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बुधवार, 9 जनवरी 2013

तस्मात् युध्यस्व भारत - ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय ब्लॉगर मित्रों ,
प्रणाम !!

चंद पढ़े-लिखे मानुषों ने फेसबुक के स्टेटस की तरह अपने दुखों का भी विभाजन कर रखा है...विभाजित सम्वेदनायें, अलग-अलग खांचों में रखे दुख| अपनी संवेदनाओं, अपने दुखों को बकायदा प्रशिक्षण दे रखा है इन बुद्धिजीवियों ने... एक किसान की आत्म-हत्या इनको व्यथित करती हैं, लेकिन एक सैनिक की मौत नहीं| आदिवासियों के सर कटने पर संवेदनायेँ उमड़-उमड़ कर बाहर आती हैं इन बुद्धिमानों की कविताओं में, लेकिन एक सैनिक के सर कटने पर निर्विकार रह जाते हैं| कैसे इस तरह से इन महानुभावों ने अपनी संवेदनाओं ढाला होगा कि एक घटना-विशेष पर दुखी होना और दूसरे पर नहीं , जितना सोचता हूँ उतना ही हैरान होता हूँ|
- गौतम राजरिशी 
सिर्फ एक सवाल आप सब से ...
गौतम जी को क्या जवाब दें ... कोई बताएगा ???
सादर आपका 
शिवम मिश्रा  
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नापाकी पाक की

*नापाकी पाक की एक और नापाक बर्बर हरकत .........* *आज प्रातः के समाचार पत्रों की मुख्य हेड लाइन काफी चौकाने वाली और दर्दनाक थी :- और समाचार कुछ इस तरह से था।* * **" पाकिस्तानी सैनिकों ने भारतीय सीमा के भीतर घुसकर गश्त लगा रहे भारतीय सेना के जवानों पर हमला कर कथित रूप से दो सैनिकों की गला काटकर नृशंस हत्या कर दी. पुंछ जिले में नियंत्रण रेखा से सटकर हुये इस हमले में पाकिस्तानी सैनिक करीब 100 मीटर तक भारतीय सीमा में घुस आये और गश्ती दल पर हमला कर दिया. उन्होंने दो लांस नायकों हेमराज और सुधाकर सिंह की हत्या करने के अलावा दो अन्य सैनिकों को घायल कर दिया. सूत्रों ने बताया कि इस क्रूर हम... more »

सड़कों पर आन्दोलन सही पर देहरी के भीतर भी झांकें

दिल्ली में हुए वीभत्स हादसे ने पूरे देश को हिला दिया । इसके बारे में अब तक बहुत कुछ कहा और लिखा गया है । अनशन ,धरने और कैंडल मार्च सब हुआ और हो रहा है । अनगिनत लोग सड़कों पर उतर आये । जनता का आक्रोश उचित भी है । पर अफ़सोस तो यह है कि इस विरोध के साथ ही ऐसी घटनाओं का होना भी जारी है | ऐसे में यह प्रश्न उठना वाजिब है कि क्या सड़कों पर उतर आना ही काफी है ? इस घटना के बाद देश भर में लोग घरों से बाहर निकले । सबने खुलकर विरोध किया । अपराधियों को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की और आज भी कर रहे हैं । ऐसे में इस ओर भी ध्यान दिया जाना ज़रूरी है कि आन्दोलन कर अपनी आवाज़ उठाने के आलावा हमे... more »

सरकार अब भी, क्या सोयी रहेगी ?

संध्या आर्य at हमसफ़र शब्द
एक चिड़ियाँ आती है और मुंडेर पर तकती सूनी आंखों को सरकार की भाषा समझाती है आंखें गंगा की तरह सूख जाने वाली है सोयी हुई है सरकार कब जगेगी नगे धड़ो के लिये क्या? सरकार अपने मुँह पर कालिख पोतेगी या सिर के बदले सिर लायेगी चेहरे की झुर्रियो में दर्द से कराहती बची सांसो की चीत्कार छुपी है न्याय क्या अब भी आंख पर पट्टी बांधकर सोयेगी!!

