनीबार जैसी फिल्मों में देखने को नहीं मिलती है. More


‘बदलते समय के साथ बदलना जरूरी’
बदलते समय के साथ स्वयं को बदल देने में ही भलाई होती है. समय का पहिया घूमता रहता है. एक समय था जब सास-ससुर चाहते थे कि उनकी बहू पढ़ी-लिखी हो, शिक्षित हो. ऐसे में घर में एक अच्छा माहौल तो बना ही रहता था, पर जब बेटा-बहू शिक्षित हों और सास- ससुर कम पढ़े-लिखे हो तो कई दिक्कते भी आती थीं. कभी बहू सास-ससुर का शोषण करने लगती थी तो कभी शिक्षा के अभाव में सास ससुर द्वारा बहू को सताया जाता था. More

मोदी के साथ यात्रा में जो देखा!
मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी विवेकानंद युवा विकास यात्रा लेकर गुजरात के गांवों में घूमे। कभी उत्तरी गुजरात, तो कभी दक्षिण गुजरात, तो कभी सौराष्ट्र। जी हां, सौराष्ट्र जहां इस बार कई मुद्दे ऐसे हैं जो साल के आखिर में होने वाले चुनाव में मोदी सरकार के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी कर सकते हैं। हमने भी उन इलाकों का दौरा किया और जानने की कोशिश की कि क्या मोदी का करिश्मा या जादू अभी भी बरकरार है या उसमें कोई कमी आई है? गुजरात का सौराष्ट्र सात जिलों से बना वो इलाका है जो गुजरात की राजनीति की दशा और दिशा तय करता है इसलिए कोई भी राजनीतिक दल या कहें नेता सौराष्ट्र के अस्तित्व को नजरअंदाज नहीं कर सकता और अगर किया तो इसका राजनीतिक नुकसान तय माना जाता है।  More

देशप्रेमी मच्छर!
एक मच्छर आदमी को ...बना देता है ,बड़ा ही कामयाब डायलाग ! मच्छर के इन गुणों का लाभ हमारी सरकारों ने कभी नहीं लिया ,बस उनके उन्मूलन के लिए कंट्रोल प्रोग्राम चलाये और करोड़ों रुपये खर्च डाले ,लेकिन भला हो उन मच्छरों का उन्होंने भी ख़त्म होने का नाम ही नहीं लिया ,क्या आम और क्या ख़ास किसी को भी नहीं छोड़ा ,कभी मलेरिया तो कभी डेंगू के रूप में  सामने आकर अपने होने का एहसास कराता रहा, More

देश के भ्रष्ट लोगों की आंखों में चमक साफ दिख रही है। उन्हें लग रहा है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ शुरू हुई मुहिम का रंग फीका पड़ चुका है। लड़ाकों में फूट पड़ गई है। रिटायर्ड जनरल वीके सिंह टीम अन्ना में शामिल हो गए हैं तो इन भ्रष्टाचारियों लोगों को लग रहा है कि अब टीम अन्ना का पूरा ध्यान अरविंद केजरीवाल और उनकी टीम को पीछे छोड़ने में होगा, और ऐसा करके ये लोग एक दूसरे को ही काटेंगे। सोमवार को जनरल सिंह ने टीम अन्ना के साथ आने का ऐलान किया। इससे आंदोलन और ज्यादा ताकतवर होगा। अपनी रिटायरमेंट से ठीक पहले वह उम्र विवाद को लेकर सरकार से उलझ गए थे और एक तरह से उनकी हार हुई थी। More>>

'जब तक है जान' से परेशान 'सन ऑफ सरदार'
हर दीवाली सिने प्रेमियों के लिए दो बड़ी फिल्‍में रिलीज होती हैं। इस बार भी ऐसा ही कुछ होने जा रहा है, लेकिन इस बार फिल्‍म रिलीज को लेकर विवाद सा खड़ा हो गया है, क्‍यूंकि यशराज बैनर्स ने महानगरों के बड़े सिनेमा घरों पर पहले से बुकिंग कर ली, जिसके चलते सन ऑफ सरदार के रास्‍ते में मुश्किलें खड़ी हो गई। More>>