जख्म एक भरता नहीं, जख्म कई और दे जाते हैं लोग।

पी.सी.गोदियाल "परचेत" at अंधड़ !
*इस बेदर्द जहां में न जाने क्यों इसकदर सताते हैं लोग, * *जख्म एक भरता नहीं, जख्म कई और दे जाते हैं लोग।* * * *मरहम लगाने के बहाने तल्ख़ लफ्जों से बिंधते है घाव, * *नसीहतों भरे सरगम सुनाकर, हमदर्दी जताते है लोग। * * **अनूठी, अनोखी है, मिजाज कुरेंदने की इनकी हसरतें, * *नफरत फैलाकर खुद को,बन्दा खुदा का बताते है लोग। * * * *इनायत पे जी रहे किसी की, यहाँ अब ये सर्कस के शेर, * *कठपुतलियां 'परचेत' इशारों पर अपने नचाते है लोग। *

विचारवान, विचारयान, विचारवाहन और ऑस्कर माईक... अरे हाँ, मैं भी

प्रवीण शाह at सुनिये मेरी भी....
. . . गतांक... से आगे... *ओम् * जमीन व समुद्र के नीचे बने हमारे पाँचों स्टेशनों के निवासियों को भी यह पता लग गया कि ऊपर खुले आसमान के नीचे बसी उनकी प्यारी दुनिया अब नहीं रही... अपने प्रियजनों, अपनी स्मृतियों और अपने अनुभवों से इस तरह यकायक बिछड़ना सभी के लिये दुखदायी था व काफी समय लगा हम सबको इस सब कुछ खो देने की तड़प से उबरने में... लेकिन जिंदगी तो जिंदगी है, वह फिर परवान चढ़ी... कुछ ही महीनों बाद हमारे स्टेशनों में हजारों शादियाँ हुई... और ऐसी ही एक शादी हुई नाभिकीय भौतिकविद् भारतीय मूल के हरि और जापानी मॉलीक्यूलर बायोलॉजिस्ट योको के बीच... मैं भी इस विवाह समारोह में शामिल हुआ.... more »

बस!!! बेरुख़ी मुझको भाती नहीं .....

Ashok Saluja at यादें...
*बस!!! बेरुख़ी मुझको भाती नहीं .....* * मायूस हूँ, उदासी अब मेरी जाती नही* * बहुत मनाया,** बेरुख़ी **उनकी भाती नही* * लाख चाहा, कभी वो भी मनाये मुझको* * आदत है उनकी, वो कभी मनाती नही |* * * * सब समझाते हैं, आ-आ के मुझको ही* * क्या उनको कुछ, समझ आती नही* * कोशिशें नाकाम रहीं, भूलने की उनको* * यादेँ हैं उनकी,कि अब तक जाती नही |* * * * माथे पे बिखरी, जुल्फों की वो घटाएं* * क्यों उसके चेहरे पे, अब छाती नही* * बड़ी हसरत से, देखता हूँ मैं उनको* * वो है कि अब, कभी मुस्कराती नही |* * * * उसके गिले-शिकवे, मैं किससे करूँ* * बात है कि अब, लबों तक आती नही* * तरकश से तीर,जुबां से निकली बात * * लौट क... more »