मंगलवार, 30 अक्टूबर 2012

अगला प्रधान मंत्री नही मुख्‍यमंत्री कौन ? कुलवंत हैप्‍पी की दस्‍तक




आगे प्रधान मंत्री कौन होंगे, चर्चा है कि नरेंद्र मोदी प्रमुख दावेदार हैं। इस में सोशल मीडिया की माने तो कोई शक भी नहीं, लेकिन इस बात को लेकर गुजरात की जनता एवं भाजपा हैरत है कि अगर नरेंद्र मोदी को पीएम बना दिया तो गुजरात का मुख्‍यमंत्री किसे बनाएंगे। चिंतन जरूरी है, क्‍यूंकि सचिन तेंदुलकर की रिपलेस्‍टमेंट किसी ऐरे गैरे से थोड़ी न होने वाली है। चलो छोड़ो राजनीतिक गलियारों की बातें, हम करते हैं अपने ब्लॉग जगत की बातें, यहां पर हमारे साथियों ने रखी हैं, कुछ बेहतरीन बातें।

(अजित वडनेरकर) at शब्दों का सफर - 21 hours ago
पिछली कड़ियाँ- 1.‘बुननाहै जीवन.2.उम्र की इमारत.3.‘समयकी पहचान. 4. दफ़ा हो जाओ हि न्दी की अभिव्यक्ति क्षमता बढ़ाने में विदेशज शब्दों के साथ-साथ युग्मपद और मुहावरे भी है शामिल हैं । *रफ़ा-दफ़ा* ऐसा ही युग्मपद है जिसका बोलचाल की भाषा में मुहावरेदार प्रयोग होता है । रफ़ा-दफ़ा करनायानी किसी मामले को निपटाना, किसी झगड़े को सुलझाना, विवादित स्थिति को टालना, दूर करना । * रफ़ा-दफ़ा* में नज़र आ रहे दोनो शब्द अरबी के हैं । यहाँ दफ़ाका अर्थ ढकेलने, दूर करने से है । इसकी विस्तृत अर्थवत्ता के बारे में पिछली कड़ी में बात की जा चुकी है । रफा ( रफ़ा ) का मूल अरबी उच्चारण.... more »

Ravishankar Shrivastava at छींटे और बौछारें - 21 hours ago
लगता है कि माइक्रोसॉफ़्ट अपने नए ताजातरीन विंडोज 8 ऑपरेटिंग सिस्टम को हर किसी के गले में एक तरह से मुफ़्त में ठूंसना चाहता है ताकि चहुँ ओर विंडोज का ही साम्राज्य बना रहे. और इसीलिए विंडोज 8 के संस्करण बेहद सस्ते में बेचे जा रहे हैं. यदि आपके कंप्यूटर विक्रेता ने आपके कंप्यूटर में पायरेटेड विंडोज एक्सपी, विंडोज 7 या ऐसा ही कोई अन्य संस्करण डाला हुआ है और आपको गाहे बगाहे इसके जेनुइन नहीं होने की चेतावनी मिलती रहती है और इसके अपग्रेड इत्यादि की सुविधा नहीं मिलती है तो आप सिर्फ 699 रुपए (14.99 डॉलर) खर्च कर अपने विंडोज को जेनुइन बनाने की सुविधा पा सकते हैं. खा... more »


नीरज गोस्वामी at नीरज - 1 day ago
आज के युग में ये बात बहुत आम हो गयी है के लोग अपनी असलियत छुपा कर जो वो नहीं हैं उसे दिखाने की कोशिश करते हैं और ऐसे मौकों पर मुझे साहिर साहब द्वारा फिल्म इज्ज़त के लिए लिखा और रफ़ी साहब द्वारा गाया एक गाना " क्या मिलिए ऐसे लोगों से जिनकी फितरत छुपी रहे, नकली चेहरा सामने आये असली सूरत छिपी रहे " याद आता है. लेकिन साहब अपवाद कहाँ नहीं होते, जब कोई ताल ठोक कर जैसा वो है वैसा ही अपने बारे में बताते हुए कहता है की: इक तअल्लुक है वुजू से भी सुबू से भी मुझे मैं किसी शौक़ को पर्दे में नहीं रखता हूँ तो यकीन मानिये दिल बाग़ बाग़ हो जाता है. वुजू और सुबू से अपनी दोस्ती को सरे आम मानने वाले ... more »


nilesh mathur at आवारा बादल - 1 day ago
देखता हूँ अन्याय और सहता हूँ जुल्म गूंगा नहीं हूँ फिर भी चुप रहता हूँ, हर तरफ कोहराम है चौराहे पर बिक रहा ईमान है अंधा नहीं हूँ फिर भी आँखें बंद रखता हूँ, दर्द से चीख रहे हैं परिंदे, पर्वत, पेड़-पौधे सुन रहा हूँ चित्कार फिर भी बहरा बना रहता हूँ। नफरत के सौदागर कत्ल करने पर आमाद हैं इंसानियत का फिर भी अनजान बना रहता हूँ, लुट रही है आबरू किसी की तो बिक रहे हैं जिस्म कहीं कहने को इंसान हूँ फिर भी तमाशबीन बना रहता हूँ, कब तक चुप रहूँ कब तक सहूँ पशुओं की तरह जीता रहूँ या अब इंसान बनूँ।

Kulwant Happy "Unique Man" at युवा सोच युवा खयालात - 2 days ago
जसपाल भट्टी को कॉमेडी किंग भी कहा जाता रहा है और वे भारतीय टेलीविजन और सिने जगत का एक जाना-पहचाना नाम रहे हैं। भट्टी को आम-आदमी को दिन-प्रतिदिन होने वाली परेशानियों को हल्के-फुल्के अंदाज में पेश करने के लिए जाना जाता रहेगा। उनका जन्म 3 मार्च 1955 को अमृतसर, पंजाब में हुआ था। उनकी पत्नी, सविता भट्टी हमेशा उनके कार्यों में उनका सहयोग करती थी। दूरदर्शन पर प्रसारित उनके सबसे लोकप्रिय शो फ्लॉप शो में उनकी पत्नी सविता भट्टी ने अभिनय करने के साथ ही उसका प्रोडक्शन भी किया। भट्टी ने पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज से इलेक्ट्रिक इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री ली लेकिन उनका मन इंजीनियिंग में नहीं ... more »



केवल राम : at चलते -चलते...! - 4 days ago
यह संसार एक मेला है , यहाँ जो भी आता है अपना समय बिता कर चला जाता है आने - जाने का यह क्रम आदि काल से चला आ रहा है . पूरी कायनात को जब हम देखते हैं तो यह ही महसूस होता है कि इस जहां में कुछ भी नित्य नहीं है , शाश्वत नहीं है . अगर कहीं कुछ शाश्वत है तो उसे हम ईश्वर की संज्ञा से अभिहित करते हैं . जो नित्य रहने वाला है , तीनो कालों में जो एक जैसा है , जिस पर किसी का भी प्रभाव नहीं होता , जिसकी सत्ता जड़ और चेतन दोनों में समायी है , जो सदा एक रस रहने वाला है , ऐसी ना जाने कितनी उपमाएं इस शाश्वत सत्ता के साथ जोड़ी जाती हैं और यह क्रम अनवरत रूप से इस संसार में चला रहता है . विश्व का कोई भ... more »