दिल छीछालेदर

noreply@blogger.com (प्रवीण पाण्डेय) at न दैन्यं न पलायनम्
जब गैंग्स ऑफ वासेपुर देखी थी तो बहुत ही नये तरह के गाने सुनने मिले थे, अन्य फिल्मों से सर्वथा भिन्न। मैं कोई फिल्म समीक्षक नहीं पर तीन विशेषतायें उसके संगीत में दिखी थीं। पहला, संगीत की धुनें स्थानीय थीं। दूसरा, उसमें बोलचाल की भाषा हिन्दी अंग्रेजी की खिचड़ी के रूप में थी। तीसरा, उसका अर्थ फिल्म में व आज के समाज में व्याप्त भावों को बहुत स्पष्ट रूप से चित्रित करता हुआ था। दिल छीछालेदर उसी फिल्म का एक गाना है। सभ्य समाज की दृष्टि से देखा जाये तो गैंग्स ऑफ वासेपुर अव्यवस्था और असभ्य आचरण की पराकाष्ठा था, उसमें रहने वालों के मन को टटोले तो वह जीवन के संघर्ष का अनियन्त्रित पथ। जब अव... more »

औकात दिखानी होगी पाकिस्तान को और पाकिस्तान-प्रेमियों की

डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर at रायटोक्रेट कुमारेन्द्र
इधर भारतीय सरकार बलात्कारियों से निपटने में, बलात्कार और महिला हिंसा के विरोध में सड़कों पर उतरने वालों को सबक सिखाने में, तमाम सारे लोगों की बयानबाजियों पर तर्क-कुतर्क करने में, अपने भ्रष्ट से भ्रष्टतम मंत्रियों, सांसदों, विधायकों को बचाने में, क्रिकेट के द्वारा रिश्तों की कटुता को समाप्त करने में लगी हुई है। ऐसा लग रहा है जैसे उसके पास देश की, समाज की, नागरिकों की कोई चिन्ता नहीं..इसी के साथ ऐसा भी लगा कि सरकार को देश की सुरक्षा की भी चिन्ता नहीं। यह इस कारण समझ में आ रहा है कि वह देश के अन्दर के दहशतगर्दों से तो निपटने में घनघोर रूप से नाकाम रही है इसके साथ ही वह अपने... more »

भारत बनाम इंडिया

गगन शर्मा, कुछ अलग सा at कुछ अलग सा
*भारत और इंडिया, तुलना अच्छी है, पर दोनों कभी एक दूसरे के विरोधी नहीं रहे। आप क्या कहते हैं? *

कुछ रिश्ते मन के ऐसे भी

Anju (Anu) Chaudhary at अपनों का साथ
*एक सोच है, जब कोई अड़चन या मन में दुविधा हो तो खुद से अकेले में बाते करना, सोचना और एक नयी उर्जा के साथ आगे बढ़ना,मन में एक नयी रोशनी का संचार करता है |बहुत अधिक सोचने की अवस्था में किसी एक दोस्त की छोटी सी कही गई बात भी मन के भीतर उत्साह भर देती है|* *कुछ रिश्ते मन के ऐसे भी * हम अपने साथ साथ अपने साथ के समस्त तारों को अपने अंदर चमकते हुए महसूस करते हैं ये सब,हमारे भीतर अपनी अपनी रोशनी संग विराजमान हैं जब जग सो जाता हैं , तो विचार और शब्द हमारी सोच के साथ आंखमिचौली खेलने लगते नींद से बोझिल आँखे, अचानक से, मौन के तारे गिनने लगती है रात की अटारी में हम सब अपने अपने विचारों स... more »

तस्मात् युध्यस्व भारत ||

शिवम् मिश्रा at बुरा भला
*यह है भारत माता के वो 2 वीर सपूत जिनकी पाकिस्तानियों द्वारा कल निर्मम हत्या कर दी गयी l इन अमर शहीदों को शत - शत नमन.... तस्मात् युध्यस्व भारत || -- इसलिए, हे भारत, युद्ध करो | (भगवद्गीता 2/18)* *जय हिन्द ...जय हिन्द की सेना !!!*

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यह है भारत माता के वो 2 वीर सपूत जिनकी पाकिस्तानियों द्वारा कल निर्मम हत्या कर दी गयी |
ब्लॉग बुलेटिन की पूरी टीम की ओर से इन अमर शहीदों को शत - शत नमन !
 
जय हिन्द ... जय हिन्द की सेना !!!

लेखागार