Markand Dave at M.K.TVFilms - HINDI ARTICLES - 5 days ago
*कानजीलाल वर्सेस कजरीवाल ? O.M.G..!* प्यारे दोस्तों, आपने फिल्म `ऑ..ह माय गॉड` देखी है? इस फिल्म में भगवान की सत्ता को ललकारने वाले `कानजी लालजी मेहता` नामक एक आम आदमी का किरदार (श्री परेश रावलजी) आपको याद है? हाँ, तब तो फिर, ये कानजीलाल के सारे संवाद भी याद होंगे..! पता नहीं क्यों, मुझे आम आदमी (MENGO PEOPLE ) कजरीवाल के मन की पीड़ा और ये कानजीलाल के मन की पीड़ा, एक जैसी लग रही है, आईए देख ही लेते हैं..! (नोट- यह व्यंग आलेख सिर्फ मनोरंजन के उद्देश्य से लिखा गया है, किसी व्यक्ति-धर्म-पक्ष-परिवार-समाज से इसका कोई लेनादे... more »

Anil Pusadkar at अमीर धरती गरीब लोग - 5 days ago
राबर बाबू को बचाने के लिये सफेद और करचोरी भाऊ को बचाने के लिये काली टोपी वालो की गैंग सामने आ रही है.बहुत अच्छी बात है मगर राबर बाबू और करचोरी भाऊ ने ऎसा किया क्या है जो देश की नं वन और नं टू गैंग उन्हे बचाने के लिये जी जान से जुट गई है?ऎसा क्या किया है कि लोग पीछे ही पड गये हैं बेचारे भोले भाले राबर और करचोरी भाऊ के?अब अगर किसी ने उन्हे उधार दे भी दिया या धंधा खडा करने के लिये मदद कर भी दी तो इसमे उनका क्या दोष?सज़ा देना ही है तो उनको दो ना भाई जिन्होने मदद के नाम पर लाखो करोडो रूपये देकर भोले भाले शरीफ लोगों को बिगाडा.उनको तो कोई कुछ कह नही रहा है बस पीछे पड गये दोनो के?अब ऎसे मे र... more »
Puja Upadhyay at लहरें - 5 days ago

इंस्टैंट नूडल्स के जमाने में भी कुछ खतों के जवाब अपने आने की मुहर छपवाते साल गुज़ार देते हैं. एक ठिठुरता हुआ पन्ना मेरे सामने पड़ा था जिसमें चिनारों की खुशबू आती थी. जिसमें खुशनुमा रातों के सन्नाटे थे और सन्नाटे को तोड़ती रातों की शिकायतें थीं. ख़त कहता था मुझसे...दुनिया बिलकुल नहीं बदली है. चाहे बंगलौर की बेनूर दोपहरें हों कि दिल्ली के धूप वाले दिन या कि कश्मीर में बहता दरिया...चिट्ठियों का मौसम सदाबहार है...रंगों में डूबा...खुशबुओं में थिरकता...कि आज भी खतों में लिखने वाले का चेहरा उभरता है...कि वो चेहरा उसकी फेसबुक प्रोफाइल से मैच नहीं करता...कि खतों में रूह का चेहरा होता है. कि... more »

चला बिहारी ब्लॉगर बनने at चला बिहारी ब्लॉगर बनने - 5 days ago

*श्रीमती गिरिजा कुलश्रेष्ठ* का परिचय उनकी कवितायें, लघुकथायें, संस्मरण, उपन्यास और कहानियाँ हैं. उनकी रचनायें चाहे जिस भी विधा में हों, अपनी एक अलग ही पहचान रखती हैं. उनकी समस्त रचनाओं में सामाजिक सरोकार को इतनी कोमलता से दर्शाया गया है कि वे कहीं से भी चीखती-चिल्लाती हुई ध्यानाकर्षण की मांग नहीं करतीं. बल्कि पाठक के हृदय को आन्दोलित करती हैं. उनकी रचनाओं में सम्वेदनाओं का पुट इतना संतुलित होता है कि बस आपके मन को छूता है, सहलाता है और धीरे से आपके मस्तिष्क को चिंतन के लिये व्यथित करता है, विवश नहीं. इनसे भी परे गिरिजा जी का एक और साहित्य-संसार है. जहाँ वे कहानियों, कविताओं और चित्... more »

लेखागार